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उन्नत उपग्रह संचार प्रौद्योगिकियों और सेवा गुणवत्ता मानकों पर टीईसी ने आयोजित की कार्यशाला

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दूरसंचार विभाग (DoT) की तकनीकी शाखा दूरसंचार इंजीनियरिंग केंद्र (TEC) ने आज नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय में “उन्नत उपग्रह संचार प्रौद्योगिकियां और सेवा गुणवत्ता मानक निर्धारण” विषय पर एक कार्यशाला का सफल आयोजन किया।

कार्यशाला में IN-SPACe, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA), आईआईटी दिल्ली तथा NGSO (नॉन-जियोस्टेशनरी ऑर्बिट) और GSO (जियोस्टेशनरी ऑर्बिट) उपग्रह ऑपरेटरों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें अमेज़न कुइपर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस लिमिटेड, वनवेब इंडिया कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड, स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड, नेल्को लिमिटेड, ह्यूजेस कम्युनिकेशंस इंडिया सहित अन्य प्रमुख संस्थाएं शामिल थीं।

यह कार्यक्रम सरकार, नियामक संस्थाओं, शिक्षाविदों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और व्यापक उपग्रह पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाने वाला महत्वपूर्ण सहयोगात्मक आयोजन रहा।

कार्यशाला में नॉन-टेरेस्ट्रियल नेटवर्क (NTN), उपग्रह-एकीकृत 5G और 6G प्रणालियों, स्पेक्ट्रम प्रबंधन तथा उपग्रह और स्थलीय नेटवर्कों के बढ़ते एकीकरण जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई।

प्रमुख NGSO उपग्रह ऑपरेटरों—अमेज़न कुइपर, जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस, वनवेब इंडिया और स्टारलिंक—ने उपग्रह आधारित ब्रॉडबैंड सेवाओं के विकसित होते परिदृश्य, तैनाती संबंधी चुनौतियों तथा कनेक्टिविटी विस्तार के लिए अपनाए जा रहे तकनीकी नवाचारों पर अपने विचार साझा किए।

कार्यशाला में चर्चा के प्रमुख विषय

  • उपग्रह संचार क्षेत्र में उभरते रुझान

  • उपग्रह प्रणालियों का स्थलीय 5G और 6G नेटवर्कों के साथ एकीकरण

  • स्पेक्ट्रम साझाकरण मॉडल और इंटरऑपरेबिलिटी ढांचे

  • उपग्रह ब्रॉडबैंड के वैश्विक विकास और तैनाती अनुभव

  • सेवा गुणवत्ता (QoS) और उपयोगकर्ता अनुभव गुणवत्ता (QoE) के मानक

  • उपग्रह आधारित कनेक्टिविटी से जुड़े अवसर और चुनौतियां

टीईसी ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी प्रगति के साथ कदमताल बनाए रखने, मानकों के समन्वय और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिए हितधारकों के साथ नियमित संवाद अत्यंत आवश्यक है।

कार्यशाला से प्राप्त सुझाव और अनुशंसाएं भारत के डिजिटल संचार ढांचे के विकास, भविष्य के सेवा गुणवत्ता मानकों के निर्धारण तथा एक सुदृढ़ और समावेशी उपग्रह संचार पारिस्थितिकी तंत्र को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।

टीईसी के बारे में

दूरसंचार इंजीनियरिंग केंद्र (TEC), भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) की तकनीकी शाखा है। टीईसी भारत में दूरसंचार उपकरणों और नेटवर्कों के लिए तकनीकी मानक, विनिर्देश तथा अनुरूपता मूल्यांकन आवश्यकताएं तैयार करता है, जिससे इंटरऑपरेबिलिटी, गुणवत्ता और वैश्विक मानकों के अनुरूपता सुनिश्चित की जा सके।

टीईसी अंतरराष्ट्रीय मंचों जैसे आईटीयू-टी (ITU-T) और आईटीयू-आर (ITU-R) में भारत का प्रतिनिधित्व करता है तथा वैश्विक मानकीकरण गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय कार्य समूहों का समन्वय भी करता है।

ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने जारी किए संशोधित TDIP दिशानिर्देश, 6G में भारत को वैश्विक नेतृत्व दिलाने पर जोर

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केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज दूरसंचार विभाग की टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट प्रमोशन (TDIP) योजना के संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए, जिनका उद्देश्य वैश्विक दूरसंचार मानकीकरण में भारत की भागीदारी को मजबूत करना और स्वदेशी दूरसंचार तकनीकों के विकास को तेज करना है। इस अवसर पर संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी तथा दूरसंचार सचिव एवं डिजिटल कम्युनिकेशंस आयोग के अध्यक्ष अमित अग्रवाल भी उपस्थित रहे।

संशोधित TDIP योजना 2026–31 की अवधि के लिए ₹203 करोड़ के कुल बजट के साथ तैयार की गई है। इसका उद्देश्य भारतीय संस्थाओं को वैश्विक मानकों में योगदान देने, नवाचार को बढ़ावा देने और 5G एडवांस्ड तथा 6G जैसी अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीकों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है।

वैश्विक दूरसंचार मानकीकरण में भारत की भूमिका मजबूत

यह योजना भारत की भागीदारी को अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU), 3GPP और oneM2M जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बढ़ाने का लक्ष्य रखती है। इसके तहत भारतीय हितधारकों को वैश्विक बैठकों में भाग लेने, तकनीकी प्रस्ताव प्रस्तुत करने, नेतृत्व भूमिकाएं निभाने और भारत में अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी।

इससे भारत को भविष्य की दूरसंचार तकनीकों के विकास में प्रमुख योगदानकर्ता बनाने और घरेलू नवाचार को वैश्विक मानकों के अनुरूप लाने में मदद मिलेगी।

व्यापक भागीदारी और नवाचार को बढ़ावा

संशोधित दिशा-निर्देशों में स्टार्टअप, एमएसएमई, शिक्षण संस्थान, शोध संस्थान, दूरसंचार सेवा प्रदाता और उद्योग जगत को शामिल किया गया है। इससे पूरे दूरसंचार इकोसिस्टम में सहयोग और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

योजना के तहत पायलट प्रोजेक्ट, प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट और तकनीकी प्रदर्शन को भी समर्थन मिलेगा, जिससे अनुसंधान से व्यावहारिक उपयोग तक का मार्ग मजबूत होगा।

क्रियान्वयन के लिए संस्थागत ढांचा

इस योजना को टेलीकम्युनिकेशंस स्टैंडर्ड्स डेवलपमेंट सोसाइटी ऑफ इंडिया (TSDSI), टेलीकॉम सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस (TCoE) और टेलीकम्युनिकेशंस कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (TCIL) जैसी संस्थाओं के माध्यम से लागू किया जाएगा।

स्वदेशी तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा

यह योजना दूरसंचार विभाग की अन्य पहलों जैसे टेलीकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TTDF) और भारत 6G मिशन के साथ मिलकर काम करेगी, जिससे अगली पीढ़ी के दूरसंचार अनुसंधान और विकास को गति मिलेगी।

संशोधित TDIP योजना भारत को वैश्विक दूरसंचार मानकीकरण में मजबूत उपस्थिति दिलाने और 6G व भविष्य की संचार प्रणालियों में वैश्विक नेतृत्व स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

स्वदेशी 5G/6G और सुरक्षित संचार तकनीकों को बढ़ावा देगा सी-डॉट–आईआईटी रुड़की का नया उत्कृष्टता केंद्र

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सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट), जो संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) के अंतर्गत एक प्रमुख अनुसंधान एवं विकास केंद्र है, ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (IIT रुड़की) — एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय महत्व के संस्थान — के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय और आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल के. पंत एमओयू हस्ताक्षर समारोह के दौरान।


इस एमओयू के तहत, सी-डॉट IIT रुड़की में एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) की स्थापना कर रहा है। सी-डॉट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) का मुख्य उद्देश्य उन्नत संचार प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी अनुसंधान, नवाचार और क्षमता निर्माण को गति देना है। यह CoE वायरलेस संचार, क्वांटम प्रौद्योगिकियां, साइबर सुरक्षा और AI आधारित अनुप्रयोगों जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान पर विशेष ध्यान केंद्रित करेगा। इस केंद्र की स्थापना से IIT रुड़की की शैक्षणिक विशेषज्ञता और सी-डॉट की औद्योगिक क्षमता का लाभ उठाते हुए शिक्षा जगत और उद्योग के बीच समन्वय को बढ़ावा मिलेगा। यह छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्ट-अप कंपनियों को भारत की नवाचार और आत्मनिर्भरता की यात्रा में योगदान देने में सक्षम बनाएगा और वैश्विक दूरसंचार नवाचार में भारत की नेतृत्व क्षमता को मजबूत करेगा।

यह केंद्र 5G/6G, RF-Sub-THz इंटीग्रेटेड सर्किट, सेंसर, मिलीमीटर-वेव बीमफॉर्मिंग ऐंटेना (ICs के साथ एकीकृत), V2X संचार, डेटा-आधारित वायरलेस संचार प्रौद्योगिकियां, ऊर्जा दक्षता आदि जैसे प्रमुख उभरते क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान एवं प्रोटोटाइप विकास को आगे बढ़ाएगा।

एमओयू पर हस्ताक्षर IIT रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत और सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय की उपस्थिति में किए गए। संस्थान के संकाय सदस्यों और सी-डॉट के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस अवसर पर भाग लिया। एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद उन्नत संचार प्रौद्योगिकियों और उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान को समर्पित नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) का उद्घाटन किया गया।

सी-डॉट की स्वदेशी दूरसंचार समाधानों के विकास में गहन विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए, यह CoE उच्च-प्रभाव वाले अनुसंधान और विकास का समर्पित केंद्र होगा, जो स्टार्ट-अप्स का समर्थन करेगा, बौद्धिक संपदा का विकास करेगा, और कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और संयुक्त अकादमिक-उद्योग सहयोग के माध्यम से सतत ज्ञान विनिमय सक्षम करेगा। यह भारत की वैश्विक दूरसंचार नवाचार में नेतृत्व क्षमता को मजबूत करेगा और देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

दिन में बाद में, छठी प्रो. ए.के. कमल मेमोरियल लेक्चर श्रृंखला के अंतर्गत, सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने “विकसित भारत के लिए स्वदेशी संचार प्रौद्योगिकियों का निर्माण” विषय पर व्याख्यान दिया। इस व्याख्यान में भारत के दूरसंचार परिदृश्य, भारत 6G विजन, दूरसंचार मूल्य श्रृंखला, मानकों और भारत के लिए अवसरों पर प्रकाश डाला गया। डॉ. उपाध्याय ने 4G/5G, TRINETRA साइबर सुरक्षा समाधान, सुरक्षित क्वांटम संचार (QKD एवं PQC), आपदा प्रबंधन, AI-सक्षम उन्नत दूरसंचार अनुप्रयोग जैसे संचार साथी, धोखाधड़ी पता लगाने की प्रणालियाँ और मिशन क्रिटिकल कम्युनिकेशन (MCX) जैसे क्षेत्रों में सी-डॉट के स्वदेशी समाधानों को भी रेखांकित किया।

CoE की दृष्टि के बारे में बताते हुए, डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने कहा,

“यह सहयोग भारत के प्रमुख शैक्षिक संस्थान की विशेषज्ञता और सी-डॉट की अनुसंधान एवं विकास क्षमता को एक साथ लाता है, जिससे स्वदेशी दूरसंचार नवाचार में तेजी आएगी। IIT रुड़की और सी-डॉट मिलकर ऐसी तकनीकों का निर्माण करेंगे जो विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता को कम करेंगी और 5G, 6G, AI और सुरक्षित संचार प्रणाली जैसे उन्नत क्षेत्रों में भारत के नेतृत्व को मजबूती देंगी।”

IIT रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत ने इस साझेदारी के महत्व पर कहा,

“यह सहयोग IIT रुड़की के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, क्योंकि हम C-DOT के साथ मिलकर भारत की अगली पीढ़ी की दूरसंचार क्षमताओं को आगे बढ़ाने जा रहे हैं। संचार इंजीनियरिंग, सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों और उभरती वायरलेस प्रणालियों में हमारी मजबूत विरासत, C-DOT के सुरक्षित, स्वदेशी और भविष्य-तैयार दूरसंचार समाधानों के राष्ट्रीय मिशन को समर्थन देगी। यह CoE हमारे संकाय, शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए रणनीतिक राष्ट्रीय महत्व की तकनीकों के सह-विकास का परिवर्तनकारी मंच प्रदान करेगा और भारत की दीर्घकालिक तकनीकी नेतृत्व दृष्टि को आगे बढ़ाएगा।”

भारत की दूरसंचार तकनीक में नई क्रांति: TEC और SRMIST ने 6G, क्वांटम संचार और AI पर सहयोग के लिए MoU किया साइन

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दूरसंचार विभाग (DoT), भारत सरकार के तकनीकी अंग, टेलीकॉम इंजीनियरिंग सेंटर (TEC) ने SRM विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (SRMIST) के साथ संयुक्त अध्ययन, शोध और उन्नत दूरसंचार तकनीकों एवं वैश्विक मानकीकरण गतिविधियों में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस साझेदारी का उद्देश्य भारत-विशिष्ट मानक और परीक्षण ढांचे विकसित करना, 6G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), गैर-भू-आधारित नेटवर्क (NTN), क्वांटम संचार जैसी भविष्य की नेटवर्क तकनीकों का अध्ययन करना और ITU-T, ITU-D, ITU-R जैसे अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार मानकीकरण समूहों में भारत की भागीदारी बढ़ाना है।

13 नवंबर 2025 को SRMIST, कट्टनकुलथुर, चेन्नई में हुए इस अवसर पर TEC के अमित कुमार श्रीवास्तव और SRMIST के रजिस्ट्रार डॉ. एस. पोनुसामी ने MoU पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर TEC और SRMIST के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।

सहयोग के मुख्य क्षेत्र:

  • 6G: AI-संचालित संसाधन प्रबंधन, बुद्धिमान शेड्यूलिंग और कम-लेटेंसी नेटवर्किंग पर सहयोग।

  • डिजिटल ट्विन: नेटवर्क व्यवहार के मॉडल और अनुकूलन के लिए साझा ढांचा।

  • क्वांटम संचार: क्वांटम क्रिप्टोग्राफी और 6G आर्किटेक्चर।

  • एज AI और वितरित इंटेलिजेंस: रियल-टाइम एनालिटिक्स, ऑटोमेशन और पूर्वानुमान समाधान।

  • AI और जेनरेटिव मॉडल्स: LLMs, फेडरेटेड लर्निंग और नेटवर्क ऑटोमेशन में सहयोग।

  • साइबर सुरक्षा: सुरक्षित और लचीले संचार नेटवर्क पर अनुसंधान।

  • RF, माइक्रोवेव और टेराहर्ट्ज: उन्नत वायरलेस संचार तकनीकों में सहयोग।

  • mmWave और कॉग्निटिव रेडियो: बीमफॉर्मिंग और स्पेक्ट्रम-कुशल संचार।

  • ऑप्टिकल कम्युनिकेशन: ऑप्टिकल और ऑप्टिकल वायरलेस सिस्टम्स पर शोध।

  • NTN: सैटेलाइट-टेरस्ट्रियल इंटीग्रेशन और HAPS पर मानकीकरण।

  • ओपन RAN और नेटवर्क डिसएग्रीगेशन: ओपन इंटरफेस और इंटरऑपरेबिलिटी।

इस साझेदारी से भारत में स्वदेशी R&D को बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक मानकीकरण प्रक्रियाओं में देश की भागीदारी मजबूत होगी। यह 'आत्मनिर्भर भारत' दृष्टि को सशक्त करते हुए दूरसंचार में भारत-विशिष्ट मानक, परीक्षण ढांचे और घरेलू समाधान विकसित करने में मदद करेगा।

TEC के बारे में:

TEC दूरसंचार विभाग का तकनीकी अंग है, जो भारत में दूरसंचार उपकरण और नेटवर्क के लिए तकनीकी मानक, विनिर्देश और अनुरूपता आवश्यकताएं तय करता है और भारत का प्रतिनिधित्व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर करता है।

SRMIST के बारे में:

SRM विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (SRMIST) की स्थापना 1985 में हुई थी। SRMIST आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, उन्नत दूरसंचार और क्वांटम संचार सहित उभरती ICT तकनीकों में मजबूत अकादमिक और अनुसंधान क्षमता रखता है।


TEC और IIT बॉम्बे के बीच उन्नत दूरसंचार तकनीक और मानकीकरण पर सहयोग समझौता

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दूरसंचार विभाग (DoT), भारत सरकार के तकनीकी अंग टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग सेंटर (TEC) ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे (IIT बॉम्बे) के साथ एक सहयोग ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य उन्नत दूरसंचार प्रौद्योगिकियों, वैश्विक मानकीकरण गतिविधियों, और संयुक्त अध्ययन व अनुसंधान में सहयोग को बढ़ावा देना है।

यह साझेदारी भारत-विशिष्ट मानक और परीक्षण ढांचे विकसित करने, भविष्य की नेटवर्क प्रौद्योगिकियों जैसे 6G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), नेक्स्ट जनरेशन नेटवर्क (NGN), VoIP आदि पर अनुसंधान करने और ITU-T (इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन – टेलीकम्युनिकेशन स्टैंडर्डाइजेशन सेक्टर) के अध्ययन समूहों में भारत की भागीदारी को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है।

यह समझौता 7 नवम्बर 2025 को अमित कुमार श्रीवास्तव, उप महानिदेशक (मोबाइल टेक्नोलॉजी), TEC और प्रो. सचिन पतवर्धन, डीन (अनुसंधान एवं विकास), IIT बॉम्बे द्वारा हस्ताक्षरित किया गया। इस अवसर पर सैयद तौसीफ अब्बास, वरिष्ठ उप महानिदेशक एवं प्रमुख (TEC), जितेंद्र बी. चव्हाण, उप महानिदेशक (WR TEC), मुंबई, और प्रो. प्रसन्न एस. चपोर्कर, विद्युत अभियांत्रिकी विभाग, IIT बॉम्बे उपस्थित थे।

यह सहयोग TEC और IIT बॉम्बे के बीच अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीकों और मानकीकरण गतिविधियों पर घनिष्ठ रूप से कार्य करने के लिए एक औपचारिक ढांचा स्थापित करता है।

प्रमुख सहयोग क्षेत्र:

  • 6G: 6G आर्किटेक्चर और सक्षम प्रौद्योगिकियों का अध्ययन, 3GPP एवं संबंधित वैश्विक मंचों में अनुसंधान और मानकीकरण गतिविधियों में योगदान।

  • कोर नेटवर्क: दूरसंचार कोर नेटवर्क पर संयुक्त अध्ययन और तकनीकी योगदान।

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): AI-आधारित बुद्धिमान नेटवर्क, स्वचालन और पूर्वानुमानित रखरखाव के लिए AI-संचालित दूरसंचार अनुप्रयोगों का विकास।

  • उपग्रह संचार प्रणाली: दूरस्थ क्षेत्रों और ग्रामीण संपर्क अनुप्रयोगों के लिए कम लागत वाले स्वदेशी उपग्रह संचार टर्मिनलों का डिजाइन और विकास।

  • सिग्नलिंग आवश्यकताएं और प्रोटोकॉल: NGN, VoIP, IMT-2020/2030 सहित टेलीकॉम नेटवर्क के लिए सिग्नलिंग आवश्यकताओं और प्रोटोकॉल पर संयुक्त अध्ययन।

यह साझेदारी स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास (R&D) को गति देने और वैश्विक मानकीकरण प्रक्रियाओं में भारत की भूमिका को मजबूत करने में मदद करेगी। साथ ही, यह सहयोग आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए स्वदेशी अनुसंधान, डिजाइन और विनिर्माण क्षमताओं को सुदृढ़ करेगा — जिससे भारत-विशिष्ट मानक, परीक्षण ढांचे और समाधान विकसित होंगे, जो देश की दूरसंचार सुरक्षा को मजबूत करेंगे और आयात पर निर्भरता घटाएँगे।

टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग सेंटर (TEC) के बारे में

TEC, दूरसंचार विभाग (DoT) का तकनीकी अंग है। यह भारत में दूरसंचार उपकरणों और नेटवर्क के लिए तकनीकी मानक, विनिर्देश और अनुरूपता मूल्यांकन आवश्यकताओं को तैयार करता है। TEC यह सुनिश्चित करता है कि देश में दूरसंचार प्रणालियाँ वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप हों और ITU-T, ITU-R जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करता है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे (IIT बॉम्बे) के बारे में

IIT बॉम्बे, जिसे भारत सरकार द्वारा "Institute of Eminence" के रूप में मान्यता प्राप्त है, विज्ञान, अभियांत्रिकी, डिजाइन, प्रबंधन और मानविकी के विभिन्न क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और अत्याधुनिक अनुसंधान के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यह दूरसंचार नेटवर्क सिग्नलिंग, NGN, 5G/6G तकनीक, और AI अनुप्रयोगों के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार में अग्रणी है।

TEC और IIIT नया रायपुर ने अगले-जेनरेशन टेलीकॉम तकनीकों में सहयोग के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए

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टेलीकॉम इंजीनियरिंग सेंटर (TEC), जो कि भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) की तकनीकी शाखा है, ने इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT) नया रायपुर के साथ एक सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीकों में अनुसंधान, नवाचार और मानकीकरण के क्षेत्र में संयुक्त प्रयास करना है।

यह रणनीतिक साझेदारी TEC की राष्ट्रीय टेलीकॉम मानकीकरण में नेतृत्व क्षमता और IIIT नया रायपुर की अकादमिक एवं शोध उत्कृष्टता को जोड़ती है। यह सहयोग भारत की वैश्विक टेलीकॉम नवाचार में भूमिका को सशक्त बनाने के लिए एक संयुक्त ढांचा प्रदान करेगा।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र:

  1. ओपन RAN और नेटवर्क डिसएग्रीगेशन:

    • ओपन इंटरफेस, मॉड्यूलर आर्किटेक्चर, वर्चुअलाइजेशन और विक्रेता इंटरऑपरेबिलिटी का विकास।

  2. कॉग्निटिव रेडियो और स्पेक्ट्रम शेयरिंग:

    • सह-अस्तित्व ढांचे पर अनुसंधान और WRC-27 एजेंडा आइटम्स के अनुरूप अध्ययन।

  3. 5G / 6G / IoT फ्रेमवर्क:

    • उभरती तकनीकों और भविष्य के नेटवर्क जनरेशन के परीक्षण वातावरण पर संयुक्त अनुसंधान।

  4. मानकीकरण में योगदान:

    • ITU-T अध्ययन समूहों और TEC के राष्ट्रीय कार्य समूहों में सहयोगी भागीदारी।

  5. भारत-विशेष परीक्षण फ्रेमवर्क:

    • भारत के डिजिटल इकोसिस्टम के अनुरूप मानक और इंटरऑपरेबिलिटी समाधान विकसित करना।

यह सहयोग भारत की वैश्विक टेलीकॉम मानकों और अंतरराष्ट्रीय नीति मंचों में भागीदारी को सशक्त बनाएगा। संयुक्त अनुसंधान परीक्षणबेड और वास्तविक दुनिया की परियोजनाओं से नवाचार में तेजी आएगी। इसके साथ ही यह साझेदारी डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देगी, और भारत की विविध कनेक्टिविटी आवश्यकताओं के अनुसार सुलभ, इंटरऑपरेबल और विक्रेता-निरपेक्ष समाधान विकसित करेगी।

सबसे महत्वपूर्ण, यह भारत को 6G नेटवर्क और उन्नत IoT एप्लिकेशन की अगली लहर के लिए तैयार करेगा और वैश्विक डिजिटल परिवर्तन में देश को अग्रिम पंक्ति में बनाए रखेगा।

आत्मनिर्भर भारत में योगदान:

यह सहयोग टेलीकॉम तकनीकों में देशी अनुसंधान, डिजाइन और विकास को बढ़ावा देकर भारत के आत्मनिर्भर भारत विज़न को भी सुदृढ़ करेगा। भारत-विशेष मानक और परीक्षण फ्रेमवर्क विकसित करके, यह साझेदारी आवश्यक संचार अवसंरचना में आयातित समाधानों पर निर्भरता को कम करेगी।

TEC के बारे में:

टेलीकॉम इंजीनियरिंग सेंटर (TEC) दूरसंचार विभाग (DoT) की तकनीकी शाखा है। TEC भारत में टेलीकॉम उपकरण और नेटवर्क के लिए तकनीकी मानक, विनिर्देश और परीक्षण आवश्यकताएँ तैयार करता है, जिससे इंटरऑपरेबिलिटी, गुणवत्ता और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ संरेखण सुनिश्चित होता है।

IIIT नया रायपुर के बारे में:

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT) नया रायपुर राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है, जो सूचना और संचार तकनीकों में उन्नत अनुसंधान और नवाचार में संलग्न है। संस्थान उद्योग और सरकार के साथ मिलकर तकनीकी विकास, कौशल निर्माण और भारत के डिजिटल परिवर्तन के लिए नवाचार को बढ़ावा देता है।


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