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रूस के बाद भारत बनेगा फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करने वाला दूसरा देश: डॉ. जितेंद्र सिंह

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि रूस के बाद भारत दुनिया का दूसरा देश होगा जो व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करेगा। “स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स” विषय पर सांसदों और विधायकों की कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि भारत ने तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) का विकास कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जिसने 6 अप्रैल 2026 को पहली बार क्रिटिकलिटी प्राप्त की।

यह रिएक्टर Indira Gandhi Centre for Atomic Research (IGCAR) द्वारा विकसित और BHAVINI द्वारा निर्मित है। यह भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत को दर्शाता है। इसमें यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड ईंधन का उपयोग होता है, जो जितना ईंधन खर्च करता है उससे अधिक उत्पन्न करता है। इस उपलब्धि के साथ भारत अपने विशाल थोरियम भंडार के उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता तरुण चुघ ने की। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि भारत को परमाणु रणनीति के तीसरे चरण में थोरियम के उपयोग की दिशा में ले जाती है। पूरी तरह संचालन में आने के बाद भारत, रूस के बाद, व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर चलाने वाला दूसरा देश बन जाएगा।

वर्तमान में केवल रूस ही व्यावसायिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित कर रहा है, जबकि भारत अपने रिएक्टर के कमीशनिंग के उन्नत चरण में है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, जर्मनी और चीन जैसे कई देशों ने पहले प्रयोगात्मक फास्ट रिएक्टर विकसित किए थे, लेकिन इनमें से अधिकांश कार्यक्रम अब बंद हो चुके हैं।

मंत्री ने कहा कि प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की स्थापना भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो परमाणु ईंधन के अधिक कुशल उपयोग को सक्षम बनाता है और थोरियम के उपयोग का मार्ग प्रशस्त करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक में केवल कुछ ही देशों ने प्रगति की है, जिससे भारत को वैश्विक स्तर पर एक विशेष स्थान मिलता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर देकर कहा कि परमाणु ऊर्जा भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और दीर्घकालिक स्थिरता लक्ष्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, खासकर 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने में।

उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों को भविष्य में निरंतर और विश्वसनीय स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता होगी, जहां परमाणु ऊर्जा अपरिहार्य होगी।

मंत्री ने स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs), नीतिगत समर्थन और SHANTI एक्ट जैसी पहलों के महत्व पर भी प्रकाश डाला, जो निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देंगे। “न्यूक्लियर मिशन” के तहत 20,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 2033 तक 5 SMRs स्थापित करने की योजना है।

उन्होंने कहा कि SMRs उद्योगों, घनी आबादी वाले क्षेत्रों, दूरदराज के इलाकों और ग्रिड से दूर क्षेत्रों में बिजली उत्पादन के लिए उपयोगी होंगे।

अंत में, उन्होंने कहा कि परमाणु, नवीकरणीय और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का संतुलित मिश्रण 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

स्वदेशी तकनीक की जीत: भारत का PFBR रिएक्टर हुआ सफल

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भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में, 500 मेगावाट (MWe) प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 6 अप्रैल 2026 को रात 08:25 बजे सफलतापूर्वक पहली क्रिटिकलिटी (नियंत्रित विखंडन श्रृंखला अभिक्रिया की शुरुआत) हासिल की। यह देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्वदेशी परमाणु तकनीक को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह उपलब्धि डॉ. अजीत कुमार मोहंती (सचिव, परमाणु ऊर्जा विभाग एवं अध्यक्ष, परमाणु ऊर्जा आयोग), श्रीकुमार जी. पिल्लई (निदेशक, IGCAR), अल्लू अनंत (CMD-इन-चार्ज, BHAVINI) और  के.वी. सुरेश कुमार (पूर्व CMD, BHAVINI) की उपस्थिति में हासिल की गई। यह सभी मानकों को पूरा करने के बाद संभव हुआ, जिन्हें परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) ने कठोर सुरक्षा समीक्षा के बाद मंजूरी दी थी।

PFBR का डिजाइन और तकनीकी विकास पूरी तरह से इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) द्वारा किया गया, जो परमाणु ऊर्जा विभाग का एक अनुसंधान केंद्र है। इसका निर्माण और संचालन भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) द्वारा किया गया।

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर भारत की दीर्घकालिक परमाणु रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पारंपरिक रिएक्टरों के विपरीत, PFBR में यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग होता है। इसके कोर के चारों ओर यूरेनियम-238 की परत होती है, जो तेज न्यूट्रॉन की मदद से प्लूटोनियम-239 में परिवर्तित हो जाती है। इससे रिएक्टर जितना ईंधन उपयोग करता है, उससे अधिक उत्पन्न करने में सक्षम होता है।

इस रिएक्टर को भविष्य में थोरियम-232 के उपयोग के लिए भी डिजाइन किया गया है, जो परिवर्तित होकर यूरेनियम-233 बनेगा और भारत के परमाणु कार्यक्रम के तीसरे चरण को ऊर्जा प्रदान करेगा।

यह क्षमता देश के सीमित यूरेनियम संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करती है और भविष्य में थोरियम आधारित ऊर्जा उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करती है।

पहली क्रिटिकलिटी हासिल करने के साथ ही भारत अपने तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को साकार करने के और करीब पहुंच गया है। फास्ट ब्रीडर तकनीक वर्तमान रिएक्टरों और भविष्य के थोरियम आधारित रिएक्टरों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती है।

यह उपलब्धि भारत की स्वदेशी डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण क्षमता को दर्शाती है। इस रिएक्टर में उन्नत सुरक्षा प्रणाली, उच्च तापमान तरल सोडियम कूलिंग तकनीक और क्लोज्ड फ्यूल साइकिल का उपयोग किया गया है, जिससे परमाणु सामग्री का पुनर्चक्रण संभव होता है और अपशिष्ट कम होता है।

यह परियोजना वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीशियनों और उद्योग सहयोगियों के समर्पण का परिणाम है, जिन्होंने स्वदेशी तकनीकों और उपकरणों के माध्यम से इसका निर्माण किया। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता को भी दर्शाता है।

ऊर्जा उत्पादन के अलावा, यह कार्यक्रम परमाणु ईंधन चक्र, उन्नत सामग्री, रिएक्टर भौतिकी और बड़े पैमाने की इंजीनियरिंग में देश की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करता है।

जैसे-जैसे भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर विश्वसनीय, कम-कार्बन और उच्च दक्षता वाली ऊर्जा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पहली क्रिटिकलिटी की यह उपलब्धि न केवल एक तकनीकी मील का पत्थर है, बल्कि “विकसित भारत” के लिए एक सतत और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य की दिशा में बड़ा कदम भी है।


भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता विस्तार की रोडमैप और तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम

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सरकार ने वर्ष 2047 तक लगभग 100 गीगावाट (GW) परमाणु विद्युत क्षमता प्राप्त करने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है। वर्तमान में, क्रियान्वयनाधीन परियोजनाओं के क्रमिक पूर्ण होने के साथ परमाणु विद्युत क्षमता को 2031–32 तक लगभग 22 गीगावाट तक बढ़ाने की योजना है। इसके अतिरिक्त, भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (NPCIL) ने 2047 तक परिकल्पित 100 गीगावाट क्षमता में से लगभग 54 गीगावाट का योगदान देने की योजना बनाई है।

भारत में यूरेनियम के सीमित भंडार हैं, जबकि थोरियम के भंडार प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। थोरियम, यूरेनियम के विपरीत, एक उपजाऊ (फर्टाइल) पदार्थ है और इसे परमाणु विखंडन द्वारा ऊर्जा उत्पन्न करने से पहले किसी परमाणु रिएक्टर में विखंडनीय यूरेनियम-233 में परिवर्तित करना आवश्यक होता है। इसे ध्यान में रखते हुए, विभाग द्वारा परिकल्पित तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का एक प्रमुख घटक बना हुआ है, जिसका उद्देश्य सीमित यूरेनियम संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करना तथा दीर्घकालिक एवं सतत ऊर्जा सुरक्षा के लिए प्रचुर थोरियम भंडारों का दोहन करना है।

तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का उद्देश्य घरेलू रूप से उपलब्ध विखंडनीय संसाधनों को बढ़ाना है। इसके प्रथम चरण में प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग दाबित भारी जल रिएक्टरों (PHWRs) में किया जाता है। दूसरे चरण में, PHWRs के प्रयुक्त ईंधन से प्राप्त प्लूटोनियम का उपयोग तीव्र प्रजनक रिएक्टरों (Fast Breeder Reactors – FBRs) में किया जाता है। इसके पश्चात, पर्याप्त FBR स्थापित क्षमता प्राप्त होने के बाद, प्लूटोनियम से ईंधनयुक्त प्रजनक रिएक्टरों में थोरियम से उत्पन्न विखंडनीय यूरेनियम-233 का उपयोग करते हुए थोरियम का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाएगा।

भारतीय भावी नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) वर्तमान में तमिलनाडु के कलपक्कम में 500 मेगावाट विद्युत (MWe) क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) परियोजना का कमीशनिंग कार्य कर रहा है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने तमिलनाडु के कलपक्कम में 2 x 500 MWe क्षमता वाली जुड़वां इकाइयों—FBR-1 और FBR-2—परियोजनाओं के लिए पूर्व-परियोजना गतिविधियाँ प्रारंभ करने की स्वीकृति प्रदान की है।

इन परियोजनाओं के लिए लागू मानकों के अनुसार पर्यावरणीय एवं सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन किए जाएंगे। BHAVINI नियोजित कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) एवं जनसंपर्क गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय जनसमुदाय का विश्वास अर्जित करने हेतु पर्याप्त कदम उठा रहा है। इन जनसंपर्क गतिविधियों के अंतर्गत, परमाणु ऊर्जा के लाभों तथा PFBR की सुरक्षा विशेषताओं के बारे में स्थानीय नागरिकों और आसपास के विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के छात्रों को जानकारी प्रदान की जाती है।

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