Media24Media.com: #CommunityHealth

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #CommunityHealth. Show all posts
Showing posts with label #CommunityHealth. Show all posts

बीमारी रोकने की ताक़त आपके पास, संदिग्ध मामलों की सूचना सीधे सरकार तक पहुंचाएं

No comments Document Thumbnail

किसी गांव, मोहल्ले या बस्ती में एक जैसी बीमारी के दो या अधिक मामले दिखें तो IHIP पोर्टल पर दें जानकारी, स्वास्थ्य विभाग करेगा तत्काल जांच

रायपुर- किसी गांव, मोहल्ले या बस्ती में यदि अचानक एक जैसी बीमारी के दो या अधिक मामले सामने आने लगें, तो यह किसी संभावित रोग प्रकोप (Outbreak) का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले इसकी जानकारी स्थानीय लोगों को ही होती है। अब आम नागरिक भी ऐसी संदिग्ध स्वास्थ्य घटनाओं की सूचना सीधे भारत सरकार के एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (IHIP) पर दर्ज कर सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग समय रहते जांच कर आवश्यक नियंत्रण उपाय शुरू कर सके।

जनभागीदारी को बढ़ावा देने और रोगों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) के अंतर्गत इंटीग्रेटेड हेल्थ इन्फॉर्मेशन प्लेटफॉर्म (IHIP) पर सामुदायिक आधारित रोग निगरानी (Community Based Surveillance) की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस व्यवस्था के माध्यम से कोई भी नागरिक अपने आसपास दिखाई देने वाली किसी असामान्य बीमारी अथवा संभावित रोग प्रकोप की सूचना सीधे ऑनलाइन दर्ज कर सकता है।

पोर्टल पर सूचना दर्ज करते समय सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम, मोबाइल नंबर, आयु, लिंग, पता तथा व्यवसाय जैसी सामान्य जानकारी के साथ घटना की तिथि, स्थान, बीमारी अथवा स्वास्थ्य संबंधी समस्या का संक्षिप्त विवरण दर्ज करना होता है। यदि घटना से संबंधित कोई फोटो या अन्य दस्तावेज उपलब्ध हों, तो उन्हें भी प्रमाण के रूप में अपलोड किया जा सकता है। सभी अनिवार्य जानकारी भरने के बाद मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी से सत्यापन करने पर सूचना संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों तक पहुंच जाती है। आवश्यकता पड़ने पर अधिकारी अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करने के लिए सूचना देने वाले व्यक्ति से भी संपर्क कर सकते हैं।

सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी संक्रामक बीमारी के फैलाव को रोकने में समय पर सूचना मिलना सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है। प्रारंभिक स्तर पर मिली सूचना से स्वास्थ्य विभाग शीघ्र जांच, सैंपल संग्रह, उपचार और आवश्यक नियंत्रण उपाय शुरू कर सकता है, जिससे बीमारी को बड़े प्रकोप या महामारी का रूप लेने से रोका जा सकता है। सामुदायिक निगरानी न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाती है, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से पूरे समाज की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।

स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल सत्य, तथ्यात्मक एवं जिम्मेदारीपूर्ण जानकारी ही पोर्टल पर दर्ज करें। अफवाहों, अपुष्ट सूचनाओं या भ्रामक जानकारी से बचें, ताकि स्वास्थ्य तंत्र वास्तविक घटनाओं पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई कर सके।

यदि आपके आसपास किसी गांव, मोहल्ले या बस्ती में अचानक एक जैसी बीमारी के दो या अधिक मामले दिखाई दें, तो उसकी सूचना https://ihip.mohfw.gov.in/cbs/#/ पर अवश्य दें। आपकी समय पर दी गई एक सूचना अनेक लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकती है और संभावित महामारी को प्रारंभिक स्तर पर ही रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

सोहम हॉस्पिटल में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन, सैकड़ों लोग हुए लाभान्वित

No comments Document Thumbnail

महासमुंद- लभराखुर्द स्थित  सोहम हॉस्पिटल में जन सेवा समिति के तत्वावधान में 127वा निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर 10 मई  रविवार को आयोजित हुई. निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर में  मरीजों का  डॉक्टर सोमी चंद्राकर एवं  डॉक्टर  युगल चंद्राकर एवं डॉ सी पी पटेल ने  40  नि: शुल्क सोनोग्राफी किया

70 से अधिक मरीज को  मार्गदर्शन दिए. टीम के द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिसमें  जोड़ो के दर्द , पेट संबंधी समस्याओं , पथरी , पेट मे जलन, गैस , चमड़ी  के रोग, साइटिका , सर्वाइकल , दाद खाज खुजली इत्यादि  का निःशुल्क परीक्षण एवं  उचित मार्गदर्शन  दिया गया. महासमुंद जिले के हर तहसील जैसे बागबाहरा क्षेत्र के कई गांव,  तुमगांव क्षेत्र, पिथौरा क्षेत्र एवं  आसपास के कई गांव के लोग इस शिविर से लाभान्वित हुए . दूरस्थ गांव से मरीज ने आकर अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराया एवं इस स्वास्थ्य शिविर का लाभ उठाया. जिसमें सोहम हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉक्टर युगल चंद्राकर के मार्गदर्शन में यह निशुल्क स्वास्थ्य एवं परीक्षण शिविर हुआ . उन्होंने बताया कि समय-समय पर इस तरह के निशुल्क सेवा के कार्य सोहम परिवार के माध्यम से चलाए जाते हैं ।

सोहम हॉस्पिटल में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन 10 को , सैकड़ों मरीजों को मिलेगा लाभ

No comments Document Thumbnail

महासमुंद- सोहम जन सेवा समिति के तत्वावधान में 10 मई 2026, रविवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक सोहम मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल लभराखुर्द में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविर में स्त्री रोग, सायटिका, कमर दर्द, घुटना दर्द एवं सर्वाइकल संबंधी समस्याओं की विशेषज्ञ जांच एवं परामर्श उपलब्ध रहेगा। शिविर में बी.पी., शुगर, ईसीजी, सोनोग्राफी एवं बोन डेंसिटी जांच निःशुल्क की जाएगी। साथ ही CT, Echo, X-Ray एवं ब्लड टेस्ट पर 50% तक की छूट तथा दवाइयों पर विशेष छूट दी जाएगी। समिति ने आम जनता से अधिक से अधिक संख्या में लाभ लेने की अपील की है।


सीआरपीएफ कंपोजिट अस्पताल भिलाई में चिकित्सा शिविर आयोजित

No comments Document Thumbnail

आरंग- शनिवार को डीआईजी मेडिकल डॉ.दुर्गा भवानी राजनाला के निर्देशन में सीआरपीएफ कंपोजिट हास्पीटल में चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में सीआरपीएफ कैंप के जवान व उनके परिवारजन, आसपास के ग्राम के ग्रामीणों सहित चरौदा के स्कूली बच्चों ने उपस्थित होकर स्वास्थ्य जांच कराया। साथ ही स्वास्थ्य संबंधी परामर्श व उपचार प्राप्त किया। शिविर के आयोजन, संयोजन में मुख्य रूप डॉ.तनिंदर सिंह ,डॉ इंदु वशिष्ठ,डॉ.अश्वथी रमेश ,सिस्टर कला ,रूबी, अभिषेक ने अहम् भूमिका निभाई।इस मौके पर डाक्टरों ने बच्चों को न्यूट्रिशियन संबंधी जानकारी देते हुए स्वास्थ्य संबंधी जागरूक रहने प्रेरित भी किया।


जियो पारसी योजना से पारसी समुदाय की आबादी बढ़ाने के प्रयास जारी

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के तहत मान्यता प्राप्त पारसी (ज़ोरास्ट्रियन) समुदाय की आबादी 1941 में 1,14,000 थी, जो 2011 की जनगणना के अनुसार घटकर 57,264 रह गई है। आबादी में इस गिरावट को रोकने और पलटने के लिए भारत सरकार ने 2013-14 में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के माध्यम से जियो पारसी योजना शुरू की।

योजना के प्रमुख घटक:

  1. मेडिकल सहायता – बांझपन, गर्भावस्था और नवजात शिशु संबंधित जटिलताओं के इलाज के लिए पारसी दंपतियों को वित्तीय सहायता। यह सुविधा वार्षिक पारिवारिक आय 30 लाख रुपये तक वाले पारसी दंपतियों के लिए उपलब्ध है।

  2. सामुदायिक स्वास्थ्य – बच्चों और आश्रित बुजुर्ग परिवार के सदस्यों की देखभाल के लिए पारसी दंपतियों को वित्तीय सहायता। यह सुविधा वार्षिक पारिवारिक आय 15 लाख रुपये तक वाले पारसी दंपतियों के लिए उपलब्ध है।

  3. अधिकारिता (Advocacy) – योजना के लाभों के प्रति जागरूकता बढ़ाना।

योजना के तहत सहायता डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से लाभार्थियों को दी जाती है, जिसमें बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और संबंधित राज्य सरकारों द्वारा अन्य सत्यापन शामिल हैं।

पिछले 5 वर्षों (2020-21 से 2024-25) में योजना पर 17.64 करोड़ रुपये खर्च किए गए और इसके तहत 232 शिशुओं का जन्म हुआ।

अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (IIPS) द्वारा 2025 में किए गए मूल्यांकन अध्ययन के अनुसार, योजना अपने लक्षित समुदाय तक प्रभावी रूप से पहुंची और लाभार्थियों ने इसे पारसी आबादी बढ़ाने में उपयोगी माना।

योजना को अगले वित्त आयोग चक्र में जारी रखने पर विचार किया जा रहा है।

यह जानकारी लोकसभा में अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजु द्वारा दी गई।

टीबी मुक्त भारत के लिए राजनीतिक सहभागिता को बढ़ावा देने हेतु राजस्थान के सांसदों से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा की बैठक

No comments Document Thumbnail

टीबी मुक्त भारत की दिशा में राजनीतिक सहभागिता को और मजबूत करने के निरंतर प्रयास के तहत, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान राजस्थान के सांसदों से बैठक की। यह सत्र विभिन्न राज्यों के सांसदों के साथ आयोजित ब्रीफिंग श्रृंखला का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत में ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) के खिलाफ सामूहिक नेतृत्व को सुदृढ़ करना है।

आज की बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री, कृषि एवं किसान कल्याण,भागीरथ चौधरी, केंद्रीय राज्य मंत्री, रेलवे एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, रवीनीत सिंह बिट्टू और राजस्थान के सांसदों ने संसद भवन एनेक्स एक्सटेंशन, नई दिल्ली में भाग लिया। इस चर्चा में निर्वाचित प्रतिनिधियों की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया गया, जो टीबी जैसी महामारी के खिलाफ भारत की प्रगति को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

सांसदों के नेतृत्व और भागीदारी की सराहना करते हुए नड्डा ने राजस्थान में टीबी स्क्रीनिंग और उपचार के विस्तार में राज्य की उपलब्धियों की प्रशंसा की और असिंप्टोमैटिक टीबी की चुनौती का मुकाबला करने के लिए सतत निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत में टीबी की घटनाएं 2015 से 2024 के बीच 21% घट गई हैं, जो वैश्विक दर से लगभग दोगुनी है, और वर्तमान में देश में 90% उपचार सफलता दर दर्ज की जा रही है, जैसा कि WHO ग्लोबल टीबी रिपोर्ट 2025 में उल्लेख किया गया है।

मंत्री ने सांसदों से जिला-स्तरीय कार्रवाई को सशक्त बनाने, नि-क्शय मित्रों का समर्थन करने और टीबी से जुड़ा कलंक समाप्त करने तथा समय पर निदान और देखभाल सुनिश्चित करने के लिए समुदायों को सक्रिय करने में नेतृत्व करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “टीबी मुक्त भारत पहल यह दर्शाती है कि कैसे राजनीतिक इच्छाशक्ति और जन सहभागिता मिलकर इस पुरानी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती को समाप्त कर सकती है।”

राजस्थान के सांसदों ने स्थानीय जागरूकता अभियानों का विस्तार करने, शीघ्र पहचान के लिए नि-क्शय शिविर आयोजित करने और अपने निर्वाचन क्षेत्रों में टीबी हस्तक्षेपों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। उन्होंने समुदाय-आधारित पहलों का समर्थन करने, पोषण, मनो-सामाजिक और आजीविका सहायता प्रदान करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव, पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने सरकार की रणनीतिक प्राथमिकताओं को रेखांकित किया, जिसमें समुदाय-आधारित स्क्रीनिंग, AI-संचालित डायग्नोस्टिक उपकरणों का रोलआउट और पोषण केंद्रित हस्तक्षेप शामिल हैं, जो उपचार के परिणामों को बेहतर बनाएंगे। अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, अराधना पटनायक ने टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत अब तक की प्रगति और आगे की दिशा का अवलोकन प्रस्तुत किया।

नेशनल वन हेल्थ मिशन असेम्बली 2025 का दो दिवसीय आयोजन सफलतापूर्वक समाप्त

No comments Document Thumbnail

नेशनल वन हेल्थ मिशन असेम्बली 2025 का दो दिवसीय आयोजन आज भारत मंडपम में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। दूसरे दिन में विशेष तकनीकी विचार-विमर्श हुए, जिन्होंने मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य के समेकित और लचीले वन हेल्थ इकोसिस्टम के निर्माण के लिए राष्ट्रीय प्रयासों को और मजबूत किया। इस असेंबली में प्रमुख मंत्रालयों, वैज्ञानिक संस्थाओं, विकास सहयोगियों और कार्यान्वयन एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में समन्वित कार्रवाई का महत्व उजागर हुआ।

पहले दिन की मजबूत शुरुआत के बाद, जिसमें सरकार के वरिष्ठ नेतृत्व ने संयुक्त निगरानी और ‘होल-ऑफ-गवर्नमेंट’ सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई, आज के सत्रों ने वैज्ञानिक, संचालनात्मक और कार्यक्रमगत चर्चाओं के माध्यम से उस गति को बनाए रखा। इन संवादों ने साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाया और विभिन्न क्षेत्रों में वन हेल्थ एकीकरण, तत्परता और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं के लिए आधार तैयार किया।

दिन की कार्यवाही का नेतृत्व वरिष्ठ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने किया। डॉ. वी. के. पॉल, सदस्य (स्वास्थ्य), नीति आयोग ने सहयोग, प्रणालीगत तत्परता और मजबूत राष्ट्रीय क्षमताओं के लिए सतत प्रयासों का आह्वान किया। उनके साथ डॉ. राजीव बहल, सचिव, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग और महानिदेशक, ICMR तथा डॉ. राजेश एस. गोखले, सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग भी उपस्थित थे, जिन्होंने नवाचार, अनुवादक विज्ञान और एकीकृत निगरानी के महत्व पर जोर दिया। FAO के स्कॉट न्यूमैन और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की संयुक्त सचिव वंदना जैन ने भी बहु-क्षेत्रीय जुड़ाव और वैश्विक सहयोग के महत्व को रेखांकित किया। DRDO, ICAR, THSTI, CEPI, FIND, AYUSH और International Vaccine Institute जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों ने भी विविध वैज्ञानिक और कार्यान्वयन दृष्टिकोण साझा किए।

डॉ. वी. के. पॉल ने असेंबली में कहा, “भारत की वन हेल्थ प्रगति एक मजबूत होल-ऑफ-गवर्नमेंट दृष्टिकोण पर निर्भर करती है, जो स्वस्थ और लचीले भविष्य की दिशा में काम करता है। सामुदायिक भागीदारी इस प्रयास की आधारशिला है। मीडिया का महत्वपूर्ण योगदान है, जो जनता की समझ को आकार देता है और गलत सूचना को दूर करता है, जबकि हमारी कानून व्यवस्था प्रणाली आपात स्थितियों में महत्वपूर्ण बल-गुणक के रूप में कार्य करती है। इन साझेदारियों को मजबूत करना यह सुनिश्चित करेगा कि समय पर, भरोसेमंद और समन्वित कार्रवाई हो।”

उन्होंने सामुदायिक सहभागिता को रोग का शीघ्र पता लगाने, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया का आधार बताया और कहा कि ग्रामीण स्तर पर वन हेल्थ तैयारियों का विस्तार होना चाहिए, जहां फ्रंटलाइन कर्मचारी, स्थानीय सरकारें और समुदाय पहली सुरक्षा पंक्ति बनाते हैं। उन्होंने COVID-19 महामारी के दौरान सामुदायिक सक्रियता को भारत की प्रमुख ताकत के रूप में उद्धृत किया और कहा कि यह असेंबली विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाकर क्षेत्रों में एकीकृत कार्रवाई को आगे बढ़ाने में सफल रही।

डॉ. राजीव बहल ने कहा, “हमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी और विकास को एकसाथ काम करने की आवश्यकता है। लक्ष्य केवल भविष्य की महामारी के लिए निदान, उपचार और टीकों का निर्माण नहीं है, बल्कि इसे तेजी से करना है। राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन प्लेटफॉर्म विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर वर्तमान और भविष्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए एक अधिक चुस्त, तैयार और उत्तरदायी इकोसिस्टम बनाने में मदद कर रहा है।”

डॉ. राजेश एस. गोखले ने कहा, “COVID-19 ने हमारे तकनीकी भविष्य की नाजुकता और वैश्विक परस्पर निर्भरता को उजागर किया। अब स्पष्ट है कि जैविक, कृत्रिम और प्राकृतिक बुद्धिमत्ता का त्रिकोण सभी भविष्य की तकनीकों को पुनर्परिभाषित करेगा। इनका संगम एक ऐसा नवाचार और गति उत्पन्न करेगा जिसकी कल्पना आज करना कठिन है। इस क्षमता का लाभ उठाना भारत के वन हेल्थ और जैव विज्ञान क्षमताओं को मजबूत करने में केंद्रीय होगा।”

चिकित्सा प्रतिक्रियाओं पर चर्चा के दौरान, प्रमुख राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञों ने भविष्य के खतरे के प्रति तेजी से प्रतिक्रिया देने वाले टीकों, निदान और उपचार के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने चुस्त अनुसंधान प्लेटफार्मों के निर्माण, आपातकालीन उपयोग के लिए नियामक प्रणालियों को मजबूत करने और वैज्ञानिक एजेंसियों, उद्योग और वैश्विक साझेदारों के बीच सहयोग बढ़ाने पर बल दिया। राज्य सरकारों ने निगरानी प्रणाली, अंतर-विभागीय समन्वय और क्षेत्र स्तर पर संचालन की तैयारियों के कार्यान्वयन अनुभव साझा किए।

क्षमता निर्माण और सामुदायिक भागीदारी पर विचार-विमर्श में यह भी रेखांकित किया गया कि एक मजबूत वन हेल्थ सिस्टम कुशल मानव संसाधन, भरोसेमंद संस्थान और सशक्त समुदायों पर निर्भर करता है। वन्यजीव स्वास्थ्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण, सामुदायिक आधारित अनुसंधान और स्वास्थ्य प्रणाली विकास के विशेषज्ञों ने बहु-स्तरीय प्रशिक्षण संरचनाओं, पेशेवर शिक्षा में वन हेल्थ का समावेश और सतत सामुदायिक साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। राज्य सरकारों ने स्थानीय सामुदायिक भागीदारी रणनीतियों और अनुकूलित समाधानों का महत्व भी साझा किया।

दिन का आयोजन भारत की बढ़ती वन हेल्थ क्षमताओं को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी के साथ समाप्त हुआ। संस्थानों ने निगरानी, जैव सुरक्षा, डिजिटल प्लेटफार्म, प्रयोगशाला नेटवर्क और सहयोगात्मक अनुसंधान प्रयासों में नवाचारों को दिखाया। नेशनल वन हेल्थ हैकथॉन के लिए एक सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें तकनीक-आधारित और सामुदायिक-केंद्रित समाधान प्रस्तुत किए गए।

विचार-विमर्श का समापन इस साझा समझ के साथ हुआ कि वन हेल्थ भारत के विकासशील भविष्य की दृष्टि को साकार करने के लिए आवश्यक है। वैज्ञानिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने, विभिन्न क्षेत्रों के सहयोग को सक्षम करने और प्रणाली के सभी स्तरों पर तैयारियों को मजबूत करने के माध्यम से, भारत एक सुरक्षित और लचीले भविष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।


सीपीआर जागरूकता सप्ताह का उद्घाटन, हर घर और सार्वजनिक स्थल पर जीवनरक्षक प्रशिक्षण का लक्ष्य

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- हृदयाघात के गंभीर मामलों में जीवन बचाने के लिए कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) एक महत्वपूर्ण और जीवनरक्षक आपातकालीन प्रक्रिया है। आम जनता में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज CPR जागरूकता सप्ताह (13–17 अक्टूबर 2025) का उद्घाटन किया। यह अभियान CPR प्रशिक्षण, प्रशिक्षण में भागीदारी और समुदाय आधारित सक्रियता को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया गया है।

इस उद्घाटन समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने मुख्य रूप से उद्घाटन किया, जिसमें स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, स्वास्थ्य पेशेवर, और चिकित्सा संस्थानों व नागरिक समाज के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य सचिव ने CPR कौशल के प्रति सार्वजनिक क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा,

“केवल हाथों द्वारा CPR करने की सरल प्रक्रिया महत्वपूर्ण अंगों में रक्त और ऑक्सीजन का प्रवाह बनाए रख सकती है जब तक कि पेशेवर मदद नहीं पहुँचती, जिससे जीवन रक्षा की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।”

स्वास्थ्य सचिव ने यह भी बताया कि CPR जागरूकता सप्ताह का लक्ष्य है कि हर घर, स्कूल, कार्यालय और सार्वजनिक स्थल पर कम से कम एक व्यक्ति इस जीवनरक्षक तकनीक में प्रशिक्षित हो। उन्होंने कहा,

“हृदयाघात भारत में अचानक मृत्यु का एक प्रमुख कारण बना हुआ है, जिसमें लगभग 70% मामले अस्पताल के बाहर होते हैं, जहां तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं होती। ऐसे समय में किसी बायस्टैंडर द्वारा समय पर CPR देना जीवन रक्षा की संभावना को काफी बढ़ा सकता है।”

उद्घाटन कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने CPR जागरूकता बढ़ाने और अन्य लोगों को यह प्रशिक्षण सीखने के लिए प्रेरित करने की प्रतिज्ञा भी ली। कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा हैंड्स-ओनली CPR का लाइव प्रदर्शन किया गया, जिसमें दर्शाया गया कि किसी भी व्यक्ति द्वारा सरल कदमों का पालन करके हृदय आपातकालीन स्थिति में किसी की जान बचाई जा सकती है।

कम बायस्टैंडर CPR प्रशासन दर और समुदाय-केंद्रित प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय पूरे भारत में 13-17 अक्टूबर, 2025 तक CPR जागरूकता सप्ताह मना रहा है। सप्ताह के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिज्ञा समारोह, भौतिक और वर्चुअल CPR प्रदर्शन, विशेषज्ञ बातचीत, पैनल चर्चा और अन्य IEC गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। उद्घाटन में देशभर से 15,000 से अधिक स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रतिभागी और चिकित्सा संस्थानों एवं नागरिक समाज के प्रतिनिधि मौजूद थे।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने MyGov और MyBharat प्लेटफ़ॉर्म के सहयोग से ऑनलाइन प्रतिज्ञा और CPR क्विज़ भी प्रकाशित किया है। प्रतिज्ञा और क्विज़ निम्नलिखित लिंक से एक्सेस किए जा सकते हैं:


अठवाँ पोषण माह: मध्य प्रदेश के बारवानी और दमोह जिलों में स्वास्थ्य गतिविधियाँ और परामर्श सत्र

No comments Document Thumbnail

अठवाँ पोशन माह के दौरान, मध्य प्रदेश के बारवानी और दमोह जिलों में परिवारों के लिए विभिन्न स्वास्थ्य गतिविधियाँ और परामर्श सत्र आयोजित किए गए।

बारवानी: पाती ब्लॉक के AWC गड़रिया फालिया सेमली में, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायक नर्स मिडवाइफ (ANM) की संयुक्त पहल से समुदाय को एकत्र किया गया और स्वास्थ्य तथा पोषण के महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। विशेष रूप से बच्चों के विकास के लिए पुरुषों की भागीदारी और महत्वपूर्ण 1000 सोने के दिन (1000 golden days) के दौरान पोषण पर जोर दिया गया।

इस अवसर पर बच्चों को अल्बेंडाजोल टैबलेट वितरित किए गए और कीड़े-मकौड़ों से बचाव, साफ-सफाई और स्वास्थ्य आदतों के महत्व पर परामर्श प्रदान किया गया।

दमोह: पादरी सहजपुर, दमोह में पोशन थाली डेमो आयोजित किया गया, जिसमें विशेष सहजन (मोरिंगा) पराठे पेश किए गए। इस दौरान मोरिंगा के पोषण लाभ और टेक होम राशन (THR) का नियमित सेवन करने के महत्व पर जोर दिया गया।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.