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बलरामपुर जिले में सेवा और स्नेह का अनूठा संकल्प, आंगनबाड़ी के नन्हे-मुन्नों के लिए होगा खिलौना दान

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17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा संकल्प अभियान

 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक 2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों में ‘आंगन मिलन सेवा’ 

कलेक्टर ने जिलेवासियों से खिलौना दान कर बच्चों की खुशियों में सहभागी बनने की अपील

रायपुर- बलरामपुर जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले ’सेवा संकल्प अभियान’ को जनभागीदारी और सामाजिक सरोकार से जोड़ने की दिशा में बलरामपुर जिले में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसी कड़ी में ’आंगन मिलन सेवा‘ (आंगनबाड़ी सम्मान एवं मातृ सम्मान) कार्यक्रम 25 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप इस पहल के तहत जिले के सभी ’2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों’ में आने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए जनसहयोग से खिलौने उपलब्ध कराए जाएंगे।

"आंगन मिलन सेवा" का उद्देश्य आंगनबाड़ी केन्द्रों को बच्चों के लिए और अधिक आनंदमय, आकर्षक तथा सीखने के अनुकूल वातावरण प्रदान करना है। इस पहल में जिले के नागरिकों की सहभागिता को विशेष महत्व दिया गया है। ’खिलौना दान इस आयोजन का सबसे आत्मीय और संवेदनशील पक्ष होगा’, जिसके माध्यम से जिलेवासी आंगनबाड़ी के बच्चों के साथ सेवा, स्नेह और अपनत्व का भाव साझा कर सकेंगे।

’घर में रखे खिलौने भी बनेंगे किसी बच्चे की खुशी का कारण’

कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने जिलेवासियों से अपील की है कि उनके घरों में ऐसे ’सुरक्षित, स्वच्छ एवं उपयोगी खिलौने’, जिनका अब उपयोग नहीं हो रहा है, वे उन्हें आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों को भेंट कर सकते हैं। इसके साथ ही इच्छुक नागरिक अपनी स्वेच्छा से नए खिलौने खरीदकर भी बच्चों को दान कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि किसी बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए किया गया छोटा-सा प्रयास भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। जिले के नागरिक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं और व्यवसायिक प्रतिष्ठान 25 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच अपने निकटतम आंगनबाड़ी केन्द्र पहुंचकर इस जनभागीदारी अभियान में शामिल हो सकते हैं।

आंगनबाड़ी केन्द्र बच्चों की पहली पाठशाला

कलेक्टर त्रिपाठी ने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्र बच्चों के जीवन की ’पहली पाठशाला’ हैं। यहीं से बच्चों में सीखने, समझने, संवाद करने और सामाजिक व्यवहार की प्रारंभिक नींव तैयार होती है। ऐसे में इन केन्द्रों को बच्चों के लिए अधिक जीवंत और सीखने योग्य बनाने में समाज की सहभागिता निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने जिलेवासियों से आग्रह करते हुए कहा कि आपका छोटा-सा सहयोग किसी बच्चे के चेहरे पर बड़ी मुस्कान ला सकता है और उसकी सीखने की यात्रा को और समृद्ध कर सकता है। बच्चों के लिए किया गया प्रत्येक छोटा प्रयास उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव को मजबूत करने में योगदान देता है।

खिलौनों से खेल-खेल में सीखने की मजबूत होगी नींव

बच्चों के लिए खिलौने केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे उनके ’रचनात्मक, बौद्धिक और सामाजिक विकास’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खेल-खेल में बच्चे नई चीजों को समझते हैं, अपनी कल्पनाशक्ति को विकसित करते हैं और भाषा तथा सामाजिक व्यवहार से जुड़े कौशल सीखते हैं।

जनसहयोग से प्राप्त खिलौनों का उपयोग आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करने में किया जाएगा, जहां वे ’खेलते हुए सीख सकें, अपनी रचनात्मकता को अभिव्यक्त कर सकें और सीखने की प्रक्रिया का आनंद उठा सकें।’ इससे आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की रुचि और सहभागिता को भी बढ़ावा मिलेगा।

सेवा से संकल्प और संकल्प से जनभागीदारी की ओर

‘आंगन मिलन सेवा’ केवल खिलौना दान तक सीमित पहल नहीं है, बल्कि यह समाज में ’संवेदनशीलता, सहयोग और अपनत्व की भावना को मजबूत करने का अवसर’ भी है। एक ओर जहां बच्चों को उनके विकास के लिए उपयोगी संसाधन मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर समाज के विभिन्न वर्गों को बच्चों के साथ सीधे जुड़कर सेवा का अवसर मिलेगा।

जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आयोजित ‘आंगन मिलन सेवा’ में सक्रिय सहभागिता निभाएं। अपने घर में अनुपयोगी लेकिन सुरक्षित और उपयोगी खिलौने किसी आंगनबाड़ी केन्द्र में दान करें या अपनी इच्छा के अनुसार नए खिलौने उपलब्ध कराएं।

यह जनभागीदारी पहल 2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों के नन्हे-मुन्नों के जीवन में खुशियों के रंग भरने के साथ-साथ सेवा, स्नेह और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को भी नई मजबूती देगी। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जिले में यह संदेश भी जाएगा कि बच्चों के बेहतर भविष्य की जिम्मेदारी केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है।

शिशु संरक्षण माह: स्वस्थ बचपन और सुरक्षित भविष्य का आधार

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धनंजय राठौर

संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

शिशु जीवन का वह नाजुक चरण है, जहाँ सही पोषण और स्वास्थ्य देखभाल उनके भविष्य की दिशा तय करती है। भारत जैसे विकासशील देश में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और विभिन्न संक्रामक बीमारियों की दर को कम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं महिला-बाल विकास विभाग द्वारा 'शिशु संरक्षण माह' का आयोजन किया जाता है। यह एक विशेष स्वास्थ्य अभियान है, जो नवजात और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कवच का कार्य करता है। बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुधारने के लिए चलाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान है। छत्तीसगढ़ राज्य में इस अभियान का नया चरण 18 अगस्त 2026 से शुरू हो गया है, जिसके तहत 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों की विशेष देखभाल की जा रही है। 


अभियान का मुख्य उद्देश्य

इस विशेष माह को मनाने का प्राथमिक लक्ष्य बाल मृत्यु दर और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाना है। इसके साथ ही, बच्चों में समय पर बीमारियों की पहचान करना, उन्हें आवश्यक विटामिन और खनिज प्रदान करना, तथा माताओं को सही पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना इस अभियान के प्रमुख उद्देश्य हैं।

प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं और गतिविधियाँ

शिशु संरक्षण माह के दौरान गांव-गांव और शहरों में स्वास्थ्य केंद्रों व आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से सेवाएं प्रदान की जाती हैं:

•विटामिन 'ए' का अनुपूरण: 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को रतौंधी (Night Blindness) जैसी आंखों की बीमारियों से बचाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन 'ए' की खुराक दी जाती है।

•एनीमिया से बचाव: 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को खून की कमी (एनीमिया) से सुरक्षित रखने हेतु आयरन एवं फॉलिक एसिड (IFA) सिरप का वितरण किया जाता है।

•पूर्ण टीकाकरण: जिन बच्चों के नियमित टीके छूट गए हैं, उन्हें खसरा, रुबेला, पोलिया, काली खांसी और टिटनेस जैसी घातक बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकृत किया जाता है।

•कुपोषण की पहचान व उपचार: आंगनवाड़ी स्तर पर सभी बच्चों का वजन और लंबाई नापकर गंभीर रूप से कुपोषित और मध्यम कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर गंभीर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जाता है।

•दस्त नियंत्रण और ओआरएस वितरण: बच्चों में डिहाइड्रेशन रोकने के लिए माताओं को ओआरएस पैकेट और जिंक की गोलियां दी जाती हैं।

जागरूकता एवं परामर्श सत्र

केवल दवाएं देना ही इस अभियान का हिस्सा नहीं है, बल्कि माताओं और परिवारों का व्यवहार परिवर्तन भी इसका महत्वपूर्ण अंग है:

•स्तनपान का महत्व: जन्म के तुरंत बाद (1 घंटे के अंदर) मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम) और शुरुआती 6 माह तक केवल स्तनपान कराने के लिए माताओं को प्रेरित किया जाता है।

•ऊपरी आहार की शुरुआत: 6 माह की आयु पूरी होने के बाद बच्चे को स्तनपान के साथ-साथ सही मात्रा और गुणवत्ता वाला पूरक आहार (ऊपरी आहार) देने की सलाह दी जाती है। 6 से 12 महीने की उम्र के बीच, आपका शिशु पौष्टिक ठोस आहार खाना शुरू कर देगा, लेकिन माँ का दूध फिर भी पोषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत बना रहेगा। जब आपका शिशु माँ का दूध या फार्मूला दूध पीना छोड़ दे, तो उसे धीरे-धीरे और धैर्य से खिलाएँ। उसे नए स्वाद चखने दें, लेकिन ज़बरदस्ती न करें।  जब आपका बच्चा ठोस आहार खाना शुरू करे, तो उसे भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खाने से रोकें ताकि वह गले में न अटके।

•अपने शिशु के मस्तिष्क के विकास में मदद करने के लिए उसे पढ़ें, उससे बातें करें और उसके लिए गाएं।

•अपने शिशु को सोने के पर्याप्त अवसर प्रदान करें - 4 से 12 महीने के शिशुओं के लिए अनुशंसित नींद की मात्रा प्रतिदिन 12 से 16 घंटे (24 घंटे की अवधि में, झपकी सहित) है।

•शिशु को सक्रिय रखना उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दिन भर उसके हाथ-पैर हिलाते रहने के लिए उसके साथ शारीरिक गतिविधियाँ करें। ज़मीन पर बैठकर हिलने-डुलने से शिशु मजबूत बनता है और साथ ही वह दुनिया को समझने और जानने की कला सीखता है।

•स्वच्छता व सैनिटेशन: हाथ धोने की सही आदत और बच्चे की देखभाल में साफ-सफाई के महत्व पर चर्चा की जाती है, जिससे संक्रमण से बचाव संभव हो सके।

•शिशु को सक्रिय रखना उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दिन भर उसके हाथ-पैर हिलाते रहने के लिए उसके साथ शारीरिक गतिविधियाँ करें। ज़मीन पर बैठकर हिलने-डुलने से शिशु मजबूत बनता है और साथ ही वह दुनिया को समझने और जानने की कला सीखता है।

•शिशु को बांधकर रखने वाले उपकरण उसके विकास में बाधा डाल सकते हैं। शिशु को झूले, स्ट्रोलर, बाउंसिंग सीट, एक्सरसाइज़ सॉसर या अन्य किसी भी बांधकर रखने वाले उपकरण में लंबे समय तक न रखें। उन्हें बाहर निकालें और घूमने-फिरने दें।

शिशु संरक्षण माह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हर परिवार और समाज के लिए अपने बच्चों के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराने वाला समय है। जब समाज का हर वर्ग—स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन/आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और अभिभावक—एक साथ मिलकर प्रयास करेंगे, तभी हम एक स्वस्थ, कुपोषण-मुक्त और सशक्त पीढ़ी का निर्माण कर सकेंगे।

मुख्य सचिव ने बच्चों के लिए स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लेकर यूनिसेफ और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की संयुक्त बैठक ली

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बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, पेयजल और स्वच्छता सेवाओं को मजबूत करने पर जोर

जिलों में पोषण कार्यक्रमों के विस्तार पर हुई चर्चा

रायपुर- मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य में बच्चों के लिए चलाये जा रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लेकर यूनिसेफ और राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग सहित अन्य विभागीय अधिकारी की बैठक ली।

बैठक में राज्य में बच्चों के लिए पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, साफ-सफाई और स्वच्छता सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाये जाने के लिए विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में बच्चों में कुपोषण, एनिमिया, विकास में देरी, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सहित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई है। बच्चों के स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत आवश्यक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, फोलेट, विटामिन, बी-12 और जिंक  की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यूनिसेफ और विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में मातृ एवं  शिशु मृत्यु दर, एनिमिया नियंत्रण, कुपोषण और बाल विवाह जैसी समस्याओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई।

अधिकारियों और यूनिसेफ की संयुक्त बैठक में बच्चों के कम्यूनिटी मेनेजमेंट का सभी जिलों तक विस्तार करने, विकलांगता वाले बच्चों के माता-पिता को खानपान संबंधी सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। बैठक में टेक होम राशन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाने के साथ-साथ घर पर पोष्टिक भोजन और बच्चों को भोजन खिलाने की बेहतर पद्धतियों को बढ़ावा देने के संबंध में जानकारी दी गई। अनाज, दाल, फल्लियों की उपलब्धता ग्राम पंचायत स्तर पर अनाज बैंक की अवधारणा पर भी चर्चा हुई। 

इसके साथ ही राज्य के किसानों तक विविध एवं पोषक तत्वों से भरपूर फसलों और दालों की पहुंच बढ़ाने के लिए अच्छे बीजों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए जोर दिया गया। बैठक में बताया गया कि राज्य में एंटी-मलेरिया अभियान के चलते मलेरिया के रोगियों में उल्लेखनीय कमी आयी है। बच्चों में एनिमिया की स्थिति के बारे में चर्चा हुई। इसके तहत बस्तर में बच्चों मे एनिमिया से निपटने विशेष स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाए जा रहे है। मुख्य सचिव ने सभी जिलों में बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, जमीन स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन और लोगों तक जरूरी सेवाएं पहुंचाने के निर्देश दिए है।

बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋर्चा शर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव अब्दुल कैसर हक, गृह विभाग की सचिव नेहा चंपावत, आयुक्त समग्र शिक्षा किरण  कौशल सहित शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

भारत में गोद लेने की प्रक्रिया: सुरक्षित भविष्य और सशक्त परिवारों के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण

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मुख्य बिंदु

  • भारत में गोद लेने की प्रक्रिया, बाल न्याय (संरक्षण और कल्याण) अधिनियम, 2015 और गोद लेने के नियम, 2022 के तहत संचालित होती है और इसे केंद्रीय गोद लेने संसाधन प्राधिकरण (CARA) मिशन वात्सल्य डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से सुगम बनाता है।

  • CARA का डिजिटल सिस्टम (CARINGS) पारदर्शी, सुरक्षित और बाल-केंद्रित गोद लेने की प्रक्रिया सुनिश्चित करता है, जिससे इच्छुक गोद लेने वाले माता-पिता पूरे देश से पंजीकरण कर सकते हैं और भौगोलिक बाधाओं के बिना गोद ले सकते हैं।

  • 60-दिन का होम स्टडी रिपोर्ट (HSR), 48–96 घंटे की संदर्भ विंडो, और अनिवार्य 2-वर्षीय फॉलो-अप बाल कल्याण सुनिश्चित करते हैं।


परिचय

भारत यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि हर बच्चे को प्रेमपूर्ण परिवार में बढ़ने का अधिकार मिले। सरकार ने CARA के माध्यम से देश और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गोद लेने की प्रक्रिया को कानूनी और संस्थागत रूप से व्यवस्थित किया है, जिससे अनाथ, परित्यक्त और समर्पित बच्चों को इच्छुक माता-पिता से मिलाना संभव हो। इस ढांचे में पारिवारिक देखभाल को संस्थागत पुनर्वास पर प्राथमिकता दी जाती है।

कानूनी और संस्थागत ढांचा

  • CARA: यह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत एक सांविधिक निकाय है जो अनाथ, परित्यक्त और समर्पित बच्चों की गोद लेने की प्रक्रिया का संचालन करता है।


  • CARA घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय गोद लेने का प्रोत्साहन करता है। यह गोद लेने की प्रक्रिया को बाल-केंद्रित और पारदर्शी बनाने के लिए Juvenile Justice Act, 2015, Adoption Regulations, 2022, और Model Foster Care Guidelines, 2024 के तहत कार्य करता है।

डिजिटल गोद लेने प्रणाली (CARINGS / Mission Vatsalya)

  • गोद लेने की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता

  • संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा

  • बाल-केंद्रित निर्णय लेना

  • सभी राज्यों में समान अवसर

  • कानूनी रूप से स्वतंत्र बच्चों और इच्छुक माता-पिता के बीच प्राथमिकताओं के आधार पर स्वत: मिलान

  • विशेष आवश्यकताओं और तत्काल प्लेसमेंट टैब द्वारा सीधे बच्चों का चयन

  • वास्तविक समय में आवेदन ट्रैकिंग और सूचनाएं

गोद लेने की प्रक्रिया: प्रमुख विशेषताएँ

  • कौन गोद ले सकता है: भारत निवासी, NRI, OCI, विदेशी, विवाहित/अविवाहित या अलग-अलग स्थितियों वाले माता-पिता।

  • पंजीकरण और दस्तावेज़: पहचान, पता, स्वास्थ्य प्रमाण पत्र, विवाह/विवाह विच्छेद प्रमाण, आय प्रमाण और पारिवारिक फोटो।

  • होम स्टडी रिपोर्ट (HSR): 60 दिनों में तैयार, 3 वर्षों तक मान्य, पुन: मान्यता आवश्यक।

  • वरिष्ठता और मिलान: पंजीकरण तिथि के आधार पर संदर्भ, उम्र, लिंग, राज्य और प्राथमिकताओं के अनुसार।

  • स्थानांतरण परिदृश्य: भारत में रहने वाले PAPs विदेश जाने पर फिर से पंजीकरण करें; अंतर्राष्ट्रीय PAPs भारत आने पर CARINGS में RI के रूप में पंजीकरण करें।

बाल संदर्भ प्रक्रिया

  • प्रत्येक PAP को वरिष्ठता और प्राथमिकताओं के आधार पर 3 बच्चों तक का संदर्भ

  • देश के भीतर: बच्चे का चयन करने के लिए 48 घंटे; अंतर्राष्ट्रीय: 96 घंटे

  • प्रत्येक संदर्भ में बच्चे की फोटो, Child Study Report (CSR), और Medical Examination Report (MER) शामिल

  • यदि बच्चे को आरक्षित नहीं किया गया, तो PAP को वरिष्ठता सूची के अंत में भेजा जाएगा

विशेष गोद लेने की श्रेणियाँ

  • स्टेप-पैरेंट गोद लेना: जैविक माता-पिता की सहमति आवश्यक

  • संबंधी गोद लेना: नज़दीकी परिवार के सदस्य

  • भाई-बहन गोद लेना: दो या अधिक भाई-बहनों को एक साथ रखने का प्रयास

  • तत्काल प्लेसमेंट श्रेणी: 6–18 वर्ष के बड़े बच्चे सीधे चयन योग्य

  • विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चे (Divyaang): विशेष ध्यान और प्राथमिकता

फोस्टर केयर

  • गोद लेने से पहले बच्चों को सुरक्षित, परिवार जैसे वातावरण में रखने की प्रक्रिया

  • भारतीय नागरिक ही फोस्टर केयर के लिए पात्र

  • फोस्टर गोद लेने की प्रक्रिया में पंजीकरण, शॉर्टलिस्टिंग, CWC अनुमोदन, मासिक निरीक्षण और 2 साल बाद स्थायी गोद लेना शामिल

सुरक्षा और पारदर्शिता

  • फिक्स्ड शुल्क संरचना और डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से वित्तीय शोषण से बचाव

  • कानूनी प्रावधानों और CARA की निगरानी में पारदर्शी प्रक्रिया

  • बच्चों के लिए जाति, धर्म, या धर्मानुसार भेदभाव नहीं

  • Post-Adoption फॉलो-अप सुनिश्चित करता है कि बच्चे का कल्याण और परिवार में समायोजन सही हो

अंतर्राष्ट्रीय गोद लेना

  • NRI, OCI और विदेश में रहने वाले विदेशी माता-पिता विशेष प्राधिकृत एजेंसियों या भारतीय दूतावास के माध्यम से पंजीकरण

  • No Objection Certificate (NOC) आवश्यक

  • 2 साल में 6 फॉलो-अप विज़िट

निष्कर्ष

भारत का गोद लेने का ढांचा बच्चों के सर्वोत्तम हित को केंद्र में रखकर सुरक्षित, पारदर्शी और सुसंगठित प्रणाली प्रदान करता है। CARA और कानूनी प्रावधानों के माध्यम से हर बच्चे को प्रेमपूर्ण परिवार में बड़े होने का अवसर मिलता है। जागरूकता और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के सहयोग से गोद लेने को केवल प्रक्रिया नहीं, बल्कि नई शुरुआत और हर बच्चे के अधिकारों का उत्सव बनाया जा रहा है।

राष्ट्रीय गोद लेने जागरूकता माह 2025

  • थीम: “Non-Institutionalised Rehabilitation of Children with Special Needs (Divyaang Children)”

  • अभियान: #EveryChildMatters – हर बच्चे को परिवार, प्रेम और सम्मान का अधिकार।

राष्ट्रीय दत्तक ग्रहण जागरूकता सम्मेलन 2025: दिव्यांग बच्चों के परिवार आधारित पुनर्वास पर देशभर का जोर

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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD) के अंतर्गत आने वाली सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) तथा आंध्र प्रदेश सरकार के महिला विकास एवं बाल कल्याण विभाग के सहयोग से राष्ट्रीय दत्तक ग्रहण जागरूकता सम्मेलन 2025 कल (27 नवंबर 2025) विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश में आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय दत्तक ग्रहण जागरूकता माह के अंतर्गत देशभर में चलाए जा रहे अभियानों का हिस्सा है।

इस वर्ष सम्मेलन की थीम है—“विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (दिव्यांग बच्चों) का गैर-संस्थागत पुनर्वास”, जो यह दर्शाता है कि सरकार ऐसे बच्चों के लिए परिवार आधारित, संवेदनशील और समावेशी देखभाल को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह पहल जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 और दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 के अनुरूप है।

सम्मेलन में प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति

कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे, जिनमें प्रमुख हैं—

  • अनिल मलिक, सचिव, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय

  • ए. सूर्या कुमारी, प्रधान सचिव, महिला विकास एवं बाल कल्याण विभाग, आंध्र प्रदेश

  • भावना सक्सेना, सदस्य सचिव एवं सीईओ, CARA

सम्मेलन का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ होगा, जिसके बाद CARA की सीईओ स्वागत भाषण और विषय प्रस्तुति देंगी। इसके पश्चात सचिव, MWCD का मुख्य संबोधन तथा आंध्र प्रदेश की प्रधान सचिव का विशेष संबोधन होगा।

कार्यक्रम के दौरान “दिव्यांग बच्चों के दत्तक ग्रहण” पर एक विशेष फिल्म भी जारी की जाएगी, जिसका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

विभिन्न हितधारकों का सहभाग

इस सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण समूह शामिल होंगे—

  • राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसियों (SARAs) के प्रतिनिधि

  • प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश से एक जिला बाल संरक्षण अधिकारी (DCPO) एवं एक चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) सदस्य

  • विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के दत्तक अभिभावक

  • संभावित दत्तक अभिभावक

  • MWCD और आंध्र प्रदेश सरकार के अधिकारी

यह मंच दत्तक ग्रहण पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े सभी हितधारकों—सुविधादाताओं और लाभार्थियों—को एक साथ लाकर सहयोग और अनुभव-साझाकरण को मजबूत करेगा।

अनुभव साझा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और नीति चर्चा

कार्यक्रम में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को गोद लेने वाले माता-पिता अपने अनुभव साझा करेंगे। बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया जाएगा। चर्चा सत्रों के माध्यम से दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देने, नीतिगत सुझावों पर विचार-विमर्श और संवेदनशील, सूचित एवं समयबद्ध पुनर्वास की आवश्यकता पर जोर दिया जाएगा।

सम्मेलन से अपेक्षित परिणाम

राष्ट्रीय दत्तक ग्रहण जागरूकता सम्मेलन 2025 से यह अपेक्षा है कि—

  • व्यवहारिक और उपयोगी सिफारिशें सामने आएंगी

  • राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के बीच सीख और अनुभव का आदान-प्रदान बढ़ेगा

  • संचालन संबंधी समन्वय में सुधार होगा

  • विशेष कर दिव्यांग बच्चों के लिए परिवार आधारित स्थायी देखभाल को प्रोत्साहन मिलेगा

इस सम्मेलन का उद्देश्य है कि भारत का हर बच्चा—विशेष रूप से विशेष आवश्यकता वाले बच्चे—एक सुरक्षित, स्नेहमय और स्थायी परिवार प्राप्त कर सके।

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