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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विजन को रेखांकित करेगी ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्टून कार्यशाला

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'मुस्कुराता बस्तर’ थीम पर जगदलपुर में होगी कार्टून कार्यशाला

स्कूली विद्यार्थियों को मिलेगा वरिष्ठ कार्टूनिस्टों से प्रशिक्षण

बस्तर की संस्कृति, पर्यटन और विकास की सकारात्मक तस्वीर को कार्टून कला के माध्यम से मिलेगी नई अभिव्यक्ति

रायपुर- छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के सहयोग से देश की एकमात्र मासिक कार्टून पत्रिका कार्टून वॉच द्वारा जगदलपुर में स्कूली विद्यार्थियों के लिए ‘मुस्कुराता बस्तर’ थीम पर विशेष कार्टून कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कार्यशाला में विद्यार्थियों को कार्टून और कैरिकेचर कला का प्रशिक्षण देने के साथ बस्तर की संस्कृति, पर्यटन और लोकजीवन को रचनात्मक रूप से अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर आज विकास, पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान के नए आयाम स्थापित कर रहा है। बस्तर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और पर्यटन स्थलों के कारण देश-दुनिया में नई पहचान बना रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, बस्तर दशहरा तथा अन्य लोकपर्व बस्तर की समृद्ध विरासत के प्रतीक हैं। कार्टून वॉच के संपादक त्र्यंबक शर्मा ने बताया कि कार्यशाला की थीम ‘मुस्कुराता बस्तर’ इन्हीं सकारात्मक पहलुओं को कार्टून कला के माध्यम से रचनात्मक अभिव्यक्ति देना है।

इस कार्यशाला में दिल्ली के वरिष्ठ कार्टूनिस्ट माधव जोशी तथा पुणे के प्रसिद्ध कैरिकेचर कलाकार शुभम जिंदे लाइव डेमो के माध्यम से ऑन-द-स्पॉट कार्टून और कैरिकेचर बनाने का प्रशिक्षण देंगे। साथ ही विद्यार्थियों को कार्टून कला के सामाजिक, रचनात्मक और रोजगारपरक पक्षों से भी परिचित कराया जाएगा।

कार्यशाला के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलेगा और बस्तर की सकारात्मक पहचान को कला के माध्यम से देशभर तक पहुंचाया जा सके। ‘मुस्कुराता बस्तर’ अभियान नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, लोक परंपराओं और प्राकृतिक धरोहर से जोड़ने का रचनात्मक प्रयास है।

कला हमेशा से अभिव्यक्ति, प्रतिबिंब और परिवर्तन का एक शक्तिशाली माध्यम रही- मंत्री गुरु खुशवंत साहेब

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‘गौरा’ -राष्ट्रीय दृश्य कला प्रदर्शनी

रायपुर- गौरा में आपका स्वागत है। यह  प्रदर्शनी आने वाले सभी लोगों के लिए खुशी, प्रेरणा और चिंतन का स्रोत बने। छत्तीसगढ़ प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप (CGPAG) द्वारा आयोजित तीसरी दृश्य कला प्रदर्शनी ‘गौरा’ का आयोजन 10 अप्रैल से 12 अप्रैल 2026 तक महंत घासीदास संग्रहालय, राजभवन के निकट स्थित आर्ट गैलरी, रायपुर में किया जा रहा है। यह प्रतिष्ठित प्रदर्शनी देशभर के 100 प्रसिद्ध कलाकारों की कलाकृतियों को एक मंच पर प्रस्तुत करेगी। इस अवसर पर चार विशिष्ट अतिथि कलाकारों की सहभागिता भी रहेगी।

इस प्रदर्शनी का उद्घाटन 10 अप्रैल 2026 को मुख्य अतिथि गुरु खुशवंत,तकनीकी शिक्षा मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन व विशिष्ट अतिथि के तौर पर डॉ. चित्तरंजन कर ,लेखक रायपुर और वेद प्रकाश भारद्वाज,दृश्य कलाकार, कला लेखक, क्यूरेटर और संपादक, नई दिल्ली के करकमलों द्वारा किया जाएगा, जो इस अवसर को गौरवान्वित करेंगे। उद्घाटन के पश्चात प्रदर्शनी  दर्शकों के लिए खुली रही।‘गौरा’ प्रदर्शनी समकालीन भारतीय कला की विविधता, सृजनात्मकता और अभिव्यक्ति का उत्सव है। यह कला प्रेमियों, विद्यार्थियों और आम दर्शकों को देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों की कृतियों को देखने और समझने का अनूठा अवसर प्रदान करेगी।

गुरु खुशवंत,तकनीकी शिक्षा मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन ने कहा कि मुझे बेहद खुशी और गर्व है कि मैं छत्तीसगढ़ की जीवंत और विविध कलात्मक भावना के उत्सव, सीजीपीएजी की उद्घाटन प्रदर्शनी ‘गौरा’ में आपका स्वागत करता हूँ। यह प्रदर्शनी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है क्योंकि इसमें हमारे क्षेत्र के 100 प्रगतिशील कलाकार एक साथ आ रहे हैं, जिनमें से प्रत्येक ने हमारे सांस्कृतिक परिदृश्य के कैनवास पर अपनी अनूठी दृष्टि और रचनात्मकता का योगदान दिया है।

यह कलाकार और दर्शक के बीच एक वार्तालाप है

डॉ. ध्रुव तिवारी -क्यूरेटर, छत्तीसगढ़ प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप (CGPAG),रायपुर ने कहा कि कला हमेशा से अभिव्यक्ति, प्रतिबिंब और परिवर्तन का एक शक्तिशाली माध्यम रही है। गौरा के माध्यम से हमारा उद्देश्य छत्तीसगढ़ में मौजूद कलात्मक प्रतिभा के समृद्ध ताने-बाने को प्रदर्शित करना है, जो हमारे कलाकारों को अपनी कहानियों, सपनों और दृष्टिकोणों को दुनिया के साथ साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। यह प्रदर्शनी केवल कलाकृतियों का प्रदर्शन नहीं है। यह एक संवाद है, कलाकार और दर्शक के बीच एक वार्तालाप है, जो आपको व्यक्तिगत स्तर पर कलाकृतियों का पता लगाने, व्याख्या करने और उनसे जुड़ने के लिए आमंत्रित करता है।

यहाँ प्रस्तुत कृतियाँ कलाकारों के लचीलेपन, नवाचार और जुनून का प्रमाण है

घासीदास म्युजियम कला वीथिका रायपुर में (CGPAG) की संगठनात्मक संरचना में डॉ. ध्रुव तिवारी -क्यूरेटर, जितेन साहू को- ऑर्डिनेटर,शांति तिर्की एसोसिएट को-ऑर्डिनेटर तथा अनिल खोबरागड़े, कोषाध्यक्ष के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यहाँ प्रस्तुत कृतियाँ हमारे कलाकारों के लचीलेपन, नवाचार और जुनून का प्रमाण हैं।  वे हमारे समय के सार को पकड़ते हैं, उन विषयों को संबोधित करते हैं जो हमारी सामूहिक चेतना-पहचान, विरासत, पर्यावरण और मानवीय अनुभव के साथ प्रतिध्वनित होते हैं। प्रत्येक कृति अपने निर्माता की आत्मा में एक खिड़की है, जो शब्दों से परे अंतर्दृष्टि और भावनाएँ प्रदान करती है।

यह कला के लिए जिज्ञासा और प्रशंसा की चिंगारी को प्रज्वलित करेगी

डॉ. ध्रुव तिवारी ने बताया कि जब आप ‘गौरा’ में आगे बढ़ते हैं, तो मैं आपको कलाकृतियों से न केवल दृष्टिगत रूप से बल्कि भावनात्मक रूप से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ। उन्हें आपसे बात करने दें, आपको चुनौती दें और आपको प्रेरित करें। कला में परिवर्तन लाने, विचार को उकसाने और समझ को बढ़ावा देने की शक्ति है। मुझे उम्मीद है कि यह प्रदर्शनी आप में से प्रत्येक के भीतर कला के लिए जिज्ञासा और प्रशंसा की चिंगारी को प्रज्वलित करेगी, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत और हमें परिभाषित करने वाली रचनात्मक भावना से गहरा संबंध बनाएगी।

 डॉ. ध्रुव तिवारीने कहा कि मैं उन सभी कलाकारों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने इस प्रदर्शनी में अपने कामों का योगदान दिया है, साथ ही आयोजकों, प्रायोजकों और समर्थकों के प्रति भी जिन्होंने ‘गौरा’ को संभव बनाया है। कला के इस उत्सव के पीछे आपकी लगन और जुनून प्रेरक शक्तियाँ हैं।

(CGPAG) के बारे में

छत्तीसगढ़ प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप (CGPAG) एक सक्रिय कला मंच है, जो कलाकारों को एकजुट कर समकालीन कला को प्रोत्साहित करने का कार्य कर रहा है। (CGPAG) की प्रथम प्रदर्शनी ‘सोहाई’ का आयोजन 12 से 14 अप्रैल 2025 तक महंत घासीदास संग्रहालय, रायपुर में आयोजित की गई थी।

WAVES और CIC के युवा कलाकारों की चमक: नेशनल स्ट्रीट फूड फेस्टिवल 2025 में भारतीय रचनात्मकता का भव्य प्रदर्शन

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 सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की प्रमुख पहलों WAVES और क्रिएट इन इंडिया चैलेंज (CIC) के विजेता कलाकारों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया, जब बैटल ऑफ बैंड्स और सिम्फनी ऑफ इंडिया के उत्कृष्ट प्रतिभागियों ने दिल्ली में आयोजित 15वें नेशनल स्ट्रीट फूड फेस्टिवल (NSSF) में मंच संभाला। यह प्रतिष्ठित आयोजन भारत की समृद्ध खाद्य संस्कृति का उत्सव मनाता है, जिसमें क्षेत्रीय व्यंजनों से लेकर लोकप्रिय स्ट्रीट फूड तक विविध स्वादों का संगम दिखता है।

इस वर्ष यह तीन दिवसीय उत्सव 12 से 14 दिसंबर 2025 तक ज Jawaharlal Nehru Stadium, New Delhi में आयोजित हो रहा है, जिसमें Create in India Challenge – Season 1 के विजेताओं के साथ-साथ मशहूर कलाकार कैलाश खेर, अभिनेता आशीष विद्यार्थी, श्रीलंकाई पॉप कलाकार योहानी, गीतकार-सinger अमिताभ एस वर्मा, और हिप-हॉप कलाकार MC Square व Kullar G भी प्रस्तुति देंगे।

CIC संगीत प्रस्तुतियों की प्रमुख झलकियाँ

फेस्टिवल में CIC के युवा और प्रतिभाशाली कलाकार अपनी कला का जादू बिखेरेंगे:

  1. बैंड शिवोहम (Battle of Bands) — पैडी, सनी, आशु और हितेश द्वारा सूफी और बॉलीवुड गीतों की प्रस्तुति।

  2. चिराग तोमर (Symphony of India) — पर्कशनिस्ट साहिल वर्मा के साथ लोकप्रिय बॉलीवुड गीत प्रस्तुत करेंगे।

  3. निशु शर्मा (Battle of Bands) — राजस्थानी लोक संगीत की प्रस्तुति।

  4. नयन कृष्णा (Symphony of India) — बाँसुरी वादन के माध्यम से मनमोहक धुनें।

  5. मालदीव के विजेता बैंड — पहली बार भारत में प्रस्तुति देंगे, जिससे कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय रंग जुड़ जाएगा।

ये सभी युवा कलाकार, WAVES और CIC पहल के माध्यम से निखरकर उभरे हैं। इन्होंने WAVES मुंबई, WAVES Global Outreach Events (मेलबर्न, ओसाका एक्सपो, टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल) में अपनी कौशल का प्रदर्शन किया है। नेशनल स्ट्रीट फूड फेस्टिवल में उनका प्रदर्शन उनके रचनात्मक सफर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है।

भारत की ऑरेंज इकॉनमी को बढ़ावा

यह पहल कलाकारों और क्रिएटिव उत्साही लोगों को अपनी प्रतिभा विकसित करने, WAVES प्लेटफ़ॉर्म पर प्रस्तुत करने और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसे आर्थिक अवसरों में बदलने का अवसर देती है। इससे भारत की Orange Economy (Creative Economy) को और मज़बूती मिलती है।

WAVES और Create in India Challenge (CIC) के बारे में

Create in India Challenge (CIC), सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की प्रमुख WAVES पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य संगीत, फिल्म, एनीमेशन, VFX, गेमिंग, कॉमिक्स, AI, XR और डिजिटल मीडिया जैसे मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्रों में भारत की रचनात्मक प्रतिभा को पहचानना, निखारना और दुनिया के सामने प्रस्तुत करना है।


अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में तीन फिल्मों की टीमों ने साझा किया अनुभव और दृष्टिकोण

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अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव भारत (IFFI) में आज एक अनूठा क्रॉस-सांस्कृतिक और क्रॉस-जॉनर संवाद देखने को मिला, जब तीन प्रमुख फिल्मों की टीमों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया। ‘निलगिरिस: ए शेयर्ड वाइल्डरनेस’, ‘मुक्काम पोस्ट बॉम्बिलवाडी’ और ‘सिकार’ की टीमों ने अपने-अपने अनुभव, चुनौतियाँ और प्रेरणाएँ साझा कीं।

‘सिकार’: असम की पहली अंतरराष्ट्रीय शूट की गई फिल्म

फिल्म ‘सिकार’ के निर्देशक देबांगकर बोरगोहैन ने भावपूर्ण अंदाज में फिल्म के मुख्य अभिनेता और संगीतकार जुबीन गर्ग को याद किया, जिनका हाल ही में निधन हो गया। उन्होंने बताया कि यह जुबीन का अंतिम रिलीज़ होने वाला फिल्म प्रोजेक्ट है। फिल्म का 70% हिस्सा लंदन में शूट किया गया और अधिकांश टीम को दूर से निर्देशन करना पड़ा। देबांगकर ने असम की असली ताकत और गरिमा को दर्शाने की अपनी कोशिशों पर भी प्रकाश डाला।

‘निलगिरिस: ए शेयर्ड वाइल्डरनेस’

इस फिल्म की टीम ने दर्शकों को प्रकृति और जीव-जंतुओं की दुनिया से परिचित कराया। एडलर्स एन.सी., एसोसिएट प्रोड्यूसर ने बताया कि 8K और 12K में शूट की गई यह डॉक्यूमेंट्री बेहद धैर्य और शोध की मांग करती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह फिल्म पूरी तरह से भारतीय निर्माण है और वैश्विक तकनीकी ज्ञान का उपयोग करके देशी दृष्टिकोण पेश करती है।

‘मुक्काम पोस्ट बॉम्बिलवाडी’: हास्य और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का संगम

निर्देशक परेश मोखाशी और निर्माता भरत शिटोले ने इस फिल्म की कहानी साझा की, जो 1942 के एक तटीय महाराष्ट्रीयन गांव में स्वतंत्रता संग्राम और द्वितीय विश्व युद्ध के बीच घटित होती है। उन्होंने बताया कि हास्य गंभीर विषयों को और अधिक प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने का माध्यम बन सकता है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस ने भारतीय सिनेमा की विविधता को उजागर किया—निलगिरिस के प्राकृतिक सौंदर्य से लेकर बॉम्बिलवाडी की हास्यपूर्ण घटनाओं और असम के जीवन की भावनात्मक कहानियों तक। इस सत्र ने यह साबित किया कि IFFI हर क्षेत्र और कहानी को मंच प्रदान करता है और हर फिल्ममेकर अपनी अनूठी दृष्टि को साझा कर सकता है।

IFFI के बारे में

1952 में स्थापित अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव भारत दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और बड़ा फिल्म उत्सव है। इसे राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC), सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार और गोवा सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है। यह महोत्सव फिल्म उद्योग में नवाचार, विविधता और सहयोग को बढ़ावा देता है और 20–28 नवंबर 2025 तक गोवा के खूबसूरत तटीय दृश्य के बीच आयोजित किया गया।

साहित्य अकादमी का बाल साहित्य पुरस्कार 2025 समारोह 14 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित होगा

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साहित्य अकादमी द्वारा बाल साहित्य की श्रेणी में दिए जाने वाले वार्षिक “बाल साहित्य पुरस्कार 2025” का आयोजन शुक्रवार, 14 नवंबर 2025 को त्रिवेणी सभागार, तानसेन मार्ग, नई दिल्ली में किया जाएगा। यह पुरस्कार साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक द्वारा प्रदान किए जाएंगे।

इस अवसर पर प्रख्यात गुजराती लेखिका डॉ. वर्षा दास मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी, जबकि साहित्य अकादमी की उपाध्यक्ष कुमुद शर्मा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करेंगी। स्वागत भाषण साहित्य अकादमी की सचिव पल्लवी प्रशांत होलकर द्वारा दिया जाएगा।

पुरस्कार प्राप्त कृतियाँ एवं लेखक निम्नलिखित हैं —

  • असमिया: मैन्हांतार पद्या (कविता) – सुरेंद्र मोहन दास

  • बंगाली: एक्होनो गाये कांता दाये (कहानी) – त्रिदिब कुमार चट्टोपाध्याय

  • बोडो: खांथी बोसोन आरो आखु दानाई (कहानी) – बिनय कुमार ब्रह्मा

  • डोगरी: नन्ही तोर (कविता) – पी.एल. परिहार ‘शौक’

  • अंग्रेजी: Dakshin: South Indian Myths and Fables Retold (कहानी) – नितिन कुशलप्पा एम.पी.

  • गुजराती: टिंचक (कविता) – कीर्तिदा ब्रह्मभट्ट

  • हिंदी: एक बाते बारह (गैर-कथात्मक एवं संस्मरण) – सुशील शुक्ल

  • कन्नड़: Notebook (कहानी) – के. शिवलिंगप्पा हंडीहल

  • कश्मीरी: शुरे ते छुुरे ग्युष (कहानी) – इजहार मुबाशिर

  • कोंकणी: बेलाबाइचो शंकर आनी हेर कण्यो (कहानी) – नयना आदरकर

  • मैथिली: चुक्का (कहानी) – मुन्नी कांत

  • मलयालम: पेंग्विनुकालुड़े वंकाराविल (उपन्यास) – श्रीजित मूथेदथ

  • मणिपुरी: अंगंगशिंग-गी शननाबुंगशिदा (नाटक) – शांतों एम.

  • मराठी: अभैमाया (कविता) – सुरेश गोविंदराव सावंत

  • नेपाली: शांति वन (उपन्यास) – संगमु लेपचा

  • ओड़िया: केत फुला फूटिची (कविता) – राजकिशोर पार्ही

  • पंजाबी: जद्दू पत्ता (उपन्यास) – पाली खादिम (अमृत पाल सिंह)

  • राजस्थानी: पंखेरू नी पीड़ा (नाटक) – भोगीलाल पाटीदार

  • संस्कृत: बालविश्वम् (कविता) – प्रीति आर. पुजारा

  • संथाली: सोना मिरू-आग संदेश (कविता) – हरलाल मुर्मू

  • सिंधी: आस्मानी परी (कविता) – हीना अगनानी ‘हीर’

  • तमिल: ओत्त्रै सिरागु ओविया (उपन्यास) – विष्णुपुरम सरवनन

  • तेलुगु: कबुर्ला देवथा (कहानी) – गंगिसेट्टी शिवकुमार

  • उर्दू: कौमी सितारे (लेख) – ग़ज़नफ़र इक़बाल

प्रत्येक विजेता को ₹50,000 की राशि और कांस्य प्रतिमा प्रदान की जाएगी।

अगले दिन, यानी 15 नवंबर 2025, साहित्य अकादमी भवन (रवींद्र भवन, फिरोजशाह रोड, नई दिल्ली) में “पुरस्कार विजेता परिचर्चा” आयोजित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता उपाध्यक्ष कुमुद शर्मा करेंगी। इस कार्यक्रम में सभी पुरस्कार विजेता लेखक अपने रचनात्मक अनुभव साझा करेंगे।


लाफिन कला में बच्चों ने सीखा कैरियर निर्माण के गुर

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अनुशासन, दिनचर्या और समय प्रबंधन जीवन में  अति महत्वपूर्ण 

महासमुंद- रविवार को  राम जानकी मंदिर परिसर ग्राम लाफिन कला में ग्राम के उत्साही शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल और गोवर्धन प्रसाद साहू की पहल पर ग्राम के नवमी से बारहवीं  तक के छात्र छात्राओं के लिए कैरियर गाइडेंस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। जिसमें ग्राम लाफिन कला व लाफिन खुर्द के करीब तीस से अधिक छात्र छात्राओं ने कैरियर  निर्माण के गुर सीखे।

इस अवसर पर कैरियर मार्गदर्शक के रूप में एल के साहू सहायक अनुभाग अधिकारी मंत्रालय नया रायपुर, नवाचारी शिक्षक महेन्द्र पटेल, गोवर्धन साहू,समाजसेवी  लीलाराम साहू व कीर्तन कार जगदीश प्रसाद साहू ने कैरियर निर्माण के अनेक गुर बताए। इस मौके पर मार्गदर्शक एल के साहू ने बच्चों को सफलता के तीन मूल मंत्र बताया।सबसे पहले लक्ष्य निर्धारण करना,उसे प्राप्त करने के लिए परिश्रम करना और धीरज रखना। उन्होंने कहा यदि इन तीनों बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए तैयारी की जाय तो सफलता अवश्य मिलती है।साथ ही उन्होंने रुचिनुरूप क्षेत्र का चयन तथा विभिन्न उदाहरणों से बच्चों के जिज्ञासाओं को शांत करने का प्रयास किया।

वहीं नवाचारी शिक्षक महेन्द्र पटेल ने छात्र जीवन में अनुशासन,समय प्रबंधन, दैनिक दिनचर्या,लेखन शैली,सत्संगति करना मोबाईल के सदुपयोग पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डालते हुए कहा छोटी-छोटी बातें हमारे जीवन में सफलता को प्रभावित करती है। यदि हम इन बातों का सदुपयोग करना समझ जाएं तो सफलता अपने आप हमारी कदम चुमती है।वहीं गोवर्धन साहू ने लक्ष्य निर्धारण कर तैयारी करने,औसत से ऊपर कार्य व पढ़ाई करने सहित विभिन्न प्रेरक प्रसंगो कहानियों के माध्यम से प्रेरित किया। वहीं लीलाराम साहू ने ग्राम स्तर पर बच्चों को मार्गदर्शन ग्राम के शिक्षक महेन्द्र और गोवर्धन की पहल की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने समाज में बढ़ती  अराजकता और नशाखोरी पर चिंता व्यक्त करते हुए बच्चों को नशा से दूर रहने तथा महापुरुषों की जीवनी से सीख लेने को कहा। सभी विद्यार्थियों ने

शिक्षको द्वारा ग्राम स्तर पर पहली बार कैरियर मार्गदर्शन आयोजन की पहल को काफी पसंद किया और भविष्य में पुनः आयोजित करने की इच्छा जताए हैं।इस अवसर पर मंदिर के सेवक बिशाल निषाद,पालक डाकेश साहू सहित तीस से अधिक विद्यार्थियों की उपस्थिति रहीं।

सेवा पर्व 2025: 'विकसित भारत के रंग, कला के संग' थीम पर देशभर में कला कार्यशालाएँ

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संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत@2047 के संकल्प से प्रेरित होकर 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक सेवा पर्व 2025 को सेवा, सृजनशीलता और सांस्कृतिक गौरव के राष्ट्रीय महोत्सव के रूप में मना रहा है। इसी क्रम में 28 सितंबर 2025 को मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली, चंडीगढ़, कोझिकोड, पणजी, भुवनेश्वर और प्रयागराज में "विकसित भारत के रंग, कला के संग" विषय पर विविध कला कार्यशालाओं एवं कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों में विद्यार्थियों, कलाकारों, शिक्षाविदों, गणमान्य व्यक्तियों और सामुदायिक नेताओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली।

प्रमुख झलकियाँ :

नई दिल्ली – एनजीएमए, जयपुर हाउस, इंडिया गेट

यहाँ सेवा पर्व 2025 की सबसे बड़ी कला कार्यशाला आयोजित हुई, जिसमें 15 हज़ार से अधिक छात्र-छात्राओं और कलाकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, कुलजीत सिंह चहल (सदस्य एवं उपाध्यक्ष, एनडीएमसी), पद्मश्री कलाकार श्याम शर्मा और वासुदेव कामथ सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने प्रतिभागियों को कला के माध्यम से "एक भारत, श्रेष्ठ भारत" और विकसित भारत के विज़न को व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया।

चंडीगढ़ – कला ग्राम, मनीमाजरा

500 से अधिक प्रतिभागियों ने कला कार्यशाला में हिस्सा लिया। संस्कार भारती के उत्तर क्षेत्र प्रमुख नवीन शर्मा ने युवाओं को संस्कृति और मूल्यों को कला के माध्यम से प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

कोझिकोड (केरल) – वेदव्यास विद्यालय, मलप्परम्बु

यहाँ 400 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए। साहित्यकार व कलाकार एम. श्रीहर्षन, प्रो. डॉ. विक्रमन, भित्ति चित्र विशेषज्ञ ससी एदावरद, बालचंद्रन ए.के. और कनकादोस ने पारंपरिक और आधुनिक कला के मेल का मार्गदर्शन दिया।

पणजी (गोवा) – संस्कृति भवन, पट्टो-पणजी

यहाँ आयोजित कला कार्यशाला में स्थानीय समुदाय की बड़ी भागीदारी रही। कार्यक्रम में विधायक राजेश फालदेसाई ने कलाकारों को विकसित भारत की आकांक्षाओं को कला के माध्यम से अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित किया।

भुवनेश्वर (ओडिशा) – ललित कला अकादमी क्षेत्रीय केंद्र

600 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। विधायक बाबू सिंह ने विद्यार्थियों और कलाकारों के योगदान की सराहना की।

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) – एम.पी. मेमोरियल स्कूल, तेलियारगंज

यहाँ स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत विद्यार्थियों ने उपयोगी वस्तुएँ स्वच्छता-आधारित अपशिष्ट सामग्री से बनाईं। इस पहल ने कला, रचनात्मकता और स्थिरता को जोड़ते हुए समाज को एक अनोखा संदेश दिया।

डिजिटल भागीदारी

मंत्रालय ने सेवा पर्व पोर्टल https://amritkaal.nic.in/sewa-parv.htm के माध्यम से संस्थागत और व्यक्तिगत भागीदारी सुनिश्चित की है। कोई भी व्यक्ति "विकसित भारत के रंग, कला के संग" थीम पर अपनी कला रचना बनाकर पोर्टल पर अपलोड कर सकता है और #SewaParv के साथ सोशल मीडिया पर साझा कर सकता है।

निष्कर्ष

28 सितंबर 2025 को देशभर में आयोजित इन कला कार्यशालाओं और स्वच्छता अभियानों ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और सामूहिकता को प्रदर्शित किया। दिल्ली से लेकर कोझिकोड और प्रयागराज तक, हर स्थल एक मंच बना – जहाँ विद्यार्थियों, कलाकारों और समुदायों ने मिलकर विकसित भारत@2047 की परिकल्पना को कला के माध्यम से जीवंत किया।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया 64वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का सम्मान, कला को बताया आध्यात्मिक साधना

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली में ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित 64वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के पुरस्कार वितरण समारोह में सम्मिलित होकर उसे गरिमा प्रदान की।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि उनका कार्य अन्य कलाकारों को भी प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में कला को लंबे समय से आध्यात्मिक साधना के रूप में माना गया है। कला केवल सौंदर्यबोध का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध करने और एक संवेदनशील समाज के निर्माण का सशक्त साधन भी है। राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि कलाकार अपनी सोच, दृष्टि और कल्पनाशक्ति के माध्यम से नए भारत की छवि प्रस्तुत कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ने यह भी रेखांकित किया कि कलाकार अपनी कला रचना में समय, ऊर्जा और संसाधन लगाते हैं। उनके कलाकृतियों को उचित मूल्य मिलने से कलाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा और जो लोग कला को पेशे के रूप में अपनाना चाहते हैं, उन्हें भी सहारा मिलेगा। उन्होंने खुशी जताई कि ललित कला अकादमी कलाकारों की कलाकृतियों की बिक्री को प्रोत्साहित कर रही है। इससे कलाकारों को आर्थिक सहयोग मिलेगा और हमारी रचनात्मक अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

राष्ट्रपति ने कला-प्रेमियों से आग्रह किया कि वे न केवल कलाकृतियों की सराहना करें, बल्कि उन्हें अपने घर भी ले जाएं। उन्होंने कहा कि हम सबको मिलकर भारत की पहचान को आर्थिक और सांस्कृतिक शक्ति दोनों रूपों में सुदृढ़ करना होगा।


भारत में छात्रों के लिए बड़ा अवसर: लॉन्च हुआ ‘विकसित भारत बिल्डथॉन 2025

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भारत सरकार ने 23 सितंबर 2025 को 'विकसित भारत बिल्डथॉन 2025' की शुरुआत की है, जो देशभर के स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए एक राष्ट्रीय नवाचार आंदोलन है। इसका उद्देश्य छात्रों में रचनात्मकता, समस्या समाधान क्षमता और आत्मनिर्भरता की भावना को बढ़ावा देना है।

क्या है 'विकसित भारत बिल्डथॉन 2025'?

यह एक स्कूल-स्तरीय हैकथॉन है, जिसे शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (DoSEL), अटल नवाचार मिशन (AIM), NITI आयोग और AICTE के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य छात्रों को 'वोकल फॉर लोकल', 'आत्मनिर्भर भारत', 'स्वदेशी' और 'समृद्धि' जैसे राष्ट्रीय विषयों पर नवाचार करने के लिए प्रेरित करना है।

महत्वपूर्ण तिथियाँ

  • पंजीकरण की अंतिम तिथि: 6 अक्टूबर 2025

  • प्रस्तावना अवधि: 6 से 13 अक्टूबर 2025

  • सिंक्रनाइज़्ड लाइव इनोवेशन इवेंट: 13 अक्टूबर 2025 (120 मिनट की लाइव सत्र)

  • अंतिम प्रस्तुति अवधि: 13 से 31 अक्टूबर 2025

  • मूल्यांकन अवधि: 1 नवंबर से 31 दिसंबर 2025

  • विजेताओं की घोषणा और सम्मान समारोह: जनवरी 2026

प्रतियोगिता के विषय

प्रतियोगिता में दो श्रेणियाँ होंगी:

  • STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित): प्रारंभिक कार्यात्मक मॉडल

  • Non-STEM (मानविकी, सामाजिक विज्ञान, कला): सामाजिक नवाचार, कला आधारित समाधान

पुरस्कार और प्रमाणपत्र

प्रतियोगिता में 1,000 से अधिक विजेताओं का चयन किया जाएगा। सभी प्रतिभागियों को भागीदारी प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे। यह कार्यक्रम छात्रों को राष्ट्रीय और वैश्विक मंचों पर अपनी नवाचारों को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करेगा। 

पंजीकरण कैसे करें?

इच्छुक छात्र vbb.mic.gov.in पर जाकर 6 अक्टूबर 2025 तक पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण के लिए छात्रों को अपनी प्रारंभिक विचार या परियोजना अवधारणा प्रस्तुत करनी होगी। 

रायपुर के छात्रों के लिए विशेष सूचना

रायपुर, छत्तीसगढ़ के छात्र भी इस राष्ट्रीय नवाचार आंदोलन का हिस्सा बन सकते हैं। राज्य शिक्षा विभाग और अटल टिंकरिंग लैब्स के माध्यम से राज्य स्तर पर भी नवाचार गतिविधियाँ आयोजित की जा सकती हैं। छात्रों को अपने स्कूलों के माध्यम से मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए और इस अवसर का पूरा लाभ उठाना चाहिए।


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