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छत्तीसगढ़ में सेमीकंडक्टर उद्योग की स्थापना से प्रदेश के विकास में जुड़ा नया आयाम

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में सेमीकंडक्टर उद्योग की स्थापना से प्रदेश के विकास में नया आयाम जुड़ रहा है। छत्तीसगढ़ के युवा अब दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीक में अपनी जगह बना रहे हैं। सेमीकंडक्टर क्रांति के साथ छत्तीसगढ़ देश के उच्च-प्रौद्योगिकी मानचित्र पर उभर रहा है। 

पॉलीमैटेक इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा राज्य में सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित करने का निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विज़न और केंद्र सरकार की अग्रणी तकनीकी नीतियों का परिणाम है। पॉलीमैटेक इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड, जो भारत की पहली सेमीकंडक्टर चिप निर्माता कंपनी है, छत्तीसगढ़ में ₹1143 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक विनिर्माण इकाई स्थापित कर रही है। डेढ़ लाख वर्ग फीट क्षेत्र में बनने वाला यह प्लांट वर्ष 2030 तक 10 अरब चिप्स का उत्पादन करेगा, 

जो टेलीकॉम, 6G/7G, लैपटॉप, पावर-इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य उभरती तकनीकों में उपयोग होंगे। इस प्लांट से छत्तीसगढ़ के अनेक युवाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। पॉलीमैटेक इलेक्ट्रॉनिक्स ने छत्तीसगढ़ के चयनित युवाओं की पहली सूची जारी की है, जिनमें अधिकांश छत्तीसगढ़ के इंजीनियरिंग और कॉमर्स ग्रेजुएट्स शामिल हैं। चयनित युवाओं में में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से कुल 12 युवा शामिल हैं। 

इनमें दुर्ग से आभार मेहूंकर (B.Tech–EEE), भिलाई से अभिषेक काशी (B.Tech–E&T), बालोद से नवीन कुमार देवांगन (B.Tech–ME), रायपुर से कुणाल यादव (BE–Mechanical), बस्तर से तुषार देवांगन (B.Tech–E&T), रायपुर से अपूर्व देवांगन (B.Tech–E&T), भिलाई की धारा सरपे (B.Tech–EEE), रायपुर के अरिन सोनी (B.Tech–E&T), रायगढ़ की तरू यादव (B.Tech–E&T), भिलाई के तुषार कुमार ठाकुर (BE–Mechanical), रायपुर के भूपेंद्र यादव (B.Com) तथा बालोद के अबिश सी. थॉमस (M.Com) को प्रशिक्षण एवं नियुक्ति के लिए चयनित किया गया है।

कंपनी के अधिकारियों ने बताया है कि चयनित युवाओं को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण देने के लिए चेन्नई में ट्रेनिंग दी जाएगी। युवाओं के एयर ट्रैवल, आवास, भोजन सहित सभी खर्च कंपनी वहन करेगी। इसके बाद चयनित युवाओं को एस्टोनिया, सिंगापुर और फ्रांस स्थित पॉलीमैटेक के वैश्विक प्लांट्स में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सभी चयनित उम्मीदवार फ्रेश इंजीनियर्स हैं। मार्च 2026 तक चयनित युवाओं की संख्या बढ़कर 200 से 250 तक हो जाएगी। "सेमीकंडक्टर उद्योग की स्थापना से प्रदेश के विकास में एक नया तकनीकी अध्याय जुड़ रहा है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विज़न के अनुरूप छत्तीसगढ़ अब उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में तेज़ी से उभर रहा है। पॉलीमैटेक द्वारा राज्य के युवाओं को चयनित कर उन्हें चेन्नई सहित एस्टोनिया, सिंगापुर और फ्रांस के वैश्विक प्लांट्स में उच्चस्तरीय प्रशिक्षण प्रदान करना इस बात का प्रमाण है कि हमारे युवाओं की क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है। यह अवसर न केवल रोजगार का माध्यम बनेगा, बल्कि युवाओं को अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर तकनीक की गहन समझ देकर उन्हें भविष्य का तकनीकी नेतृत्व प्रदान करेगा। हमारी सरकार हर निवेशक को पूर्ण सहयोग और हर युवा को विश्वस्तरीय कौशल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।” - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

छत्तीसगढ़ बनेगा मध्य भारत का टेक्नोलॉजी और नवाचार हब : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) नवा रायपुर के 10वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय ‘मेक इन सिलिकॉन’ संगोष्ठी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपना रजत जयंती वर्ष मना रहा है और आज राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ का भी ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेशवासियों और ट्रिपल आईटी परिवार को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संस्थान महान शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर स्थापित है, जिन्होंने शिक्षा, एकता और औद्योगिक विकास को राष्ट्र की प्रगति से जोड़ा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सेमीकंडक्टर मिशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। यह मिशन न केवल बुनियादी ढांचा विकसित कर रहा है, बल्कि युवाओं को सशक्त बनाने और नवाचार को प्रोत्साहन देने का भी कार्य कर रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सेमीकंडक्टर आज आधुनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है— मोबाइल, सैटेलाइट, रक्षा प्रणाली और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सभी इससे जुड़े हैं। ऐसे में ‘मेक इन सिलिकॉन’ जैसी पहल भारत की चिप क्रांति को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ इस मिशन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कुशल मानव संसाधन, सुदृढ़ औद्योगिक ढांचा, निर्बाध बिजली आपूर्ति और तकनीकी विकास के लिए अनुकूल माहौल उपलब्ध है। नवा रायपुर में सेमीकंडक्टर यूनिट की स्थापना का भूमिपूजन हो चुका है, जिससे युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर को आईटी और इनोवेशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य का ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन डॉक्यूमेंट’ सतत विकास पर केंद्रित है, जिसमें सेमीकंडक्टर को प्रमुख क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इज ऑफ डूइंग बिज़नेस के साथ अब स्पीड आफ डूइंग बिज़नेस पर भी बल दे रही है।

मुख्यमंत्री ने देशभर से आए विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस संगोष्ठी से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश को लाभ मिलेगा। उन्होंने आह्वान किया कि “हम सब मिलकर छत्तीसगढ़ को मध्य भारत का ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार का केंद्र बनाएं तथा भारत के सेमीकंडक्टर मिशन में सक्रिय योगदान दें।”

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि जब मैं पढ़ाई कर रहा था, तब छत्तीसगढ़ में एक भी राष्ट्रीय स्तर का संस्थान नहीं था। किंतु पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता के कारण आज प्रदेश में आईआईटी, आईआईएम, एचएनएलयू, एम्स, एनआईटी और ट्रिपल आईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान स्थापित हुए हैं। इन संस्थानों ने राज्य को उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नई पहचान दी है।

चौधरी ने कहा कि वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ में शिक्षा और तकनीकी विकास की अपार संभावनाएँ हैं। आज का युग टेक्नोलॉजी-ड्रिवन इकोनॉमी का है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट के सर्वर डाउन होने से विश्वभर में जिस प्रकार कार्य प्रभावित हुए, उससे स्पष्ट है कि पावर टेक्नोलॉजी आज जीवन, अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रणाली को किस हद तक प्रभावित करती है। इसलिए हमें इन चुनौतियों का सामना करने के लिए अभी से तैयार रहना होगा।

उन्होंने कहा कि नवाचार, कौशल और काबिलियत ही भविष्य में आपकी वास्तविक उपयोगिता सिद्ध करेंगे। बड़ी उपलब्धियाँ वही व्यक्ति प्राप्त करता है, जो अपनी क्षमता को निरंतर तराशता है। युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि परिवर्तन हमेशा दृष्टिकोण, संकल्प और निरंतर प्रयास से आता है। साउथ कोरिया के तकनीकी परिवर्तन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि “हमें भी उसी प्रकार शिक्षा, तकनीक और शोध में निवेश बढ़ाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना होगा।”

वित्त मंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे तकनीकी दक्षता, शोध और रचनात्मक सोच को अपने जीवन का आधार बनाएं, क्योंकि आने वाला समय उन्हीं का होगा जो ज्ञान और नवाचार को अपनी शक्ति बनाएंगे।

उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि सेमीकंडक्टर और औद्योगिक क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ‘मेक इन सिलिकॉन’ संगोष्ठी एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप शैक्षणिक संस्थान सेमीकंडक्टर क्षेत्र में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार उच्च शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने युवाओं से कहा कि “आपका नवाचार और आपका संकल्प भारत की तकनीकी पहचान को नई ऊँचाई देगा।”

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) नवा रायपुर के निदेशक प्रो. ओम प्रकाश व्यास ने अतिथियों को संस्थान की 10 वर्षों की उपलब्धियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि संस्थान में विकसित भारत की अवधारणा के अनुरूप शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। छात्रों के कौशल विकास और क्षमता निर्माण के लिए उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण एवं उद्योग आधारित परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।

इस अवसर पर ट्रिपल आईटी इलाहाबाद के निदेशक प्रो. मुकुल सुतावणे, आईआईटी इंदौर के प्रो. संतोष विश्वकर्मा, मनोज कुमार मजूमदार सहित शिक्षाविद् एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहीं।

उल्लखेनीय है कि ‘मेक इन सिलिकॉन’ - स्वदेशी सेमीकंडक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी - ट्रिपल आईटी नया रायपुर के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी (ECE) विभाग के माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और वीएलएसआई डिजाइन समूह द्वारा आयोजित की जा रही है। इस संगोष्ठी का उद्देश्य भारत की सेमीकंडक्टर क्षमताओं को सशक्त बनाना और आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण को प्रोत्साहित करना है। यह आयोजन शिक्षा जगत, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच नवाचार, ज्ञान-विनिमय और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक सशक्त मंच है, जिससे भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सके।

संगोष्ठी में वीएलएसआई डिजाइन और माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में उन्नत तकनीक, जैसे नैनोइलेक्ट्रॉनिक्स, एमईएमएस, क्वांटम डिवाइस, तथा उद्योग-शिक्षा सहयोग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। इन क्षेत्रों में प्रगति न केवल तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करेगी बल्कि भारत के अनुसंधान और औद्योगिक विकास के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य भी करेगी।

राष्ट्रीय मिशन के तहत यह पहल सेमीकंडक्टर उपकरण, पैकेजिंग और फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता एवं नवाचार को गति देने का प्रयास है। संगोष्ठी में नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स की सहभागिता से कौशल विकास, आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ीकरण और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दिया गया है। यह आयोजन आत्मनिर्भर भारत मिशन की भावना के अनुरूप भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर नवाचार और निर्माण का केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सेमीकंडक्टर का स्वर, भारत का नया दौर, PM मोदी के नेतृत्व में भारत बना रहा तकनीकी आत्मनिर्भरता की नई पहचान

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 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में नया इतिहास रच रहा है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के जरिए भारत न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भी एक भरोसेमंद साझेदार बन रहा है।


आज मंगलवार, 2 सितंबर 2025 को पीएम मोदी सेमीकॉन इंडिया 2025 का उद्घाटन करेंगे। यह आयोजन भारत की इस यात्रा को और गति देगा।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन : आत्मनिर्भरता की नींव

  • दिसंबर 2021 में शुरू हुआ 76,000 करोड़ रुपए का आईएसएम भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन, विनिर्माण और पैकेजिंग का वैश्विक केंद्र बनाने का प्रयास है।
  • 2023 से 2025 के बीच 6 राज्यों में 1.60 लाख करोड़ रुपए के निवेश से 10 परियोजनाएं स्वीकृत हुईं।
  • गुजरात के साणंद में कायन्स सेमीकॉन की इकाई रोज़ाना 60 लाख चिप्स बनाने की क्षमता के साथ तैयार हो रही है।
  • नोएडा और बेंगलुरु में 3-नैनोमीटर चिप डिजाइन केंद्र भारत की तकनीकी क्षमता का प्रतीक बन रहे हैं।
  • वर्ष 2025 के अंत तक भारत की पहली मेड-इन-इंडिया चिप लॉन्च होगी।

वैश्विक सहयोग : सिलिकॉन कूटनीति

  • 29-30 अगस्त 2025 को पीएम मोदी की जापान यात्रा से भारत-जापान साझेदारी को नई दिशा मिली।
  • जापानी पीएम शिगेरु इशिबा के साथ टोक्यो इलेक्ट्रॉन मियागी लिमिटेड (TEL) का दौरा किया गया।
  • दोनों देशों ने आपूर्ति श्रृंखला को लचीला और विश्वसनीय बनाने का संकल्प लिया।
  • भारत-जापान डिजिटल साझेदारी 2.0 और आर्थिक सुरक्षा पहल के तहत अनुसंधान व नवाचार पर जोर दिया गया।

कौशल विकास : नई प्रतिभाओं का निर्माण

  • 2030 तक भारत को 10 लाख कुशल सेमीकंडक्टर पेशेवरों की आवश्यकता होगी।
  • 278 कॉलेजों में EDA टूल्स की पढ़ाई शुरू की गई।
  • अब तक 60,000 से अधिक लोग प्रशिक्षित हो चुके हैं।
  • डिज़ाइन लिंक्ड प्रोत्साहन (DLI) योजना से 22 कंपनियों को 234 करोड़ रुपए का सहयोग मिला।
  • 17 संस्थानों ने 20 चिप्स का सफल निर्माण किया।
  • आर्थिक असर : वैश्विक बाजार में भारत की धमक
  • भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2023 में 38 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 45-50 बिलियन डॉलर तक पहुंचा।
  • 2030 तक इसका लक्ष्य 100-110 बिलियन डॉलर रखा गया है।
  • वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर का होगा, जिसमें भारत 10% हिस्सेदारी हासिल करने की तैयारी में है।
  • PLI योजना से 14 क्षेत्रों में 1.76 लाख करोड़ रुपए का निवेश और हजारों नए रोजगार सृजित हुए हैं।

 

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