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दो वर्ष की निरंतर सेवा, निरंतर विकास की दिशा में एक और पहल: मुख्यमंत्री साय ने कॉफी टेबल बुक्स का किया विमोचन

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज शाम नवीन विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में “दो साल निरंतर सेवा,निरंतर विकास” की भावना को समर्पित छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक सौंदर्य को दर्शाने वाली जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रकाशित आठ कॉफी टेबल बुक्स का विमोचन किया गया। 

इनमें बस्तर दशहरा (हिन्दी), बस्तर दशहरा (अंग्रेजी),पुण्यभूमि छत्तीसगढ़ (हिन्दी),पुण्यभूमि छत्तीसगढ़ (अंग्रेजी), छत्तीसगढ़ के अतुल्य जलप्रपात (हिन्दी), छत्तीसगढ़ के अतुल्य जलप्रपात (अंग्रेजी),बैगा टैटू (हिन्दी) और बैगा टैटू (अंग्रेजी) शामिल हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ये कॉफी टेबल बुक्स छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, ऐतिहासिक परंपराओं, आदिवासी कला और प्राकृतिक विरासत को देश-विदेश तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने इसे राज्य की पहचान को सशक्त करने वाला सार्थक प्रयास बताया।

इस अवसर पर जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव , महासमुन्द विधायक योगेश्वर सिन्हा, जनसंपर्क विभाग के सचिव रोहित यादव, जनसंपर्क आयुक्त रवि मित्तल, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी आलोक सिंह, पूर्व विधायक खिलावन साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं संबंधित विभागों के अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।

WAVES और CIC के युवा कलाकारों की चमक: नेशनल स्ट्रीट फूड फेस्टिवल 2025 में भारतीय रचनात्मकता का भव्य प्रदर्शन

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 सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की प्रमुख पहलों WAVES और क्रिएट इन इंडिया चैलेंज (CIC) के विजेता कलाकारों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया, जब बैटल ऑफ बैंड्स और सिम्फनी ऑफ इंडिया के उत्कृष्ट प्रतिभागियों ने दिल्ली में आयोजित 15वें नेशनल स्ट्रीट फूड फेस्टिवल (NSSF) में मंच संभाला। यह प्रतिष्ठित आयोजन भारत की समृद्ध खाद्य संस्कृति का उत्सव मनाता है, जिसमें क्षेत्रीय व्यंजनों से लेकर लोकप्रिय स्ट्रीट फूड तक विविध स्वादों का संगम दिखता है।

इस वर्ष यह तीन दिवसीय उत्सव 12 से 14 दिसंबर 2025 तक ज Jawaharlal Nehru Stadium, New Delhi में आयोजित हो रहा है, जिसमें Create in India Challenge – Season 1 के विजेताओं के साथ-साथ मशहूर कलाकार कैलाश खेर, अभिनेता आशीष विद्यार्थी, श्रीलंकाई पॉप कलाकार योहानी, गीतकार-सinger अमिताभ एस वर्मा, और हिप-हॉप कलाकार MC Square व Kullar G भी प्रस्तुति देंगे।

CIC संगीत प्रस्तुतियों की प्रमुख झलकियाँ

फेस्टिवल में CIC के युवा और प्रतिभाशाली कलाकार अपनी कला का जादू बिखेरेंगे:

  1. बैंड शिवोहम (Battle of Bands) — पैडी, सनी, आशु और हितेश द्वारा सूफी और बॉलीवुड गीतों की प्रस्तुति।

  2. चिराग तोमर (Symphony of India) — पर्कशनिस्ट साहिल वर्मा के साथ लोकप्रिय बॉलीवुड गीत प्रस्तुत करेंगे।

  3. निशु शर्मा (Battle of Bands) — राजस्थानी लोक संगीत की प्रस्तुति।

  4. नयन कृष्णा (Symphony of India) — बाँसुरी वादन के माध्यम से मनमोहक धुनें।

  5. मालदीव के विजेता बैंड — पहली बार भारत में प्रस्तुति देंगे, जिससे कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय रंग जुड़ जाएगा।

ये सभी युवा कलाकार, WAVES और CIC पहल के माध्यम से निखरकर उभरे हैं। इन्होंने WAVES मुंबई, WAVES Global Outreach Events (मेलबर्न, ओसाका एक्सपो, टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल) में अपनी कौशल का प्रदर्शन किया है। नेशनल स्ट्रीट फूड फेस्टिवल में उनका प्रदर्शन उनके रचनात्मक सफर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है।

भारत की ऑरेंज इकॉनमी को बढ़ावा

यह पहल कलाकारों और क्रिएटिव उत्साही लोगों को अपनी प्रतिभा विकसित करने, WAVES प्लेटफ़ॉर्म पर प्रस्तुत करने और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसे आर्थिक अवसरों में बदलने का अवसर देती है। इससे भारत की Orange Economy (Creative Economy) को और मज़बूती मिलती है।

WAVES और Create in India Challenge (CIC) के बारे में

Create in India Challenge (CIC), सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की प्रमुख WAVES पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य संगीत, फिल्म, एनीमेशन, VFX, गेमिंग, कॉमिक्स, AI, XR और डिजिटल मीडिया जैसे मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्रों में भारत की रचनात्मक प्रतिभा को पहचानना, निखारना और दुनिया के सामने प्रस्तुत करना है।


IITF 2025 में युवाओं की भागीदारी का उत्सव

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नई दिल्ली में आयोजित 44वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले (IITF) में इस वर्ष का थीम “एक भारत श्रेष्ठ भारत” केवल मंडपों या सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ही नहीं, बल्कि उन युवा कारीगरों और उद्यमियों के चेहरों पर जीवंत होता दिखाई देता है, जो गर्व के साथ अपने स्टॉल संभाल रहे हैं। बिजनौर से मधुबनी, अलवर से कच्छ, और भूमध्यसागर पार ट्यूनीशिया तक—IITF 2025 भारत और विश्व के आर्थिक तथा सांस्कृतिक परिदृश्य को बदलने वाली युवा पीढ़ी की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है।

भारत मंडपम की चौड़ी गलियारों में ये युवा प्रतिभागी केवल उत्पाद नहीं बेच रहे हैं। वे पारिवारिक विरासतों को आगे बढ़ा रहे हैं, पारंपरिक हस्तशिल्प में नवाचार कर रहे हैं, नई तकनीकों के साथ प्रयोग कर रहे हैं और अपने आत्मनिर्भर उद्यमी सफर को आकार दे रहे हैं।

इन युवाओं की कहानियों में MSME विकास, कौशल उन्नयन, ग्रामीण आजीविका और वैश्विक बाजार से जुड़ाव बढ़ाने वाली नीतियों की वास्तविक अभिव्यक्ति देखी जा सकती है। इन प्रयासों को सशक्त बनाता है मेरा युवा भारत (MY Bharat)—भारत सरकार की एक ऐतिहासिक पहल, जो युवाओं को नेतृत्व, नवाचार और राष्ट्रनिर्माण के लिए मंच प्रदान करती है।

IITF 2025 में, युवाओं की आकांक्षाएँ अवसर से मिलती हैं—और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के भविष्य को आकार देने का मौका मिलता है।

बिजनौर का गुड़ नवाचारक

उत्तर प्रदेश के बिजनौर से आए 26 वर्षीय नमन शर्मा नई पीढ़ी के उस संकल्प का प्रतीक हैं, जो अपनी मिट्टी से जुड़कर विरासत को आधुनिक पहचान देना चाहते हैं। भारत के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में से एक बिजनौर का प्रतिनिधित्व करते हुए नमन कहते हैं—

“मैं गुड़ उद्योग को आधुनिक बनाना चाहता हूँ और लोगों को रसायन-मुक्त, प्राकृतिक उत्पाद देना चाहता हूँ।”

2018 से प्रयोग शुरू कर चुके नमन ने 2021 में अपनी कंपनी पंजीकृत की। उनके 21 वर्षीय भाई और 23 वर्षीय बहन उनकी मुख्य टीम हैं। वे 15 फैक्ट्री कर्मचारियों और पैकेजिंग यूनिट में 25 महिलाओं को रोजगार देते हैं।

IITF में उनकी यह पहली भागीदारी है, जो क्षेत्रीय आयोजनों में उल्लेखनीय सफलता के बाद संभव हुई। अब वे निर्यात बाजार को लक्ष्य बना रहे हैं और PMEGP के माध्यम से यूनिट विस्तार की तैयारी कर रहे हैं।

पद्मश्री विरासत को आगे बढ़ाता मधुबनी का युवा कलाकार

बिहार मंडप में मधुबनी कला के रंग सबका ध्यान आकर्षित करते हैं। इन्हीं रंगों के बीच 18 वर्षीय मधुरम कुमार झा खड़े हैं—जितवारपुर गाँव के, जो मधुबनी कला का केंद्र माना जाता है।

उनकी दादी पद्मश्री बऊआ देवी—मिथिला कला की अग्रणी हस्ती हैं। मधुरम बचपन से उनकी कला को देखते हुए बड़े हुए।

वे कहते हैं—
“जब दादी माँ पेंटिंग करती थीं, मैं उनके पास बैठ जाता था… देखकर सीखता था।”

पढ़ाई के साथ वे देशभर में प्रदर्शनियों में भाग लेते हैं। वे चाहते हैं कि मधुबनी कला “हर गली, हर देश” तक पहुँचे। आगे चलकर वे IRS अधिकारी या नौसेना में शामिल होना चाहते हैं।

वे बताते हैं—
“सरकार ने हमें नाम दिया है, पहचान दी है… दादी माँ की वजह से।”

राजस्थान की कुम्हार परंपरा को आगे बढ़ाती करिश्मा

राजस्थान मंडप में टेराकोटा के बर्तन करीने से सजे हैं। इनके बीच 20 वर्षीय करिश्मा परजापत अपने परिवार की कुम्हारी परंपरा का प्रतिनिधित्व करती हैं।

वे बताती हैं—
“हम मिट्टी तोड़ते हैं, गलाते हैं, भिगोते हैं… फिर पिता उसे आकार देते हैं और भट्टी में पकाते हैं।”

करिश्मा बीए कर रही हैं और साथ ही परिवार की इस कला में हाथ बँटा रही हैं। उनका स्टॉल महिला सशक्तिकरण निदेशालय द्वारा प्रायोजित है, और यह उनका दूसरा चयन है।

उनकी उपस्थिति भारतीय हस्तकला में युवा महिलाओं की बढ़ती भूमिका का मजबूत संकेत है।

800 वर्ष पुरानी कच्छ की घंटी कला के युवा शिल्पकार

गुजरात के 26 वर्षीय लुहार जावेद अब्दुल्ला जब अपनी कला के बारे में बताते हैं, तो मानों सदियों पुरानी कहानी सुनाते हैं—

“हमारा काम 800-900 साल पुराना है, और हमारे परिवार का 400 साल से अधिक।”

कच्छ की यह पारंपरिक तांबे की घंटियाँ, जो पहले मवेशियों के गलों में बांधी जाती थीं, अब वाद्ययंत्र, विंड चाइम और सजावटी वस्तुओं के रूप में बनाई जाती हैं। उनकी यूनिट में 20 कर्मचारी हैं, जिनमें अधिकतर महिलाएँ हैं।

IITF उनके लिए व्यापार से आगे एक सांस्कृतिक मंच है—जहाँ हर घंटी कच्छ की विरासत को नई पहचान देती है।

सीमाओं के पार: अंतरराष्ट्रीय मंडप के युवा चेहरे

IITF 2025 में 12 देशों ने भाग लिया है। अंतरराष्ट्रीय मंडप वैश्विक संस्कृतियों और शिल्प का जीवंत संगम बन गया है।

इसी भीड़ में 26 वर्षीय अहमद शाहिद (ट्यूनीशिया) अपने हाथ से बने सिरेमिक, ऑलिव वुड उत्पाद और सजावटी वस्तुएँ प्रदर्शित कर रहे हैं।

वे कहते हैं—
“भारतीय लोग बहुत सवाल पूछते हैं… जानना चाहते हैं कि चीजें कैसे बनती हैं।”

IITF उनके लिए भारतीय बाजार को समझने, व्यापारिक साझेदारियों और निर्यात अवसरों का द्वार है।

युवा: परिवर्तन की धुरी

IITF 2025 “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की भावना को युवाओं की जीवंत भागीदारी के माध्यम से मजबूत बनाता है। ये युवा—
उद्यमी, कलाकार, नवप्रवर्तक—भारत की विविधता को अपनी रचनात्मक ऊर्जा के साथ प्रस्तुत करते हैं।

उनकी कहानियाँ दर्शाती हैं कि जब युवाओं को मंच मिलता है, तो वे परंपरा और नवाचार दोनों में नया जीवन फूँकते हैं।

यही युवा हैं जो आज देश की प्रगति को आगे बढ़ा रहे हैं—हर कला, हर तकनीक और हर विचार के साथ।


एक भारत श्रेष्ठ भारत: IITF में संस्कृति, कारोबार और कारीगरों का अनोखा मिलन

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परिचय

दशकों से ट्रेड फेयर यह दिखाते आए हैं कि जब लोग, उत्पाद और विचार एक साथ आते हैं, तो बाजार कैसे विकसित होते हैं। इस वर्ष का इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए “एक भारत श्रेष्ठ भारत” थीम के साथ आयोजित हो रहा है। अपने 44वें संस्करण में यह मेला 3,500 से अधिक प्रतिभागियों, 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तथा 11 देशों के प्रदर्शकों को एक साथ लाकर भारत मंडपम को संस्कृतियों और वाणिज्य का संगम बना देता है।

बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे पार्टनर स्टेट्स, तथा झारखंड बतौर फोकस स्टेट, सिर्फ वस्तुएं ही नहीं, बल्कि अपने राज्यों की आर्थिक आकांक्षाओं को भी प्रस्तुत कर रहे हैं।

सरकारी विभागों, पीएसयू, एमएसएमई, स्टार्टअप्स, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शकों और शिल्पकार समूहों को एक ही छत के नीचे लाकर यह मेला छोटे उत्पादकों, पारंपरिक कारीगरों और नई पीढ़ी के उद्यमियों के लिए भारत का सबसे प्रभावी मंच बन चुका है।

“मैंने इतना बड़ा ट्रेड फेयर कभी नहीं देखा”

एक गलियारे में मिस्र (Egypt) के इस्लाम कमाल अपने मार्बल शिल्प पर रुकने वाले आगंतुकों को देखते हैं। उनका परिवार पिछले 25 वर्षों से यहां आता रहा है—इतना लंबा समय कि उनका व्यापार इस मेले के बदलावों का प्रतिरूप बन गया है।

वे कहते हैं,

“इस क्षेत्र में लगातार वृद्धि हुई है। हमें हमेशा अच्छा रिस्पॉन्स मिलता है, और अब मांग पहले से कहीं ज्यादा है।”

इस्लाम के अनुसार, भारत मंडपम “दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेड फेयर” है, जहां उन्हें हर साल अधिक समर्थन और अधिक ग्राहक मिलते हैं। उनका अनुभव उन कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों से मेल खाता है जो इसलिए लौटते हैं क्योंकि भारत अब खुद एक भरोसेमंद बाजार बन गया है।

एक बाजार जो दूसरा घर बन गया

तुर्की के उलास की कहानी इससे भी गहरी है।
“हम लगभग 24–25 साल से भारत आ रहे हैं,” वे बताते हैं।
“पहले हम दूसरे देशों में भी मेलों में जाते थे, लेकिन अब हम सिर्फ भारत में ही प्रदर्शनी लगाते हैं।”

वे हर साल लगभग छह महीने भारत में बिताते हैं, ऐसे रिश्ते बनाते हुए जो मेले की अवधि से कहीं आगे तक चलते हैं।

“हमारे ग्राहक हर साल वापस आते हैं,” वे मुस्कुराते हुए कहते हैं।
“यही हमें प्रेरित करता है।”

जब परंपरा बन जाती है रोज़गार

एक अन्य मंडप में कोल्हापुरी चप्पलों का स्टॉल लोगों से भरा है।

सचिन सातपुते के लिए, यह मेला सिर्फ बाज़ार नहीं है; यह एक ऐसा मंच है, जहां परंपरा को सम्मान और खरीदार दोनों मिलते हैं।

वे कहते हैं,
“ऐसे आयोजन हमारे मार्केटिंग और ब्रांडिंग में बहुत मदद करते हैं।”

उनके लिए यह 15 दिनों का आयोजन छह महीनों की कमाई लेकर आता है।

जब स्टॉक मेले के खत्म होने से पहले ही बिक जाए

कुछ कहानियां पैमाने की होती हैं—तेजी से बिकते स्टॉक और खाली शेल्फ की।

महाराष्ट्र की शोभा कहती हैं,
“यह हमारा दूसरा मौका है ट्रेड फेयर में। पिछले साल हमने 2–3 क्विंटल माल बेचा था, और हमारा स्टॉक मेले के खत्म होने से 2–3 दिन पहले ही खत्म हो गया था।”

उनका अनुभव छोटे उत्पादकों के लिए भरोसा देता है, जो पहचान और पहुंच की तलाश में रहते हैं।

एक्सपोर्ट करने वाले भी ढूंढते हैं घरेलू बाजार

मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) के मोहम्मद फाज़िल सामान्यतः अपने मेटल हैंडीक्राफ्ट्स यूरोप और अमेरिका में निर्यात करते हैं।

लेकिन इस बार वे भारत मंडपम में एक नए उद्देश्य से आए हैं:
“हम घरेलू बाजार में ज्यादा एक्सपोजर चाहते हैं।”

उनके लिए यह मेला ब्रांडिंग, पैठ और नए खरीदारों का परीक्षण स्थल है।

जब मेला कारीगरों के सपनों को सहारा देता है

उत्त्तर प्रदेश के नेशनल अवॉर्डी इकराम हुसैन कहते हैं,
“यह मेरा दूसरा मौका है मेले में, और यह मेरे लिए बेहद लाभदायक रहा है।”

उनके लिए यह आयोजन 15 दिनों में तीन महीने के बराबर बिक्री लेकर आता है।

वे कहते हैं,
“यहां मिली संभावनाओं ने मुझे अपना व्यवसाय बढ़ाने में बहुत मदद की है।”

उनकी कहानी बताती है कि ऐसे प्लेटफ़ॉर्म कारीगरों के सपनों को नई उड़ान देते हैं।

रिश्ते जो मेले के बाद भी चलते रहते हैं

थाईलैंड की किम पिछले 12 वर्षों से यहां आ रही हैं।
“मैं जिन ग्राहकों से यहां मिलती हूं, वे आमतौर पर अगले साल फिर लौटते हैं,” वे कहती हैं।

उन्हें मेले के बाद भी कई थोक के ऑर्डर मिलते हैं—जिससे साबित होता है कि यहां बने रिश्ते लंबे समय तक टिकते हैं।

जब व्यापार एक समुदाय बन जाता है

मेले में थोड़ा अधिक समय बिताएं और एक पैटर्न स्पष्ट दिखने लगता है—चाहे वह मिस्र का मार्बल हो, थाईलैंड के आभूषण, महाराष्ट्र का चमड़ा या उत्तर प्रदेश की धातु कारीगरी—हर प्रदर्शक विकास, पहचान, जुड़ाव और बढ़ती आय की बात करता है, जो 14-दिन के इस आयोजन से कहीं आगे तक असर छोड़ती है।

ऐसे ट्रेड फेयर केवल बिक्री नहीं बढ़ाते—
वे इकोसिस्टम बनाते हैं, जहां:

  • कारीगरों को पहचान मिलती है

  • निर्यातक घरेलू बाजार खोजते हैं

  • छोटे उत्पादक अपने ग्राहकों को बार-बार लौटते हुए देखते हैं

भारत मंडपम जैसे मंच यह दिखाते हैं कि जब परंपरा, उद्यमिता और वैश्विक जुड़ाव एक साथ आते हैं, तो व्यापार एक उत्सव बन जाता है।


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