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ESTIC 2025: आयुष मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में नवाचार और पारंपरिक चिकित्सा के संगम पर किया जोर

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आयुष मंत्रालय ने आज नई दिल्ली स्थित सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंसेज (CCRAS) मुख्यालय, जनकपुरी में ईमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC) 2025 में अपनी भागीदारी को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव अलार्मेलमंगई डी ने की। उन्होंने मंत्रालय की ESTIC 2025 में भागीदारी को दर्शाने वाला एक थीमैटिक वीडियो भी प्रदर्शित किया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि ESTIC 2025 भारत की वैज्ञानिक भावना और सहयोग की शक्ति का उत्सव है। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का उत्सव है — जो यह दर्शाता है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मिलकर एक स्वस्थ, स्थायी भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आयुष मंत्रालय “स्वास्थ्य और चिकित्सा प्रौद्योगिकी” थीम के अंतर्गत भाग लेगा, जो भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान प्रणाली और आधुनिक विज्ञान के सुंदर संगम का प्रतीक है।

संयुक्त सचिव ने यह भी उल्लेख किया कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली आज एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। आधुनिक चिकित्सा क्षेत्र में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निदान और प्रिसिजन मेडिसिन जैसे नवाचार नई दिशा दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दुनिया फिर से आयुर्वेद और अन्य आयुष प्रणालियों की ओर रोकथाम और समग्र स्वास्थ्य कल्याण के लिए रुख कर रही है। उन्होंने कहा कि ये दोनों धाराएँ मिलकर स्वास्थ्य सेवा की नई परिभाषा गढ़ सकती हैं।

आयुष ग्रिड पहल के माध्यम से मंत्रालय ने पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को डिजिटल और नागरिक-केंद्रित रूप देने के लिए कई अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं —

  • Ayush Hospital Management Information System (A-HMIS) — बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन हेतु

  • e-Learning Management System (e-LMS) — डिजिटल शिक्षा और छात्र प्रबंधन के लिए

  • Y-Break App — कार्यस्थल पर योग और वेलनेस के लिए

  • Yoga Portal — योग संसाधनों के एकीकृत मंच के रूप में

  • e-Aushadhi और Ayush Suraksha — औषधि नियंत्रण और रोगी सुरक्षा हेतु

इसके अतिरिक्त Ayush Research Portal, Clinical Case Repository, Ayusoft और NAMASTE Portal जैसी पहलों से अनुसंधान और मानकीकरण को सुदृढ़ किया जा रहा है। मंत्रालय mYoga App (WHO के साथ साझेदारी में) और Ayush Global Portal जैसे उपकरणों से वैश्विक पहुंच का विस्तार कर रहा है, वहीं PM GatiShakti Ayush Asset Mapping Tool अवसंरचना योजना और निगरानी को सशक्त बना रहा है।

अब मंत्रालय कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भविष्यवाणी विश्लेषण, साहित्य खनन, व्यक्तिगत अनुशंसाओं और वास्तविक समय निगरानी जैसे क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा दे रहा है — जिससे एक डेटा-चालित, नवाचार-नेतृत्वित और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त आयुष डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हो सके।

डॉ. ए. रघु, सलाहकार (आय), ने कहा कि ESTIC 2025 भारत-केंद्रित नवाचारों, पॉइंट-ऑफ-केयर डायग्नोस्टिक्स, बायोमेडिकल प्रौद्योगिकियों और एकीकृत स्वास्थ्य समाधानों को प्रदर्शित करने का एक राष्ट्रीय मंच है। उन्होंने कहा कि यह भागीदारी आत्मनिर्भर, नवाचार-प्रधान और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

डॉ. श्रीनिवास राव चिंता, संयुक्त सलाहकार (एच), ने मंत्रालय की भागीदारी पर विस्तृत प्रस्तुति दी और बताया कि “हेल्थ एंड मेडिकल टेक्नोलॉजीज़” थीम के अंतर्गत मंत्रालय का फोकस क्षेत्र नवोन्मेषी अनुसंधान मॉडल, एकीकृत स्वास्थ्य ढाँचे और पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक वैज्ञानिक नवाचार से जोड़ने वाले सहयोगी प्रोजेक्ट्स पर होगा।

ESTIC 2025 में आयुष मंत्रालय पार्टनर मंत्रालय के रूप में भाग लेगा। मंत्रालय का विशेष सत्र 4 नवंबर 2025 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा, जिसकी सह-अध्यक्षता वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव (आयुष) और डॉ. राजीव बहल, सचिव (डीएचआर) एवं महानिदेशक (ICMR) करेंगे।

इस सत्र में प्रमुख वक्ता होंगे —

  • डॉ. शिव कुमार सारिन, निदेशक, ILBS

  • प्रो. गगनदीप कांग, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन

  • प्रो. तनुजा नेसरी, निदेशक, ITRA, जामनगर

  • सी. वी. मुरलीधरन, SCTIMST, तिरुवनंतपुरम

पैनल चर्चा का संचालन डॉ. जितेंद्र शर्मा, प्रबंध निदेशक एवं संस्थापक-सीईओ, आंध्र प्रदेश मेडटेक ज़ोन करेंगे।

ESTIC 2025, जो कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है, 3 से 5 नवंबर 2025 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा। इसका उद्देश्य सरकार, अकादमिक जगत, उद्योग, स्टार्टअप्स और नागरिक समाज के बीच साझेदारी को प्रोत्साहित करना है, ताकि भारत की नवाचार-आधारित विकास यात्रा को गति मिले और विकसित भारत 2047 के विज़न को साकार किया जा सके।

आयुष मंत्रालय ने गोवा में 10वें आयुर्वेद दिवस पर लॉन्च किया DRAVYA पोर्टल

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100 प्रमुख औषधीय पदार्थों की जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध होगी

AI-रेडी प्लेटफ़ॉर्म भविष्य में आयुष ग्रिड और अन्य पहलों से जुड़ेगा

QR कोड इंटीग्रेशन से पौधों और दवा भंडारों में मानकीकृत जानकारी प्रदर्शित होगी

गोवा-आयुष मंत्रालय ने 10वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर DRAVYA (डिजिटाइज्ड रिट्रीवल एप्लिकेशन फॉर वर्सटाइल यार्डस्टिक ऑफ आयुष) पोर्टल लॉन्च किया। यह पोर्टल आयुष प्रणाली में इस्तेमाल होने वाले 100 प्रमुख औषधीय पदार्थों की जानकारी डिजिटल रूप में संग्रहीत करेगा और समय-समय पर अपडेट होता रहेगा।

तकनीकी और वैश्विक दृष्टि:

DRAVYA पोर्टल AI-रेडी है और इसे भविष्य में आयुष ग्रिड और अन्य मंत्रालयीय पहलों से जोड़ा जाएगा। QR कोड इंटीग्रेशन के माध्यम से यह पोर्टल औषधीय पौधों के उद्यानों और दवा भंडारों में मानकीकृत जानकारी प्रदर्शित करेगा।

उद्घाटन समारोह में शामिल dignitaries:

इस अवसर पर गोवा के राज्यपाल अशोक गजपति राजू, मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत, केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव, ऊर्जा मंत्री श्रीपाद यस्सो नाइक और आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा मौजूद थे।

DRAVYA का उद्देश्य:

केंद्रीय आयुष मंत्री जाधव ने कहा, “DRAVYA केवल डिजिटल आर्काइव नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा का आधुनिक स्वरूप है। यह पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संगम है।”

आयुष सचिव वैद्य कोटेचा ने बताया कि पोर्टल क्लासिकल ग्रंथों और आधुनिक शोध को जोड़कर वैज्ञानिक समुदाय, नीति निर्माता और नवप्रवर्तकों के लिए सुलभ और भरोसेमंद संसाधन साबित होगा।

CCRAS के महानिदेशक प्रो. रबिनारायण आचार्य ने कहा, “यह पोर्टल शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और विद्यार्थियों के लिए क्रॉस-डिसिप्लिनरी रिसर्च और साक्ष्य-आधारित आयुष दवाओं के सत्यापन में सहायक होगा।”

निष्कर्ष:

DRAVYA पोर्टल के माध्यम से आयुष प्रणाली के औषधीय ज्ञान को डिजिटल, खोज योग्य और वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।


आयुष मंत्रालय ने शुरू किया देश का पहला इंटीग्रेटिव ऑन्कोलॉजी रिसर्च एंड केयर सेंटर – कैंसर देखभाल में नया आयाम

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समेकित चिकित्सा के माध्यम से कैंसर देखभाल में परिवर्तन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम

आयुष मंत्रालय ने 10वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA), धारगल, गोवा में इंटीग्रेटिव ऑन्कोलॉजी रिसर्च एंड केयर सेंटर (IORCC) का उद्घाटन किया। यह अत्याधुनिक संस्थान भारत का पहला ऐसा केंद्र है, जिसे परंपरागत और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों को एक साथ लाकर रोगी-केंद्रित, साक्ष्य-आधारित कैंसर पुनर्वास प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया है।

इसका वर्चुअल उद्घाटन गोवा के राज्यपाल पुसपति अशोक गजपति राजू द्वारा किया गया। इस अवसर पर गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत, केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, केंद्रीय राज्य मंत्री (विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा) श्रीपाद यशो नाइक, पर्नेम के विधायक प्रवीण आर्लेकर और आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा उपस्थित रहे।

भारत का पहला बहु-विषयक केंद्र

IORCC देश के पहले बहु-विषयक केंद्रों में से एक है, जहाँ आयुर्वेद, योग, फिजियोथेरेपी, आहार चिकित्सा, पंचकर्म और आधुनिक ऑन्कोलॉजी को एक ही छत के नीचे समेकित किया गया है। इसका उद्देश्य कैंसर रोगियों को समग्र देखभाल और पुनर्वास सेवाएँ प्रदान करना है।

गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने कहा:

“गोवा में स्थापित यह केंद्र कैंसर से लड़ाई में एक ऐतिहासिक कदम है। गोवा सरकार, AIIA गोवा और टाटा मेमोरियल सेंटर के ACTREC के सहयोग से एक ऐसा मॉडल विकसित हो रहा है, जो आधुनिक उपचार (जैसे सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन) को आयुर्वेदिक चिकित्सा से जोड़कर बेहतर रिकवरी, दुष्प्रभावों में कमी और रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करेगा। यह न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में समेकित कैंसर देखभाल का मानक स्थापित करेगा।”

स्वास्थ्य नवाचार में आयुष की भूमिका

केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा:“आयुष मंत्रालय का उद्देश्य ऐसे उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना करना है, जो पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ एकीकृत करें। IORCC इसी दृष्टिकोण का उदाहरण है, जो कैंसर रोगियों के जीवन-स्तर और मनो-सामाजिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए साक्ष्य-आधारित समेकित पुनर्वास सेवाएँ प्रदान करेगा।”

श्रीपाद यशो नाइक ने कहा:“यह अभिनव मॉडल केवल कैंसर ही नहीं बल्कि न्यूरोलॉजिकल और विकास संबंधी विकारों के प्रबंधन में भी नई आशा देता है।”

नेतृत्व और अनुसंधान

केंद्र का संचालन प्रो. डॉ. सुजाता कदम, डीन, AIIA गोवा करेंगी और डॉ. संजय खेड़ेकर संयोजक होंगे। क्लीनिकल और अकादमिक टीम में प्रमुख ऑन्कोलॉजिस्ट और समेकित चिकित्सा विशेषज्ञ जैसे डॉ. शेखर साल्कर और AIIA गोवा के अन्य फैकल्टी सदस्य शामिल हैं।

प्रो. पी.के. प्रजापति, निदेशक, AIIA दिल्ली ने कहा:“IORCC साक्ष्य-आधारित समेकित स्वास्थ्य देखभाल को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह केंद्र ऐसे मानकीकृत प्रोटोकॉल विकसित करेगा जो कैंसर उपचार की सुरक्षा, प्रभावशीलता और परिणामों को बेहतर बनाएंगे।”

प्रो. डॉ. सुजाता कदम ने कहा:“IORCC न केवल बहु-विषयक क्लिनिकल देखभाल प्रदान करेगा बल्कि समेकित ऑन्कोलॉजी में उन्नत अनुसंधान, प्रशिक्षण और नवाचार का केंद्र भी बनेगा।”

राष्ट्रीय स्वास्थ्य एकीकरण की दिशा में कदम

IORCC का उद्घाटन आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, AIIA के अकादमिक नेताओं और समेकित ऑन्कोलॉजी टीम के प्रमुख चिकित्सकों की उपस्थिति में हुआ।

इस केंद्र की स्थापना के साथ, आयुष मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप एकीकृत स्वास्थ्य ढांचा बनाने की अपनी दृष्टि को दोहराया है। यह पहल पारंपरिक चिकित्सा की बुद्धिमत्ता को आधुनिक चिकित्सा की वैज्ञानिकता के साथ मिलाकर भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।


राष्ट्रीय कार्यशाला में आयुष डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों पर जोर

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कुमारकोम-राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत “आयुष क्षेत्र में आईटी समाधान” पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन आज केटीडीसी वाटरस्केप्स, कुमारकोम में हुआ। इस अवसर पर आयुष ग्रिड और उससे जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लाइव डेमोंस्ट्रेशन तथा गहन विचार-विमर्श आयोजित किए गए।

कार्यशाला में A-HMIS, e-LMS, योग पोर्टल एवं Y-Break ऐप, ई-औषधि पोर्टल, आयुष सुरक्षा, रिसर्च पोर्टल, NAMASTE पोर्टल, mYoga ऐप, आयुष ग्लोबल पोर्टल और पीएम-गतिशक्ति आयुष एसेट मैपिंग टूल सहित कई डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रदर्शित किए गए। साथ ही, भविष्य के लिए एआई आधारित निर्णय समर्थन एवं मॉनिटरिंग सिस्टम पर भी जानकारी दी गई।

समापन सत्र में सात राज्यों ने अपने अनुभव साझा किए और डिजिटल एकीकरण हेतु सामान्य प्रोटोकॉल का प्रारूप तैयार किया गया।

मुख्य वक्तव्य:

  • वीणा जॉर्ज, स्वास्थ्य एवं महिला-कल्याण मंत्री, केरल सरकार ने कहा कि “तेज़ तकनीकी प्रगति को अपनाते समय पारंपरिक मूल्यों का संरक्षण भी आवश्यक है।”

  • वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव, आयुष मंत्रालय ने कहा कि “डिजिटल उपकरण अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता हैं, जो आयुष सेवाओं की सुलभता, किफ़ायत और गुणवत्ता सुनिश्चित करेंगे।”

इस कार्यशाला में 23 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से 91 प्रतिनिधियों सहित कुल 155 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने कहा कि यह आयोजन न केवल केंद्रीय आईटी प्लेटफॉर्म्स पर स्पष्टता लाया, बल्कि अंतरराज्यीय सहयोग और एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य मानकों की दिशा में नई राह खोली।

आगामी कार्यक्रम:
प्रतिभागियों का 20–21 सितम्बर को कोट्टायम, आलप्पुझा और त्रिशूर जिलों में आयुष सुविधाओं का क्षेत्रीय दौरा आयोजित होगा।

यह कार्यशाला भारत की भविष्य-उन्मुख, गतिशील और नागरिक-केंद्रित आयुष डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।


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