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आईएनएस त्रिकंड की केन्या यात्रा संपन्न, भारत-केन्या नौसैनिक सहयोग हुआ मजबूत

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भारतीय नौसेना के अग्रिम पंक्ति के गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस त्रिकंड ने 10 अप्रैल 2026 को केन्या के मोम्बासा बंदरगाह पर अपनी यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की।

यह पोर्ट कॉल पश्चिमी नौसेना कमान के कमांडर-इन-चीफ वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन की केन्या यात्रा के साथ हुआ। इस दौरान एक औपचारिक समारोह में INSAS राइफल और गोला-बारूद केन्या नौसेना को सौंपे गए।

प्रमुख गतिविधियां:

  • छोटे हथियारों की हैंडलिंग और मेंटेनेंस प्रशिक्षण

  • VBSS (Visit, Board, Search and Seizure) अभ्यास

  • क्रॉस-डेक विजिट और संयुक्त अभ्यास

  • सामुदायिक सेवा और खेल प्रतियोगिताएं

  • योग सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम

आईएनएस त्रिकंड के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी ने केन्या नौसेना के अधिकारियों से मुलाकात कर सहयोग को और मजबूत किया।

महत्व:

यह यात्रा भारत के MAHASAGAR विजन (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) को दर्शाती है। इससे भारत और केन्या के बीच नौसैनिक सहयोग, मित्रता और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिलेगी।



भूटान दौरे पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, ऊर्जा सहयोग को मिलेगी नई गति

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नई दिल्ली/थिम्फू- केंद्रीय ऊर्जा तथा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल चार दिवसीय भूटान दौरे पर आज पहुंचे। उनका यह दौरा भारत-भूटान के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों को और गहराई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारत और भूटान के बीच लंबे समय से आपसी विश्वास, समझ और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर आधारित उत्कृष्ट संबंध रहे हैं। यह दौरा विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

दौरे के दौरान मनोहर लाल ने भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

इसके अलावा, उन्होंने भूटान सरकार के ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री ल्योंपो जेम त्शेरिंग के साथ भी बैठक की। इस दौरान जलविद्युत क्षेत्र में चल रहे सहयोग को मजबूत करने, नवीकरणीय ऊर्जा के नए अवसरों और क्षेत्रीय बिजली व्यापार को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।

ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के दायरे को विस्तारित करते हुए, भारत और भूटान ने एक सशक्त द्विपक्षीय संस्थागत ढांचा स्थापित किया है। यह तंत्र दोनों देशों के बीच चल रही और भविष्य की परियोजनाओं की नियमित समीक्षा और समन्वय सुनिश्चित करेगा। सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में गैर-जल ऊर्जा, सीमा-पार ट्रांसमिशन, परियोजना वित्तपोषण, क्षमता निर्माण और संस्थागत साझेदारी शामिल हैं।

इस अवसर पर दोनों देशों के बीच दो महत्वपूर्ण समझौते भी हुए—

  1. पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना का टैरिफ प्रोटोकॉल:

    1020 मेगावाट की इस परियोजना का संयुक्त उद्घाटन 11 नवंबर 2025 को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक द्वारा किया गया था। 19 सितंबर 2025 से इस परियोजना से अतिरिक्त बिजली का भारत को निर्यात शुरू हो चुका है।

  2. रिएक्टिव एनर्जी अकाउंटिंग की कार्यप्रणाली:

    यह तकनीकी ढांचा ग्रिड स्थिरता बढ़ाने, बिजली विनिमय की दक्षता सुधारने और दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार को सुगम बनाने में मदद करेगा।

इस दौरे के दौरान हुई चर्चाएं और समझौते भारत-भूटान संबंधों को नई दिशा देने के साथ-साथ दोनों देशों की समृद्धि और विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

भारत-मंगोलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन

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भारत और मंगोलिया के बीच कूटनीतिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने के अवसर पर “भारत और मंगोलिया के बीच सांस्कृतिक अंतरप्रवाह” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के बृहत्तर भारत एवं क्षेत्र अध्ययन विभाग द्वारा आयोजित किया गया, जो संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था है। सम्मेलन का उद्घाटन आज नई दिल्ली स्थित IGNCA के संवेत ऑडिटोरियम में किया गया।

मंगोलियाई संस्कृति पर विशेष प्रदर्शनी

इस अवसर पर मंगोलियाई संस्कृति की दृश्य प्रस्तुति पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया, जो 25 फरवरी तक IGNCA की दर्शनम गैलरी में आम जनता के लिए खुली रहेगी।
सम्मेलन में भारत, मंगोलिया, अमेरिका, फ्रांस और अन्य देशों के 31 विद्वान भाग ले रहे हैं, और दो दिनों में कुल 75 शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।

मुख्य अतिथि के विचार

मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह सम्मेलन भारत और मंगोलिया के बीच साझा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल धर्म तक सीमित नहीं रहे, बल्कि खगोल विज्ञान, पंचांग विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य और दर्शन जैसे क्षेत्रों तक फैले हैं।

उन्होंने मंगोलियन कांग्यूर को भाषाई और दार्शनिक विद्वत्ता का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड बताया और कहा कि इसके संरक्षण और डिजिटलीकरण से सभ्यतागत संवाद और सांस्कृतिक कूटनीति मजबूत होती है।
उन्होंने प्रधानमंत्री के 2015 मंगोलिया दौरे के दौरान भारत को “आध्यात्मिक पड़ोसी” कहे जाने का उल्लेख किया और कहा कि यह सम्मेलन 70 वर्षों के कूटनीतिक संबंधों और सदियों पुराने सभ्यतागत रिश्तों को दर्शाता है।

संस्कृति मंत्रालय की भूमिका

संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने कहा कि भारत और मंगोलिया साझा सभ्यतागत स्मृति और सांस्कृतिक निकटता पर आधारित साझेदारी बना रहे हैं।
उन्होंने तेल रिफाइनरी परियोजना, रक्षा, शिक्षा और पांडुलिपि संरक्षण जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग का उल्लेख किया।उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट मौसमी और प्रोजेक्ट बृहत्तर भारत के तहत साझा अमूर्त विरासत को दस्तावेज़ करने और यूनेस्को में बहुराष्ट्रीय मान्यता दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मंगोलिया के राजदूत का संबोधन

मंगोलिया के राजदूत गनबोल्ड डम्बाजाव ने भारत को मंगोलिया का “आध्यात्मिक पड़ोसी” और प्रमुख क्षेत्रीय साझेदार बताया।उन्होंने बौद्ध धर्म को दोनों देशों का साझा मूल्य बताया और कांग्यूर और तेंग्यूर जैसे बौद्ध ग्रंथों के संरक्षण और अनुवाद का उल्लेख किया।उन्होंने इनके प्रसार में भारत के सहयोग की सराहना की और दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी पर प्रकाश डाला।

सम्मेलन का उद्देश्य

यह सम्मेलन विद्वानों को भारत और मंगोलिया के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों पर चर्चा का मंच प्रदान करता है, जिसमें:

  • पुरातात्विक संबंध

  • धार्मिक और साहित्यिक परंपराएँ

  • मंगोलिया में संस्कृत पांडुलिपियाँ

  • कला और सांस्कृतिक आदान-प्रदान

  • साझा भौतिक विरासत
    जैसे विषय शामिल हैं।


भारत–ऑस्ट्रेलिया बिज़नेस केस स्टडीज़ संकलन का शुभारंभ: 100 अरब डॉलर की साझेदारी की ओर मजबूत कदम

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नई दिल्ली- भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी), दिल्ली परिसर में “Pitch Perfect Australia-India: Perfect Conditions for a $100 Billion Partnership” शीर्षक से भारत–ऑस्ट्रेलिया बिज़नेस केस स्टडीज़ संकलन का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर नीति-निर्माता, राजनयिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और शिक्षाविद एकत्र हुए और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के अगले चरण पर विचार-विमर्श किया गया।

यह संकलन भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT) और न्यू लैंड ग्लोबल ग्रुप द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया गया है। इसमें भारत और ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत कंपनियों की वास्तविक व्यावसायिक यात्राओं को संकलित किया गया है। प्रकाशन में 30 संगठनों के अनुभव शामिल हैं, जिन्होंने दोनों बाजारों में सफलतापूर्वक प्रवेश किया, विस्तार किया और व्यावसायिक अवसरों का लाभ उठाया।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह संकलन नीति, उद्योग और अकादमिक जगत के लिए अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने कहा,

“ये केस स्टडीज़ इस बात का प्रमाण हैं कि व्यापार समझौते किस प्रकार वास्तविक अवसरों में बदले हैं और व्यवसायों ने उन्हें अपनी वृद्धि के लिए कैसे उपयोग किया है।”

उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल भारत–ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ECTA) से होने वाले लाभों को और सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन (OAM) ने इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि अकादमिक, सरकार और उद्योग को एक मंच पर लाने वाली ऐसी पहलें भारत-ऑस्ट्रेलिया के मजबूत रणनीतिक संबंधों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

संयुक्त सचिव पेटल ढिल्लन ने भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक संबंधों में बढ़ती गति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आईआईएफटी ने शोध-आधारित अंतर्दृष्टि विकसित करने और ईसीटीए के बेहतर उपयोग को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आईआईएफटी के कुलपति प्रो. राकेश मोहन जोशी ने वास्तविक व्यावसायिक अनुभवों को सीखने के संसाधनों में बदलने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सहयोग शोध और व्यवहार के बीच सेतु बनाने तथा वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती भूमिका को समर्थन देने के आईआईएफटी के संकल्प को दर्शाते हैं।

न्यू लैंड ग्लोबल ग्रुप, ऑस्ट्रेलिया के संस्थापक एवं सीईओ दीपेन रुघानी ने द्विपक्षीय जुड़ाव को गहरा करने में व्यावसायिक केस स्टडीज़ की भूमिका पर बल दिया। वहीं, कार्यकारी निदेशक नताशा झा भास्कर ने दोनों बाजारों में कार्यरत कंपनियों की सफलता की कहानियां और उनसे मिले सबक प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम का समापन सरकार, व्यापार संगठनों और दोनों देशों में कार्यरत कंपनियों के प्रतिनिधियों की सहभागिता वाली पैनल चर्चा तथा नेटवर्किंग सत्र के साथ हुआ।

राजदूत अनिल वाधवा ने इस केस संकलन की सराहना करते हुए इसे भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग को सशक्त बनाने की दिशा में एक सार्थक कदम बताया।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक संबंधों को और गहरा करने की दिशा में यह संकलन व्यवसायों, नीति-निर्माताओं और शोधकर्ताओं के लिए एक व्यावहारिक संसाधन के रूप में कार्य करेगा, जो अवसरों की पहचान, चुनौतियों के समाधान और सफल सीमा-पार सहयोग को उजागर करेगा।

भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT) की स्थापना वर्ष 1963 में भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत की गई थी। वर्ष 2002 में इसे डीम्ड-टू-बी-यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त हुआ। यह संस्थान शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान और परामर्श के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में क्षमता निर्माण के लिए समर्पित एक प्रमुख संस्था है।

भारत और नीदरलैंड्स के बीच रक्षा साझेदारी को मजबूत करने के लिए मंत्रियों की बैठक

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में नीदरलैंड्स के विदेश मंत्री डेविड वैन वील से भेंट की, जिसमें दोनों देशों के बीच मजबूत और बढ़ती रक्षा साझेदारी को पुनः पुष्टि की गई। दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन के प्राथमिक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने रणनीतिक साझेदारी के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में रक्षा सहयोग को विकसित करने के उद्देश्य से सैन्य-से-सैन्य सहयोग को बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दोहराया।

चर्चाओं में भारत और नीदरलैंड्स की साझा प्रतिबद्धता को उजागर किया गया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र स्वतंत्र, खुले, समावेशी और नियम-आधारित होना चाहिए। मंत्रियों ने दोनों देशों के रक्षा उद्योगों को जोड़ने और विशेष रूप से निच तकनीक के क्षेत्र में निकट रक्षा साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और नीदरलैंड्स के भारत में राजदूत मेरिसा गेरार्ड्स की उपस्थिति में रक्षा सहयोग पर एक समझौता पत्र (Letter of Intent) का आदान-प्रदान किया गया।

दोनों देश तकनीकी सहयोग, प्लेटफ़ॉर्म और उपकरणों के सह-उत्पादन और सह-विकास के लिए रक्षा औद्योगिक रोडमैप विकसित करके पहचाने गए क्षेत्रों में रक्षा सहयोग की संभावनाओं का अन्वेषण करने का इरादा रखते हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों देशों के बीच जन-संपर्क संबंध बहुत मजबूत हैं, और नीदरलैंड्स में बड़ी भारतीय प्रवासी समुदाय एक जीवित सेतु के रूप में कार्य कर रही है, जो मित्रता के बंधनों को और मजबूत करती है।


भारत–स्लोवेनिया JCTEC का 10वां सत्र नई दिल्ली में सम्पन्न

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भारत–स्लोवेनिया व्यापार एवं आर्थिक सहयोग संयुक्त समिति (JCTEC) के 10वें सत्र का आयोजन नई दिल्ली में हुआ। यह बैठक भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव साकेत कुमार और स्लोवेनिया के विदेश और यूरोपीय मामलों के मंत्रालय में आर्थिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कूटनीति के महानिदेशक पीटर जापेल्ज़ की सह-अध्यक्षता में संपन्न हुई।

यह सत्र भारत और स्लोवेनिया के बीच वर्तमान आर्थिक संबंधों की समीक्षा, प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने और व्यापार एवं निवेश के लिए एक अग्रदृष्टि-आधारित रोडमैप तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

पिछले कई वर्षों में भारत और स्लोवेनिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार निरंतर बढ़ोतरी दर्शाता रहा है, जो इस साझेदारी की गहराई और मजबूती को प्रतिबिंबित करता है।

स्लोवेनिया की मध्य यूरोप के चौराहे पर स्थित रणनीतिक स्थिति और यूरोप के साथ भारत की बढ़ती भागीदारी, दोनों देशों के लिए क्षेत्रों को और नज़दीक लाने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है। भौगोलिक और आर्थिक हितों का यह संगम व्यापार, प्रौद्योगिकी, नवाचार और संपर्कता (कनेक्टिविटी) में सहयोग को और मजबूत करने का ठोस आधार है।

बैठक के दौरान वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिदृश्य की व्यापक समीक्षा की गई, साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों का मूल्यांकन भी किया गया। कृषि, रसायन एवं फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य, परिवहन, ऊर्जा, पर्यटन, MSMEs, तथा आयुर्वेद एवं पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने एक संतुलित और परस्पर लाभकारी भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के शीघ्र निष्कर्ष पर आशावाद व्यक्त किया।

अपनी यात्रा के दौरान,पीटर जापेल्ज़ ने भारत सरकार के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की।

10वें JCTEC सत्र ने भारत और स्लोवेनिया की मजबूत आर्थिक साझेदारी के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्टि की, जो आपसी विश्वास, साझा मूल्यों और दीर्घकालिक मित्रता पर आधारित है। यह सत्र यूरोप और भारत के बीच व्यापक सहयोग के लिए एक सुदृढ़ आधार भी स्थापित करता है।


भारत–दक्षिण अफ्रीका संबंध मजबूत: PM मोदी और राष्ट्रपति रामाफोसा की G20 के दौरान द्विपक्षीय मुलाकात

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माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जोहान्सबर्ग में G20 शिखर सम्मेलन के दौरान दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति महामहिम सिरिल रामाफोसा से मुलाकात की।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति रामाफोसा का गर्मजोशी भरे स्वागत और सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका द्वारा नई दिल्ली G20 शिखर सम्मेलन में लिए गए निर्णयों को आगे बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की।

भारत–दक्षिण अफ्रीका के ऐतिहासिक संबंधों को याद करते हुए दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और व्यापार एवं निवेश, खाद्य सुरक्षा, कौशल विकास, खनन, युवा आदान–प्रदान और जनता से जनता के संबंध सहित विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।

नेताओं ने दक्षिण अफ्रीका में भारतीय कंपनियों की बढ़ती उपस्थिति का स्वागत किया और बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी, नवाचार, खनन और स्टार्ट-अप क्षेत्र में पारस्परिक निवेश को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने भारत में दक्षिण अफ्रीकी चीता पुनर्वास के लिए राष्ट्रपति रामाफोसा को धन्यवाद दिया और उन्हें भारत की पहल इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस में शामिल होने का आमंत्रण दिया।

दोनों नेताओं ने ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने के लिए संयुक्त रूप से कार्य करने पर सहमति जताई। इस संदर्भ में, प्रधानमंत्री ने IBSA नेताओं की बैठक आयोजित करने की दक्षिण अफ्रीका की पहल की प्रशंसा की। राष्ट्रपति रामाफोसा ने 2026 में भारत की आगामी BRICS अध्यक्षता के लिए पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।

आईएनएस सावित्री मोज़ाम्बिक के पोर्ट बेइरा पहुंचा, भारत-मोज़ाम्बिक नौसेनाओं के बीच सहयोग को करेगा मजबूत

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भारतीय नौसेना का ऑफशोर पेट्रोल पोत (OPV) आईएनएस सावित्री हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में अपनी तैनाती के हिस्से के रूप में मोज़ाम्बिक के पोर्ट बेइरा पहुँचा। पोत का स्वागत मोज़ाम्बिक नौसेना के कर्मियों द्वारा गर्मजोशी और औपचारिकता के साथ किया गया, जो दोनों देशों के गहरे ऐतिहासिक संबंधों और सशक्त समुद्री सहयोग को दर्शाता है।

अपनी यात्रा के दौरान, दोनों नौसेनाओं के कर्मी संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर आदान-प्रदान में भाग लेंगे, जिनका उद्देश्य पारस्परिक सहयोग और भविष्य की संयुक्त तैनातियों के लिए इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाना है। प्रशिक्षण सत्रों में नेविगेशन, विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) निगरानी, VBSS अभ्यास, क्षति नियंत्रण और अग्निशमन अभ्यास पर चर्चा और व्यावहारिक अनुभव शामिल होंगे।

पोत की सामुदायिक पहुंच गतिविधियों के तहत, आईएनएस सावित्री स्थानीय नागरिकों के लिए ओपन शिप विजिट आयोजित करेगा, जिससे उन्हें भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमताओं और समृद्ध समुद्री परंपराओं को जानने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा, स्थानीय समुदाय के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविर भी आयोजित किया जाएगा, जिससे मित्रता और सद्भावना के संबंध और मजबूत होंगे।

यात्रा का समापन संयुक्त योग सत्रों और फुटसाल (इनडोर फुटबॉल) जैसे मैत्रीपूर्ण खेल मुकाबलों के साथ होगा, जिससे दोनों नौसेनाओं के कर्मियों के बीच सौहार्द और टीम भावना को प्रोत्साहन मिलेगा।

यह बंदरगाह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका को एक विश्वसनीय और प्राथमिक सुरक्षा साझेदार (Preferred Security Partner) के रूप में पुनः स्थापित करती है।

भारत-वियतनाम रक्षा नीति वार्ता के 15वें संस्करण का हनोई में आयोजन

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भारत-वियतनाम रक्षा नीति वार्ता (डीपीडी) का 15वां संस्करण आज, 10 नवंबर 2025 को हनोई में आयोजित हुआ। इस वार्ता की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा उपमंत्री वरिष्ठ लेफ्टिनेंट जनरल होआंग ज़ुआन चिएन ने की। दोनों पक्षों ने हाइड्रोग्राफी सहयोग, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण, संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों, बंदरगाह यात्राओं, जहाज दौरों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और शिपयार्ड उन्नयन जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा, वास्तविक समय सूचना आदान-प्रदान, सैन्य चिकित्सा तथा विशेषज्ञों के आदान-प्रदान जैसे नए उभरते क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने का निर्णय लिया। इसके साथ ही, दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर विचार-विमर्श भी किया।

वार्ता के दौरान, पनडुब्बी खोज, बचाव सहायता और सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए गए, जो इस क्षेत्र में आपसी सहयोग के लिए एक ढांचा प्रदान करेगा।

इसके अतिरिक्त, रक्षा उद्योग सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक आशय पत्र (Letter of Intent) पर भी हस्ताक्षर किए गए। इसमें तकनीकी हस्तांतरण, उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग, संयुक्त अनुसंधान, संयुक्त उद्यम, रक्षा उत्पादन के लिए उपकरणों की खरीद, विशेषज्ञों का आदान-प्रदान तथा उपकरणों की डिजाइन और निर्माण को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया।

भारत के रक्षा उत्पादन विभाग और वियतनाम के रक्षा उद्योग के महा विभाग के बीच चल रहे रक्षा उद्योग सहयोग के कार्यान्वयन व्यवस्था के अंतर्गत, दोनों पक्षों ने दिसंबर 2025 में अगली बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया।

वार्ता के बाद रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग से मुलाकात की और डीपीडी से संबंधित प्रमुख निर्णयों की जानकारी दी। डीपीडी का 16वां संस्करण 2026 में भारत में आयोजित किया जाएगा।

रक्षा नीति वार्ता भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी की समीक्षा और उसे दिशा देने का प्रमुख तंत्र है तथा यह भारत-वियतनाम संयुक्त दृष्टि वक्तव्य 2030 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वियतनाम, भारत की एक्ट ईस्ट नीति और इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। रक्षा सचिव की वियतनाम यात्रा ने दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और सुदृढ़ किया है।

पीयूष गोयल की न्यूज़ीलैंड यात्रा: भारत–न्यूज़ीलैंड व्यापार संबंधों को मज़बूत करने और FTA वार्ताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कदम

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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 5 नवंबर 2025 को न्यूज़ीलैंड में होंगे, जहाँ वे न्यूज़ीलैंड के वाणिज्य मंत्री महामहिम टॉड मैकक्ले के साथ चल रही मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ताओं पर चर्चा करेंगे। यह यात्रा दोनों देशों की इस साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि वे FTA प्रक्रिया को तेज़ी से आगे बढ़ाते हुए एक व्यापक और पारस्परिक रूप से लाभकारी आर्थिक साझेदारी को मज़बूत करना चाहते हैं।

भारत–न्यूज़ीलैंड FTA वार्ताओं का चौथा दौर 3 नवंबर 2025 को ऑकलैंड में शुरू हुआ, जो दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संवाद को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस यात्रा के दौरान,गोयल व्यापार, निवेश और नवाचार के संबंधों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई उच्च-स्तरीय कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इनमें न्यूज़ीलैंड के प्रमुख व्यापारिक समुदाय के सदस्यों और भारत से आए व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल के साथ विशेष संवाद भी शामिल होगा, जिससे दोनों देशों के निजी क्षेत्रों के बीच अधिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

ऑकलैंड में न्यूज़ीलैंड–इंडिया बिजनेस फोरम दोपहर में आयोजित किया जाएगा, जिसके बाद भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों के साथ एक सामुदायिक संवाद कार्यक्रम होगा।

इसके अलावा, फायरसाइड चैट का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें पीयूष गोयल और न्यूज़ीलैंड के वाणिज्य मंत्री महामहिम टॉड मैकक्ले भाग लेंगे। इस सत्र का संचालन ऑकलैंड बिजनेस चैंबर के सीईओ साइमन ब्रिजेस द्वारा किया जाएगा। संवाद का मुख्य विषय होगा — व्यापार सहयोग को आगे बढ़ाना, आर्थिक एकता के नए क्षेत्रों की पहचान करना, और नवाचार, प्रौद्योगिकी व सतत विकास के क्षेत्रों में सहयोग को प्रोत्साहित करना।

इन कार्यक्रमों में उद्योग जगत के नेताओं, वाणिज्यिक चैंबर्स और न्यूज़ीलैंड सरकार के प्रतिनिधियों की भागीदारी अपेक्षित है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों और एक मज़बूत, भविष्य-उन्मुख आर्थिक साझेदारी की साझा दृष्टि को और सुदृढ़ करेगा।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागीन खुरेलसुख से की भेंट

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज नई दिल्ली में मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागीन खुरेलसुख से भेंट की। दोनों नेताओं ने यह स्वीकार किया कि दोनों लोकतंत्र क्षेत्र की शांति और समृद्धि में साझा हित रखते हैं और उन्होंने आशा व्यक्त की कि उनकी बैठक संबंधों को नए क्षेत्रों में और विविध बनाएगी।

रक्षा मंत्री और मंगोलियाई राष्ट्रपति ने बताया कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी है और रक्षा सहयोग इस साझेदारी का मुख्य स्तंभ है। द्विपक्षीय रक्षा संबंधों का दायरा समय के साथ विस्तारित हुआ है, जिसमें संयुक्त कार्य समूह की बैठकें, सैन्य-से-सैन्य आदान-प्रदान, उच्च स्तरीय दौरे, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण कार्यक्रम और द्विपक्षीय अभ्यास शामिल हैं।

मंगोलियाई राष्ट्रपति ने साइबर सुरक्षा और मंगोलियाई सशस्त्र बलों की क्षमता बढ़ाने में भारत के सहयोग के लिए भारत का धन्यवाद किया। उन्होंने याद दिलाया कि जब राजनाथ सिंह गृह मंत्री थे, तब उन्होंने तेल रिफाइनरी परियोजना का भूमि-पूजन समारोह किया था और उन्होंने इसे उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को मंगोलिया आने का आमंत्रण दिया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 2018 और 2022 में पूर्व में मंगोलिया के अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति खुरेलसुख द्वारा दिखाए गए गर्मजोशी भरे स्वागत को याद किया।

राष्ट्रपति उखनागीन खुरेलसुख का भारत का आधिकारिक दौरा 13-16 अक्टूबर 2025 तक जारी रहेगा, जो भारत-मंगोलिया राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ के अवसर पर हो रहा है।


मंगोलिया के राष्ट्रपति ने भारत संसद का दौरा किया, द्विपक्षीय सहयोग और साझा सांस्कृतिक विरासत पर हुई चर्चा

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आज मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख़ उखना और उनके प्रतिनिधिमंडल ने भारत की संसद का दौरा किया। उन्हें लोक सभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने मकर द्वार पर गर्मजोशी से स्वागत किया।

प्रतिनिधिमंडल ने संसद भवन की वास्तुकला, कलात्मक शिल्पकला और सांस्कृतिक धरोहर की सराहना की और नई संसद भवन में भारत की सजीव लोकतांत्रिक परंपराओं को देखा।

दोनों नेताओं के बीच उपजाऊ द्विपक्षीय बातचीत हुई।ओम बिड़ला ने कहा कि भारत और मंगोलिया अपने 70वें राजनयिक संबंध वर्ष का जश्न मना रहे हैं। उन्होंने सहयोग की प्रगति की सराहना की और पिछले सात दशकों में दोनों देशों के बीच सहयोग के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। अपनी 2023 की मंगोलिया यात्रा का उल्लेख करते हुए, उन्होंने दोनों देशों की प्रतिबद्धता को सशक्त पार्लियामेंटरी लोकतंत्र के लिए दोहराया।

ओम बिड़ला ने कहा कि भारत-मंगोलिया सहयोग में रक्षा, स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी और आर्थिक क्षेत्र में बड़े अवसर हैं। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय संबंध लोकतंत्र, धर्म और विकास (3D) के सिद्धांतों पर आधारित हैं और दोनों देशों के बीच गहन ऐतिहासिक और आध्यात्मिक संबंध हैं।

साझा बौद्धिक विरासत पर चर्चा करते हुए,ओम बिड़ला ने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएँ समय की सीमा से परे हैं और आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने “बहुजन हिताय बहुजन सुखाय” के सिद्धांत का उल्लेख किया, जो आज भी भारत की नीति निर्धारण में मार्गदर्शक है। उन्होंने लोक सभा में धर्म चक्र का उल्लेख किया, जो धर्म आधारित शासन का प्रतीक है।

नई संसद भवन पर प्रकाश डालते हुए, ओम बिड़ला ने बताया कि COVID-19 महामारी के बावजूद भवन का निर्माण रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि भवन में भारत के 1.4 अरब लोगों की आकांक्षाएँ और बौद्ध दर्शन के तत्व झलकते हैं। एक गैलरी में “बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघं शरणं गच्छामि” के श्लोक और “प्रकाश जैसी बनें” की प्रेरणाएँ प्रदर्शित हैं।

पार्लियामेंटरी सहयोग बढ़ाने की बात करते हुए, ओम बिड़ला ने कहा कि दोनों देशों के संसदों के बीच नियमित आदान-प्रदान द्विपक्षीय संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ है। उन्होंने 2023 में मंगोलिया में हस्ताक्षरित साझा समझौते (MoU) का उल्लेख किया और मंगोलियाई सांसदों को भारत के PRIDE संस्थान में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के अवसरों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।

महिलाओं की भागीदारी पर जोर देते हुए,ओम बिड़ला ने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में महिलाओं की प्रतिनिधित्व में वृद्धि की है। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान स्थानीय निकायों में 33% आरक्षण सुनिश्चित करता है, जबकि कई राज्यों में इसे 50% तक बढ़ाया गया है। उन्होंने “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” का भी उल्लेख किया, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण सुनिश्चित करता है।

मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसु ख़ उखना ने ओम बिड़ला की 2023 की मंगोलिया यात्रा को याद किया और उनके नेतृत्व की पार्लियामेंटरी सहयोग में भूमिका की सराहना की। उन्होंने भारत को मंगोलिया का “आध्यात्मिक पड़ोसी और महान मित्र” बताया और भारत की तेजी से बढ़ती आर्थिक शक्ति और वैश्विक शांति में योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने भारत-मंगोलिया के सहयोग और वैश्विक मंचों पर साझेदारी की आशा व्यक्त की।


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