Media24Media.com: #CulturalFestival

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #CulturalFestival. Show all posts
Showing posts with label #CulturalFestival. Show all posts

14 सितंबर से सुर, ताल और घुंघरुओं की झंकार से गूंजेगा 41 वें चक्रधर समारोह का मंच

No comments Document Thumbnail

स्थानीय प्रतिभाओं और छत्तीसगढ़ी लोक कलाकारों को मिलेगा मंच

रामलीला मैदान में 10 दिनों तक सजेगा शास्त्रीय संगीत, नृत्य और लोक संस्कृति का महाकुंभ

रायगढ़ कलेक्टर की अध्यक्षता में कलाकार चयन समिति की बैठक संपन्न

रायपुर- रायगढ़ जिले की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक 41वें चक्रधर समारोह-2026 इस वर्ष 14 से 23 सितंबर 2026 तक स्थानीय रामलीला मैदान में आयोजित होगा। दस दिवसीय इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजन को भव्य, सुव्यवस्थित और यादगार बनाने के लिए आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलाकार चयन समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर एवं चक्रधर समारोह आयोजन समिति के अध्यक्ष मयंक चतुर्वेदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कलाकारों के चयन, कार्यक्रम की रूपरेखा तथा आयोजन की प्रशासनिक तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि चक्रधर समारोह केवल शास्त्रीय कला का मंच नहीं, बल्कि रायगढ़ और छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने निर्देश दिए कि इस वर्ष आयोजन में स्थानीय कलाकारों, नवोदित प्रतिभाओं तथा छत्तीसगढ़ की लोक कला एवं लोक संस्कृति को विशेष स्थान दिया जाए, ताकि क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत का प्रभावी प्रदर्शन हो सके। बैठक में निर्णय लिया गया कि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित कलाकारों के साथ-साथ रायगढ़ और प्रदेश के लोक कलाकारों को भी पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। छत्तीसगढ़ी लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं तथा स्थानीय प्रतिभाओं की प्रस्तुति समारोह का विशेष आकर्षण होगी। इससे प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिलेगी। समारोह के दौरान शास्त्रीय गायन, वादन, नृत्य, लोक कला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का संतुलित कार्यक्रम तैयार करने पर समिति ने विस्तार से विचार-विमर्श किया। विशेषज्ञों ने कार्यक्रमों की समय-सारिणी, प्रस्तुति की गुणवत्ता तथा दर्शकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिन्हें आयोजन की अंतिम रूपरेखा में शामिल किया जाएगा। 

बैठक में मोती महल रायगढ़ (राज परिवार) से देवेन्द्र प्रताप सिंह एवं उर्वशी देवी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिजीत बबन पठारे, एडीएम अपूर्व प्रियेश टोप्पो, सहायक कलेक्टर गोकुल आर.के. संयुक्त कलेक्टर पूजा बंसल, प्रो. अम्बिका वर्मा, प्रदेश संयोजक सांस्कृतिक प्रकोष्ठ अनुपम पाल, कलाकार भूपेन्द्र बरेठ तथा प्राचार्य राजेश डेनियल सहित समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

आयोजन स्थल पर व्यवस्थाओं को लेकर विभागों को मिले निर्देश

बैठक में रामलीला मैदान में मंच निर्माण, आकर्षक सज्जा, दर्शक दीर्घा, ध्वनि एवं प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, पार्किंग, पेयजल, स्वच्छता तथा अन्य जनसुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए संबंधित विभागों को विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। आयोजन के प्रत्येक पहलू में विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया।

सांस्कृतिक गरिमा और भव्यता के साथ होगा आयोजन

बैठक में आयोजन समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि इस वर्ष का 41वां चक्रधर समारोह सांस्कृतिक गरिमा, उत्कृष्ट व्यवस्थाओं और उच्चस्तरीय प्रस्तुतियों के कारण पहले से अधिक भव्य और ऐतिहासिक होगा। राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों के साथ स्थानीय एवं छत्तीसगढ़ी लोक कलाकारों की सहभागिता समारोह को नई पहचान देगी तथा रायगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को देशभर में और अधिक प्रतिष्ठा दिलाएगी।


22 अप्रैल को गढ़ रीवा में आयोजित होगा 'लोरिक-चंदा' लोकनाट्य महोत्सव

No comments Document Thumbnail

नवा रायपुर/आरंग- छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोकगाथाओं में रची-बसी 'लोरिक चंदा' (चंदैनी लोकनाट्य) विधा को संरक्षण देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ऐतिहासिक ग्राम गढ़ रीवा में आगामी 22 अप्रैल को एक भव्य 'लोरिक चंदा लोकनाट्य महोत्सव' का आयोजन किया जाएगा। यह पहल दम तोड़ती लोक कला को नई ऊर्जा देने और युवा पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से की जा रही है।

 कैबिनेट मंत्री से मिला समर्थन 

​महोत्सव की तैयारियों के सिलसिले में आज मंगलवार को  ग्राम गढ़ रीवा के 73 वर्षीय सरपंच घसियाराम साहू, उपसरपंच सूरज साहू तथा पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के प्रतिनिधि दूजेराम धीवर, महेन्द्र पटेल एवं प्रतीक कुमार टोंड्रे ने नवा रायपुर में कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब से सौजन्य भेंट की।

​प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री जी को महोत्सव का औपचारिक प्रस्ताव सौंपते हुए विस्तार से चर्चा की। प्रस्ताव पर हर्ष व्यक्त करते हुए मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि "चंदैनी जैसी पारंपरिक विधाएं हमारी पहचान हैं। इन्हें विलुप्त होने से बचाने के लिए ग्राम स्तर पर किया जा रहा यह प्रयास मील का पत्थर साबित होगा।" उन्होंने इस आयोजन की सराहना करते हुए इसे भव्यता प्रदान करने के लिए प्रदेश के संस्कृति मंत्री को भी आमंत्रित करने का आश्वासन दिया।

जनसहयोग से सजेगा महोत्सव का मंच 

​ग्राम के सरपंच घसियाराम साहू ने जानकारी दी कि इस महोत्सव का आयोजन पूर्णतः जनसहयोग से ग्राम के बाजार चौक में किया जाएगा। आयोजन की रूपरेखा पीपला वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा तैयार की जा रही है। महोत्सव के मुख्य आकर्षण के रूप में छत्तीसगढ़ की तीन सुप्रसिद्ध चंदैनी टीमों का चयन किया गया है, जो रात भर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगी।

​ विशेषज्ञों का होगा जुटान 

​केवल प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि इस विधा के वैचारिक पक्ष को समझने के लिए लोरिक चंदा (चंदैनी) के जानकारों और विशेषज्ञों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया जा रहा है। आयोजन को लेकर गढ़ रीवा सहित आसपास के क्षेत्रों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से न केवल मनोरंजन होगा, बल्कि हमारी प्राचीन सांस्कृतिक गाथाओं का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने माधवपुर मेले के लिए दी शुभकामनाएँ, बताया संस्कृति में इसका महत्व

No comments Document Thumbnail

प्रधान मंत्री, नरेंद्र मोदी ने गुजरात के पोर्बंदर में चल रहे माधवपुर मेला के लिए शुभकामनाएँ दी हैं। मोदी ने कहा कि यह जीवंत उत्सव हमारी शानदार संस्कृति को उजागर करता है और साथ ही गुजरात और पूर्वोत्तर के बीच शाश्वत सांस्कृतिक संबंध को भी मजबूत करता है।

“यह त्योहार विविध परंपराओं को एक साथ लाता है, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की सच्ची भावना को दर्शाता है। मैं लोगों से इस मेले में आने का आग्रह करता हूँ!” मोदी ने कहा।

प्रधान मंत्री ने अप्रैल 2022 के मन की बात कार्यक्रम में माधवपुर मेले के महत्व और हमारी संस्कृति में इसकी भूमिका के बारे में भी बात की थी।

प्रधान मंत्री ने X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया:

“गुजरात के पोर्बंदर में चल रहे माधवपुर मेले के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।
यह जीवंत उत्सव हमारी शानदार संस्कृति को उजागर करता है और साथ ही गुजरात और पूर्वोत्तर के बीच शाश्वत सांस्कृतिक संबंध को भी मजबूत करता है।
यह त्योहार विविध परंपराओं को एक साथ लाता है, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की सच्ची भावना को दर्शाता है। मैं लोगों से इस मेले में आने का आग्रह करता हूँ!”

“अप्रैल 2022 के #मनकीबात कार्यक्रम में मैंने माधवपुर मेले के महत्व और हमारी संस्कृति में इसकी भूमिका के बारे में बात की थी। कृपया इसे सुनें…”



नवा रायपुर में परम्परा से पहचान तक ‘आदि परब-2026’ का भव्य आयोजन

No comments Document Thumbnail

राज्य के चिन्हांकित 43 जनजातियों और उपजातियों की संस्कृति, परिधान और चित्रकला का प्रदर्शन

छत्तीसगढ़ सहित मध्यप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के जनजातीय कलाकार होंगे शामिल,सजेगा आदि रंग, परिधान और हाट

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की परिकल्पना और निर्देश पर 13 और 14 मार्च 2026 को नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में ’परम्परा से पहचान तक’ - आदि परब - 2026 का भव्य आयोजन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को राष्ट्रीय मंच देने के उद्देश्य से ‘आदि परब-2026’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। 


भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से आदिम जाति विकास विभाग के अंतर्गत आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। उक्त आशय की जानकारी आज टीआरटीआई में आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और प्रशिक्षण संस्थान के संचालक श्रीमती हिना अनिमेष नेताम ने दी।

आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और आदिवासी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के संचालक हिना अनिमेष नेताम ने प्रेसवार्ता में बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की परिकल्पना और निर्देश पर ‘आदि परब-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में विभाग इस आयोजन को सफल बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

प्रमुख सचिव बोरा ने बताया कि दो दिवसीय इस आयोजन में छत्तीसगढ़ की 43 जनजातियों के साथ-साथ मध्यप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के जनजातीय समुदाय भी शामिल होंगे l आयोजन का उद्देश्य जनजातीय पहचान, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा पारंपरिक ज्ञान के संवर्धन को बढ़ावा देना है।

पहली बार एक मंच पर दिखेंगी 43 जनजातियों की वेशभूषाएँ

प्रमुख सचिव बोरा ने बताया कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत “आदि-परिधान जनजातीय अटायर शो” का आयोजन 13 मार्च को सुबह 10.30 बजे से शाम 8 बजे तक और 14 मार्च को शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक किया जाएगा। इस आयोजन में राज्य की 43 जनजातीय समुदायों की पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक विशेषताओं को पहली बार एक ही मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। प्राकृतिक रंगों, स्थानीय संसाधनों और हाथों से बने वस्त्रों से तैयार ये परिधान जनजातीय जीवन शैली और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का संदेश देंगे। इसमें भाग लेने के लिए 120 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन पंजीयन कराया है। 

‘आदि रंग’ में चित्रकला के माध्यम से जल-जंगल-जमीन का संदेश

प्रमुख सचिव बोरा ने प्रेसवार्ता में बताया कि आदि परब के तहत “आदि रंग - जनजातीय चित्रकला महोत्सव” भी आयोजित होगा। इस महोत्सव में जनजातीय कलाकार अपनी पारंपरिक चित्रकला के माध्यम से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण, जनजातीय जीवन दर्शन और पर्यावरणीय चुनौतियों को प्रस्तुत करेंगे। इस कार्यक्रम में 155 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन पंजीयन कराया है। चित्रकला प्रतियोगिता 18-30 वर्ष और 30 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की दो श्रेणियों में होगी।

दोनों श्रेणी में प्रथम पुरस्कार 20 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 15 हजार रुपये और तृतीय पुरस्कार 10 हजार रुपये दिए जाएंगे। साथ ही दोनों आयु वर्गों के 10-10 प्रतिभागियों को 2000 रुपये का सांत्वना पुरस्कार भी दिया जाएगा।

आदि-हाट में मिलेगा जनजातीय हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद

प्रमुख सचिव बोरा ने बताया कि आयोजन के दौरान “आदि-हाट जनजातीय शिल्प मेला” भी लगाया जाएगा, जिसमें छत्तीसगढ़ के जनजातीय हस्तशिल्प, वनोपज और पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया जाएगा। यहां 14 समूहों द्वारा हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां आगंतुक प्रदेश के पारंपरिक स्वाद का आनंद ले सकेंगे।

यूपीएससी में चयनित जनजातीय युवाओं का होगा सम्मान

प्रमुख सचिव बोरा ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा 2025 में छत्तीसगढ़ से आदिम जाति विकास विभाग की योजनाओं के सहयोग से चयनित अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थी डायमंड सिंह ध्रुव औरअंकित साकनी का सम्मान किया जाएगा। साथ ही इस मौके पर ‘प्रयास’ संस्थान के विद्यार्थियों को विभागीय योजनाओं के तहत लैपटॉप भी वितरित किए जाएंगे।

संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम 2026 का समापन,सुकमा के जनजातीय नाट्य ने बिखेरा जलवा

No comments Document Thumbnail

मुड़िया जनजाति पर आधारित नाट्य का मंचन

गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया सम्मानित

जगदलपुर- बस्तर संभाग की गौरवशाली संस्कृति, कला और परंपराओं के संरक्षण हेतु आयोजित 'बस्तर पंडुम 2026' में सुकमा जिले ने सफलता का परचम लहराया है। जगदलपुर के लाल बाग मैदान में आयोजित इस भव्य संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में सुकमा के जनजातीय नाट्य दल विधा को उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया।

देश के गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुकमा के कलाकारों को स्मृति चिन्ह और 50 हजार रुपये का चेक प्रदान कर सम्मानित किया।

संस्कृति के संरक्षण की अनूठी पहल

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बस्तर के पारंपरिक नृत्य, गीत, खानपान, शिल्प और आंचलिक साहित्य के मूल स्वरूप को सहेजना और स्थानीय कलाकारों को एक बड़ा मंच प्रदान करना है। प्रशासन की इस पहल से न केवल विलुप्त हो रही विधाओं को संजीवनी मिल रही है, बल्कि जनजातीय समूहों के सतत विकास का मार्ग भी प्रशस्त हो रहा है।

सुकमा के कलाकारों ने जीती प्रतियोगिता

कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन और जिला सीईओ मुकुन्द ठाकुर के कुशल प्रबंधन में सुकमा जिले से 12 विधाओं के कुल 69 कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।

प्रथम स्थान कोंटा विकासखंड के सुदूर ग्राम पंचायत कोंडासांवली के आश्रित गांव पारला गट्टा की टीम ने नाट्य विधा में बाजी मारी।

कला का जीवंत चित्रण

मुड़िया जनजाति के 13 सदस्यीय दल (9 पुरुष, 4 महिला) ने दैनिक उपयोग की वस्तुओं जैसे ताड़ का पत्ता, मयूर पंख, तीर-धनुष और मछली पकड़ने के जाल का कलात्मक प्रयोग कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इन कलाकारों ने बढ़ाया जिले का गौरव

कोंटा विकासखंड में स्थित पारला गट्टा निवासी कलाकार लेकम लक्का, प्रकाश सोड़ी, विनोद सोड़ी, जोगा सुदाम और उनकी टीम ने अपनी प्रतिभा से सुकमा जिले को गौरवान्वित किया है। कलाकारों की इस सफलता में नोडल अधिकारी मनीराम मरकाम और पी श्रीनिवास राव का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने कलाकारों को संभाग स्तर तक पहुंचाने और प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभाई।


भारत में रंगमंच का महाकुंभ: NSD आयोजित करेगा 25वां भारत रंग महोत्सव 2026 (27 जनवरी–20 फरवरी)

No comments Document Thumbnail

नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) द्वारा आयोजित किया जाने वाला भारत रंग महोत्सव (BRM) 2026 27 जनवरी से 20 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा। यह विश्व का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव है और इस बार यह अपनी सबसे व्यापक और समावेशी प्रस्तुति के साथ सामने आ रहा है।

इस बार महोत्सव देशभर में 40 स्थानों पर आयोजित होगा और सातों महाद्वीपों से कम से कम एक-एक अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुति शामिल होगी, जिससे इसका वैश्विक प्रभाव और भी बढ़ जाएगा।

प्रमुख आकर्षण

  • 277 भारतीय प्रस्तुतियाँ (136 चयनित और आमंत्रित नाट्य प्रस्तुतियाँ)

  • 12 अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियाँ

  • 228 भारतीय और विदेशी भाषाओं/उपभाषाओं में प्रदर्शन

  • 817 राष्ट्रीय और 34 अंतरराष्ट्रीय आवेदन में से चयनित

  • 19 विश्वविद्यालयों और 14 स्थानीय प्रस्तुतियों का समावेश

भाषाई और सांस्कृतिक विविधता

इस संस्करण में भाषा और संस्कृति का विस्तार कर मैथिली, भोजपुरी, तुलु, उर्दू, संस्कृत, ताई खामती, न्युशी सहित कई भाषाओं और जनजातीय/लुप्तप्राय भाषाओं को मंच मिलेगा।

नए केंद्र और पहुंच

पहली बार नए केंद्रों में शामिल हैं:लद्दाख, अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप, दमन और दीव, आइजॉल (मिज़ोरम), तुरा (मेघालय), नागांव (असम), मंडी (हिमाचल प्रदेश) और रोहतक (हरियाणा)

समावेशिता और समाज

इस महोत्सव में पहली बार ट्रांसजेंडर समुदाय, सेक्स वर्कर्स, वरिष्ठ नागरिक और अन्य अल्पप्रतिनिधित समूहों की प्रस्तुतियाँ भी शामिल होंगी।

विविध कार्यक्रम

  • आदिरंग महोत्सव (जनजातीय रंगमंच, नृत्य, शिल्प)

  • जश्ने बचपन (बाल रंगमंच)

  • बाल संगम (बच्चों द्वारा लोक नृत्य और नाटक)

  • पूर्वोत्तर नाट्य समारोह

  • कठपुतली, नृत्य नाटक, संस्कृत नाट्य महोत्सव

  • माइक्रो ड्रामा फेस्टिवल

साहित्य और संगोष्ठी

  • 17 किताबें लॉन्च होंगी (श्रुति पहल के तहत)

  • थिएटर बाजार में नए नाटकों को बढ़ावा

  • 33 प्रस्तुतियाँ महिला निर्देशकों द्वारा निर्देशित

सम्मान और श्रद्धांजलि

महोत्सव में भगवान बिरसा मुंडा, लोक माता अहिल्या बाई, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महान हस्तियों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। साथ ही रतन थियाम, दया प्रकाश सिन्हा, बंसी कौल, अलोक चटर्जी जैसे रंगमंच दिग्गजों को भी सम्मानित किया जाएगा।

कर्मा पर्व प्रकृति से जुड़ाव और सामूहिक आनंद का उत्सव है: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

No comments Document Thumbnail

कर्मा महोत्सव में लोक कलाकारों ने दी रंगारंग प्रस्तुतियां

नगर पंचायत भटगांव के विकास के लिए एक करोड़ रुपए की घोषणा

सूरजपुर जिले को दी 172.51 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात

रायपुर- कर्मा महोत्सव को छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। ऐसे आयोजन लोक पर्वों को सहेजने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। कर्मा पर्व प्रकृति से जुड़ाव, आपसी भाईचारा और सामूहिक आनंद का उत्सव है। उक्त आशय के विचार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सूरजपुर जिले के चुनगुड़ी में आयोजित कर्मा महोत्सव में व्यक्त किए। 

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर 172.51 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने चुनगुड़ी के स्कूल मैदान को मिनी स्टेडियम के रूप में विकसित करने तथा नगर पंचायत भटगांव के विकास हेतु एक करोड़ रुपये की घोषणा की। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और सांसद चिंतामणि महाराज ने भी सम्बोधित किया।

परंपरा, संस्कृति और उल्लास से परिपूर्ण कर्मा महोत्सव में मांदर की थाप और घुंघरुओं की झंकार के बीच पूरा क्षेत्र कर्मा नृत्य की लय में थिरक उठा। सूरजपुर, सरगुजा, जशपुर, बलरामपुर, कोरिया एवं मनेंद्रगढ़ जिलों से आए 33 कर्मा दलों के लोक कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में कर्मा नृत्य प्रस्तुत कर सबको लोक संस्कृति के रंगों से भर दिया। 

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर लगायी गई प्रदर्शनी के स्टॉलों का निरीक्षण कर नाव-जाल एवं आइस बॉक्स, आयुष्मान कार्ड, छत्तीसगढ़ महिला कोष से ऋण वितरण और महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित छह रेडी-टू-ईट ईकाइयों का शुभारंभ किया और पोषण वितरण कार्य से जुड़ी महिलाओं को शॉल-श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। इसके अलावा महिलाओं को स्वरोजगार के लिए मुद्रा लोन, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के अंतर्गत बीमा क्लेम तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत खुशियों की चाबी प्रदान की।

कार्यक्रम में विधायक भूलन सिंह मरावी, वन विकास निगम के अध्यक्ष राम सेवक पैकरा, जिला पंचायत अध्यक्ष चंद्रमणि पैकरा, उपाध्यक्ष रेखा राजलाल रजवाड़े सहित अनेक जनप्रतिनिधि सहित समस्त जिलास्तरीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

धर्मनगरी आरंग में मोरध्वज महोत्सव संपन्न, कवियों के हास्य व्यंग्य के बीच करीब 3 घंटे रहे मुख्यमंत्री साय

No comments Document Thumbnail

आरंग- दानशीलता और धर्म नगरी आरंग में  दो दिवसीय राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव–2026 का गरिमामय समापन  हो गया है। 15 और 16 जनवरी के दो दिवसीय  आयोजन में  प्रख्यात कवि कुमार विश्वास के हास्य व्यंग्य के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करीब तीन घंटे तक आरंग में रहे।

महोत्सव के अंतिम दिन लोरिक चंदा,  राजा मोरध्वज की नाट्य प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रहा। स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने देर शाम तक समां बांधा। अंतरराष्ट्रीय स्तर के कवियों का पहली बार आरंग में कवि सम्मेलन ने पूरे नगर को उत्सवमय बना दिया।

मुख्यमंत्री ने दी सौगातें

महोत्सव समापन समारोह के मुख्य अतिथि और प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने क्षेत्रीय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब की मांग पर मंच से ही अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं।

मुख्यमंत्री ने नगर पंचायत समोदा  स्थित उपतहसील को पूर्ण तहसील बनाए जाने की घोषणा की, जिससे क्षेत्रवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई। 

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने राजा मोरध्वज महोत्सव के लिए शासकीय अनुदान राशि 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की घोषणा की। उन्होंने इनडोर स्टेडियम एवं खेल परिसर का नामकरण “राजा मोरध्वज खेल परिसर” किए जाने की भी घोषणा की। इन घोषणाओं के बाद महोत्सव स्थल  तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। 

मुख्यमंत्री का प्रेरक संबोधन

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि राजा मोरध्वज ने दानशीलता और धर्म परायण की जो मिसाल पेश की है, वह अद्वितीय है। आरंग स्थित बाबा बागेश्वरनाथ महादेव की पूजा अर्चना करके वनवास के दौरान भगवान श्रीराम आगे बढ़े। यह सिद्ध पीठ आज भी जन-जन के आस्था का केंद्र है। 

मुख्यमंत्री ने आरंग को धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से विशिष्ट बताते हुए कहा कि ऐसे महोत्सव नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ते हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे राजा मोरध्वज के आदर्श—त्याग, सत्य और जनसेवा—को अपने जीवन में अपनाएँ। अंत में उन्होंने राजा मोरध्वज को नमन करते हुए संयोजक गुरु खुशवंत साहेब और आरंग की जनता को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

बाबा बागेश्वरनाथ का दर्शन पूजा 

आरंग पहुँचते ही मुख्यमंत्री ने बाबा बागेश्वरनाथ मंदिर जाकर पूजा-अर्चना की और छत्तीसगढ़ की समृद्धि व खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विजय बघेल, सतनामी समाज के धर्मगुरु बालदास साहेब, आयोजन संयोजक कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, ध्रुव कुमार मिर्धा, पीठाधीश राजीव लोचन महाराज, विधायक रोहित साहू, इंद्र कुमार साहू, आरंग नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. संदीप जैन, जनपद अध्यक्ष टाकेश्वरी मुरली साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं मंडल-निगम के अध्यक्ष उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन संजय शर्मा और विनोद गुप्ता ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. संदीप जैन ने किया।

विशिष्ट सेवा के लिए मोरध्वज अलंकरण सम्मान

महोत्सव में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को “मोरध्वज अलंकरण सम्मान” से सम्मानित किया गया। इनमें 5 व्यक्तिगत और एक संस्थागत कुल 6 अलंकरण में प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। 

दानशीलता के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान  स्व. भागीरथी लाल अग्रवाल के पौत्र आशीष कुमार अग्रवाल,  गौ-सेवा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए राहुल जोशी, खेल-कूद के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए  भुवन लाल नशीने, शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए  मुरली मनोहर देवांगन, कला एवं संगीत के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान प्रभुलाल साहनी और उनके पुत्र लल्ला साहनी को मोरध्वज अलंकरण से विभूषित किया गया।

समाज सेवा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए संस्थागत सम्मान पीपला वेलफेयर फाउंडेशन आरंग को प्रदान किया गया। संरक्षक आनंदराम साहू, अध्यक्ष दूजेराम धीवर और संयोजक महेन्द्र पटेल को मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान देते हुए महोत्सव के संयोजक गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि आरंग में इस महोत्सव का फाउंडेशन इसी संस्था ने रखी है, जो अब भव्य रूप ले चुका है। 

भक्ति से सांस्कृतिक संध्या तक

महोत्सव के दूसरे दिन की शुरुआत सुबह 9 बजे माता गायत्री यज्ञ–हवन से हुई। वैदिक मंत्रोच्चार और हवन की पवित्र अग्नि के बीच नगरवासियों ने सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। दोपहर 2 से 5 बजे तक स्कूल एवं कॉलेज के छात्र–छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। देशभक्ति, लोकसंस्कृति और सामाजिक संदेशों से भरपूर नृत्य-नाट्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन कार्यक्रमों का संचालन नवाचारी शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल और अरविंद वैष्णव ने किया।

ऐतिहासिक कवि सम्मेलन ने बांधा समां

महोत्सव का सबसे प्रतीक्षित क्षण रात साढ़े 10 बजे आया, जब देश के प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास के कवि सम्मेलन से आयोजन का भव्य समापन हुआ। उनके साथ हास्य कवि रोहित शर्मा, श्रृंगार रस की कवियत्री साक्षी तिवारी, हास्य-व्यंग्य के सशक्त कवि दिनेश बावरा तथा वीर रस के कवि विनीत चौहान ने अपनी ओजस्वी, भावपूर्ण और राष्ट्रभाव से भरी कविताओं से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। तालियों की गूंज और भावनाओं का सैलाब आयोजन की ऐतिहासिक सफलता का साक्षी बना। मुख्यमंत्री भी देर रात तक कवि सम्मेलन में समापन तक बैठे रहे।

मोरध्वज आरंग महोत्सव 2026 का भव्य समापन, मुख्यमंत्री ने विकास से जुड़ी अहम घोषणाएँ कीं

No comments Document Thumbnail

रायपुर- राजा मोरध्वज की त्याग, धर्म और सत्यनिष्ठा की गौरवगाथा को समर्पित मोरध्वज आरंग महोत्सव–2026 का समापन समारोह ऐतिहासिक गरिमा और भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राजा मोरध्वज का जीवन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों का अमर प्रतीक है, जो आज भी समाज को सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आरंग की यह पुण्यभूमि त्रेता युग में प्रभु श्रीराम के चरण-स्पर्श से तथा द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण की स्मृतियों से अनुप्राणित रही है। उन्होंने बागेश्वर बाबा में विधिवत जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और सतत विकास की कामना की।

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को गति देने वाली कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं। उन्होंने समोदा उप तहसील को पूर्ण तहसील का दर्जा देने और वहाँ पूर्णकालिक तहसीलदार की पदस्थापना की घोषणा की। इसके साथ ही मोरध्वज महोत्सव के लिए दिए जाने वाले शासकीय अनुदान को ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में प्रस्तावित खेल परिसर सहित अन्य अधोसंरचना विकास कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने का आश्वासन भी दिया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार “मोदी की गारंटी” के अनुरूप जनहित को सर्वोपरि रखते हुए कार्य कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को सरकार की विकास नीति का प्रमुख आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि संवेदनशील शासन, त्वरित निर्णय और जनता से सीधा संवाद ही सरकार की पहचान है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सैंड आर्टिस्ट हेमचंद साहू को रेत से भगवान श्रीकृष्ण, भगवान श्रीराम एवं भगवान बागेश्वरनाथ की दिव्य आकृतियाँ उकेरने के लिए सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कलाकार की सृजनशीलता और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी उत्कृष्ट कला न केवल हमारी आस्था और सांस्कृतिक विरासत को सशक्त करती है, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान को भी राष्ट्रीय स्तर पर गौरव प्रदान करती है। उन्होंने कलाकार को भविष्य में भी इसी प्रकार अपनी कला के माध्यम से प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए शुभकामनाएँ दीं।

समापन अवसर पर जनप्रतिनिधियों, साधु-संतों, मातृशक्ति, युवाओं एवं बड़ी संख्या में उपस्थित नागरिकों की सहभागिता ने समारोह को ऐतिहासिक बना दिया। मुख्यमंत्री ने आयोजन समिति को सफल और भव्य आयोजन के लिए बधाई देते हुए प्रदेशवासियों को मोरध्वज महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।

समारोह में  उप मुख्यमंत्री अरुण साव, स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, गुरु बालकदास साहेब, सांसद विजय बघेल,  बृजमोहन अग्रवाल, विधायक इंद्रकुमार साहू, मोतीलाल साहू, रोहित साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

दो दिवसीय राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव आज से, भव्य आयोजन के लिए सजा नगर

No comments Document Thumbnail

आरंग-  दो दिवसीय (15 एवं 16 जनवरी को) आयोजित होने वाले राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव को लेकर नगर सहित अंचल में उत्साह  है। महोत्सव के लिए नगर को आकर्षक रोशनी, बैनर-पोस्टर से दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है। प्रचार वाहन नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में भ्रमण कर महोत्सव का संदेश पहुँचा रहे हैं।

कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर प्रशासन भी अलर्ट मोड में है। वहीं आयोजन की सतत निगरानी स्वयं कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब द्वारा की जा रही है।

दो दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा

पहले दिन 15 जनवरी को

महोत्सव के पहले दिन सुप्रसिद्ध सैंड आर्टिस्ट हेमचंद साहू द्वारा महोत्सव स्थल पर रेत कलाकृति से राम और श्याम की प्रतिकृति का निर्माण किया जाएगा। इसके पश्चात बाबा बागेश्वरनाथ मंदिर से कार्यक्रम स्थल तक शोभायात्रा निकाली जाएगी।  मंच पर बाबा बागेश्वरनाथ महादेव की पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ होगा।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में सुवा नृत्य (कोसमखुटा) एवं पंथी पार्टी (कुटेशर) की प्रस्तुति होगी।

इतिहासकारों एवं शिक्षाविदों के व्याख्यान के क्रम में आरंग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आयोजन की सार्थकता पर पटकथा लेखक आनंदराम साहू, वरिष्ठ इतिहासकार एवं पुराविद प्रो. आर.एन. विश्वकर्मा, वरिष्ठ पुराविद जी.एल. रायकवार, शिक्षाविद मुरली मनोहर देवांगन का वक्तव्य होगा।

इसके अलावा स्वरांजलि डांस ग्रुप की प्रस्तुति, राजा मोरध्वज की झांकी का मंचन, समाज प्रमुखों का सम्मान तथा सुनील सोनी स्टार नाइट का रंगारंग कार्यक्रम आयोजित होगा। 

दूसरे दिन मुख्यमंत्री और कुमार विश्वास का कार्यक्रम

महोत्सव के दूसरे दिन 16 जनवरी को सुबह वेदमाता गायत्री यज्ञ-हवन एवं पूजन होगा। इसके बाद स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति होगी। लोरिक-चंदा (देउर गाँव, साजा) की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रहेगी।

धमतरी से आई राजा मोरध्वज की जीवंत झांकी, अतिथियों का स्वागत एवं उद्बोधन के पश्चात राजा मोरध्वज अलंकरण सम्मान समारोह  होगा। अलग-अलग क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वालों को मोरध्वज अलंकरण से विभूषित किया जाएगा। 

महोत्सव के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मंत्रिमंडल के सदस्य, विधायक एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रहेगी। 

कवि डॉ. कुमार विश्वास सहित अन्य प्रतिष्ठित कवियों द्वारा काव्यपाठ के साथ ही महोत्सव संपन्न होगा। आयोजन को लेकर समूचे नगर में विशेष उत्साह एवं उल्लास का माहौल  है।

राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव के भव्य आयोजन की तैयारी

No comments Document Thumbnail

दुल्हन की तरह सज रही है मोरध्वज नगरी आरंग 

आरंग- राजा मोरध्वज की नगरी के नाम से विख्यात आरंग इन दिनों उत्सव के रंग में रंगने तैयार है।  15 और 16 जनवरी को होने वाले राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव 2026 के स्वागत में नगर को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है। पूरे नगर में उत्साह, उमंग और उल्लास का माहौल है। ऐसी लोक मान्यता है कि त्रेता में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और द्वापर में श्रीकृष्ण के चरण कमल आरंग की धरती पर पड़े थे। महोत्सव के लिए बन रहे भव्य मंच में राम और श्याम की झांकी आगंतुकों के मन को मोहने वाली है।

पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल को महोत्सव का आमंत्रण देते हुए मंत्री गुरू खुशवंत साहेब

महोत्सव का यह भव्य आयोजन कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के संयोजन में, सर्व समाज, नगर पालिका परिषद आरंग एवं विधानसभा क्षेत्र आरंग के जन-जन की भागीदारी से पहली बार भव्य रूप में आयोजित किया जा रहा है। महोत्सव की शुरुआत 2023 में पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संयोजन में हुई थी। इस साल पहली बार आरंग में भव्य महोत्सव का आयोजन छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किया जा रहा है। आयोजन  की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। 

मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने तैयारियों का जायजा लेने के बाद कहा कि आरंग छत्तीसगढ़ का प्राचीन और ऐतिहासिक नगरी है। इसके पुरावैभव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर जो सम्मान मिलना चाहिए, वह भूगर्भ में दफन है। गढ़ रींवा में पुरातात्विक खोदाई से यह स्पष्ट हो गया है कि आरंग का वैभवशाली इतिहास श्रीपुर (सिरपुर) से भी प्राचीन है।

गौरव को पुनर्स्थापित करने महोत्सव महत्वपूर्ण 

ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से यह अत्यंत महत्वपूर्ण  स्थान है। इसकी पहचान और गौरव को दूर-दूर तक प्रचारित करने में यह महोत्सव मील का पत्थर साबित होगा।  इस आयोजन को सभी के सहयोग से ऐतिहासिक बनाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि आरंग  ऐसा नगर है, जहाँ भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों का पदार्पण हुआ। माता कौशल्या का जन्मस्थली भी इसी पावन धरती चंदखुरी में हुआ माना जाता है। बाबा गुरु घासीदास जी का “मनखे-मनखे एक समान” का अमर संदेश  उनकी कर्मभूमि भंडारपुरी धाम से निकलकर पूरी दुनिया में मानवता का प्रकाश फैला रहा है। नगर में शिद्ध शक्तिपीठ बाबा बागेश्वरनाथ महादेव सहित अनेक दिव्य स्वयंभू शिवलिंग हैं, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

मुख्यमंत्री सहित अनेक मंत्री होंगे महोत्सव में शरीक 

महोत्सव को लेकर आरंग नगर को भव्य रूप से सजाया जा रहा है। जगह-जगह बैनर, पोस्टर, रोशनी, झालर, तोरण और पताकाएँ लगाई गई हैं। पूरा आरंग उत्सव नगरी का रूप ले चुका है। जगह-जगह ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से उत्सव का संदेश प्रसारित किया जा रहा है।

महोत्सव में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित  छत्तीसगढ़ शासन के मंत्रीगण, सांसद, विधायक और निगम मंडल के पदाधिकारी  शिरकत करेंगे। सभी मंत्रियों और विधायकों को मंत्री गुरु खुशवंत साहेब स्वयं आमंत्रित कर रहे हैं। नगर में सर्व समाज की बैठकें आयोजित कर जिम्मेदारियाँ तय की गई है। अतिथियों के सत्कार में कोई कमी न रहे, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। 

राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव को लेकर नगरवासियों में अपार उत्साह है। आरंग एक बार फिर अपने गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के साथ देश-प्रदेश का ध्यान आकर्षित करने को तैयार है।

राजिम त्रिवेणी संगम में आयोजित भक्त माता राजिम जयंती महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय

No comments Document Thumbnail

साहू समाज का सामूहिक विवाह कार्यक्रम सामाजिक उत्थान की मिसाल —मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भक्त माता राजिम जयंती महोत्सव में हुए शामिल

रायपुर- राजिम भक्तिन माता एवं माता कर्मा के बताए संदेश मानव समाज के लिए कल्याणकारी है, हमें उनके संदेशों का अनुसरण करना चाहिए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव  साय ने आज राजिम के त्रिवेणी संगम में आयोजित भक्त माता राजिम जयंती महोत्सव को सम्बोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने भगवान राजीव लोचन एवं भक्त माता राजिम की पूजा अर्चना कर प्रदेश और समाज की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने साहू सृजन पत्रिका का विमोचन किया। साहू समाज द्वारा मुख्यमंत्री का गजमाला पहनाकर स्वागत किया। 



मुख्यमंत्री साय ने राजिम माता भक्ति जयंती की बधाई देते हुए कहा कि साहू समाज समृद्ध और शिक्षित समाज है जो हर दृष्टिकोण से समृद्ध रहा है। साहू समाज का इतिहास भी समृद्ध रहा है। हम सबको दानवीर भामाशाह,बाबा सत्यनारायण जी का आशीर्वाद मिल रहा है। यह समाज निरंतर विकास करें। यही कामना है। जब समाज एक जुट होगा तो केवल समाज ही नहीं प्रदेश और देश भी शक्तिशाली और समृद्ध बनता है। 

मुख्यमंत्री साय ने साहू समाज के सामूहिक विवाह को अनुकरणीय पहल बताते हुए कहा कि राजिम माता ने जिस साहू समाज को अपनी मेहनत और त्याग से संगठित किया, आज वह समाज शिक्षा, कृषि व व्यवसाय सहित सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम राजिम माता के आशीर्वाद से हर गारंटी को पूरा कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ खनिज, वन, उर्वरा से भरपूर है। अब नक्सलवाद से जवान पूरी ताकत से लड़ रहे हैं। हम सबका संकल्प है कि 31 मार्च तक बस्तर को नक्सल मुक्त कर देंगे। राज्य के विकास में बाधक नक्सलवाद अब खत्मा की ओर है। राज्य को हम सब समृद्धि की दिशा में लेकर जाएंगे। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज सिरकट्टी आश्रम में भव्य राम जानकी मंदिर में धर्म ध्वजा की स्थापना की गई। इस पुण्य अवसर पर हमें शामिल होने का सौभाग्य मिला। जैसे अयोध्या धाम में धर्म ध्वजा स्थापना किए हैं, उसी तर्ज पर यहां कुटेना में भी धर्म ध्वजा स्थापित किया गया है। मेरा सौभाग्य है कि एक साल पहले भी इस अवसर पर शामिल होने का अवसर मिला था। 

उप मुख्यमंत्री अरूण साव ने कहा कि साहू समाज एक संगठित समाज के रूप में जाना जाता है। आज हम सभी राजिम माता की जयंती मनाने आये हैं। उन्होंने कहा कि त्रिवेणी संगम के इस पावन धरती से प्रेरणा लेकर जाएंगे और मिलकर समाज के विकास के लिए काम करेंगे। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि माता राजिम भक्तीन की महिमा का बखान करते हुए कहा कि राजिम त्याग, भूमि तपस्या, साधना और श्रम की भूमि है। भगवान को खिचड़ी खिलाने वाले समाज से हमारा समाज का नाता है। हम अपने पुरखों के योगदान को याद करके समाज को आगे ले जा सकते हैं। शिक्षा और संस्कार भी जरूरी है। 

इस अवसर पर साहू समाज के प्रतिनिधिगण सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर की कला, संस्कृति और परंपराओं को समर्पित बस्तर पंडुम 2026 के लोगो एवं थीम गीत का विमोचन

No comments Document Thumbnail

बस्तर पंडुम हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं, कला और विरासत का जीवंत मंच - मुख्यमंत्री साय

बस्तर पंडुम 2026 बनेगा विश्व–स्तरीय सांस्कृतिक आयोजन

रायपुर- बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, लोकपरंपराओं और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन वर्ष 2026 में भी गत वर्ष की भांति भव्य एवं आकर्षक रूप में किया जाएगा। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा में माँ दंतेश्वरी के आशीर्वाद के साथ मंदिर प्रांगण में बस्तर पंडुम का लोगो एवं थीम गीत का विमोचन किया। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने नववर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बस्तर पंडुम बस्तर की  सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का  सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि आज माँ दंतेश्वरी के इस पावन प्रांगण से बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ हो रहा है। यहाँ बस्तर पंडुम 2026 का लोगो और थीम गीत का विमोचन किया गया है। बस्तर पंडुम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा है। यह हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं, कला और विरासत का जीवंत मंच है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की असली पहचान हमारी आदिवासी परंपराओं में है। हम नृत्य, गीत, शिल्प, व्यंजन, वन-औषधि और देवगुडि़यों के माध्यम से इन परंपराओं और संस्कृति को जीते हैं। पिछले वर्ष हमने बस्तर पंडुम की शुरुआत की थी। समापन अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी हम सबके बीच आए थे। इस वर्ष हम राष्ट्रपति , केंद्रीय गृहमंत्री, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री तथा भारत में नियुक्त विभिन्न देशों के राजदूतों को भी आमंत्रित कर रहे हैं। पिछली बार बस्तर पंडुम को लेकर बस्तरवासियों का जो उत्साह और जोश देखने को मिला, वह अभूतपूर्व था। इस बार हम इसे और अधिक भव्य बना रहे हैं, ताकि यहाँ की धरोहर राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष बस्तर पंडुम की प्रतिस्पर्धाओं में विधाओं की संख्या सात से बढ़ाकर बारह कर दी गई है। इनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, पूजा-पद्धति के साथ ही शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक व्यंजन-पेय, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि को भी शामिल किया गया है। इस बार बस्तर पंडुम प्रतियोगिता का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर की संस्कृति को सहेजते हुए नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए। बस्तर अब केवल संस्कृति का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि शांति, समृद्धि और पर्यटन के माध्यम से विकास का भी प्रतीक बनेगा।  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार बस्तर को नई ऊँचाइयों पर ले जा रही है। यह उत्सव बताता है कि बस्तर अब संघर्ष से नहीं, बल्कि सृजन और उत्सव से पहचाना जाएगा।

उन्होंने बस्तरवासियों एवं सभी कलाकार भाई-बहनों से आग्रह किया कि वे अपनी कला के माध्यम से बस्तर का गौरव बढ़ाएँ और अधिक से अधिक संख्या में बस्तर पंडुम के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लें। 

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि ‘पंडुम’ का अर्थ पर्व होता है। बस्तर में खुशियों को बढ़ाने के लिए समय-समय पर विभिन्न पर्व (पंडुम) मनाए जाते हैं। किसी भी पर्व की शुरुआत माता के आशीर्वाद से करने की परंपरा रही है। इसी तारतम्य में बस्तर पंडुम की शुरुआत माँ दंतेश्वरी के मंदिर परिसर से की जा रही है। बस्तर समृद्ध संस्कृति से परिपूर्ण है। यहाँ निवास करने वाली जनजातियों की कला, शिल्प, नृत्य, संगीत और खानपान को समाहित कर बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि  बस्तर में शांति स्थापना के प्रयास सफल हो रहे हैं। मार्च 2026 तक लाल आतंक समाप्त होकर रहेगा।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की कला, संस्कृति और परंपरा गर्व का विषय है। इस समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का प्रयास बस्तर पंडुम के माध्यम से किया जा रहा है। पौराणिक काल में भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान दंडकारण्य क्षेत्र में समय व्यतीत किया था। ऐसे पावन क्षेत्र में सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने की पहल सरकार ने की है। 

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध बस्तर क्षेत्र की विभिन्न विधाओं को बढ़ावा देने और संरक्षित करने के लिए सरकार लगातार दूसरे वर्ष बस्तर पंडुम का आयोजन कर रही है। इस वर्ष बारह विधाओं में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने मंदिर प्रांगण में ही संभाग के वरिष्ठ मांझी, चालकी, गायता, पुजारी, आदिवासी समाज के प्रमुखजनों तथा पद्म सम्मान से अलंकृत कलाकारों के साथ संवाद किया। कार्यक्रम को बस्तर सांसद महेश कश्यप एवं दंतेवाड़ा विधायक चैतराम आटमी ने भी संबोधित किया। इस दौरान बस्तर के पारंपरिक नेतृत्वकर्ता मांझियों और समाज प्रमुखों ने भी बस्तर पंडुम के आयोजन के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

उल्लेखनीय है कि बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी 2026 से 5 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत बस्तर संभाग में 10 से 20 जनवरी तक जनपद स्तरीय कार्यक्रम, 24 से 29 जनवरी तक जिला स्तरीय कार्यक्रम तथा 2 से 6 फरवरी तक संभाग स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।  जिन विधाओं में प्रदर्शन एवं प्रतियोगिताएँ होंगी, उनमें बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति, शिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य तथा वन-औषधि प्रमुख हैं।इस बार के बस्तर पंडुम में विशेष रूप से भारत में विभिन्न देशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों को आमंत्रित किए जाने पर भी चर्चा हुई, ताकि उन्हें बस्तर की अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और जनजातीय जीवन से अवगत कराया जा सके। साथ ही बस्तर संभाग के निवासी उच्च पदस्थ अधिकारी, यूपीएससी एवं सीजीपीएससी में चयनित अधिकारी, चिकित्सक, अभियंता, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि तथा देश के विभिन्न राज्यों के जनजातीय नृत्य दलों को आमंत्रित करने का भी निर्णय लिया गया है।

प्रतिभागियों के पंजीयन की व्यवस्था इस बार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से करने का प्रस्ताव है, जिससे अधिकाधिक कलाकारों एवं समूहों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उल्लेखनीय है कि बस्तर अंचल की कला, शिल्प, त्योहार, खानपान, बोली-भाषा, आभूषण, पारंपरिक वाद्ययंत्र, नृत्य-गीत, नाट्य, आंचलिक साहित्य, वन-औषधि और देवगुडि़यों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

इसके तहत बस्तर संभाग के सात जिलों की 1,885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगरपालिकाओं, 12 नगर पंचायतों और 1 नगर निगम क्षेत्र में तीन चरणों में आयोजन होगा। इस आयोजन के लिए संस्कृति एवं राजभाषा विभाग को नोडल विभाग के रूप में नामित किया गया है।

इस अवसर पर सांसद महेश कश्यप, दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी, बस्तर आईजी सुंदरराज पी., संस्कृति विभाग के सचिव रोहित यादव, डीआईजी कमलोचन कश्यप, कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव, पुलिस अधीक्षक गौरव राय सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

बस्तर पंडुम का वर्ष 2026 में भी होगा भव्य एवं आकर्षक ढंग से आयोजन: मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बस्तर पंडुम की तैयारियों को लेकर हुई उच्चस्तरीय बैठक

No comments Document Thumbnail

बस्तर पंडुम 2026: बस्तर की परंपराओं को मिलेगा वैश्विक मंच

रायपुर- बस्तर अंचल की समृद्ध लोकपरंपराओं, जनजातीय संस्कृति, कला और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन वर्ष 2026 में भी गत वर्ष की भांति भव्य और आकर्षक रूप में किया जाएगा। इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में विगत दिवस मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। बैठक में आयोजन की विस्तृत तैयारियों की समीक्षा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी 2026 से 5 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत 10 से 20 जनवरी तक जनपद स्तरीय कार्यक्रम, 24 से 30 जनवरी तक जिला स्तरीय कार्यक्रम तथा 1 से 5 फरवरी तक संभाग स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इस वर्ष बस्तर पंडुम में विधाओं की संख्या 7 से बढ़ाकर 12 की जा रही है। जिन विधाओं में प्रदर्शन एवं प्रतियोगिताएं होंगी, उनमें बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति, शिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य तथा वन-औषधि प्रमुख हैं।

मुख्यमंत्री साय ने तैयारियों के संबंध में विभागीय अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की और आयोजन को सुव्यवस्थित, गरिमामय तथा अधिक प्रभावी स्वरूप में संपन्न कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम, बस्तर की असली आत्मा और सांस्कृतिक विरासत का सशक्त मंच है।

बैठक में यह बताया गया कि बस्तर पंडुम 2026 का लोगो, थीम गीत और आधिकारिक वेबसाइट का विमोचन माँ दंतेश्वरी के आशीर्वाद के साथ मंदिर प्रांगण में ही मुख्यमंत्री साय द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर वरिष्ठ मांझी–चालकी, गायता–पुजारी, आदिवासी समाज के प्रमुखजन तथा पद्म सम्मान से अलंकृत कलाकार उपस्थित रहेंगे। इस बार विशेष रूप से भारत के विभिन्न देशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों को आमंत्रित किए जाने पर भी चर्चा हुई, ताकि उन्हें बस्तर की अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और जनजातीय जीवन से अवगत कराया जा सके। साथ ही बस्तर संभाग के निवासी उच्च पदस्थ अधिकारी, यूपीएससी एवं सीजीपीएससी में चयनित अधिकारी, चिकित्सक, अभियंता, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि तथा देश के विभिन्न राज्यों के जनजातीय नृत्य दलों को आमंत्रित करने का भी निर्णय लिया गया।

प्रतिभागियों के पंजीयन की व्यवस्था इस बार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से करने का प्रस्ताव है, जिससे अधिकाधिक कलाकारों और समूहों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

उल्लेखनीय है कि बस्तर अंचल की कला, शिल्प, त्योहार, खान-पान, बोली-भाषा, आभूषण, पारंपरिक वाद्ययंत्र, नृत्य-गीत, नाट्य, आंचलिक साहित्य, वन-औषधि और देवगुड़ियों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके तहत बस्तर संभाग के सात जिलों के 1,885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगरपालिकाओं, 12 नगर पंचायतों और 1 नगर निगम क्षेत्र में तीन चरणों में आयोजन होगा। इस आयोजन के लिए संस्कृति एवं राजभाषा विभाग को नोडल विभाग नामित किया गया है। 

बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, संस्कृति सचिव रोहित यादव, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, संचालक विवेक आचार्य सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

IFFI 2025 : संगीत, संस्कृति और सिनेमा का भव्य पर्व ‘IFFIESTA’ गोवा में शानदार शुरुआत

No comments Document Thumbnail

वर्षों के दौरान, IFFI एक साधारण फिल्म महोत्सव से बढ़कर एक भव्य सांस्कृतिक उत्सव बन गया है—एक ऐसा अनुभव जो सिनेमा, संगीत और जीवन की विविधताओं को एक मंच पर लाता है। पिछले वर्ष IFFIESTA ने इस सांस्कृतिक यात्रा को नई दिशा देते हुए संगीत और कला को IFFI का अभिन्न हिस्सा बनाया।

20 नवंबर को गोवा के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी इनडोर स्टेडियम में दूरदर्शन और WAVES OTT द्वारा आयोजित IFFIESTA के भव्य उद्घाटन के साथ IFFI के 56वें संस्करण ने अपनी समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाया, जिसमें संगीत, संस्कृति और लाइव प्रदर्शनों की अनूठी झलक देखने को मिली।

इस मौके पर कई प्रसिद्ध हस्तियों ने उपस्थित होकर समारोह की शोभा बढ़ाई। इनमें वरिष्ठ अभिनेता अनुपम खेर, ऑस्कर विजेता संगीतकार एम. एम. कीरावाणी, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री एमी बरुआ, फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रवि कोट्टारकारा, दक्षिण कोरिया की प्रसिद्ध गायिका एवं सांसद जेवोन किम, तथा दूरदर्शन के महानिदेशक के. सतीश नंबूदिरीपद शामिल रहे।

अपने उद्घाटन भाषण में डीजी नंबूदिरीपद ने कहा कि पारंपरिक प्रसारण माध्यम अब डिजिटल क्रांति की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने बताया कि Doordarshan भी समय की मांग को देखते हुए अपने नए डिजिटल प्लेटफॉर्म WAVES OTT के साथ एक नई यात्रा शुरू कर चुका है, जो परिवारों के लिए सुरक्षित और उत्कृष्ट मनोरंजन प्रदान करेगा।

इसके बाद मंच पर अनुपम खेर ने दूरदर्शन से जुड़ी अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा, “हमारी शुरुआत दूरदर्शन से हुई। दूरदर्शन ने ही हमें सिनेमा से परिचित कराया—यह सुगंध आज भी हमारे जीवन में बसी हुई है।”

कार्यक्रम की शुरुआत दक्षिण कोरियाई गायिका जेवोन किम द्वारा वंदे मातरम के भावपूर्ण प्रस्तुतीकरण से हुई। उन्होंने भारत की गर्मजोशी भरी मेहमाननवाजी के लिए आभार व्यक्त किया और भारत–कोरिया के कंटेंट सहयोग को लेकर उत्साह जताया।

इसके बाद गायक-गीतकार ओशो जैन ने दो घंटे का यादगार लाइव प्रदर्शन प्रस्तुत किया।

आगे क्या? — IFFIESTA के तीन और उत्सवपूर्ण दिन

IFFIESTA 2025 के अगले तीन दिन (22–24 नवंबर) नि:शुल्क प्रवेश के साथ आयोजित होंगे:

दिन 2 : 22 नवंबर

होस्ट: नीतू चंद्रा और निहारिका रायजादा

  • Battle of Bands: The Bandits (India) बनाम Beats of Love (International) – होस्ट: ईशा मलवीया

  • सुरों का एकलव्य: प्रतिभा सिंह बघेल और अतिथि कलाकार

  • वाह उस्ताद: 'मिट्टी की आवाज़' — वुसत इक़बाल ख़ान द्वारा फोक एवं फ्यूज़न

दिन 3 : 23 नवंबर

होस्ट: निहारिका रायजादा

  • Battle of Bands: MH43 (India) बनाम The Swastik (International) – होस्ट: हर्ष लिम्बाचिया

  • सुरों का एकलव्य

  • वाह उस्ताद: ‘सूफ़ी और भक्ति’

दिन 4 : 24 नवंबर

होस्ट: निहारिका रायजादा

  • Battle of Bands: The Vairagis (India Winners) बनाम Knights – होस्ट: हुसैन कुआजरवाला

  • सुरों का एकलव्य

  • देवांचल की प्रेम कथा – हिमाचली लोक नृत्य का विशेष लाइव प्रदर्शन

  • वाह उस्ताद समापन: ‘राग और सिनेमा फ्यूज़न’

सभी कार्यक्रमों का प्रसारण DD Bharati पर लाइव और WAVES OTT पर स्ट्रीम किया जा रहा है, जबकि DD National विशेष highlights दिखा रहा है।

IFFI के बारे में

1952 में शुरू हुआ इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सव है। NFDC, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और एंटरटेनमेंट सोसायटी ऑफ गोवा द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह महोत्सव हर वर्ष विश्वभर की सिनेमा प्रतिभाओं को एक मंच पर लाता है।

56वां संस्करण (20–28 नवंबर) अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, मास्टरक्लास, ट्रिब्यूट्स और ऊर्जावान WAVES Film Bazaar के साथ विभिन्न भाषाओं और रचनात्मक प्रयोगों का भव्य संगम प्रस्तुत कर रहा है।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.