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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आईआईएमटी यूनिवर्सिटी, मेरठ के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

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भारत के उपराष्ट्रपतिसी. पी. राधाकृष्णन ने आज आईआईएमटी यूनिवर्सिटी, मेरठ के तृतीय दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह अवसर केवल शैक्षणिक यात्रा का समापन नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता की शुरुआत है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि छात्र एक ऐसे भारत में कदम रख रहे हैं जो तेजी से बदल रहा है और अवसरों से भरपूर है। उन्होंने वर्तमान समय को देश के इतिहास का एक महत्वपूर्ण दौर बताया, जो परिवर्तनकारी बुनियादी ढांचे और विकास पहलों से चिह्नित है।

उन्होंने इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित नमो भारत ट्रेन और मेरठ मेट्रो का उल्लेख करते हुए कहा कि ये आधुनिक, कुशल और टिकाऊ कनेक्टिविटी के उदाहरण हैं, जो छात्रों और पेशेवरों के लिए नए अवसर खोल रहे हैं।

“विकसित भारत” के दृष्टिकोण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह एक राष्ट्रीय मिशन है, जिसमें युवाओं की ऊर्जा, रचनात्मकता और प्रतिबद्धता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “आत्मनिर्भर भारत” की भावना इस परिवर्तनकारी यात्रा का मूल है।

छात्रों को उनकी जिम्मेदारियों का एहसास कराते हुए उपराष्ट्रपति ने राष्ट्र-निर्माण में योगदान देने, ईमानदारी, अनुशासन और सेवा के मूल्यों को अपनाने तथा विकास को समावेशी, सतत और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा बनाए रखने पर बल दिया।

उन्होंने छात्रों को व्यक्तिगत सफलता से आगे सोचने और अपनी आकांक्षाओं को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ जोड़ने की सलाह दी। उन्होंने उन्हें नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनने के लिए प्रेरित किया। साथ ही नवाचार को अपनाने, स्थानीय उद्योगों को समर्थन देने और स्वदेशी समाधान को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि “विकसित भारत @ 2047” का दृष्टिकोण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक समावेशी विकास पहुंचाना है।

उन्होंने यह भी कहा कि दीक्षांत समारोहों में महिलाएं लगातार अधिक संख्या में सम्मान और पदक प्राप्त कर रही हैं, जो एक सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का संकेत है। यह परिवर्तन उनकी दृढ़ता, अनुशासन और सहयोगी वातावरण का परिणाम है और भविष्य की पीढ़ियों को एक अधिक समावेशी और प्रगतिशील भारत की ओर प्रेरित कर रहा है।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार में पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री धर्मपाल सिंह, राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी, योगेश मोहन गुप्ता सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

आईआईएम रांची में उपराष्ट्रपति का संबोधन, युवाओं से नैतिक नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण का आह्वान

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रांची (झारखंड)- भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज आईआईएम रांची के 15वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में भाग लिया और छात्रों को संबोधित किया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि प्रबंधन शिक्षा केवल कॉर्पोरेट तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान और समावेशी विकास में योगदान देना चाहिए। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे सफलता को केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि मूल्यों और नैतिकता के आधार पर परिभाषित करें।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि ईमानदारी, विश्वास और नैतिक नेतृत्व मजबूत संस्थानों की नींव हैं। उन्होंने युवाओं को “Think Global, Act Local” का मंत्र अपनाते हुए विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में योगदान देने का आह्वान किया।

उन्होंने छात्रों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि सच्ची सफलता वही है, जो समाज को लौटाने में दिखाई दे।

इस अवसर पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

इससे पहले, उपराष्ट्रपति ने खूंटी जिले के उलिहातु गांव में भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली का दौरा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने रांची में बिरसा चौक पर भी पुष्पांजलि अर्पित की।

उपराष्ट्रपति का यह दौरा युवाओं को नैतिक नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करने वाला माना जा रहा है।


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