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सहकारिता से बढ़ेगी किसानों की आय, विकसित छत्तीसगढ़ की नींव होगी मजबूत : मुख्यमंत्री साय

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सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूर्ण होने पर राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन आयोजित

162 करोड़ से अधिक की तेंदूपत्ता प्रोत्साहन राशि वितरण का शुभारंभ, 1352 नई सहकारी समितियों के गठन से गांवों तक पहुंचा सहकार का विस्तार

पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता को मिल रहा है बढ़ावा

किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता का सबसे प्रभावी माध्यम बन रही है सहकारिता

उत्कृष्ट सहकारी समितियों को सहकार प्रेरणा पुरस्कार से किया गया सम्मानित, महिला स्व सहायता समूह को वितरित किया गया लाभांश

रायपुर- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय का गठन देश के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय है। यह निर्णय 'सहकार से समृद्धि' के संकल्प को साकार करने वाला है। डबल इंजन की सरकार छत्तीसगढ़ में सहकारिता के माध्यम से किसानों, वनवासियों, महिला समूहों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मंडपम में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन एवं सहकारी सप्ताह कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर उत्कृष्ट समितियों को सहकार प्रेरणा पुरस्कार प्रदान किया तथा संग्रहण वर्ष 2023 के 7.14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए 162 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन पारिश्रमिक राशि के वितरण का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि मैं किसान का बेटा हूं और बचपन से ही सहकारिता से मेरा गहरा रिश्ता रहा है। तभी से मुझे विश्वास था कि सहकारिता के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'सहकार से समृद्धि' का वही सपना धरातल पर साकार होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रथम कार्यकाल में उन्हें राज्यमंत्री के रूप में साथ काम करने का अवसर मिला और उन्होंने किसानों के प्रति प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता तथा समर्पण को बहुत करीब से देखा है। किसानों के कल्याण के प्रति इसी प्रतिबद्धता के कारण प्रधानमंत्री ने कृषि मंत्रालय का दायरा बढ़ाते हुए उसका नाम 'कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय' किया, ताकि किसानों का समग्र विकास सरकार की प्राथमिकता बने। सहकारिता किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता का सबसे प्रभावी माध्यम बन रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा मिली है और इसका लाभ सीधे किसानों एवं ग्रामीण परिवारों तक पहुंच रहा है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार केवल कृषि ही नहीं बल्कि पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता को मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में व्यापक बदलाव दिखाई देने लगे हैं। राज्य सरकार पशुपालन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पहले किसानों को खेती-किसानी के लिए 16 से 18 प्रतिशत दर पर ऋण लेना पड़ता था और भारी-भरकम ब्याज का बोझ उन्हें आर्थिक रूप से परेशान कर देता था। आज सहकारिता व्यवस्था और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से किसानों को बिना ब्याज ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश के 15 लाख से अधिक किसानों को 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिससे किसानों को खेती के लिए सुलभ वित्तीय सहायता मिल रही है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जिस प्रकार दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व और सुरक्षा बलों के साहस से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है, उसी प्रकार सहकारिता के माध्यम से भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा परिवर्तन लाया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सहकारी सप्ताह के दौरान विषय विशेषज्ञों के मंथन से प्रदेश में सहकारिता के नए आयाम स्थापित होंगे और इसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।

सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पांच वर्ष पूरे होना देश के लिए गौरव का विषय है। इस अवसर पर 29 जून से 06 जुलाई तक सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में सहकारिता के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सहकारिता का मूल उद्देश्य है। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश की कोई भी पंचायत सहकारिता से वंचित न रहे, इस दिशा में कार्य करते हुए राज्य में 1352 नई सहकारी समितियों का गठन किया गया है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने सहकारिता विभाग के ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से किसानों का पंजीयन पूरी तरह ऑनलाइन, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने सहकारिता से जुड़े विभिन्न स्टालों का किया अवलोकन

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न सहकारी संस्थाओं द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया और सहकारिता के माध्यम से किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों तथा वनधन समितियों द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना की। उन्होंने हरित क्रांति आदिवासी सहकारी समिति जशपुर, महामाया बहुउद्देशीय सहकारी समिति कोरबा, बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम, छत्तीसगढ़ हर्बल्स, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड), छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ, इफको तथा गंगा मैया दुग्ध उत्पादक संघ बालोद सहित विभिन्न संस्थाओं के स्टॉलों का अवलोकन कर उनके कार्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में 5 नवीन पैक्स समितियों को माइक्रो एटीएम वितरित किए तथा छत्तीसगढ़ हर्बल्स के पांच नए उत्पादों का लोकार्पण किया। उन्होंने उत्कृष्ट तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए, वन-धन समितियों की हैंडबुक का विमोचन किया, महिला स्व-सहायता समूहों को लाभांश वितरित किया तथा विभिन्न हितग्राहियों को सामग्री, प्रोत्साहन राशि और केसीसी ऋण वितरित किए। 

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदारनाथ गुप्ता, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, छत्तीसगढ़ तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, प्राधिकृत अधिकारी विपणन संघ शशिकांत द्विवेदी, सहकार भारती के कनिराम, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी संघ के प्राधिकृत अधिकारी सौरभ शर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी अंत्यावसायी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार बेसरा, छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के अध्यक्ष भोजराम देवांगन, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्षगण, सहकारिता सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता रमेश शर्मा सहित जनप्रतिनिधि, विभिन्न सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारी, किसान एवं बड़ी संख्या में हितग्राही उपस्थित थे।

खेत से भविष्य तक: सुशासन से सशक्त होती भारतीय कृषि की कहानियाँ

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महाराष्ट्र के नासिक जिले के दाभाड़ी गाँव में रहने वाली भावना नीलकंठ निकम ने स्नातक होने के बावजूद कृषि को अपना पेशा चुना। कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) द्वारा उपलब्ध कराए गए संरचित क्षमता निर्माण प्रशिक्षण और कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं के सहयोग से उन्होंने 2,000 वर्ग मीटर का पॉलीहाउस स्थापित किया। उन्होंने ड्रिप सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण तथा मत्स्य और कुक्कुट पालन जैसी सहायक गतिविधियों को अपनाते हुए आधुनिक कृषि पद्धतियाँ लागू कीं। उनके खेत में शिमला मिर्च, टमाटर, सेम और अंगूर जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों का उत्पादन होता है। वर्षा जल संचयन तालाबों की व्यवस्था के कारण सूखे समय में भी सिंचाई सुनिश्चित रहती है। नवाचारपूर्ण खेती के लिए उन्हें वर्ष 2021 में महाराष्ट्र सरकार द्वारा “नवाचारी महिला किसान सम्मान पत्र” सहित कई सम्मान प्राप्त हुए। उनका खेत अब एक आदर्श एकीकृत कृषि मॉडल बन चुका है, जिससे न केवल उनकी आय में विविधता आई है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए यह एक प्रेरक और प्रशिक्षण स्थल भी बन गया है।

वहीं बिहार के बांका जिले में बिनीता कुमारी ने सीमित संसाधनों के बावजूद एक सफल आजीविका मॉडल विकसित किया। कृषि परिवार से आने वाली बिनीता कुमारी ने KVK बांका से मशरूम उत्पादन और स्पॉन निर्माण का प्रशिक्षण प्राप्त किया। मात्र 25 मशरूम बैग से शुरुआत कर उन्होंने विभिन्न किस्मों के मशरूम और वर्षभर उत्पादन प्रणाली अपनाई। आज वे ताजे मशरूम और स्पॉन की बिक्री से सालाना 2.5 से 3 लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। वे आसपास के किसानों को भी स्पॉन की आपूर्ति करती हैं और भविष्य में एक आधुनिक स्पॉन प्रयोगशाला स्थापित करने की योजना रखती हैं। उनकी पहल से लगभग 300 महिला किसानों ने मशरूम उत्पादन को आय का स्थायी स्रोत बनाया है, जो यह दर्शाता है कि लक्षित प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग किस प्रकार व्यापक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न कर सकता है।

ये उदाहरण भारतीय कृषि की व्यापक तस्वीर को दर्शाते हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, ‘कृषि एवं संबद्ध गतिविधियाँ’ क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है, जो वित्त वर्ष 2023-24 में वर्तमान मूल्यों पर देश के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 16 प्रतिशत का योगदान देता है और करीब 46.1 प्रतिशत आबादी को आजीविका प्रदान करता है। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ यह क्षेत्र कई सहायक और डाउनस्ट्रीम उद्योगों को भी मजबूती प्रदान करता है। इसी कारण शासन सुधारों में आय समर्थन, अवसंरचना विकास, सिंचाई विस्तार, जोखिम प्रबंधन, बेहतर बाजार पहुंच और सतत कृषि पर विशेष ध्यान दिया गया है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत अब तक 21 किस्तों में 3.88 लाख करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं, जिससे किसानों को प्रत्यक्ष आय सहायता मिली है। कृषि अवसंरचना कोष के अंतर्गत 23 दिसंबर 2025 तक 2.87 लाख से अधिक लाभार्थी पंजीकृत हुए हैं और 57,000 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया गया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना ने सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देकर किसानों को कम जल-खपत वाली उच्च मूल्य फसलों की ओर प्रेरित किया है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के अंतर्गत ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’, कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन, मृदा स्वास्थ्य, वर्षा आधारित क्षेत्र विकास, फसल विविधीकरण और कृषि स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन जैसे घटक शामिल हैं।

ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) ने बाजार पहुंच और मूल्य पारदर्शिता में सुधार किया है, जबकि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ने फसल नुकसान के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान की है। 23 दिसंबर 2025 तक खरीफ और रबी 2025 सीजन में 16.06 लाख किसानों को 3.60 लाख रुपये के दावे का लाभ मिला है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना ने संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देकर दीर्घकालिक भूमि उत्पादकता सुनिश्चित की है।

इन योजनाओं का प्रभाव तब और अधिक बढ़ जाता है जब ये NABARD और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) जैसी संस्थाओं के सहयोग से खेत स्तर पर एकीकृत रूप में लागू होती हैं। तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में NABARD अनुदान से समर्थित एक परियोजना के तहत आदिवासी किसानों ने आम की बागवानी, दलहन और सब्जियों की अंतरफसल, तथा सिंचाई अवसंरचना के माध्यम से अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की। इसी तरह हरियाणा के रेवाड़ी जिले में धरचना किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड ने तेलहन उत्पादन को सामूहिक उद्यम में बदलकर 500 से अधिक किसानों, जिनमें 90 प्रतिशत महिलाएँ हैं, की आय बढ़ाई।

सुशासन दिवस के अवसर पर ये अनुभव यह स्पष्ट करते हैं कि कृषि में प्रभावी शासन का अर्थ केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि खेती को एक सम्मानजनक, सुरक्षित और भविष्य उन्मुख आजीविका बनाना है। खेतों से भविष्य तक, भारतीय कृषि की यह नई कहानी नीतिगत समन्वय, सहभागी दृष्टिकोण और ठोस परिणामों पर आधारित है, जो किसानों के आत्मविश्वास और देश की आर्थिक मजबूती को नई दिशा दे रही है।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में राष्ट्रीय एफपीओ कॉन्क्लेव 2025 का उद्घाटन किया

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज दिल्ली में राष्ट्रीय एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) कॉन्क्लेव 2025 का उद्घाटन किया। इस आयोजन में देश के 24 राज्यों और 140 जिलों से 500 से अधिक प्रगतिशील किसानों, एफपीओ, कार्यान्वयन एजेंसियों (IAs) और क्लस्टर-आधारित व्यवसाय संगठनों (CBBOs) ने भाग लिया।

सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने किसानों, एफपीओ सदस्यों और सहभागी संस्थानों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि किसानों को उत्पादक से उद्यमी और व्यापारी बनने की दिशा में अग्रसर होना चाहिए, ताकि उनका लाभ सीधे उन्हीं तक पहुंचे।

मंत्री चौहान ने किसानों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री किसानों के हितों की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य किसानों के कल्याण के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली को बढ़ावा देना है। केवल अनाज पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है; आय बढ़ाने के लिए सहायक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित करना आवश्यक है।”

केंद्रीय मंत्री ने मूल्य असमानता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “किसानों को अक्सर उनके उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पाता, जबकि उपभोक्ता अधिक भुगतान करते हैं। इस अंतर को कम करना आवश्यक है।” उन्होंने घोषणा की कि सरकार शीघ्र ही ‘बीज अधिनियम’ (Seed Act) लाने जा रही है ताकि किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज मिल सकें। साथ ही, नकली बीज और कीटनाशकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और किसानों की सुरक्षा हेतु कठोर कानून लागू किए जाएंगे।

मंत्री चौहान ने किसानों से “मूल्य संवर्धन (Value Addition)” की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “किसान केवल उत्पादक बनकर न रहें, बल्कि कृषि के माध्यम से उद्यमी बनें। प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।”

उन्होंने एफपीओ से छोटे किसानों के कल्याण के लिए गंभीरता से कार्य करने, मंत्रालय को व्यावहारिक सुझाव देने और सदस्यता बढ़ाने, कारोबार में वृद्धि और गुणवत्ता सुधार पर ध्यान देने का आग्रह किया।

सम्मान और प्रदर्शनी

दिल्ली के हौज़ खास स्थित एनसीडीसी और एनसीयूआई परिसरों में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने उत्कृष्ट संगठन, व्यवसाय और डिजिटल नवाचार के लिए श्रेष्ठ एफपीओ, सीबीबीओ और कार्यान्वयन एजेंसियों को सम्मानित किया।

एनसीडीसी परिसर में आयोजित कृषि उत्पाद प्रदर्शनी में कुल 267 एफपीओ ने अनाज, दलहन, तिलहन, फल, सब्जियाँ, जैविक, प्रसंस्कृत और पारंपरिक उत्पाद प्रदर्शित किए। कृषि मंत्री ने 57 स्टॉलों का निरीक्षण किया, किसानों से सीधे संवाद किया, उनकी नवाचारों की सराहना की और उन्हें तकनीक, बाजार एवं नए विचार अपनाने के लिए प्रेरित किया।

तकनीकी सत्र और परिचर्चाएँ

कार्यक्रम में कई तकनीकी सत्र और पैनल चर्चाएँ आयोजित की गईं जिनमें तिलहन उत्पादन, जल उपयोग दक्षता, प्राकृतिक खेती, कृषि अवसंरचना कोष, मधु उत्पादन, डिजिटल विपणन, एजीमार्क प्रमाणन और बीज उत्पादन जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और किसानों ने इन चर्चाओं में सक्रिय भाग लिया।

किसान उद्यमिता और बाजार संपर्क को बढ़ावा

एफपीओ, किसानों, खरीदारों और विक्रेताओं के बीच संवाद के लिए एक विशेष मंच बनाया गया, जिससे ग्रामीण उद्यमियों के लिए नए बाजार अवसरों का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह कॉन्क्लेव किसानों को उत्पादक, प्रदाता और सहभागी के रूप में सशक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

यह आयोजन मंत्री–किसान संवाद का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो एफपीओ उत्पादों को प्रोत्साहन देता है और नए विचारों के आदान-प्रदान के माध्यम से देशभर के किसानों को लाभान्वित करता है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में नई उपलब्धियाँ: खरीफ 2025 में संतोषजनक बुवाई, ₹38,000 करोड़ की उर्वरक सब्सिडी को मंजूरी

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केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सभी किसानों की ओर से धन्यवाद ज्ञापित किया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ₹38,000 करोड़ की उर्वरक सब्सिडी को मंजूरी दी गई है।

शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान यह जानकारी दी गई कि खरीफ 2025 सीजन में बुवाई का कार्य अत्यंत संतोषजनक रहा है। धान की कुल बुवाई का क्षेत्रफल 441.58 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। इसी प्रकार, तेलहन फसलों का कुल क्षेत्रफल 190.13 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जिसमें सोयाबीन और मूंगफली प्रमुख फसलें हैं। दालों की बुवाई 120.41 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की गई है, जो देश की पोषण सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं गन्ने का क्षेत्रफल 59.07 लाख हेक्टेयर है, जिससे गन्ना किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।

इस वर्ष भारत के कृषि क्षेत्र को अनुकूल मानसून, पर्याप्त वर्षा और जलाशयों में बेहतर जल भंडारण का बड़ा लाभ मिला है। साप्ताहिक कृषि प्रगति समीक्षा के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि अधिकांश प्रमुख जलाशयों में जलस्तर सामान्य या उससे अधिक है, जिससे सिंचाई की आवश्यकताएँ पूरी तरह पूरी हो रही हैं और खरीफ फसलों की समय पर बुवाई संभव हो सकी है। पर्याप्त मिट्टी की नमी ने फसल वृद्धि को बढ़ावा दिया है और रबी फसलों के क्षेत्र में विस्तार की संभावना को बल दिया है।

कृषि आयुक्त डॉ. पी.के. सिंह द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि सिंचाई परियोजनाओं और जलाशयों में जल की उपलब्धता में सुधार हुआ है, जिससे सिंचित क्षेत्रों में कृषि विकास को प्रोत्साहन मिला है। देशभर के 161 जलाशयों में कुल जीवित जल भंडारण 165.58 बिलियन घन मीटर (BCM) है, जो पिछले वर्ष के स्तर का 104.30% और दस वर्ष के औसत का 115.95% है।

बैठक में यह भी बताया गया कि खरीफ फसलों की कटाई कुछ क्षेत्रों में प्रारंभ हो चुकी है, जो कुल खरीफ क्षेत्र के लगभग 27% हिस्से को कवर करती है, जबकि रबी फसलों की बुवाई प्रारंभिक चरण में है। प्याज, आलू और टमाटर फसलों की स्थिति देशभर में संतोषजनक है और चावल व गेहूं का वर्तमान भंडार बफर मानकों से अधिक है।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश का कृषि क्षेत्र समय पर और अनुकूल मानसून, पर्याप्त जल संसाधनों, कुशल योजना और डिजिटल नवाचारों के कारण ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की किसान हितैषी नीतियाँ किसानों की आय बढ़ाने और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने में सहायक हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार, राज्यों के सहयोग से, आगामी रबी सीजन में दालों और तेलहनों की अधिक बुवाई और रिकॉर्ड उत्पादकता को प्रोत्साहित करने के लिए सभी आवश्यक सहायता प्रदान करेगी।

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