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भूपेश बघेल के खिलाफ चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में बड़ी सुनवाई

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नई दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़ी चुनाव याचिका को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें बघेल के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करने से इनकार किया गया था।

इस फैसले के बाद अब चुनाव याचिका पर आगे कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकेगी। याचिका में भूपेश बघेल के चुनाव को चुनौती दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि बघेल का चुनाव अवैध घोषित कर दिया गया है। फिलहाल मामला केवल याचिका की सुनवाई आगे बढ़ने से जुड़ा है। अब संबंधित आरोपों और दावों पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सुनवाई होगी।

इस मामले पर छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी नजर बनी हुई है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा: राम मंदिर चंदा विवाद पर सदन में भारी हंगामा, विपक्षी दल का वॉकआउट

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे के मुद्दे पर सदन में जबरदस्त राजनीतिक टकराव देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक हाथों में पोस्टर लेकर विधानसभा पहुंचे और इस विषय पर तत्काल चर्चा की मांग को लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हुई तीखी बहस, नारेबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के कारण सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित हुई।


जनभावनाओं और पारदर्शिता का हवाला

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने स्थगन प्रस्ताव लाते हुए कहा कि वे यह मुद्दा किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि प्रदेश के करोड़ों रामभक्तों की आस्था का प्रतिनिधित्व करते हुए उठा रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया,

"देशभर के श्रद्धालुओं ने अटूट विश्वास के साथ राम मंदिर निर्माण के लिए समर्पण राशि (चंदा) दी थी। यदि उस राशि के रखरखाव या उपयोग को लेकर कोई सवाल उठ रहे हैं, तो इस पर सदन में खुली चर्चा और पारदर्शिता बेहद जरूरी है।"

कांग्रेस विधायकों ने इस विषय पर काम रोको (स्थगन) प्रस्ताव के माध्यम से विस्तृत चर्चा कराने की मांग पर जोर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी विपक्ष का पक्ष रखते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों ने राम मंदिर के लिए श्रद्धापूर्वक योगदान दिया है। जनता से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा की अनुमति न देना लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।

हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं: सत्ता पक्ष

दूसरी ओर, सत्ता पक्ष ने विपक्ष की इस मांग का कड़ा विरोध किया। संसदीय कार्य मंत्री अजय चंद्राकर ने नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ा मामला पूरी तरह से केंद्रीय और स्वायत्त विषय है, जो राज्य सरकार के प्रशासनिक या विधायी दायरे में नहीं आता। उन्होंने कहा कि विधानसभा केवल उन्हीं विषयों पर चर्चा कर सकती है जो राज्य सूची के अंतर्गत आते हों, इसलिए इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

विधानसभा अध्यक्ष ने खारिज किया प्रस्ताव

दोनों पक्षों के बीच बढ़ते गतिरोध को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने व्यवस्था दी कि प्रस्तुत स्थगन प्रस्ताव नियमों के अनुरूप राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से संबंधित नहीं है। इस आधार पर उन्होंने विपक्ष के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। अध्यक्ष के इस निर्णय के बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन में नारेबाजी शुरू कर दी और विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट किया।

 

पंजाब कांग्रेस में घमासान: बघेल से बैठक से पहले चन्नी के तेवर सख्त, बोले- 'तेल देखिए और तेल की धार देखिए'

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 चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान को सुलझाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। संकट दूर करने के लिए पंजाब पहुंचे प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल आज (शनिवार) पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं के साथ चंडीगढ़ में एक महत्वपूर्ण बैठक कर रहे हैं। इस बैठक में चन्नी सहित करीब 50 नेता शामिल होने पहुंचे हैं।


हालांकि, इस बैठक से ठीक पहले पूर्व सीएम चन्नी के तेवर काफी तल्ख नजर आए। मीटिंग में जाने से पहले मीडिया से बात करते हुए चन्नी ने बड़े ही आक्रामक अंदाज में कहा, "तेल देखिए और तेल की धार देखिए, फिर बात करेंगे।"

प्रदेश अध्यक्ष को लेकर मचा है बवाल

पंजाब कांग्रेस में यह कलह 1 जुलाई को कांग्रेस आलाकमान द्वारा जारी की गई संगठनात्मक सूची के बाद शुरू हुई। इस सूची में अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, जबकि पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया। चन्नी गुट ने इस सूची पर कड़ी आपत्ति जताते हुए राजा वडिंग के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं और मांग की है कि चन्नी को ही प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी जाए।

कावेरी बीज कंपनी पर किसानों का करोड़ों रुपये बकाया, सीएम और पूर्व सीएम को सौंपा ज्ञापन

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महासमुंद- सिकंदराबाद (तेलंगाना) की कावेरी बीज कंपनी द्वारा छत्तीसगढ़ के किसानों और मजदूरों का भुगतान नहीं करने का मामला सामने आया है। करीब आठ महीने से भुगतान नहीं मिलने से परेशान किसानों के प्रतिनिधि मंडल ने रविवार को परागांव में मुख्यमंत्री विष्णु देव सायऔर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेलको ज्ञापन सौंपा।

दोनों नेताओं से किसानों और मजदूरों का बकाया भुगतान दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई। जानकारी के अनुसार वर्ष 2024-25 के रबी सीजन में सिकंदराबाद (तेलंगाना) की कावेरी बीज कंपनी ने छत्तीसगढ़ के किसानों की जमीन लीज पर लेकर बीज उत्पादन कराया था।किसानों से खेती कराई गई। मजदूरों से कड़ी मेहनत कराई गई। मशीनों का भी उपयोग किया गया। लेकिन अब तक किसानों की लीज राशि और मजदूरों का मेहनताना नहीं दिया गया है। किसानों का मूल बकाया ₹3,23,26,388 है। मजदूरों का मेहनताना ₹7,89,500 है।

जुलाई 2025 से फरवरी 2026 तक 2 प्रतिशत मासिक ब्याज जोड़ने पर कुल बकाया राशि बढ़कर ₹3,84,14,430 हो गई है। प्रतिनिधि मंडल में जिला पंचायत सदस्य जागेश्वर जुगनू चंद्राकर, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही और प्रभावित किसान कृष्ण कुमार चंद्राकर, रोशन चंद्राकर, भीखम चंद्राकर, पंकज चंद्राकर और प्रवीण चंद्राकर शामिल थे।

किसानों ने कहा कि यह केवल पैसों का मामला नहीं है। यह किसानों और मजदूरों की मेहनत और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। भुगतान नहीं मिलने से कई परिवार कर्ज में डूब गए हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। आजीविका पर भी संकट खड़ा हो गया है।

किसानों ने कहा कि शासन-प्रशासन से कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

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