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आयुष्मान भारत: समग्र स्वास्थ्य कवरेज, सुदृढ़ अवसंरचना और डिजिटल स्वास्थ्य की दिशा में परिवर्तनकारी पहल

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आयुष्मान भारत चार प्रमुख घटकों से मिलकर बना है:

(क) आयुष्मान आरोग्य मंदिर

आयुष्मान भारत का पहला घटक 1,50,000 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स (AB-HWCs) की स्थापना से संबंधित है, जिन्हें अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में जाना जाता है। इसके अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्थित उप-स्वास्थ्य केंद्रों (SHCs) तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) को उन्नत कर समुदाय के निकट समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इन केंद्रों का उद्देश्य समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (CPHC) प्रदान करना है, जिसके तहत प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य (RCH) तथा संक्रामक रोग सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है और गैर-संचारी रोगों जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह तथा मौखिक, स्तन एवं गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की जांच व उपचार सेवाएँ जोड़ी गई हैं। इसके अतिरिक्त मानसिक स्वास्थ्य, ईएनटी, नेत्र, मुख स्वास्थ्य, वृद्धावस्था, उपशामक देखभाल, ट्रॉमा केयर तथा योग जैसी स्वास्थ्य संवर्धन गतिविधियाँ भी चरणबद्ध रूप से शामिल की गई हैं।

आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल जीवन-चक्र दृष्टिकोण अपनाते हुए रोकथाम, संवर्धन, उपचार, पुनर्वास और उपशामक सेवाओं को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर तक जोड़ती है। किसी व्यक्ति की जीवन-कालीन स्वास्थ्य आवश्यकताओं का लगभग 80–90% भाग प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से पूरा होता है, जिससे बेहतर स्वास्थ्य परिणाम एवं जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।

प्राथमिक स्वास्थ्य टीम द्वारा समुदाय स्तर पर जनसंख्या सूचीकरण, रोगों की प्रारंभिक पहचान, समय पर रेफरल, उपचार अनुपालन तथा फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाता है। आवश्यक दवाइयाँ एवं जांच सुविधाएँ समुदाय के निकट उपलब्ध कराकर सुदृढ़ एवं लचीली प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण किया जा रहा है।

उपलब्धियाँ (30.11.2025 तक):

  • 1,81,873 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित

  • 12 सेवाओं का विस्तारित पैकेज एवं टेली-परामर्श सुविधा

  • कुल 494.71 करोड़ लाभार्थी आगमन (फुटफॉल)

  • 41.93 करोड़ टेली-परामर्श

  • उच्च रक्तचाप की 39.50 करोड़ जांच

  • मधुमेह की 36.70 करोड़ जांच

  • मौखिक कैंसर की 32.40 करोड़ जांच

  • महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की 15.23 करोड़ जांच

  • महिलाओं में स्तन कैंसर की 8.37 करोड़ से अधिक जांच

  • 6.54 करोड़ योग/वेलनेस सत्र आयोजित

(ख) आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY)

आयुष्मान भारत का दूसरा स्तंभ प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना है, जो विश्व की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना है। इसके अंतर्गत प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का निःशुल्क स्वास्थ्य कवरेज द्वितीयक एवं तृतीयक उपचार हेतु प्रदान किया जाता है।

प्रमुख तथ्य:

  • 12 करोड़ परिवार योजना के अंतर्गत आच्छादित

  • कई राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने संसाधनों से लाभार्थी आधार का विस्तार किया

  • फरवरी 2024 से लगभग 37 लाख आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएँ शामिल

  • 42.48 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी (1 दिसम्बर 2025 तक)

  • 10.98 करोड़ अस्पताल में भर्ती, कुल लागत ₹1.60 लाख करोड़

  • 32,574 अस्पताल (15,532 निजी सहित) पैनल में

  • महिलाओं की भागीदारी:

    • आयुष्मान कार्ड – लगभग 49%

    • अस्पताल में भर्ती – लगभग 48%

आयुष्मान वय वंदना कार्ड:

  • 29 अक्टूबर 2024 को 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए लॉन्च

  • अनुमानित 4.5 करोड़ परिवार / 6 करोड़ व्यक्ति लाभान्वित

  • अब तक 94,19,515 पंजीकरण

डिजिटल पहल:

  • Ayushman App (एंड्रॉयड आधारित) – फेस ऑथ, OTP, आईरिस एवं फिंगरप्रिंट से सत्यापन

  • दिल्ली और ओडिशा में 2025 से योजना का विस्तार

(ग) प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM)

यह आयुष्मान भारत का तीसरा स्तंभ है, जिसका कुल परिव्यय लगभग ₹64,180 करोड़ है। इसे 25 अक्टूबर 2021 को शुरू किया गया और यह FY 2021–22 से 2025–26 तक लागू है। यह देशभर में स्वास्थ्य अवसंरचना सुदृढ़ करने की सबसे बड़ी योजना है।

इस मिशन का उद्देश्य प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर पर स्वास्थ्य प्रणालियों की क्षमता बढ़ाना तथा वर्तमान एवं भविष्य की महामारियों/आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटना है।

प्रमुख लक्ष्य:

  • आईटी-सक्षम रोग निगरानी प्रणाली

  • ब्लॉक, जिला, क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर सर्विलांस प्रयोगशालाओं का नेटवर्क

  • प्रवेश बिंदुओं (Points of Entry) पर स्वास्थ्य इकाइयों का सुदृढ़ीकरण

  • वन हेल्थ अप्रोच के अंतर्गत अनुसंधान एवं जैव-चिकित्सीय क्षमता विकास

अवसंरचना प्रावधान:

  • 17,788 भवनरहित उप-स्वास्थ्य केंद्रों का आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में निर्माण

  • 11,024 शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स

  • 3,382 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट्स

  • 730 जिला एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएँ

  • 5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले जिलों में 50–100 बिस्तरों के क्रिटिकल केयर ब्लॉक

वर्तमान स्थिति (CSS घटक):

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों हेतु कुल आवंटन: ₹34,932.27 करोड़

  • ₹32,928.82 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति

  • 621 क्रिटिकल केयर ब्लॉक, 744 जिला प्रयोगशालाएँ, 9519 उप-स्वास्थ्य केंद्र AAM आदि स्वीकृत

12 केंद्रीय अस्पतालों (AIIMS, PGI, JIPMER, IMS-BHU आदि) में 150-बिस्तरों वाले क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक स्वीकृत हैं।

(घ) आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM)

सितंबर 2021 में प्रारंभ आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य नागरिक-केंद्रित, सुरक्षित और इंटरऑपरेबल डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।

इसके माध्यम से नागरिक अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड (प्रिस्क्रिप्शन, जांच रिपोर्ट, डिस्चार्ज सारांश आदि) सुरक्षित रूप से संग्रहित कर सकते हैं और सहमति के आधार पर डॉक्टरों से साझा कर सकते हैं, जिससे निरंतर एवं बेहतर उपचार संभव होता है।

प्रमुख घटक:

  • ABHA (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) – नागरिकों की डिजिटल पहचान

  • HPR – स्वास्थ्य पेशेवर रजिस्ट्री

  • HFR – स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री

  • ड्रग रजिस्ट्री

इंटरऑपरेबिलिटी गेटवे:

  • Health Information Consent Manager (HIE-CM)

  • National Health Claims Exchange (NHCX)

  • Unified Health Interface (UHI)

इन पहलों के माध्यम से ABDM स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

आयुष्मान आरोग्य मंदिर: भारत में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण

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राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा एएएम पोर्टल पर रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 31.10.2025 तक उप-स्वास्थ्य केन्द्रों (SHCs) और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों (PHCs) को सुदृढ़ करते हुए कुल 1,80,906 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAMs) [पूर्व में आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (AB-HWCs)] बनाए जा चुके हैं।

एएएम चरणबद्ध तरीके से प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की 12 सेवा पैकेज प्रदान करते हैं, जिनमें प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य सेवाएँ, संचारी रोग, गैर-संचारी रोग (NCDs), पेलिएटिव केयर एवं वृद्धजन देखभाल, सामान्य मानसिक विकारों की देखभाल, तंत्रिका संबंधी स्थितियाँ (मिर्गी, डिमेंशिया) और नशा-उपयोग विकार (तंबाकू, शराब, ड्रग्स) प्रबंधन, दंत स्वास्थ्य, ईएनटी देखभाल तथा बुनियादी आपातकालीन देखभाल शामिल हैं। इन सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक दवाओं एवं जांचों की सूची को विस्तृत किया गया है—PHC-AAMs पर 172 दवाएँ एवं 63 डायग्नॉस्टिक्स, तथा SHC-AAMs पर 106 दवाएँ एवं 14 डायग्नॉस्टिक्स उपलब्ध कराए गए हैं।

मुख्य सेवाओं में पाँच सामान्य एनसीडी—हाइपरटेंशन, डायबिटीज, मुख कैंसर, स्तन कैंसर और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर—की व्यापक स्क्रीनिंग शामिल है। NP-NCD पोर्टल के अनुसार, 31.10.2025 तक SHCs एवं PHCs (ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र सहित AAMs) में कुल:

  • 38.79 करोड़ हाइपरटेंशन स्क्रीनिंग,

  • 36.05 करोड़ डायबिटीज स्क्रीनिंग,

  • 31.88 करोड़ मुख कैंसर स्क्रीनिंग,

  • 14.98 करोड़ स्तन कैंसर स्क्रीनिंग,

  • 8.15 करोड़ गर्भाशय ग्रीवा कैंसर स्क्रीनिंग की गई हैं।

इसके अतिरिक्त, सभी ऑपरेशनल एएएम में उपलब्ध टेली-कंसल्टेशन सेवाएँ लोगों को घर के नजदीक विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुँचने में सक्षम बनाती हैं, जिससे भौतिक दूरी, सेवा प्रदाताओं की कमी तथा निरंतर देखभाल से जुड़ी चुनौतियों का समाधान होता है। 31.10.2025 तक AAMs में कुल 41.14 करोड़ टेली-कंसल्टेशन किए जा चुके हैं।

फंड और अनुमोदन:

पिछले 3 वर्षों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत AAMs के लिए राज्यों के कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना (SPIP) अनुमोदन और व्यय का विवरण इस प्रकार है (रु. करोड़ में):

  • वित्त वर्ष
  • SPIP अनुमोदन
  • व्यय
  • 2022-23
  • 4,346.60
  • 2,233.53
  • 2023-24
  • 3,909.67
  • 1,590.70
  • 2024-25
  • 3,051.15
  • 1,211.02

हेल्थ डायनेमिक्स ऑफ इंडिया (HDI) — यह एक वार्षिक प्रकाशन है, जो राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा रिपोर्ट किए गए स्वास्थ्य प्रशासनिक डेटा पर आधारित है। SHCs एवं PHCs (AAMs सहित) में उपलब्ध मानव संसाधन और आधारभूत संरचना का राज्यवार विवरण HDI 2022-23 के निम्न लिंक पर उपलब्ध है:

जुलाई 2024 में, नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) ने AAM कार्यक्रम के प्रभाव और कार्यान्वयन का मूल्यांकन करने हेतु एक अध्ययन कराया। अध्ययन में कई प्रोत्साहनकारी परिणाम सामने आए, जैसे—इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, एनसीडी प्रबंधन, ओपीडी सेवाएँ, मुफ्त दवाएँ और डायग्नॉस्टिक्स उपलब्ध होने के कारण सामुदायिक फुटफॉल में वृद्धि। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की नियुक्ति से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ मजबूत हुई हैं तथा ई-संजीवनी जैसे डिजिटल टूल्स से विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुँच आसान हुई है।

हालाँकि, रिपोर्ट में मानव संसाधन उपलब्धता, कौशल आधारित प्रशिक्षण, दवाओं एवं जांचों की निरंतर उपलब्धता, डिजिटल इंटरऑपरेबिलिटी, डेटा-आधारित योजना, अंतर-विभागीय समन्वय तथा समुदाय सहभागिता को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई गई है।

NHM के तहत, सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रदर्शन की नियमित रूप से समीक्षा बैठकें, मध्यावधि समीक्षा, वरिष्ठ अधिकारियों के फील्ड दौरे, सेवा वितरण मानक निर्धारण एवं उपलब्धियों को पुरस्कृत करने जैसी गतिविधियों के माध्यम से निगरानी की जाती है। साथ ही, योजना की प्रगति और स्थिति के आकलन हेतु कॉमन रिव्यू मिशन (CRM) का वार्षिक आयोजन भी किया जाता है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री,  प्रतापराव जाधव ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।


टीबी मुक्त भारत अभियान: उन्मूलन की दिशा में सशक्त पहल

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टीबी मुक्त भारत अभियान (राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम) पूरे देश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत लागू किया जा रहा है।

टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत, अनिर्धारित टीबी मामलों की पहचान करने, टीबी से होने वाली मौतों को कम करने और नए संक्रमणों को रोकने के लिए एक नए दृष्टिकोण को लागू किया गया है। इसमें संवेदनशील आबादी की पहचान, छाती का एक्स-रे द्वारा स्क्रीनिंग, सभी संभावित टीबी मामलों के लिए शुरुआती न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (NAAT), त्वरित और उचित उपचार आरंभ करना, उच्च-जोखिम वाले टीबी मामलों के प्रबंधन के लिए विभेदित टीबी देखभाल, पोषण सहायता तथा घर के संपर्कों और पात्र संवेदनशील आबादी को निवारक उपचार शामिल है। निक्षय पोर्टल का उपयोग पूरे देश में सभी टीबी रोगियों का विवरण दर्ज करने के लिए किया जाता है।

समुदाय की भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM) द्वारा प्रदान की जाने वाली समग्र प्राथमिक देखभाल सेवाओं के माध्यम से किया जाता है। जनसामान्य को शिक्षित करने और लक्षणों, टीबी की रोकथाम तथा समय पर उपचार के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए गहन सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं। जनभागीदारी गतिविधियाँ विद्यालयों, पंचायती राज संस्थानों, स्वयं सहायता समूहों, आंगनवाड़ी केंद्रों, स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों और सिविल सोसायटी संगठनों की भागीदारी से लागू की जाती हैं।

पोषण सहायता के लिए, 1 नवंबर 2024 से सरकार ने निक्षय पोषण योजना (NPY) के तहत टीबी रोगियों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को बढ़ाकर 500 रुपये से 1,000 रुपये प्रति माह प्रति रोगी कर दिया है, जो संपूर्ण उपचार अवधि के लिए लागू होगा।

निक्षय पोषण योजना के तहत, अप्रैल 2018 से अब तक 4,322 करोड़ रुपये 1.35 करोड़ टीबी रोगियों को वितरित किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, निक्षय मित्र पहल के तहत, सितंबर 2022 से अब तक 20.3 लाख टीबी रोगियों को कुल 45.66 लाख फूड बास्केट वितरित की गई हैं।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री, अनुप्रिया पटेल ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।


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