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UPSC के शताब्दी वर्ष पर दो दिवसीय ‘शताब्दी सम्मेलन’ का आयोजन

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केंद्रीय लोक सेवा आयोग (UPSC) अपनी शताब्दी वर्ष समारोह के अंतर्गत दो दिवसीय ‘शताब्दी सम्मेलन’ का आयोजन कर रहा है। यह सम्मेलन 26 और 27 नवंबर 2025 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा। लोकसभा अध्यक्ष माननीय ओम बिड़ला मुख्य अतिथि के रूप में और माननीय डॉ. जितेंद्र सिंह, राज्य मंत्री (कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन) विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल होंगे। भारत सरकार के अन्य वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।

इस कार्यक्रम में UPSC तथा विभिन्न राज्य लोक सेवा आयोगों के वर्तमान और पूर्व अध्यक्ष एवं सदस्य, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी तथा देश के प्रमुख व्यक्तित्व एक ही मंच पर एकत्रित होंगे। दो दिवसीय शताब्दी सम्मेलन के अंतर्गत 26 नवंबर 2025, संविधान दिवस के अवसर पर ‘चिंतन’ शीर्षक से एक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य देश में लोक सेवा आयोगों की संवैधानिक विरासत का सम्मान करना है।

उद्घाटन पूर्णाधिवेशन में कई विशिष्ट अतिथि संबोधित करेंगे, जिनमें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला का मुख्य भाषण, डॉ. जितेंद्र सिंह का मंत्रिस्तरीय संबोधन, तथा UPSC के माननीय अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार के विचार शामिल होंगे।

यह आयोजन UPSC और राज्य लोक सेवा आयोगों की राष्ट्र-निर्माण में भूमिका पर विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। इसके माध्यम से भर्ती प्रणाली में सुधार, समावेशिता और तकनीकी परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद को बढ़ावा मिलेगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पुट्टापर्थी में श्री सत्य साईं बाबा जन्मशताब्दी विशेष सत्र को संबोधित किया

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भारत की राष्ट्रपति,द्रौपदी मुर्मू ने आज (22 नवंबर, 2025) आंध्र प्रदेश के पुट्टापर्थी स्थित प्रसांथि निलयम् में श्री सत्य साईं बाबा की जन्मशताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष सत्र को अपने मंगल उपस्थिति से सुशोभित किया।

राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि प्राचीन काल से ही हमारे संत और ऋषि अपने कर्म और वचनों द्वारा समाज का मार्गदर्शन करते आए हैं। इन महापुरुषों ने समाज कल्याण के लिए अनेक कार्य किए हैं। ऐसे महान व्यक्तित्वों में श्री सत्य साईं बाबा का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। उन्होंने सदैव समाज के कल्याण के लिए कार्य किया। श्री सत्य साईं बाबा ने “मनुष्य सेवा ही ईश्वर सेवा है” के सिद्धांत को महत्व दिया और अपने भक्तों को भी इस आदर्श का अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया। इस प्रकार उन्होंने आध्यात्मिकता को जन-कल्याण के साथ जोड़ा। उन्होंने आध्यात्मिकता को निःस्वार्थ सेवा और व्यक्तिगत परिवर्तन से जोड़कर लाखों लोगों को सेवा मार्ग अपनाने के लिए प्रेरित किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि श्री सत्य साईं बाबा ने अनेक सामाजिक कल्याण कार्यों के माध्यम से आदर्शों को वास्तविकता में बदलने का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है। श्री सत्य साईं सेंट्रल ट्रस्ट विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता की निशुल्क शिक्षा प्रदान करता है, जिसमें शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ चरित्र निर्माण भी सम्मिलित है। शिक्षा के साथ-साथ, निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ भी उनके मिशन को आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र के सूखा-प्रभावित हजारों गाँवों को पेयजल उपलब्ध कराना भी उनके दूरदर्शी चिंतन का परिणाम है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सत्य साईं बाबा का संदेश “सबको प्रेम करो, सबकी सेवा करो” और “सदैव सहायता करो, किसी को कष्ट न दो” शाश्वत और सार्वभौमिक हैं। उनका विश्वास था कि विश्व हमारा विद्यालय है और पाँच मानवीय मूल्य—सत्य, धर्म, शांति, प्रेम और अहिंसा—हमारा पाठ्यक्रम हैं। उनके मानवीय मूल्यों के उपदेश सभी संस्कृतियों और सभी कालों के लिए प्रासंगिक हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के अनुरूप राष्ट्र-निर्माण सभी संगठनों का कर्तव्य है। आध्यात्मिक संगठन इसमें महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। भारत सरकार नागरिकों का जीवन सरल और सुविधाजनक बनाने के लिए अनेक कदम उठा रही है, ताकि वे अपनी प्रतिभा और क्षमता का उपयोग राष्ट्र के विकास में कर सकें। सभी परोपकारी संस्थाएँ, गैर-सरकारी संगठन, निजी क्षेत्र तथा नागरिकों को भारत सरकार के इन प्रयासों में सहयोग करना चाहिए। उनका योगदान भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के हमारे लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगा।



उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने श्रवणबेलगोला में आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी की शताब्दी स्मृति समारोह में की शिरकत

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में परमपूज्य आचार्य श्री 108 शांतिसागर महाराज जी की पुण्य स्मृति में आयोजित समारोह में भाग लिया। यह आयोजन आचार्य श्री के 1925 में महामस्तकाभिषेक समारोह हेतु इस पवित्र स्थल पर आगमन की शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी की प्रतिमा का अनावरण भी किया।

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी के दिगंबर परंपरा के पुनर्जागरण में किए गए योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री का जीवन अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद जैसे जैन सिद्धांतों का सजीव उदाहरण है, जो आज भी आत्मिक शांति और सामाजिक सद्भाव के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं।

उन्होंने कहा कि भौतिकवाद और अस्थिरता से भरे इस युग में आचार्य श्री का जीवन हमें यह संदेश देता है कि सच्ची स्वतंत्रता भोग में नहीं, बल्कि संयम में है; और सच्चा सुख बाहरी संपत्ति में नहीं, बल्कि आंतरिक शांति में निहित है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस शताब्दी समारोह के माध्यम से श्रवणबेलगोला स्थित दिगंबर जैन मठ ने न केवल एक महान संत की स्मृति का सम्मान किया है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आध्यात्मिक ज्योति को पुनः प्रज्वलित किया है। उन्होंने कहा कि अनावृत की गई प्रतिमा सादगी, पवित्रता और करुणा की शक्ति की स्मृति दिलाने वाला प्रतीक बनकर खड़ी रहेगी।

उपराष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी का संदेश समस्त भारतीयों को धर्म, सहिष्णुता और शांति के मार्ग पर अग्रसर करता रहेगा।

उन्होंने श्रवणबेलगोला के दो हजार वर्ष पुराने गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए भगवान बाहुबली की 57 फुट ऊँची एकाश्म मूर्ति को आध्यात्मिक श्रद्धा और कला कौशल का शाश्वत प्रतीक बताया।

राधाकृष्णन ने सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा आचार्य भद्रबाहु की प्रेरणा से श्रवणबेलगोला में संन्यास लेने के ऐतिहासिक प्रसंग का उल्लेख किया और कहा कि यह घटना दर्शाती है कि सांसारिक उपलब्धियों के शिखर पर पहुँचने के बाद भी व्यक्ति को अंततः आध्यात्मिक ज्ञान की तलाश करनी चाहिए।

उन्होंने भारत सरकार द्वारा प्राकृत भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने और जैन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण हेतु “ज्ञान भारतम मिशन” शुरू करने की सराहना की। उन्होंने तमिलनाडु और जैन धर्म के गहरे ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि जैन धर्म ने संगम कालीन और पश्चात् संगम कालीन तमिल साहित्य जैसे शिलप्पदिकारम में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उपराष्ट्रपति ने श्रवणबेलगोला दिगंबर जैन महास्थान मठ के वर्तमान प्रमुख अभिनव चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी की भी सराहना की, जो आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी की परंपरा को स्वास्थ्य, शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों जैसे प्राकृत रिसर्च इंस्टीट्यूट के माध्यम से आगे बढ़ा रहे हैं।

उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि श्रवणबेलगोला भारत की आध्यात्मिक धरोहर का उज्ज्वल रत्न बना रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को धर्म, सहिष्णुता और शांति के मार्ग पर प्रेरित करता रहेगा।

इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी, कर्नाटक के राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा, योजना और सांख्यिकी मंत्री डी. सुधाकर, हासन से सांसद श्रेयस एम. पटेल, श्रवणबेलगोला दिगंबर जैन महास्थान मठ के संतगण और अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सेंट टेरेसा कॉलेज, केरल की शताब्दी उत्सव में भाग लिया

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आज, 24 अक्टूबर 2025 को भारत की राष्ट्रपति Smt. द्रौपदी मुर्मू ने केरल के एर्नाकुलम में सेंट टेरेसा कॉलेज के शताब्दी उत्सव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि सेंट टेरेसा कॉलेज ने महिलाओं की शिक्षा को गहरे आध्यात्मिक मूल्यों के साथ बढ़ावा दिया है, जो समाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण में एक महत्वपूर्ण योगदान है। हमें उन विशिष्ट व्यक्तियों की दृष्टि और विरासत को गहराई से स्वीकार करना चाहिए जिन्होंने इस संस्था की स्थापना की और इसे एक शताब्दी तक लगातार उपलब्धियों की राह पर अग्रसरित किया।

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि केरल की महिलाएं देश को नेतृत्व प्रदान करती रही हैं। संविधान सभा के 15 विशिष्ट महिला सदस्य संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण दृष्टिकोण लेकर आई थीं, जिनमें से तीन केरल से थीं – अम्मू स्वामिनाथन, एनी मास्करीन और दक्षयानी वेलायुदन। उन्होंने मौलिक अधिकारों, सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर बहसों को प्रभावित किया। भारत की पहली महिला उच्च न्यायालय न्यायाधीश जस्टिस अन्ना चंडी थीं, जो 1956 में केरल उच्च न्यायालय की न्यायाधीश बनीं। इसके बाद, 1989 में जस्टिस M. फातिमा बीवी भारत की सर्वोच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश बनीं।

राष्ट्रपति ने कहा कि सेंट टेरेसा कॉलेज की होनहार महिला छात्राएं युवा भारत, प्रगतिशील भारत और सशक्त भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने कहा कि देश की जनसांख्यिकीय लाभ का सही उपयोग करने के लिए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दशक में लैंगिक बजट आवंटन में चार और आधा गुना वृद्धि हुई है। 2011 और 2024 के बीच महिला नेतृत्व वाली MSMEs लगभग दोगुनी हो गई हैं। 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए महिला कार्यबल की 70% भागीदारी एक प्रमुख स्तंभ है। विभिन्न सामाजिक और आर्थिक वर्गों की महिलाएं भारत की प्रगति में योगदान दे रही हैं। राष्ट्रपति ने यह जानकर प्रसन्नता जताई कि इस कॉलेज की पूर्व छात्राएं देश की वृद्धि और विकास में सकारात्मक भूमिका निभा रही हैं।

राष्ट्रपति ने यह भी प्रसन्नता जताई कि सेंट टेरेसा कॉलेज ने SLATE (Sustainability, Leadership and Agency through Education) परियोजना शुरू की है। इस परियोजना के माध्यम से कॉलेज ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। छात्रों को सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से जोड़ना और उन्हें भविष्य के रोजगारों के लिए तैयार करना इस परियोजना के सराहनीय उद्देश्य हैं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थान जैसे सेंट टेरेसा कॉलेज भारत को ज्ञान-सुपर पावर बनने में मदद करेंगे।


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