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डाक प्रशिक्षण केंद्र सहारनपुर के 75 वर्ष पूरे, स्मारक डाक टिकट जारी

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नई दिल्ली- डाक विभाग ने डाक प्रशिक्षण केंद्र (PTC), सहारनपुर के 75 वर्ष पूरे होने पर प्लेटिनम जुबली मनाई। इस अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया गया, जो संस्थान की उत्कृष्ट प्रशिक्षण परंपरा और राष्ट्र निर्माण में योगदान को दर्शाता है।

यह डाक टिकट केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया द्वारा आकाशवाणी भवन, नई दिल्ली स्थित रंग भवन सभागार में जारी किया गया। इस कार्यक्रम में डाक सेवाओं के महानिदेशक जितेंद्र गुप्ता, सदस्य (वित्त) मनीष सिन्हा, सीजीसीए वंदना गुप्ता और सदस्य (एचआरडी) कर्नल एस. एफ. एच. रिजवी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में मंत्री सिंधिया ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि डाक प्रशिक्षण केंद्र केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि एक ऐसी जगह है जहां इतिहास जीवित है और निरंतर विकसित हो रहा है। उन्होंने कहा कि 75 वर्षों का यह सफर राष्ट्र निर्माण में इसके महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है।

भविष्य की दृष्टि पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि भारत वर्ष 2030 तक न केवल देश बल्कि विश्व का एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में डाक विभाग और उसके कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

2 अप्रैल 1951 को स्थापित डाक प्रशिक्षण केंद्र सहारनपुर का उद्देश्य स्वतंत्र भारत के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना था। यह संस्थान 56.71 एकड़ परिसर में फैला हुआ है और अब उत्तरी भारत के 8 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के डाक कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदान करने वाला प्रमुख संस्थान बन चुका है।

आज यह केंद्र 11 आधुनिक कंप्यूटर लैब और एक विशेष ई-स्टूडियो से सुसज्जित है, जहां हर साल करीब 3,000 कर्मचारियों को ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स, डिजिटल संचालन और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही अनुशासन, विश्वसनीयता और जनसेवा जैसे मूल्यों को भी विकसित किया जाता है।

यह स्मारक डाक टिकट देशभर के फिलैटेलिक ब्यूरो में उपलब्ध है और इसे ऑनलाइन भी खरीदा जा सकता है।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने सम्राट पेरुम्बिदुगु मुथरैयार द्वितीय को समर्पित स्मारक डाक टिकट का विमोचन किया

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भारत के उपराष्ट्रपति,सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में सम्राट पेरुम्बिदुगु मुथरैयार द्वितीय (सुवर्ण मरण) को समर्पित स्मारक डाक टिकट का विमोचन किया।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तमिल संस्कृति और भाषा के प्रति भारत सरकार के निरंतर समर्थन की सराहना की। उन्होंने काशी तमिल संगम और तमिल राजाओं, नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों को मान्यता देने एवं सम्मानित करने के प्रयासों की प्रशंसा की, जिन्हें अतीत में पर्याप्त मान्यता नहीं मिली थी।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सम्राट पेरुम्बिदुगु मुथरैयार पर स्मारक डाक टिकट का विमोचन इस निरंतर मान्यता प्रक्रिया का हिस्सा है।

सम्राट पेरुम्बिदुगु मुथरैयार के ऐतिहासिक महत्व को उजागर करते हुए उन्होंने कहा कि वे प्राचीन तमिलनाडु के सबसे विख्यात शासकों में से एक थे और मुथरैयार वंश के प्रतिष्ठित शासक थे, जिन्होंने 7वीं से 9वीं शताब्दी ईस्वी के बीच तमिलनाडु के मध्य क्षेत्रों पर शासन किया। उन्होंने बताया कि सम्राट ने लगभग चार दशकों तक तिरुचिरापल्ली से शासन किया और उनका राज्य प्रशासनिक स्थिरता, क्षेत्रीय विस्तार, सांस्कृतिक संरक्षण और सैन्य कौशल के लिए जाना जाता था।

उपराष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि तमिलनाडु के विभिन्न स्थानों पर पाए गए शिलालेख सम्राट के मंदिरों के दान, सिंचाई कार्यों और तमिल साहित्य में योगदान का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि सम्राट का शासन दक्षिण भारतीय इतिहास में एक विशिष्ट स्थान रखता है।

प्रधानमंत्री की दृष्टि ‘विकसित भारत @2047’ का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर और महान नेताओं की विरासत का दस्तावेजीकरण, सम्मान और संरक्षण राष्ट्रीय प्राथमिकता है। उन्होंने आज़ादी का अमृत महोत्सव के दौरान सभी क्षेत्रों के स्वतंत्रता सेनानियों और महान शासकों को सम्मानित करने के प्रयासों का उल्लेख किया, जिसमें तमिलनाडु भी शामिल है। उन्होंने बताया कि 2014 से अब तक तमिलनाडु सहित लगभग 642 चोरी हुई मूर्तियाँ और प्राचीन वस्तुएँ वापस प्राप्त की गई हैं।

इस अवसर पर वित्त और कॉर्पोरेट मामले की केंद्रीय मंत्री, निर्मला सीतारमण; राज्यसभा के उपाध्यक्ष, हरिवंश; और सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री, डॉ. एल. मुरुगन सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।


बॉम्बे जिमखाना की 150वीं वर्षगांठ पर डाक विभाग ने जारी किया स्मारक डाक टिकट

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 डाक विभाग ने बॉम्बे जिमखाना की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में स्मारक डाक टिकट जारी किया है, जो इसके खेल उत्कृष्टता की समृद्ध विरासत और राष्ट्र में इसके स्थायी सांस्कृतिक योगदान का जश्न मनाता है।

यह स्मारक डाक टिकट मुंबई के बॉम्बे जिमखाना में केंद्रीय संचार और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया द्वारा जारी किया गया, जिसमें राज्यसभा सदस्य मिलिंद देओरा, बॉम्बे जिमखाना के अध्यक्ष संजीव सारन मेहरा, पोस्टमास्टर जनरल, नवी मुंबई क्षेत्र, सुचिता जोशी, और अन्य गणमान्य व्यक्तियों एवं बॉम्बे जिमखाना के सदस्यों की उपस्थिति रही।

बॉम्बे जिमखाना की 150वीं वर्षगांठ पर स्मारक डाक टिकट का विमोचन

इस अवसर पर बोलते हुए, ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आशा व्यक्त की कि यह स्मारक डाक टिकट प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में यात्रा करता हुए संदेशवाहक की भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि जैसे खेल में कहानियां और मूल्य छिपे होते हैं, वैसे ही यह टिकट भी युवाओं को खेलों में भाग लेने, सक्रिय रहने और संस्थाओं की सकारात्मक भूमिका में विश्वास रखने के लिए प्रेरित करेगा।

सिंधिया ने भारत पोस्ट और बॉम्बे जिमखाना क्लब के बीच समानता की ओर इशारा करते हुए कहा कि दोनों संस्थाएं भावनाओं को संप्रेषित करने, लोगों को जोड़ने और पीढ़ियों को जोड़ने के उद्देश्य से स्थापित हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण और अडिग समर्थन के तहत डाक विभाग एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है—यह अपनी पारंपरिक प्रणालियों को पुनर्परिभाषित कर रहा है, सेवा विस्तार कर रहा है और अगले पांच वर्षों में दुनिया का सबसे बड़ा और सर्वसमावेशी लॉजिस्टिक्स संगठन बनने की दिशा में अग्रसर है।

1875 में स्थापित, बॉम्बे जिमखाना भारत की खेल और सामाजिक विरासत में एक प्रतिष्ठित स्तंभ के रूप में खड़ा है। इसने कई पीढ़ियों के खिलाड़ियों का पोषण किया और सांस्कृतिक व खेल गतिविधियों का एक जीवंत केंद्र बनकर कार्य किया। डेढ़ शताब्दी के दौरान इस संस्थान ने खेल भावना, सहयोग और सामुदायिक जुड़ाव की भावना को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

स्मारक डाक टिकट का विवरण

इस विशेष डाक टिकट में बॉम्बे जिमखाना के प्रतिष्ठित परिसर और मैदान को खूबसूरती से चित्रित किया गया है, जो इसके स्थायी विरासत और भारत के खेल क्षेत्र में योगदान का प्रतीक है।

इस विशेष अंक के माध्यम से डाक विभाग ने संस्था के 150 वर्षों के सफर को सम्मानित किया और भारत की समृद्ध खेल उपलब्धियों को फिलाटेली (डाक टिकट संग्रहण) के माध्यम से संरक्षित और प्रदर्शित करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

स्मारक डाक टिकट जनता के लिए फिलाटेलिक ब्यूरो और ऑनलाइन www.epostoffice.gov.in के माध्यम से उपलब्ध होगा।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का संबोधन

सिंधिया ने इस अवसर पर यह भी कहा कि बॉम्बे जिमखाना न केवल खेलों में उत्कृष्टता का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से युवाओं में प्रेरणा और नेतृत्व कौशल को भी बढ़ावा देता है। उन्होंने डाक विभाग के इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह स्मारक डाक टिकट भविष्य की पीढ़ियों को इस ऐतिहासिक संस्था की विरासत से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागरीय अनुसंधान केंद्र (NCPOR) ने मनाया अंटार्कटिका दिवस, गोवा के राज्यपाल ने किया विशेष डाक टिकट का विमोचन

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अंटार्कटिका दिवस के अवसर पर आज (1 दिसंबर 2025) गोवा के वास्को-द-गामा स्थित राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागरीय अनुसंधान केंद्र (NCPOR) में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गोवा के माननीय राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

राज्यपाल ने कहा कि NCPOR भारत की ध्रुवीय एवं महासागरीय खोजों का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जिसने पिछले 25 वर्षों में दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भारत की वैज्ञानिक क्षमता को स्थापित किया है।

NCPOR की सिल्वर जुबली पर विशेष डाक टिकट जारी

कार्यक्रम में राज्यपाल ने NCPOR की स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष स्मारक डाक टिकट जारी किया। उन्होंने कहा कि यह टिकट भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा NCPOR के उल्लेखनीय योगदान का सम्मान है।

अंटार्कटिका का वैश्विक महत्व

राज्यपाल ने कहा—

  • अंटार्कटिका में दुनिया के 70% ताजे पानी का भंडार है।

  • यदि यह पूरी तरह पिघल जाए, तो वैश्विक समुद्र-स्तर में व्यापक वृद्धि हो सकती है।

  • भारत जैसे 1.4 अरब की आबादी वाले देश के लिए इन परिवर्तनों को समझना और उनसे निपटने की तैयारी करना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार द्वारा स्वीकृत नई अनुसंधान स्टेशन ‘मैत्री-II’ और स्वदेशी बर्फ श्रेणी अनुसंधान पोत देश की वैज्ञानिक प्रगति के प्रतीक हैं।

NCPOR के प्रमुख उपलब्धियाँ

NCPOR ने ध्रुवीय क्षेत्रों में भारत के वैज्ञानिक अभियानों का नेतृत्व किया है। संस्थान ने निम्नस्थायी भारतीय अनुसंधान केंद्र स्थापित किए हैं—

  • अंटार्कटिका: दक्षिण गंगोत्री, मैत्री, भारती

  • आर्कटिक: हिमाद्रि

  • हिमालय: हिमांश

भारत सरकार के निरंतर समर्थन पर प्रशंसा

NCPOR के निदेशक डॉ. थम्बन मेलोथ ने अपने संबोधन में कहा कि भारत सरकार हमेशा वैज्ञानिक अभियानों के प्रति प्रतिबद्ध रही है और हालिया स्वीकृतियाँ इसका प्रमाण हैं।

डाक विभाग की भूमिका

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अमिताभ सिंह, मुख्य डाक महानिदेशक (महाराष्ट्र सर्कल), ने कहा कि यह स्मारक टिकट NCPOR की 25 वर्ष की यात्रा को सम्मानित करने का माध्यम है।



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