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वीबी-जी राम जी अधिनियम से पारदर्शी व्यवस्था एवं समयबद्ध मजदूरी भुगतान होंगे सुनिश्चित - उप मुख्यमंत्री शर्मा

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रायपुर। उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने शनिवार को अपने निवास कार्यालय में जिला पंचायत अध्यक्षों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्षों ने अपने क्षेत्रों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और अपेक्षाओं को उपमुख्यमंत्री के समक्ष रखा तथा मानदेय, भ्रमण-यात्रा, आवास एवं अन्य भत्तों में वृद्धि, उचित सुरक्षा व्यवस्था और वाहन किराए में संशोधन जैसी मांगों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने सभी मांगों को गंभीरतापूर्वक सुना और उन पर विस्तृत चर्चा की।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा से जिला पंचायत अध्यक्षों ने विभिन्न मांगों पर की चर्चा

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) वीबी जी राम जी अधिनियम 2025 सहित जिला पंचायतों से जुड़े प्रमुख विकासात्मक विषयों पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में जिला पंचायतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। योजनाओं का वैज्ञानिक नियोजन, आधुनिक तकनीक का उपयोग और जनप्रतिनिधियों का सतत क्षमता विकास ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस और सकारात्मक बदलाव लाएगा।

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि नए अधिनियम के तहत अब ग्रामीण परिवारों को 125 दिवस तक रोजगार की गारंटी मिलेगी। जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना, सौर ऊर्जा और आजीविका संवर्धन पर विशेष जोर दिया गया है, साथ ही कमजोर वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से समयबद्ध मजदूरी भुगतान भी सुनिश्चित किया जाएगा।

उन्होंने आगे बताया कि इस अधिनियम में आवास, पेयजल, स्वच्छता एवं विद्युतीकरण जैसे कार्यों को भी शामिल किया गया है, जिससे गांवों में अधोसंरचना निर्माण को नई गति मिलेगी। ग्राम सभा द्वारा समग्र योजना निर्माण के प्रावधान से कार्यों के दोहराव पर रोक लगेगी और संतुलित विकास सुनिश्चित होगा।

नवीन अधिनियम में पंचायतों को भविष्य के लिए तैयार करते हुए जल सुरक्षा, आजीविका से जुड़ी अधोसंरचनाओं के विकास तथा मौसमी आपदाओं से बचाव पर विशेष फोकस किया गया है। किसानों के हित में राज्य सरकारों को फसल बुवाई और कटाई के चरम समय में प्रतिवर्ष 60 दिवस तक कार्य स्थगन की अधिसूचना जारी करने का प्रावधान भी रखा गया है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित राहत पहुंचाने हेतु विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।

बैठक में जिला पंचायत विकास निधि, जनपद पंचायत विकास निधि, मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना, महतारी सदन निर्माण, श्रद्धांजलि योजना, अटल डिजिटल सुविधा केंद्र और क्षमता विकास योजना पर भी अधिकारियों द्वारा विस्तृत जानकारी दी गई। जिला पंचायत अध्यक्षों ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अपने सुझाव साझा किए।

इसके साथ ही समर्थ पंचायत पोर्टल के माध्यम से स्थानीय निकायों के करों की यूपीआई आधारित संग्रहण व्यवस्था, प्रदर्शन आधारित अनुदान प्रणाली तथा ग्राम संपदा मोबाइल एप द्वारा परिसंपत्तियों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों के लिए आयोजित एक्सपोजर विजिट कार्यक्रमों की रूपरेखा से भी अवगत कराया।

छत्तीसगढ़ बना भारत का ग्रोथ इंजन

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 रायपुर : विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य अनुरूप छत्तीसगढ़ में न केवल तेजी से अधोसंरचनाएं विकसित हो रही है, बल्कि सस्टेनबल डेवलपमेंट गोल के लक्ष्य को भी हासिल किया जा रहा है। विगत दो वर्षों में छत्तीसगढ़ भारत के विकास इंजन के रूप में भी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।


प्रदेश की नवीन औद्योगिक नीति में डिफेंस, आईटी, एआई, ग्रीन एनर्जी जैसे नए क्षेत्रों को विशेष पैकेज दिया जा रहा है। राज्य में अब तक 7.69 लाख रूपए के निवेश के प्रस्ताव मिल चुके हैं। राज्य में विकास, विश्वास और सुरक्षा का नया वातावरण बना है। राज्य की प्रगति में माओवाद आतंक हमेशा से ही बाधक रही है। अब यह बाधा दूर होने जा रही है। माओवाद अब अंतिम सांसें ले रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सुशासन, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक सुदृढ़ एवं परिणाम आधारित बनाने के लिए सुशासन एवं अभिसरण विभाग का गठन किया है। शासन व्यवस्था में अनुशासन और समयबद्धता सुनिश्चित करने हेतु 01 दिसम्बर 2025 से मंत्रालय महानदी भवन में अधिकारियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू कर दी गई है, जिससे कार्य संस्कृति और जवाबदेही को नई पहचान मिल रही है।

प्रदेश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण जुड़ा है नवा रायपुर अटल नगर में छत्तीसगढ़ के नए भव्य विधानसभा भवन का लोकार्पण प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा किया गया। यह विधानसभा भवन नई ऊर्जा, नई सोच और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प का प्रतीक है।

पिछले 2 वर्षों में बस्तर और सरगुजा अंचल के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए वहां सड़क, रेल, स्वास्थ्य और संचार सहित कई नई परियोजनाएं भी शुरू की गई। नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है। बस्तर में पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाने का प्रयास किए जा रह हैं। इसके लिए नई होम स्टे पॉलिसी और इको टूरिज्म के लिए विशेष प्रावधान रखे है। बस्तर और सरगुजा अंचल में उद्योगों की स्थापना पर विशेष सुविधाएं, छूट और रियायतें दी जा रही है। इसके अलावा उद्योगों को विशेष पैकेज के अंतर्गत सस्ती जमीन उपलब्ध कराई जा रही है।

नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत माओवाद आतंक से प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित 69 सुरक्षा कैम्पों के माध्यम से मूलभूत सुविधाओं के साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। बस्तर की बदलती फिजा को सबके सामने लाने में बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे बड़े आयोजनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बस्तर के युवा अब विकास से जुड़ना चाहते है, इसकी बानगी यहां चलाए जा रहे हैं। स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों में देखी जा सकती है। बस्तर की युवाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए और उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए पर्यटन ऑटोमोबाईल, पायलट, आईटी आदि क्षेत्रों में स्किल डेवलपमेंट के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

राज्य में सस्टेनबल डेवलपमेंट गोल को हासिल करने के लिए सामाजिक, आर्थिक गतिशीलता के लिए शुरू की गई कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत 40 लाख घरों में पीने का स्वच्छ जल मुहैया कराया जा रहा है। इसी प्रकार 26 लाख से अधिक परिवारों के लिए पीएम आवास स्वीकृत किए गए हैं। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने और समाज में उनकी भूमिका बढ़ाने के लिए महतारी वंदन योजना में 70 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खाते में एक-एक हजार रूपए की राशि दी जा रही है। इस योजना के अंतर्गत लगभग 14 हजार करोड़ रूपए की राशि जारी की जा चुकी है। आयुष्मान भारत योजना के दायरे में राज्य की 98 प्रतिशत आबादी को लाया जा चुका है।

छत्तीसगढ़ में धान की पैदावार और समर्थन मूल्य में खरीदी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुख्य धुरी है। किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए मोदी की गारंटी के अंतर्गत किसानों को देश में सर्वाधिक धान का मूल्य दिया जा रहा है। राज्य के 2300 से अधिक धान उपार्जन केंद्रों में सफलतापूर्वक धान की खरीदी की जा रही है। किसानों से धान प्रति एकड़ 21 क्विंटल के मान से तथा 3100 रूपए प्रति क्विंटल की कीमत दी जा रही है। किसान हितैषी फैसलों के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ में किसानों के खाते में एक लाख करोड़ रूपए से अधिक की राशि अंतरित की जा चुकी है। किसान इस राशि का खेती किसानी में भरपूर निवेश कर रहे हैं और इससे बाजार भी गुलजार हुए हैं जिससे शहरी अर्थव्यवस्था पर सीधा असर दिख रहा है। ट्रैक्टर आदि की बिक्री ने रिकार्ड आंकड़ा छू लिया है।

छगन लोन्हारे उप संचालक (जनसंपर्क)

विशेष-लेख : छत्तीसगढ़: विकास की नई उड़ान

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रायपुर। छत्तीसगढ़ ने अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे करते हुए विकास यात्रा का नया अध्याय लिखा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित भारत 2047 के संकल्प के अनुरूप राज्य सरकार ने विकसित छत्तीसगढ़ का रोडमैप तय किया है। छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में प्रदेश की जीडीपी को दोगुना कर 75 लाख करोड़ तक पहुँचाना है, जिससे प्रत्येक नागरिक की आय में दस गुना वृद्धि हो सके।

नई उद्योग नीति ने छत्तीसगढ़ को निवेशकों का पसंदीदा गंतव्य बना दिया है। अब तक लगभग 6.65 लाख करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित हुआ है। इज ऑफ डूइंग बिजनेस के साथ-साथ स्पीड ऑफ डूइंग बिजनेस को भी प्राथमिकता दी गई है। एमएसएमई स्टार्टअप और नई टेक्नॉलॉजी आधारित उद्योगों को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है। कोरबा जिले के पॉवर एवं मेटल सेक्टर से लेकर दुर्ग-राजनांदगांव के इंडस्ट्रियल कॉरिडोर तक नए औद्योगिक केंद्र विकसित हो रहे हैं।

छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहाँ लिथियम ब्लॉक की सफलतापूर्वक नीलामी की गई। छत्तीसगढ़ राज्य ऊर्जा उत्पादन में तेजी से प्रगति कर रहा है। अभी हम विद्युत उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर हैं। राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता 30 हजार मेगावॉट है और वर्ष 2030 तक यह क्षमता देश में प्रथम स्थान पर पहुँच जाएगी।

छत्तीसगढ़ तेजी से सोलर क्रांति की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना सर्वाधिक लोकप्रिय योजना बन गई है। बड़ी संख्या में लोग अपने घरों की छत पर सोलर पैनल लगाकर इसका लाभ उठाने लगे है। वर्ष 2027 तक 5 लाख घरों में सोलर पैनल के माध्यम से मुफ्त बिजली की व्यवस्था का लक्ष्य रखा गया है।

छत्तीसगढ़ में रेलवे नेटवर्क, राष्ट्रीय राजमार्ग, एयरपोर्ट और इंटीरियर कनेक्टिविटी पर तेजी से काम हो रहा है। राजधानी रायपुर, नया रायपुर और भिलाई को मिलाकर स्टेट कैपिटल रीजन विकसित किया जा रहा है, जो भविष्य में 50 लाख आबादी की जरूरतें पूरी करेगा।

राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है। धान के साथ-साथ कोदो, कुटकी, रागी जैसी मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा दिया गया है। कृषक उन्नति योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, सिंचाई पम्पों को निःशुल्क बिजली की उपलब्धता एवं कृषि कल्याण के अन्य कार्यक्रमों से किसान सशक्त हो रहे हैं। लघु वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। इससे न केवल वनवासियों की आय बढ़ी है बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।

बीते डेढ़ साल में छत्तीसगढ़ में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। दूरस्थ इलाकों में स्कूल, मोबाइल कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए गए हैं। आयुष्मान भारत योजना से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को निःशुल्क इलाज मिल रहा है। बच्चों और युवाओं के कौशल विकास के लिए विशेष प्रशिक्षण केंद्र खोले गए हैं।

राज्य सरकार ने सुशासन को अपनी सर्वाेच्च प्राथमिकता बनाई है। ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार से नागरिक घर बैठे राजस्व, पेंशन और प्रमाण पत्र जैसी सेवाएँ प्राप्त कर रहे हैं। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अनेक सुधार किए गए हैं।

छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित और संवर्धित करने के लिए विशेष योजनाएँ लागू की गई हैं। कल्चर पार्क और फिल्म सिटी की स्थापना की पहल के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। खेलों के क्षेत्र में नए स्टेडियम और प्रशिक्षण केंद्रों का विकास युवाओं को नए अवसर प्रदान कर रहा है।

छत्तीसगढ़ आज आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में बढ़ रहा है। सड़क, रेल, उद्योग, ऊर्जा, कृषि, शिक्षा-स्वास्थ्य, सुशासन और सांस्कृतिक सहित हर क्षेत्र में संतुलित विकास हो रहा है। यह यात्रा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन से ही संभव हुई है। छत्तीसगढ़ सरकार का संकल्प 2047 तक राज्य को देश के अग्रणी और आत्मनिर्भर राज्यों में शामिल करना है।


सेवा पखवाड़ा एवं विकसित भारत पर आधारित, छायाचित्र प्रदर्शनी का विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने किया शुभारंभ

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प्रदर्शनी में मोदी जी के संकल्पना पर आधारित मजबूत राष्ट्र की झलक है -विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा

महासमुंद-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आज कलेक्ट्रेट परिसर में आदि सेवा पर्व, सेवा पखवाड़ा एवं विकसित भारत की संकल्पना पर आधारित भव्य छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी का शुभारम्भ महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने किया। इस अवसर पर नगरपालिका उपाध्यक्ष देवीचंद राठी, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष पवन पटेल, जिला बास्केट बॉल संघ के जिलाध्यक्ष प्रदीप चंद्राकर, पार्षद पीयूष साहू, धनेश्वरी सोनवानी, माखन पटेल, पूर्व पार्षद राजू चन्द्राकर, शरद मराठा, रमेश साहू एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस अवसर पर कलेक्टर विनय कुमार लंगेह एवं जनसम्पर्क अधिकारी पोषण साहू ने अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रदर्शनी का अवलोकन कराया।

छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन जनसंपर्क विभाग द्वारा किया गया। जिसमें प्रधानमंत्री मोदी जी की विकसित भारत की संकल्पना, सेवा कार्यों, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प और उनके जीवन की प्रेरणादायक यात्रा एवं जनकल्याणकारी योजनाओं को छायाचित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री मोदी के बचपन, उनकी शिक्षा, देशभक्ति, तथा प्रधानमंत्री के रूप में उनके द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्यों की झलक को सजीव चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है।

इस अवसर पर विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने कहा कि यह प्रदर्शनी केवल एक दृश्य प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह विकसित भारत की परिकल्पना की नींव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है, और इसके लिए हर नागरिक को अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने इस प्रदर्शनी को केंद्र सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं और विकास योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने की दिशा में एक सार्थक पहल बताया। प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री मोदी के दृढ़ संकल्पों, मजबूत फेसलों और एक राष्ट्र, एक लक्ष्य की झलक दिखाई देती है। उनके बचपन से आज तक के सफर को फोटो के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।

प्रदर्शनी में मोदी जी के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को खूबसूरती से उकेरा गया है, जैसे उनका बचपन, देशभक्ति की भावना, उनके संघर्षों की कहानी, मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री बनने की यात्रा, और उनके द्वारा देश के विकास के लिए उठाए गए कदम। उपलब्धियों में डिजिटल हुई पहचान, डिजिटल से भुगतान, छत्तीसगढ़ को मिली सौगात, शिक्षा का एक नया अध्याय, एक पेड़ मां के नाम, जल शक्ति, आतंकवाद का मुंह तोड़ जवाब, अंतरिक्ष शक्ति, वर्षो का अंधेरा छटा घर-घर में सूरज उगा और हर गरीब के सिर पर हो अपनी छत जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियों को भी प्रदर्शित किया गया है। छायाचित्र प्रदर्शनी के साथ-साथ जनसंपर्क विभाग की पत्रिका जनमन का निःशुल्क वितरण भी किया गया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, आम नागरिक सहित विद्यार्थीगण, अधिकारी-कर्मचारी, समूह की महिलाएं, युवाओं ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

नारी शक्ति और विकसित भारत के संकल्प को समर्पित ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ अभियान का रक्षा मंत्री ने किया वर्चुअल प्रस्थान

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नई दिल्ली, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया से विश्व की पहली त्रि-सेवा संपूर्ण महिला नाविकों की परिक्रमा यात्रा ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ को वर्चुअल रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने इसे नारी शक्ति, तीनों सेनाओं की एकजुटता, आत्मनिर्भर भारत, सैन्य कूटनीति और भारत की वैश्विक दृष्टि का अद्वितीय प्रतीक बताया।

अगले नौ महीनों में 10 महिला अधिकारी स्वदेशी निर्मित भारतीय थलसेना नौकायन पोत (IASV) त्रिवेणी पर लगभग 26,000 समुद्री मील की यात्रा करेंगी। इस दौरान वे भूमध्य रेखा को दो बार पार करेंगी, तीन महान केप्स (लीउविन, हॉर्न और गुड होप) का चक्कर लगाएंगी और दक्षिणी महासागर तथा ड्रेक पैसेज जैसी खतरनाक जलधाराओं से गुजरेंगी। मई 2026 में यह दल मुंबई लौटेगा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि यह केवल समुद्री यात्रा नहीं बल्कि अनुशासन और संकल्प की साधना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अधिकारी कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए विजयी होकर लौटेंगी और विश्व को दिखाएँगी कि भारतीय महिलाओं का साहस असीम है।

उन्होंने हाल ही में आईएनएस तरिणी पर दो महिला नौसेना अधिकारियों द्वारा विश्व परिक्रमा की ऐतिहासिक उपलब्धि का उल्लेख किया और विश्वास जताया कि ‘त्रिवेणी’ भी वैश्विक स्तर पर नया कीर्तिमान स्थापित करेगी। राजनाथ सिंह ने 50 फुट लंबे स्वदेशी निर्मित ‘त्रिवेणी’ को आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक बताते हुए कहा कि इसकी हर समुद्री मील यात्रा भारत की सामरिक स्वायत्तता और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम है।

यात्रा के दौरान दल ऑस्ट्रेलिया के फ़्रेमेन्टल, न्यूज़ीलैंड के लिटेल्टन, कनाडा के पोर्ट स्टैनली और दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन बंदरगाहों पर भी पहुंचेगा, जहाँ भारतीय संस्कृति, परंपरा और सेनाओं की शक्ति का परिचय विश्व को मिलेगा। साथ ही, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी के सहयोग से समुद्र में माइक्रो-प्लास्टिक अध्ययन, समुद्री जीवन का दस्तावेजीकरण और समुद्री स्वास्थ्य पर जागरूकता गतिविधियाँ भी की जाएँगी।

दल में शामिल 10 सदस्य:

लेफ्टिनेंट कर्नल अनुजा वरुडकर (अभियान प्रमुख), स्क्वाड्रन लीडर श्रद्धा पी. राजू (उप प्रमुख), मेजर करमजीत कौर, मेजर ओमिता दलवी, कैप्टन प्राजक्ता पी. निकम, कैप्टन दौली बुटोला, लेफ्टिनेंट कमांडर प्रियंका गुसांई, विंग कमांडर विभा सिंह, स्क्वाड्रन लीडर अरुवी जयदेव और स्क्वाड्रन लीडर वैषाली भंडारी।

दल ने पिछले तीन वर्षों में कड़े प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय अभ्यास यात्राओं से अपने कौशल को परिष्कृत किया है। यह अभियान विश्व नौकायन स्पीड रिकॉर्ड काउंसिल के मानकों के अनुसार पूरा किया जाएगा।


स्वदेशी से समृद्ध और विकसित भारत: आत्मनिर्भर भारत के रोडमैप पर शिक्षा एवं कौशल नेतृत्व की विचार-विमर्श बैठक

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नई दिल्ली, प्रधानमंत्री के विकसित भारत के आह्वान को आगे बढ़ाते हुए कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) और शिक्षा मंत्रालय (MoE) ने आज कौशल भवन, नई दिल्ली में “स्वदेशी से समृद्ध और विकसित भारत – शिक्षा एवं कौशल में रणनीतियाँ” विषय पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की।

बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने की। इस अवसर पर जयन्त चौधरी, स्वतंत्र प्रभार, कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्यमंत्री एवं शिक्षा राज्यमंत्री तथा डॉ. सुकांत मजूमदार, शिक्षा राज्यमंत्री उपस्थित रहे।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षा और कौशल मिशन स्वदेशी के दो प्रमुख स्तंभ हैं। विद्यालयों से ही आत्मनिर्भर भारत के बीज बोए जाने चाहिए, ताकि विद्यार्थी स्वदेशी, नवाचार और सांस्कृतिक गर्व के दूत बन सकें। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि शिक्षा और कौशल एक-दूसरे के पूरक हैं और मिलकर आत्मविश्वासी भारत का निर्माण करेंगे। जयन्त चौधरी ने इसे भारत के लिए वैश्विक मूल्य श्रृंखला में नई भूमिका गढ़ने का अवसर बताया और युवाओं को भविष्य के कौशलों जैसे एआई, प्रौद्योगिकी और डिजाइन से लैस करने पर बल दिया। डॉ. मजूमदार ने उच्च शिक्षा और कौशल संस्थानों को ज्ञान-केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता बताई।

बैठक में जन संपर्क, जन भागीदारी और जन अभियान के दृष्टिकोण से सभी शैक्षणिक और कौशल संस्थानों को मिशन स्वदेशी से जोड़ने का आह्वान किया गया। डिजिटल सामग्री, पॉडकास्ट, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों को युवाओं तक पहुँचाने पर विशेष बल दिया गया।

अंत में, शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े सचिवों ने कार्यान्वयन योग्य सुझाव प्रस्तुत किए। बैठक ने 2047 तक समृद्ध और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षा और कौशल को केंद्र में रखने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।



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