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चूरू में लेफ्टिनेंट जनरल सागत सिंह की प्रतिमा का अनावरण, ओम बिरला ने दी श्रद्धांजलि

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 चूरू- ओम बिरला ने आज राजस्थान के चूरू में अदम्य योद्धा, स्वर्गीय लेफ्टिनेंट जनरल सागत सिंह राठौड़ की प्रतिमा के अनावरण समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर ओम प्रकाश माथुर, भजनलाल शर्मा, भागीरथ चौधरी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

लेफ्टिनेंट जनरल सागत सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ओम  बिरला ने कहा कि उनका जीवन साहस, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा का प्रेरणादायक उदाहरण है। द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीय सेना के साथ उनके पराक्रम से लेकर गोवा मुक्ति आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराने तक, उनका योगदान अत्यंत उल्लेखनीय रहा। नाथू ला सीमा पर उनके साहसिक निर्णयों ने देश की सीमाओं को मजबूत किया, और 1971 के युद्ध में ढाका में पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे बांग्लादेश के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

राजस्थान की वीरता और देशभक्ति की परंपरा का उल्लेख करते हुए ओम  बिरला ने कहा कि राज्य का प्रत्येक परिवार राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो युवाओं को देशसेवा के लिए प्रेरित करेगी।

लोकसभा अध्यक्ष ने आगे कहा कि सागत सिंह की वीरता और विरासत पूरे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय है। उनका जीवन सिखाता है कि साहस, दृढ़ संकल्प और समर्पण के साथ कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से ऐसे महान वीरों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

सीआरपीएफ शौर्य दिवस पर शहीदों को अमित शाह ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

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नई दिल्ली- केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) के शौर्य दिवस के अवसर पर वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके अदम्य साहस एवं बलिदान को नमन किया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश में अमित शाह ने कहा कि सीआरपीएफ के बहादुर जवानों ने देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए जो सर्वोच्च बलिदान दिया है, वह हमेशा देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा, “सीआरपीएफ शौर्य दिवस पर हमारे वीर जवानों के अदम्य साहस और बलिदान को नमन। 1965 में आज ही के दिन रण ऑफ कच्छ के सरदार पोस्ट पर सीआरपीएफ के निर्भीक जवानों ने दुश्मनों के हमलों को विफल करते हुए एक अटूट दीवार की तरह खड़े रहकर भारत के इतिहास में वीरता का स्वर्णिम अध्याय लिखा था।”

गृह मंत्री ने आगे कहा कि यह दिन उन शहीदों की याद दिलाता है, जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। उनका यह बलिदान सदैव देश के लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।

सीआरपीएफ शौर्य दिवस हर वर्ष 9 अप्रैल को मनाया जाता है, जो 1965 में रण ऑफ कच्छ के सरदार पोस्ट पर हुए ऐतिहासिक युद्ध में सीआरपीएफ जवानों की वीरता और पराक्रम की स्मृति में समर्पित है। इस दिन देशभर में शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है और उनके योगदान को याद किया जाता है।

इस अवसर पर पूरे देश ने वीर जवानों के साहस, समर्पण और देशभक्ति को सलाम करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बच्चों को प्रदान किए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज (26 दिसंबर 2025) नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान किए। यह पुरस्कार बच्चों को वीरता, सामाजिक सेवा, पर्यावरण, खेल, कला एवं संस्कृति तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में उनके असाधारण योगदान के लिए दिए गए।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने सभी पुरस्कार विजेता बच्चों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इन बच्चों ने न केवल अपने परिवार और समाज, बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये पुरस्कार देशभर के बच्चों को प्रेरित करेंगे और उन्हें आगे बढ़ने के लिए उत्साहित करेंगे। उन्होंने कहा कि यह सम्मान बच्चों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से प्रदान किया गया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि लगभग 320 वर्ष पूर्व सिख धर्म के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी, तथा उनके चारों पुत्रों ने सत्य और न्याय की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि सबसे छोटे दो साहिबजादों की वीरता को देश-विदेश में सम्मान और श्रद्धा के साथ याद किया जाता है। उन्होंने सत्य और न्याय के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले उन महान बाल वीरों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी देश की महानता तब सुनिश्चित होती है, जब उसके बच्चे देशभक्ति और उच्च आदर्शों से ओत-प्रोत होते हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि बच्चों ने वीरता, कला एवं संस्कृति, पर्यावरण, नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा और खेल जैसे विविध क्षेत्रों में अपनी असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।

उन्होंने कहा कि सात वर्षीय वाका लक्ष्मी प्रज्ञिका जैसी प्रतिभाशाली बच्चों के कारण ही भारत को विश्व पटल पर शतरंज की महाशक्ति माना जाता है। अजय राज और मोहम्मद सिदान पी ने अपनी बहादुरी और सूझबूझ से दूसरों की जान बचाकर प्रशंसा के पात्र बने। वहीं, नौ वर्षीय व्योमा प्रिया और ग्यारह वर्षीय कमलेश कुमार ने दूसरों की जान बचाते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

राष्ट्रपति ने दस वर्षीय श्रवण सिंह का भी उल्लेख किया, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्ध जैसी परिस्थितियों में अपने घर के पास सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों को नियमित रूप से पानी, दूध और लस्सी पहुंचाई। उन्होंने दिव्यांग बालिका शिवानी होसुरु उप्पारा की सराहना की, जिन्होंने आर्थिक और शारीरिक सीमाओं के बावजूद खेल जगत में असाधारण उपलब्धियां हासिल कीं। इसके अलावा वैभव सूर्यवंशी ने क्रिकेट के अत्यंत प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में कई रिकॉर्ड बनाकर देश का नाम रोशन किया।

राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि ऐसे साहसी और प्रतिभाशाली बच्चे निरंतर अच्छे कार्य करते रहेंगे और भारत के भविष्य को उज्ज्वल बनाएंगे।



छोटी सी उम्र में साहिबजादों ने वीरता और गौरव की जो मिसाल पेश की, वह युगों तक प्रेरणा देती रहेगी – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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बलिदान और कर्तव्य के गौरवशाली इतिहास से नई पीढ़ी को परिचित कराना हमारा नैतिक दायित्व - मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री साय वीर बाल रैली में हुए शामिल, हरी झंडी दिखाकर किया रैली का शुभारंभ

साहसिक गतिविधियों और भव्य झांकियों के साथ 5 हजार से अधिक स्कूली छात्र-छात्राओं ने निकाली ऐतिहासिक रैली

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग द्वारा  आयोजित वीर बाल रैली में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने राजधानी रायपुर के मरीन ड्राइव से रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस भव्य रैली में लगभग 5,000 से अधिक स्कूली छात्र-छात्राओं, स्काउट-गाइड एवं एनसीसी कैडेट्स ने सहभागिता की। रैली में सिख परंपरा की वीरता को दर्शाती गतका जैसी साहसिक गतिविधियों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं प्रेरणादायी झांकियों ने उपस्थित जनसमूह को गहरे भावनात्मक स्तर पर जोड़ा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में हम दशम गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों — बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी — के अद्वितीय बलिदान को नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि केवल 9 वर्ष और 7 वर्ष की अल्पायु में साहिबजादों ने जिस अदम्य साहस, आस्था और बलिदान का परिचय दिया, वह मानव इतिहास में अनुकरणीय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी छोटी उम्र में भी साहिबजादे किसी दबाव के आगे नहीं झुके, अपनी आस्था से विचलित नहीं हुए और धर्म एवं सत्य की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। यह बलिदान केवल सिख समाज ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। साय ने कहा कि सिख धर्म की यह गौरवशाली परंपरा हम सभी के लिए गर्व का विषय है। नई पीढ़ी को साहिबजादों के बलिदान और मूल्यों से परिचित कराना हमारा नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2022 से वीर बाल दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की पहल अत्यंत सराहनीय है। इससे बच्चों और युवाओं में शौर्य, साहस और राष्ट्रप्रेम की भावना प्रबल हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम साहिबजादों के जीवन को देखते हैं, तो हमें दशम गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा दिए गए संस्कारों और शिक्षाओं पर गर्व होता है। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना कर अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का मार्ग दिखाया। उनकी प्रेरक पंक्तियाँ “सवा लाख से एक लड़ाऊँ, चिड़ियन ते मैं बाज लड़ाऊँ, तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहलाऊँ।” आज भी हर भारतीय के भीतर साहस और संघर्ष की चेतना जागृत करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पंक्तियाँ हमें सिखाती हैं कि साधन नहीं, साहस और संकल्प ही विजय का मार्ग प्रशस्त करते हैं। भारत की धरती धन्य है, जिसने ऐसे महान गुरुओं और साहिबजादों को जन्म दिया। उन्होंने इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग एवं शिक्षा विभाग को बधाई और शुभकामनाएँ दीं। 

कैबिनेट मंत्री खुशवंत साहेब ने कहा कि साहिबजादों का बलिदान हमें निर्भीकता, सत्यनिष्ठा और राष्ट्रप्रथम की भावना का मार्ग दिखाता है। उनका जीवन हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।

छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा ने साहिबजादों की शहादत के ऐतिहासिक प्रसंगों से उपस्थित जनसमूह को अवगत कराया।

इस अवसर पर रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा, क्रेडा अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी, सीजीएमएससी अध्यक्ष दीपक म्हस्के, छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा सहित सिख समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधि, समाजसेवी एवं विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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