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भारत की बायोइकोनॉमी में ऐतिहासिक उछाल: 2014 के 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 195 अरब डॉलर, वैश्विक बायोटेक हब बनने की ओर देश

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नई दिल्ली- भारत की बायोइकोनॉमी ने पिछले एक दशक में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि यह क्षेत्र 2014 में लगभग 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 195 अरब डॉलर से अधिक तक पहुंच गया है। यह तेज़ वृद्धि भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत बायोटेक्नोलॉजी केंद्र के रूप में स्थापित कर रही है।

वे बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) के 14वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे, जहां देशभर के वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, उद्योग प्रतिनिधि और स्टार्टअप्स शामिल हुए।

 तेज़ी से बढ़ता बायोटेक सेक्टर

मंत्री ने कहा कि बीते एक वर्ष में ही इस क्षेत्र ने 17–18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की है, जो इसे भारत के सबसे तेज़ी से बढ़ते क्षेत्रों में शामिल करता है।

  • 2025 में बायोइकोनॉमी का आकार: 195.3 अरब डॉलर

  • GDP में योगदान: लगभग 4.8%

  • 2020 के बाद से क्षेत्र का आकार: दोगुना से अधिक

यह दर्शाता है कि भारत अब वैश्विक बायोटेक शक्ति के रूप में उभर रहा है।

BIRAC: नवाचार का प्रमुख स्तंभ

BIRAC को इस सफलता का मुख्य आधार बताते हुए मंत्री ने कहा कि यह संस्था:

  • अनुसंधान और उद्योग के बीच सेतु का कार्य करती है

  • स्टार्टअप्स को फंडिंग, मेंटरशिप और इन्क्यूबेशन प्रदान करती है

  • प्रयोगशालाओं से तकनीकों को बाजार तक पहुंचाने में मदद करती है

2030 तक 300 अरब डॉलर का लक्ष्य

भारत ने वर्ष 2030 तक 300 अरब डॉलर की बायोइकोनॉमी का लक्ष्य निर्धारित किया है।
मंत्री ने विश्वास जताया कि वैज्ञानिकों, उद्यमियों और स्टार्टअप्स के सहयोग से यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

 BioE3 नीति: सतत विकास की दिशा

सरकार की BioE3 Policy के तहत:

  • पर्यावरण अनुकूल बायोमैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा

  • क्लाइमेट-रेजिलिएंट कृषि

  • स्मार्ट प्रोटीन और बायो-केमिकल्स

  • कार्बन कैप्चर तकनीक

जैसे क्षेत्रों में नवाचार को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

निवेश और स्टार्टअप्स का विस्तार

  • ₹1 लाख करोड़ का RDI फंड

  • देश में 11,800 से अधिक बायोटेक स्टार्टअप्स सक्रिय

यह भारत के डीप-टेक और नवाचार इकोसिस्टम को मजबूत बना रहा है।

रिपोर्ट्स में दिखी प्रगति

कार्यक्रम के दौरान जारी:

  • India Bioeconomy Report 2026

  • BIRAC Impact Report

में बताया गया कि

  • इस क्षेत्र में रोजगार सृजन बढ़ा है

  • सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं और टिकाऊ तकनीकों का विकास हुआ है

  • स्टार्टअप्स का तेजी से विस्तार हुआ है

युवाओं और नवाचार पर फोकस

मंत्री ने कहा कि सरकार:

  • टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवाओं को अवसर दे रही है

  • महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रही है

 इससे देशभर में इनोवेशन की मजबूत संस्कृति विकसित हो रही है।

 निष्कर्ष

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विज्ञान, उद्योग और नीति-निर्माताओं के संयुक्त प्रयास से
भारत आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर भविष्य में भारत की अर्थव्यवस्था का मुख्य ग्रोथ इंजन बनकर उभरेगा।

Technology Development Board का बड़ा कदम: CAR-NK थेरेपी के लिए East Ocyon Bio Private Limited को समर्थन

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भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत Technology Development Board (TDB) ने गुरुग्राम स्थित East Ocyon Bio Private Limited को “CAR-NK आधारित सेल थेरेपी विकास एवं कठिन-उपचार योग्य ट्यूमर तथा लीशमैनियासिस के लिए क्लिनिकल परीक्षण” परियोजना हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की है। यह परियोजना भारत में पहली बार ऑफ-द-शेल्फ CAR-NK सेल थेरेपी के लिए एक प्लेटफॉर्म-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो उन्नत इम्यूनोथेरेपी और बायोथेरेप्यूटिक्स निर्माण क्षमता को सुदृढ़ करेगा।

CAR-NK (काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर–नेचुरल किलर) सेल थेरेपी पारंपरिक ऑटोलॉगस CAR-T थेरेपी की तुलना में अधिक सुरक्षित और स्केलेबल विकल्प के रूप में उभर रही है। इसमें स्वस्थ दाताओं से NK कोशिकाओं को अलग कर उनका विस्तार किया जाता है और उन्हें रोग-विशिष्ट लक्ष्यों के विरुद्ध CAR संरचना के साथ इंजीनियर किया जाता है। CAR-T थेरेपी के विपरीत, CAR-NK थेरेपी तुरंत उपलब्ध होती है, निर्माण प्रक्रिया सरल होती है, ग्राफ्ट-वर्सस-होस्ट डिजीज (GvHD) का जोखिम कम होता है तथा साइटोकाइन रिलीज सिंड्रोम (CRS) और न्यूरोटॉक्सिसिटी की संभावना भी अपेक्षाकृत कम रहती है।

इस परियोजना के अंतर्गत कंपनी निम्नलिखित विकसित और व्यावसायीकरण करने का प्रस्ताव रखती है:

  • मल्टीपल प्रतिरोधी ठोस ट्यूमर के लिए Anti-PD-L1 CAR-NK सेल थेरेपी

  • लीशमैनियासिस के उपचार हेतु CAR-NK आधारित नई इम्यूनोथेरेप्यूटिक रणनीति

“यह स्वदेशी तकनीकी प्लेटफॉर्म एलोजेनिक, ऑफ-द-शेल्फ CAR-NK और CAR-गामा डेल्टा (γδ) टी-सेल थेरेपी पर आधारित है…”,जिन्हें स्वस्थ दाताओं से प्राप्त कर बड़े पैमाने पर इंजीनियर किया जाएगा, GMP-अनुकूल प्रणालियों के अंतर्गत क्रायो-प्रिजर्व किया जाएगा और बिना रोगी-मैचिंग के उपयोग में लाया जाएगा। यह प्रक्रिया लागत-प्रभावशीलता, तीव्र उपलब्धता और व्यापक पहुंच सुनिश्चित करेगी। प्रमुख नवाचार में PD-L1 लक्षित CAR संरचना को NK कोशिकाओं में गामा-रेट्रोवायरल प्लेटफॉर्म के माध्यम से समाहित किया गया है, जिससे उच्च अभिव्यक्ति दक्षता और दीर्घकालिक कार्यक्षमता सुनिश्चित होती है।

इस अवसर पर TDB के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि यह समर्थन उच्च-प्रभाव वाली उन्नत तकनीकों को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो अपूर्ण चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ स्वदेशी निर्माण क्षमताओं को भी मजबूत करती हैं। उन्होंने कहा कि देश में उन्नत सेल थेरेपी प्लेटफॉर्म विकसित होने से आयातित उपचारों पर निर्भरता कम होगी और भारत अगली पीढ़ी की इम्यूनोथेरेपी में प्रतिस्पर्धी भूमिका निभा सकेगा।

कंपनी के सह-संस्थापक डॉ. रेनु और डॉ. दिनेश कुंडू ने कहा कि TDB का सहयोग CAR-NK प्लेटफॉर्म के क्लिनिकल अनुवाद को गति देगा और प्रयोगशाला नवाचार से मरीजों तक पहुंच के बीच की दूरी को कम करेगा। उनका मानना है कि स्वदेशी, स्केलेबल और किफायती सेल थेरेपी प्लेटफॉर्म का विकास भारत और विश्व स्तर पर कैंसर एवं संक्रामक रोगों के उपचार परिदृश्य में परिवर्तन ला सकता है।

यह परियोजना भारत के बायो-इनोवेशन इकोसिस्टम को मजबूत करने, तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ाने और अत्याधुनिक उपचारों की सुलभता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ की परिकल्पना के अनुरूप है।

डॉ. जितेंद्र सिंह: स्वास्थ्य और फार्मा में AI का विवेकपूर्ण उपयोग और निजी क्षेत्र के सहयोग से भारत बनेगा वैश्विक हेल्थकेयर हब

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नई दिल्ली- विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज जोर देकर कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का विवेकपूर्ण उपयोग स्वास्थ्य और फार्मा क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो सकता है। उन्होंने उभरती जैवप्रौद्योगिकी और जीन थेरेपी परियोजनाओं में निजी क्षेत्र के साथ सरकार के मजबूत सहयोग पर भी प्रकाश डाला।

कन्फेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्री (CII) फार्मा एवं लाइफ साइंसेज समिट 2025 में संबोधन करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सबसे बड़ी परिवर्तन यह है कि सरकार उद्योग तक समान उत्साह के साथ पहुँचती है, जो पूरे सरकारी और उद्योग दृष्टिकोण को दर्शाता है।

मंत्री ने बताया कि AI अब केवल विकल्प नहीं बल्कि निदान, दवा खोज और स्वास्थ्य सेवा वितरण में एक आवश्यक उपकरण बन गया है। हालांकि, इसका उपयोग मानव-केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने कहा, “वास्तविक चुनौती यह है कि हम AI को इस तरह एक हाइब्रिड मॉडल में एकीकृत करें जो तकनीक और मानवीय सहानुभूति का संतुलन बनाए।”

स्वास्थ्य नवाचार के उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि AI-आधारित निदान मॉडल अब कल्चर परीक्षण का समय दिनों से मिनटों तक घटा रहे हैं, और AI संचालित टेलीमेडिसिन परियोजनाएँ स्थानीय बोलियों में दूरदराज के गांवों तक चिकित्सा सेवाओं का विस्तार कर रही हैं, जिससे रोगियों का आत्मविश्वास और परिणाम दोनों बेहतर हो रहे हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की बढ़ती वैज्ञानिक और औद्योगिक क्षमताओं को उजागर करते हुए कहा कि सरकार निजी क्षेत्र के साथ जीन थेरेपी, जैवप्रौद्योगिकी और टीका विकास जैसे सीमांत क्षेत्रों में सक्रिय रूप से भागीदारी कर रही है। उन्होंने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) की कई पहल अब प्रमुख निजी कंपनियों के साथ सहयोग में काम कर रही हैं, ताकि सिंथेटिक एंटीबायोटिक्स, DNA और HPV वैक्सीन, और बायो-निर्माण जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी समाधान विकसित किए जा सकें।

सरकार की व्यापक अनुसंधान पहल का उल्लेख करते हुए मंत्री ने उद्योग नेताओं को हाल ही में घोषित ₹1 लाख करोड़ के R&D फंड का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया, जो स्वास्थ्य, कृषि और अन्य क्षेत्रों में गहरी तकनीक परियोजनाओं का समर्थन करता है। उन्होंने कहा, “पहली बार, सरकार नवाचार के लिए निजी कंपनियों को वित्तपोषित कर रही है — जो भारत की R&D पारिस्थितिकी में एक परिवर्तनकारी कदम है।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में आयातक से निर्यातक में बदलाव की भी सराहना की, विशेष रूप से टीकों, बायोसिमिलर और किफायती मेडिकल उपकरणों में। उन्होंने कहा, “हम अब उच्च गुणवत्ता वाली, लागत-कुशल स्वास्थ्य तकनीक का उत्पादन कर रहे हैं जो दुनिया भर में बाज़ार पा रही हैं।”

अपने संबोधन को समाप्त करते हुए मंत्री ने उद्योग हितधारकों से कहा कि वे केवल अपने क्षेत्रों का नेतृत्व न करें, बल्कि राष्ट्रीय प्रगति में साझेदार के रूप में काम करें और नए सहयोग क्षेत्रों का सुझाव दें। उन्होंने कहा, “विज्ञान, चिकित्सा और प्रौद्योगिकी अब एक एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं, और हमें मिलकर वैश्विक स्वास्थ्य के भविष्य को आकार देने में एक बड़ी भूमिका के लिए तैयार रहना चाहिए।”

TDB ने स्वदेशी 16-वेलेन्ट न्यूमोकोकल वैक्सीन विकास को दी मंज़ूरी, उन्नत टीका निर्माण में बढ़ेगी भारत की आत्मनिर्भरता

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प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार ने नवी मुंबई स्थित टेकइन्वेंशन लाइफकेयर लिमिटेड को स्वदेशी रूप से विकसित 16-वलेंट न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (PCV-16) के वाणिज्यिक स्तर पर cGMP उत्पादन सुविधा स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है। यह परियोजना देश में अगली पीढ़ी के कंजुगेट वैक्सीन के विकास और निर्माण क्षमता को मजबूत करेगी तथा आयातित उत्पादों पर दीर्घकालिक निर्भरता कम करेगी।

इस PCV-16 तकनीक में न्यूमोकोकल बैक्टीरिया के 16 रणनीतिक रूप से चुने गए सीरोटाइप शामिल हैं। इनमें वे प्रकार शामिल हैं जो भारत तथा अन्य निम्न और मध्यम-आय वाले देशों में गंभीर संक्रमण (IPD), एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस और अधिक मृत्यु दर के लिए ज़िम्मेदार हैं। जहाँ 13 सीरोटाइप मौजूदा वैश्विक वैक्सीन प्लेटफॉर्म से मेल खाते हैं, वहीं 12F, 15A और 22F जैसे तीन उभरते सीरोटाइप को जोड़कर इसके कवरेज को और व्यापक बनाया गया है, जिससे इस स्वदेशी वैक्सीन का सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व बढ़ता है।

परियोजना सेरोटाइप प्राथमिकता निर्धारण का वैज्ञानिक पुनर्मूल्यांकन दर्शाती है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और अन्य संवेदनशील समूहों के लिए किफायती प्रतिरक्षण समाधान संभव हो सकेगा। इस तकनीक का प्रारंभिक शोध एवं विकास कार्य फरीदाबाद स्थित BSC BioNEST Bio-Incubator के BSL-2 सुविधा में किया गया, जिसके बाद इसे नवी मुंबई स्थित कंपनी के GMP-संगत हाई-कंटेनमेंट R&D केंद्र ‘HORIZON’ में आगे बढ़ाया गया। अनोखे सेरोटाइप डिजाइन और प्रक्रिया नवाचारों की सुरक्षा के लिए भारतीय पेटेंट भी दायर किया गया है।

TDB के समर्थन से अब यह परियोजना पूर्ण पैमाने पर cGMP निर्माण की ओर बढ़ेगी, जिससे उन्नत कंजुगेट वैक्सीन तकनीकों का देश में ही विकास, प्रमाणीकरण और व्यावसायीकरण संभव होगा। यह पहल भारत की वैक्सीन आत्मनिर्भरता बढ़ाने, घरेलू बायोमैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करने और भविष्य की बहुवैलेंट वैक्सीन प्लेटफॉर्म का मार्ग खोलने में मदद करेगी।

टेकइन्वेंशन लाइफकेयर लिमिटेड अब तक 15 से अधिक पेटेंट दर्ज कर चुकी है और कई स्वदेशी वैक्सीन उम्मीदवारों—जैसे भारत का पहला 6-इन-1 मेनिंगोकोकल कंजुगेट वैक्सीन—पर काम कर रही है। कंपनी को अगली पीढ़ी के वैक्सीन नवाचार में योगदान के लिए राष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा सराहा भी गया है।

इस अवसर पर TDB के सचिव  राजेश कुमार पाठक ने कहा:

“PCV-16 परियोजना उन उच्च-प्रभाव वाली, अगली पीढ़ी की वैक्सीन तकनीकों का प्रतिनिधित्व करती है, जिन्हें TDB समर्थन देना चाहता है। स्वदेशी विकास और बड़े पैमाने के निर्माण को सक्षम बनाकर हम भारत की स्वास्थ्य तैयारी को मजबूत कर रहे हैं तथा घरेलू, विश्वसनीय समाधान उपलब्ध करा रहे हैं।”

टेकइन्वेंशन के प्रवर्तकों ने कहा:

“TDB का सहयोग हमारे PCV-16 को उन्नत R&D से बड़े पैमाने पर, किफायती उत्पादन की ओर तेजी से ले जाएगा। यह साझेदारी भारत और निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए विस्तृत कवरेज वाली वैक्सीन उपलब्ध कराने के हमारे प्रयास की आधारशिला है।”

DBT–उत्तर प्रदेश साझेदारी से भारत का फार्मा और बायोटेक क्षेत्र तेजी से बढ़ेगा, निर्यात 30 बिलियन डॉलर के पार

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भारत के फार्मा निर्यात की वर्तमान मूल्य लगभग 27.8 बिलियन डॉलर है और यह वर्ष के अंत तक 30 बिलियन डॉलर को पार करने की उम्मीद है, यह जानकारी केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी; पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कर्मियों, लोक शिकायतों और पेंशन विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज यहां दी।

मंत्री ने यह भी बताया कि भारत का घरेलू फार्मा बाजार वर्तमान में 60 बिलियन डॉलर का है, जिसे 2030 तक दोगुना होकर 130 बिलियन डॉलर होने की उम्मीद है।

डॉ. जितेंद्र सिंह यह बात भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच एक आधिकारिक एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर समारोह के बाद कह रहे थे। यह समझौता, DBT की एजेंसी BIRAC और उत्तर प्रदेश प्रोमोट फार्मा काउंसिल (UPPPC) के माध्यम से किया गया, और इसका उद्देश्य फार्मा, बायोटेक और MedTech सेक्टर में नवाचार, उद्यमिता और निवेश को तेज करना है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में वर्तमान में लगभग 800 मेडिकल डिवाइस निर्माता हैं और MedTech सेक्टर की वार्षिक वृद्धि 15 से 20% है।

अधिकारियों ने बताया कि इस सहयोग का ध्यान अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने, स्टार्टअप्स के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने, कौशल विकास और ज्ञान साझा करने, SMEs और MSMEs के साथ उद्योग संबंध मजबूत करने और निवेश को प्रोत्साहित करने पर होगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का बायोटेक इकोसिस्टम 2014 में लगभग 50 स्टार्टअप्स से बढ़कर आज 11,000 से अधिक स्टार्टअप्स तक पहुँच गया है, जो देश के आर्थिक और स्वास्थ्य लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की क्षमता दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत अब वैश्विक स्तर पर वैक्सीन का आपूर्तिकर्ता माना जाता है, क्योंकि यहां दुनिया की 60 प्रतिशत से अधिक वैक्सीन का उत्पादन होता है और 200 से अधिक देशों को भारतीय वैक्सीन की खुराक भेजी जाती है।

मंत्री ने इस विकास का श्रेय नीति समर्थन और पूरे सरकारी दृष्टिकोण को दिया, जिसके तहत DBT और उसकी एजेंसियां राज्यों के साथ सहयोग स्थापित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि DBT–UP जैसे साझेदारी मॉडल विकसित भारत 2047 के विज़न को आगे बढ़ाने और “Made in India, Made for the World” के तहत सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं के वैश्विक प्रदाता के रूप में भारत की स्थिति मजबूत करने में मदद करेंगे।

DBT सचिव और BIRAC चेयरमैन डॉ. राजेश एस. गोखले ने कहा कि उत्तर प्रदेश के साथ समझौता “नवाचार पाइपलाइन को खोलने और किफायती तकनीकों को स्केल करने” में मदद करेगा। वरिष्ठ राज्य सरकार के अधिकारियों ने राज्य को फार्मा, बायोटेक और MedTech के केंद्र के रूप में स्थापित करने की प्रतिबद्धता जताई, जिसमें लखनऊ में बायोटेक पार्क, ग्रेटर नोएडा में मेडिकल डिवाइस पार्क और ललितपुर में बल्क ड्रग और फार्मा पार्क जैसी परियोजनाओं का उल्लेख किया।

भारत की बायोइकोनॉमी वर्तमान में लगभग 165 बिलियन डॉलर की है और सरकार ऐसे केंद्र–राज्य सहयोगों को भारत को वैश्विक बायोफार्मा और MedTech हब बनाने के लिए एक अवसर मानती है।

समारोह में उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि राज्य फार्मा, बायोटेक और MedTech के केंद्र के रूप में खुद को स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। DBT-BIRAC के सहयोग से लखनऊ, ग्रेटर नोएडा और ललितपुर में शुरू की गई पहलें स्टार्टअप्स को बढ़ावा देंगी और अनुसंधान सहयोग को बढ़ाकर स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव लाएंगी।

BIRAC के प्रबंध निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार ने कहा कि साझेदारी का फोकस कौशल विकास, इनक्यूबेशन और वाणिज्यीकरण पर होगा, ताकि नवाचार तेज़ी से बाज़ार तक पहुँचें और व्यापक सामाजिक और आर्थिक लाभ उत्पन्न करें।

समारोह में उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव अमित कुमार घोष और DBT, BIRAC और उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे, जो केंद्र और राज्य दोनों की भारत के बायोटेक और फार्मा क्षेत्र को विकसित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

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