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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे में जैबिल की उन्नत विनिर्माण इकाई का उद्घाटन किया

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केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 17 जून 2026 को पुणे के रंजनगांव में जैबिल इंक. (Jabil Inc.) की अत्याधुनिक उन्नत विनिर्माण (एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग) इकाई का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर वरिष्ठ नेता दिलीप वलसे पाटिल, युवा नेता ज्ञानेश्वर काटके, जैबिल सर्किट्स के कार्यकारी उपाध्यक्ष एवं मुख्य परिचालन अधिकारी एंडी प्रीस्टली सहित महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और जैबिल की टीम उपस्थित रही।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) वैश्विक प्रगति का एक प्रमुख इंजन बन चुकी है और इसके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का देश में विकास करना रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एआई डेटा सेंटर आज दुनिया भर में तीव्र विकास के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ दृष्टिकोण के तहत यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इन डेटा सेंटरों में उपयोग होने वाले प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक घटकों का निर्माण भारत में ही हो।

उन्होंने बताया कि जैबिल अपनी आधुनिक और उच्च-तकनीकी सुविधा के माध्यम से पुणे में डेटा सेंटरों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक घटकों का निर्माण करेगी। यह संयंत्र भारत की घरेलू तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में निर्यात को भी बढ़ावा देगा।

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण की सराहना की, जिसके कारण इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभों में से एक बन गया है। उन्होंने कहा कि सरकार की लक्षित नीतियों के परिणामस्वरूप इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ा है और आज यह भारत के निर्यात की तीसरी सबसे बड़ी श्रेणी बन चुका है।

जैबिल की अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षमताएं

जैबिल की यह नई सुविधा अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तकनीकों से सुसज्जित है। यहां निम्नलिखित क्षेत्रों से संबंधित उत्पादों का निर्माण किया जाएगा:

  • एआई आधारित डेटा सेंटर उपकरण (AI Systems)

  • 5G प्रौद्योगिकी उपकरण

  • उच्च स्तरीय नेटवर्किंग उपकरण

  • औद्योगिक विद्युत प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक्स

  • उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स

यह उच्च-प्रौद्योगिकी संयंत्र घरेलू मांग को पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक निर्यात बाजारों की आवश्यकताओं को भी पूरा करने में सक्षम होगा।

इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर 11,000 तक रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। साथ ही, यह घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को वैश्विक प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियां

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक भारत से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और निर्यात की वर्तमान उपलब्धियों की कल्पना भी कठिन थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की स्पष्ट और दूरदर्शी नीति ने भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक विनिर्माण भागीदार बना दिया है।

मुख्य उपलब्धियां:

  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग का मूल्य: ₹13 लाख करोड़

  • निर्यात में प्रगति: इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात श्रेणी 9वें स्थान से बढ़कर 7वें, 5वें, 4वें और फिर 3वें स्थान पर पहुंची।

  • 2025 में उपलब्धि: इलेक्ट्रॉनिक्स भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बनी।

  • अगला लक्ष्य: इलेक्ट्रॉनिक्स को भारत की दूसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बनाना।

अश्विनी वैष्णव ने आश्वासन दिया कि सरकार प्रतिभा विकास, कौशल निर्माण, प्रशिक्षण तथा उच्च-सटीकता वाले यांत्रिक पुर्जों के विनिर्माण के लिए विशेष पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के व्यापक स्थानीयकरण के लिए वैश्विक नवप्रवर्तकों के साथ साझेदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया।

भारत ने BRICS औद्योगिक दक्षता केंद्र (BCIC) में औपचारिक रूप से सहभागिता की

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भारत ने ब्रिक्स औद्योगिक दक्षता केंद्र (BRICS Centre for Industrial Competencies – BCIC) में औपचारिक रूप से सहभागिता की। इस अवसर पर उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा वाणिज्य भवन, नई दिल्ली में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया।

संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (UNIDO) के सहयोग से स्थापित BCIC, ब्रिक्स देशों की विनिर्माण कंपनियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को एकीकृत सहायता सेवाएँ प्रदान करने वाला वन-स्टॉप सेंटर है। इसका मुख्य उद्देश्य इंडस्ट्री 4.0 क्षमताओं को सुदृढ़ करना है।

इस अवसर पर DPIIT और UNIDO के बीच एक ट्रस्ट फंड समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते पर DPIIT के आर्थिक सलाहकार अग्रिम कौशल और UNIDO के निदेशक डॉ. क्रिस्टियानो पासिनी ने हस्ताक्षर किए, जिससे BCIC ढांचे में भारत की भागीदारी औपचारिक रूप से सुनिश्चित हुई।

राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) को ब्रिक्स औद्योगिक दक्षता हेतु भारत केंद्र के रूप में नामित किया गया है। DPIIT के नीतिगत मार्गदर्शन और UNIDO के तकनीकी सहयोग से NPC, BCIC के अंतर्गत भारत की भागीदारी का नेतृत्व करेगा तथा क्षमता निर्माण, उत्पादकता वृद्धि और उन्नत विनिर्माण प्रथाओं को अपनाने में योगदान देगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता DPIIT के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने की। इस अवसर पर NPC की महानिदेशक नीरजा शेखर, DPIIT, MSME मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, UNIDO के प्रतिनिधि तथा उद्योग भागीदार फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) भी उपस्थित रहे।


भारत में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट निर्माण को बढ़ावा: ₹7,280 करोड़ की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी

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प्रमुख बिंदु

  • सरकार ने देश में सिन्‍टर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के समेकित घरेलू विनिर्माण इकोसिस्टम की स्थापना के लिए ₹7,280 करोड़ की योजना को मंजूरी दी।

  • इस योजना के तहत 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) की घरेलू उत्पादन क्षमता विकसित की जाएगी, जिसमें रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक पूरी वैल्यू चेन शामिल होगी।

  • यह पहल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी।

  • यह योजना नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन (NCMM) और MMDR अधिनियम सुधारों जैसी नीतिगत पहलों से समर्थित है।

  • आयात निर्भरता कम करते हुए भारत की वैश्विक उन्नत सामग्री वैल्यू चेन में भागीदारी को सशक्त बनाएगी और दीर्घकालिक औद्योगिक विकास को गति देगी।

परिचय

केंद्र सरकार ने ‘सिन्‍टर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) विनिर्माण को प्रोत्साहन देने की योजना’ को मंजूरी दी है, जिसका कुल वित्तीय परिव्यय ₹7,280 करोड़ है। इस योजना का उद्देश्य भारत में 6,000 MTPA की एकीकृत REPM विनिर्माण क्षमता स्थापित करना है, जिसमें कच्चे रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर अंतिम मैग्नेट उत्पाद तक संपूर्ण प्रक्रिया शामिल होगी।

इस घरेलू इकोसिस्टम के निर्माण से इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए आवश्यक इनपुट में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। यह पहल आत्मनिर्भर भारत, मजबूत आपूर्ति शृंखला और नेट ज़ीरो 2070 के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है।

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) क्या हैं?

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट सबसे शक्तिशाली स्थायी मैग्नेटों में से एक होते हैं। इनका उपयोग उन तकनीकों में होता है जहाँ छोटे आकार में उच्च चुंबकीय क्षमता की आवश्यकता होती है, जैसे—

  • इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटर

  • पवन ऊर्जा टरबाइन जनरेटर

  • उपभोक्ता एवं औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स

  • एयरोस्पेस और रक्षा प्रणालियाँ

  • सटीक सेंसर और एक्ट्यूएटर

उन्नत इंजीनियरिंग अनुप्रयोगों के लिए REPM अत्यंत आवश्यक हैं, इसलिए भारत में इनका घरेलू उत्पादन दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

भारत की वर्तमान स्थिति और योजना की आवश्यकता

भारत के पास रेयर अर्थ खनिजों का बड़ा भंडार है, विशेष रूप से मोनाजाइट, जो आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र में पाया जाता है। देश में लगभग 1.315 करोड़ टन मोनाजाइट उपलब्ध है, जिसमें अनुमानित 72.3 लाख टन रेयर अर्थ ऑक्साइड मौजूद हैं।

इसके अतिरिक्त, गुजरात और राजस्थान में हार्ड रॉक क्षेत्रों में 12.9 लाख टन REO संसाधन चिन्हित किए गए हैं। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा किए गए व्यापक अन्वेषण से 48.26 करोड़ टन रेयर अर्थ अयस्क संसाधनों की पहचान भी हुई है।

इसके बावजूद, भारत अभी भी REPM के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। वर्ष 2022–23 से 2024–25 के बीच भारत ने 60% से 80% तक मूल्य के आधार पर और 85% से 90% तक मात्रा के आधार पर आयात चीन से किया। अनुमान है कि 2030 तक REPM की घरेलू मांग दोगुनी हो जाएगी।

योजना के प्रमुख घटक

  • देश में 6,000 MTPA की एकीकृत REPM विनिर्माण क्षमता का निर्माण।

  • वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से अधिकतम 5 लाभार्थियों का चयन, प्रत्येक को 1,200 MTPA तक की क्षमता।

  • ₹6,450 करोड़ की बिक्री-आधारित प्रोत्साहन राशि, जो 5 वर्षों में दी जाएगी।

  • ₹750 करोड़ की पूंजी सब्सिडी, जिससे अत्याधुनिक विनिर्माण इकाइयों की स्थापना को समर्थन मिलेगा।

  • कुल 7 वर्षों की कार्यान्वयन अवधि—2 वर्ष की स्थापना अवधि और 5 वर्ष का प्रोत्साहन चरण।

राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से तालमेल

यह योजना भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण, रक्षा आत्मनिर्भरता, और रणनीतिक विनिर्माण लक्ष्यों के अनुरूप है। REPM ऊर्जा-कुशल मोटरों और पवन ऊर्जा प्रणालियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे यह पहल नेट ज़ीरो 2070 लक्ष्य को भी समर्थन देती है।

यह योजना नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन (NCMM), MMDR अधिनियम संशोधन 2023, और अन्य खनन सुधारों के साथ मिलकर भारत की क्रिटिकल मिनरल वैल्यू चेन को मजबूत करती है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य और भारत का अवसर

वैश्विक स्तर पर रेयर अर्थ और मैग्नेट आपूर्ति शृंखलाओं में बार-बार व्यवधान देखने को मिले हैं। ऐसे में भारत ने ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, जाम्बिया, पेरू, जिम्बाब्वे, मोजाम्बिक सहित कई देशों के साथ सहयोग समझौते किए हैं।

इसके साथ ही खानिज विदेश इंडिया लिमिटेड (KABIL) विदेशों में रणनीतिक खनिज परिसंपत्तियों के अधिग्रहण और अन्वेषण में सक्रिय भूमिका निभा रही है, जिससे भारत की दीर्घकालिक आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

निष्कर्ष

सिन्‍टर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट विनिर्माण योजना भारत की औद्योगिक क्षमता को मजबूत करने, आयात निर्भरता कम करने और उन्नत तकनीकी निवेश को आकर्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल रोजगार सृजन, स्वच्छ ऊर्जा अपनाने और आत्मनिर्भर भारत एवं विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी।

JBIC गवर्नर का धोलेरा SIR दौरा: भारत की उभरती सेमिकॉन सिटी में प्रगतिशील अवसंरचना का अवलोकन

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जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (JBIC) के गवर्नर नोबुमित्सु हयाशी ने आज गुजरात स्थित राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम (NICDC) के फ्लैगशिप औद्योगिक पार्क ‘धोलेरा स्पेशल इंवेस्टमेंट रीजन (धोलेरा SIR)’ का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य भारत के पहले और उभरते सेमिकॉन सिटी में प्रगति की समीक्षा करना तथा तेजी से विकसित हो रहे ग्रीनफील्ड एवं ‘प्लग-एंड-प्ले’ औद्योगिक अवसंरचना पारिस्थितिकी तंत्र का आकलन करना था। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहा है और धोलेरा देश का सबसे महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड स्मार्ट औद्योगिक शहर बनकर अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

धोलेरा SIR की विश्व-स्तरीय अवसंरचना की सराहना

दौरे के दौरान JBIC गवर्नर हयाशी ने धोलेरा SIR की विश्व-स्तरीय योजना, मजबूत अवसंरचना तैयारियों और उत्कृष्ट प्रशासनिक ढांचे की सराहना की। उन्होंने भारत की सेमीकंडक्टर विकास यात्रा पर विश्वास व्यक्त करते हुए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट की तेज प्रगति को नोट किया। उन्होंने कहा कि धोलेरा की एकीकृत प्रणालियाँ, स्केलेबल यूटिलिटीज और भविष्य-तैयार अवसंरचना उसे उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निवेशों के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी गंतव्य बनाती हैं।

ABCD बिल्डिंग और प्रमुख यूटिलिटी सुविधाओं का निरीक्षण

दौरा ABCD बिल्डिंग से शुरू हुआ, जो धोलेरा का प्रशासन एवं कमांड सेंटर है। यहाँ प्रतिनिधिमंडल ने एकीकृत योजना ढांचा, डिजिटल गवर्नेंस आर्किटेक्चर और केंद्रीकृत यूटिलिटी प्रबंधन प्रणालियों की समीक्षा की।

इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने इंस्टीट्यूटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC), एक्सपीरियंस सेंटर और टोरेंट पावर के 400 kV सबस्टेशन जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं का भ्रमण किया, जो उन्नत विनिर्माण के लिए धोलेरा की मजबूत आधारभूत संरचना को दर्शाती हैं।

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के 91,000 करोड़ रुपये के सेमीकॉन फैब प्लांट का अवलोकन

धोलेरा SIR में स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट में JBIC प्रतिनिधिमंडल ने टाटा समूह नेतृत्व के साथ बैठक की और 163-एकड़ में विकसित किए जा रहे कारखाने की प्रगति का जायजा लिया।
यह भारत का पहला व्यावसायिक सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट है, जो ₹91,000 करोड़ के निवेश से PSMC (ताइवान) के साथ मिलकर विकसित किया जा रहा है।

यह प्लांट 2027 से उत्पादन शुरू करेगा और 110 nm से 28 nm नोड्स तक प्रति माह 50,000 वेफर्स का निर्माण करेगा। इससे 20,000 से अधिक उच्च-कुशल रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
गवर्नर हयाशी ने उम्मीद जताई कि यह परियोजना भारत–जापान तकनीकी सहयोग को नए आयाम देगी।

NICDC और DICDL ने प्रस्तुत किए धोलेरा के प्रमुख फीचर्स

NICDC के CEO एवं MD रजत कुमार सैनी ने धोलेरा SIR की प्रमुख विशेषताओं पर प्रस्तुति दी। DICDL के MD  कुलदीप आर्या एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

भारत के NICDC औद्योगिक शहरों में जापानी कंपनियों का बढ़ता निवेश

जापानी कंपनियों ने NICDC के विभिन्न औद्योगिक नगरों में 116 एकड़ से अधिक क्षेत्र में ₹1,700 करोड़ से अधिक के निवेश के साथ अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है।
नवीनतम निवेशकों में NX Logistics India Pvt. Ltd. शामिल है, जिसने AURIC (शेंद्रा) में 12.86 एकड़ से विस्तार करते हुए अब धोलेरा में भी अपनी इकाई स्थापित की है। इससे ₹86 करोड़ का निवेश और 400 नौकरियाँ पैदा होंगी।

अन्य जापानी कंपनियाँ—Nippon Express, Nagata, Sango और Fuji Silvertech—भी अपने परिचालन का विस्तार कर रही हैं।

उच्च स्तरीय अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों का केंद्र बन रहा है धोलेरा

हाल के महीनों में धोलेरा ने JBIC, JETRO, JICA, जापान चैंबर ऑफ कॉमर्स एवं दर्जनों अन्य कंपनियों के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी की है।
यह भारत–जापान औद्योगिक सहयोग में धोलेरा की केंद्रीय भूमिका को प्रदर्शित करता है।

धोलेरा में विकसित हो रहा है संपूर्ण स्मार्ट औद्योगिक शहर

धोलेरा में सामाजिक अवसंरचना भी तेजी से विकसित हो रही है:

  • 200-बेड का मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल

  • एकीकृत विद्यालय

  • गेस्ट हाउस एवं कॉर्पोरेट होटल

  • अंतरराष्ट्रीय टेंट सिटी

  • मल्टी-क्यूज़ीन फूड कोर्ट

  • अग्निशमन स्टेशन

  • निजी डेवलपर्स द्वारा आवासीय व वाणिज्यिक परियोजनाएँ

धोलेरा का Activation Area एक आधुनिक मिश्रित-उपयोग परिसर के रूप में उभर रहा है।

JBIC गवर्नर हयाशी का यह दौरा न केवल धोलेरा की वैश्विक प्रतिष्ठा को मजबूत करता है, बल्कि भारत–जापान सेमीकंडक्टर सहयोग और वैश्विक वैल्यू चेन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित करता है।

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