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छत्तीसगढ़ में कोयला घोटाले पर बड़ी मार, पूर्व सीएम की उपसचिव की संपत्ति जब्त

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में एसीबी-ईओडब्ल्यू (ACB-EOW) ने कोयला घोटाले से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई की है। राज्य सेवा की निलंबित अफसर और पूर्व मुख्यमंत्री की उपसचिव रही सौम्या चौरसिया की करीब 8 करोड़ रुपये मूल्य की 16 अचल संपत्तियां कुर्क कर ली गई हैं। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और दण्ड विधि संशोधन अध्यादेश 1944 के प्रावधानों के तहत की गई।


करोड़ों की संपत्ति का खुलासा

जांच में सामने आया कि सौम्या चौरसिया ने अपने करीबी रिश्तेदारों — सौरभ मोदी, अनुराग चौरसिया और अन्य के नाम पर लगभग 47 करोड़ रुपये की 45 संपत्तियां खरीदीं। इनकी खरीद को कोयला लेवी और अन्य भ्रष्टाचार से अर्जित अवैध आय से जोड़ा गया है।

ईडी और एसीबी-ईओडब्ल्यू की कार्रवाई

  • पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सौम्या चौरसिया की 29 संपत्तियां (करीब 39 करोड़ रुपये मूल्य की) कुर्क की थीं।
  • अब शेष 16 संपत्तियों (8 करोड़ रुपये मूल्य की) को रायपुर विशेष न्यायालय के आदेश पर 22 सितंबर 2025 को कुर्क किया गया।
  • यह आदेश 16 जून 2025 को ईओडब्ल्यू द्वारा दाखिल किए गए आवेदन पर सुनवाई के बाद पारित हुआ।

छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला क्या है?

कोयला लेवी घोटाला – कोयला परिवहन और खनन के दौरान अवैध वसूली (लेवी) की जाती थी, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ और अफसरों-कारोबारियों ने करोड़ों की कमाई की।

मिलीभगत का जाल – कई वरिष्ठ अफसरों और कारोबारियों पर सिंडिकेट बनाकर करोड़ों की अवैध वसूली करने का आरोप।

सौम्या चौरसिया की भूमिका – पूर्व सीएम की उपसचिव रही चौरसिया पर रिश्वत और अवैध वसूली से करोड़ों की संपत्ति बनाने का आरोप।

जांच एजेंसियों की पड़ताल – ED और EOW की संयुक्त कार्रवाई में बेनामी संपत्तियों और काले धन को उजागर किया गया।

हजारों करोड़ का मामला – जांच एजेंसियों के अनुसार घोटाले की रकम हजारों करोड़ रुपये तक फैली हुई है।

आगे की कार्रवाई

अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है। आने वाले समय में अन्य लोकसेवकों के खिलाफ भी अनुपातहीन संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। इसे प्रदेश में भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।

CG Coal Scam : निलंबित IAS रानू साहू, समीर विश्नोई, सौम्या चौरसिया सहित छह आरोपी हुए जेल से रिहा

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ कोयला लेवी घोटाले में गिरफ्तार निलंबित IAS अधिकारी रानू साहू, पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया, और वरिष्ठ IAS अधिकारी समीर विश्नोई शनिवार सुबह रिहा हो गए है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी आरोपियों को अंतरिम जमानत दिए जाने के बाद शुक्रवार को जमानती प्रक्रिया पूरी कर ली गई।


इस बहुचर्चित घोटाले में आरोपी सूर्यकांत तिवारी, सौम्या चौरसिया, समीर विश्नोई, रानू साहू सहित अन्य को जस्टिस सूर्यकांत और दीपांकर दत्ता की खंडपीठ ने अंतरिम राहत प्रदान की। कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी आरोपी अगली सूचना तक छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहेंगे और जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देंगे।

ये हैं जमानत की शर्तें

अगले आदेश तक छत्तीसगढ़ राज्य में नहीं रहेंगे
रिहाई के एक सप्ताह के भीतर राज्य से बाहर रहने का पता संबंधित थाना और जांच एजेंसियों को देना होगा।
सभी को पासपोर्ट कोर्ट में जमा करना होगा।
गवाहों से संपर्क, साक्ष्य से छेड़छाड़ या किसी भी प्रकार की बाधा पर जमानत रद्द मानी जाएगी।
जब भी जांच एजेंसी या ट्रायल कोर्ट बुलाए, उपस्थित रहना अनिवार्य होगा।

कोयला घोटाला: क्या है मामला?

प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में कोयले के संचालन और परिवहन से जुड़े कार्यों में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है। करीब 570 करोड़ रुपए के इस घोटाले में ऑनलाइन परमिट को ऑफलाइन करने, अवैध वसूली और सिंडिकेट के ज़रिए धन उगाही जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड कोयला व्यापारी सूर्यकांत तिवारी को माना जा रहा है।

तत्कालीन खनिज विभाग के संचालक समीर विश्नोई ने 15 जुलाई 2020 को एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत ऑनलाइन परमिट सिस्टम को बंद कर दिया गया और उसके स्थान पर ऑफलाइन प्रणाली लागू की गई। इससे कोयला व्यापारियों से सीधे वसूली का रास्ता खुला। व्यापारी प्रति टन 25 रुपए की अवैध वसूली करते थे, जिसके बाद ही उन्हें परिवहन पास मिलता था।

DMF घोटाला: खनिज निधि में भारी गड़बड़ी

ED और राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की संयुक्त जांच में डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड (DMF) से संबंधित अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में भारी कमीशनखोरी (25-40%) और फर्जी कंपनियों के ज़रिए करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया।

यह आरोप विशेष रूप से रानू साहू पर लगे हैं, जब वे रायगढ़ और कोरबा की कलेक्टर थीं। कहा गया कि उन्होंने खनन परियोजनाओं में अनुचित ठेके दिए और ठेकेदारों से मोटी रिश्वत ली।

ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि रिश्वत को वैध दिखाने के लिए इसे “अकोमोडेशन एंट्री” के रूप में दर्ज किया गया। साथ ही तलाशी के दौरान 76.50 लाख कैश, 8 बैंक अकाउंट (35 लाख) और कई फर्जी दस्तावेज व डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए।

 

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