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ASI ने प्रोजेक्ट मौसाम पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की

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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने प्रोजेक्ट मौसाम के अंतर्गत “इंडियन ओशन क्षेत्र में समुद्री नेटवर्क के संगम पर द्वीप” शीर्षक से एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। यह राष्ट्रीय कार्यशाला नवंबर 2025 में नई दिल्ली में आयोजित की गई थी, और इसका उद्देश्य प्रोजेक्ट मौसाम के थीमैटिक फ्रेमवर्क दस्तावेज़ को अंतिम रूप देने के लिए अंतरविषयक इनपुट और दृष्टिकोण एकत्रित करना था। यह दस्तावेज़ परियोजना के लक्ष्य, उद्देश्य, दायरा और गतिविधियों के साथ-साथ भविष्य के लिए रोडमैप का विवरण प्रस्तुत करता है।

कार्यशाला के आयोजन के लिए ASI के आवंटित बजट से ₹30 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी, और इसका लगभग ₹25,70,182/- व्यय हुआ।

प्रोजेक्ट मौसाम में संयुक्त अंतरराष्ट्रीय नामांकन, अनुसंधान और प्रलेखन, तथा साझेदार देशों के बीच क्षमता निर्माण शामिल है।

यह जानकारी आज लोकसभा में संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने एक लिखित उत्तर में दी।

“भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की खुदाई शाखाओं में स्टाफिंग और आधुनिक तकनीकों का उपयोग”

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ASI (Archaeological Survey of India) की खुदाई शाखाओं में स्टाफिंग नियमित भर्ती नियमों (UPSC, SSC) और फीडर ग्रेड अधिकारियों के प्रमोशन के माध्यम से पूरी की जाती है। पिछले एक वर्ष में खुदाई शाखाओं में स्टाफ़ की संख्या 86 से बढ़कर 102 हो गई है। उपलब्ध कर्मचारियों को चल रहे खुदाई प्रोजेक्ट्स की आवश्यकताओं के अनुसार तैनात किया जाता है।

फील्ड स्टाफ की क्षमता बढ़ाने के लिए समय-समय पर आंतरिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 तक 24 खुदाई/अन्वेषण की अनुमति दी गई है और हर खुदाई के बाद तकनीकी रिपोर्ट तैयार करना अनिवार्य है।

अकादमिक और पुरातात्त्विक सहयोगों की समयावधि और प्रकार संबंधित शाखाओं द्वारा समीक्षा की जाती है। LiDAR, GIS, ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग प्राचीन स्मारकों और पुरातात्त्विक स्थलों के अध्ययन और दस्तावेजीकरण के लिए किया जा रहा है।

संरक्षित स्मारकों और क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने के लिए Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act, 1958 और Public Premises (Eviction of Unauthorised Occupants) Act, 1971 के तहत कदम उठाए जाते हैं। सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट को एस्टेट ऑफिसर के अधिकार दिए गए हैं, और आवश्यकतानुसार राज्य सरकार/पुलिस की मदद भी ली जाती है। सुरक्षा के लिए नियमित वॉच और वार्ड स्टाफ के अलावा CISF और निजी सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं।

Key Points:

  • खुदाई शाखाओं में स्टाफ़ बढ़कर 102 हुआ।

  • 24 खुदाई/अन्वेषण परियोजनाओं की अनुमति।

  • LiDAR, GIS, ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल।

  • अतिक्रमण रोकने और स्मारकों की सुरक्षा के लिए कानूनी और फिजिकल उपाय।

  • फील्ड स्टाफ के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम।

राष्ट्रीय सांख्यिकीय सर्वेक्षणों के डेटा की पारदर्शिता, सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए MoSPI की व्यापक पहल

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 यह जानकारी आज लोकसभा में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री, साथ ही योजना मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री एवं संस्कृति मंत्रालय के राज्य मंत्री राव इंदरजीत सिंह द्वारा दी गई।

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) के यूनिट-लेवल डेटा की सुगम उपलब्धता

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा संचालित राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) के यूनिट-लेवल डेटा और मेटाडेटा को मंत्रालय की वेबसाइट पर नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है।
डाटा उपयोगकर्ताओं के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश दिए जाते हैं ताकि वे आसानी से सर्वेक्षण संकेतकों का निर्माण कर सकें।

डेटा डाउनलोड को और सरल बनाने के लिए, एक डेटा एक्सट्रैक्शन टूल भी उपलब्ध कराया गया है, जिससे उपयोगकर्ता कच्चे डेटा को उपयोगी व विश्लेषणयोग्य प्रारूप में परिवर्तित कर सकें। सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी होने के बाद डेटा यूज़र्स कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की जाती हैं ताकि उपयोगकर्ताओं की समझ बढ़ाई जा सके और पद्धति से जुड़ी जिज्ञासाओं का समाधान हो सके।

डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा

MoSPI द्वारा डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए कड़े प्रोटोकॉल अपनाए जाते हैं:

  • माइक्रोडाटा/यूनिट-लेवल डेटा को अनाम (anonymized) किया जाता है ताकि किसी व्यक्ति की पहचान न उजागर हो।

  • डेटा संग्रह के लिए Computer Assisted Personal Interviewing (CAPI) का उपयोग किया जाता है, जिसमें

    • संपूर्ण डेटा ट्रांसमिशन एन्क्रिप्टेड मोड में होता है।

    • डेटा सुरक्षित क्लाउड-आधारित प्लेटफ़ॉर्म पर संग्रहित किया जाता है।

राज्यों की क्षमता निर्माण (Capacity Building)

MoSPI द्वारा राज्यों को विस्तृत प्रशिक्षण दिए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • NSS सर्वेक्षणों का संचालन

  • CAPI सॉफ्टवेयर का उपयोग

  • क्लाउड-आधारित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का प्रबंधन

सर्वेक्षण बाद की टेब्युलेशन वर्कशॉप्स के माध्यम से राज्य अधिकारियों की क्षमता और बढ़ाई जाती है।
मंत्रालय द्वारा ‘Support for Statistical Strengthening (SSS)’ उप-योजना के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सांख्यिकीय क्षमता बढ़ाने हेतु 2010 से 27 नवम्बर 2025 तक ₹364.69 करोड़ प्रदान किए गए हैं, जिनमें से ₹42.01 करोड़ EFC 2021-26 अवधि के दौरान जारी किए गए।

वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) में डेटा गुणवत्ता सुनिश्चित करना

ASI के लिए डेटा संग्रह अब वेब पोर्टल के माध्यम से किया जाता है, जिससे:

  • मानवीय त्रुटियों में कमी

  • डेटा में स्वतः वैलिडेशन

  • माइक्रो व मैक्रो स्तर पर डेटा चेक

MoSPI द्वारा नियमित रूप से ASI राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाती हैं ताकि उद्योग प्रतिनिधियों को सर्वेक्षण के महत्व से अवगत कराया जा सके और उनकी भागीदारी बढ़ाई जा सके।
इसके अलावा:

  • मल्टी-लेयर वैलिडेशन चेक

  • ASI यूनिट्स के लिए जागरूकता कैंप

  • निरीक्षण व प्रशिक्षण

द्वारा डेटा की गुणवत्ता लगातार बेहतर की जा रही है।


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