Media24Media.com: #वन्यजीव तस्करी

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वन्यजीव तस्करी का भंडाफोड़: दो बाघों की खाल और पैंगोलिन शल्क बरामद

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 जगदलपुर। छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र सीमा पर वन्यजीव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। Wildlife Crime Control Bureau (WCCB), वन विभाग, पुलिस और Udanti-Sitanadi Tiger Reserve की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन सेफ पैसेज के तहत कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से दो बाघों की खाल बरामद की गई है।


जानकारी के अनुसार संयुक्त टीम ने महाराष्ट्र–छत्तीसगढ़ सीमा क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए बाबूराव मडावी और बिजेश्वर गेडाम को एक मोटरसाइकिल समेत पकड़ा। दोनों के खिलाफ पश्चिम पारलकोट परिक्षेत्र, पश्चिम भानुप्रतापपुर वन मंडल (जिला कांकेर) में वन अपराध प्रकरण क्रमांक 390/09 दर्ज किया गया है।

जांच के दौरान आरोपियों के ठिकानों से पैंगोलिन के शल्क भी बरामद किए गए हैं। इससे अंतर्राज्यीय स्तर पर सक्रिय वन्यजीव तस्करी के एक संगठित नेटवर्क के संचालन की आशंका गहरा गई है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार दोनों आरोपी कथित तौर पर पुलिस विभाग से जुड़े कर्मचारी हैं। वहीं, आशंका जताई जा रही है कि बरामद बाघों का शिकार Indravati National Park–अबूझमाड़ क्षेत्र में किया गया हो सकता है। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।

वन विभाग ने इस कार्रवाई को मध्य भारत के करीब 400 किलोमीटर लंबे टाइगर कॉरिडोर की सुरक्षा के लिहाज से बड़ी सफलता बताया है। अधिकारियों ने कहा कि वन्यजीव तस्करी और शिकार में शामिल अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत आगे भी सख्त अभियान जारी रहेगा।

तेंदुआ खाल तस्करी का भंडाफोड़: 3 राज्यों में फैला गिरोह, 9 आरोपी गिरफ्तार

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 बलरामपुर। जिले में अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए वन विभाग की संयुक्त टीम ने तेंदुआ खाल तस्करी में शामिल एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उनके कब्जे से दो तेंदुए की खाल बरामद हुई है।


जानकारी के मुताबिक, वन मंत्री के निर्देश और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। 2 अप्रैल 2026 को वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (मध्य क्षेत्र भोपाल), राज्य उड़नदस्ता रायपुर और वनमंडल बलरामपुर की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सूचना पर थाना बसंतपुर क्षेत्र के ग्राम जमई मोड़ के पास घेराबंदी की।

कार्रवाई के दौरान मोटरसाइकिल सवार दो संदिग्धों को रोककर तलाशी ली गई, जिसमें एक तेंदुए की खाल बरामद हुई। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया और उनके पास से एक और खाल जब्त की गई।

गिरफ्तार आरोपी झारखंड, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के रहने वाले हैं, जो लंबे समय से अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी में सक्रिय थे।

सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

फिलहाल मामले की गहन जांच जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में टीम जुटी हुई है।

हाथी दांत तस्करी का पर्दाफाश: उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में 3 आरोपी गिरफ्तार

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 गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी-पोचिंग टीम ने हाथी दांत की तस्करी का पर्दाफाश किया है। टीम ने जंगली हाथी का दांत बेचने की फिराक में घूम रहे तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान एक बेशकीमती हाथी दांत सहित शिकार में उपयोग होने वाले आधुनिक और पारंपरिक उपकरणों का बड़ा जखीरा बरामद किया गया।


वन विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई गोपनीय सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिली थी कि कुल्हाड़ीघाट निवासी पदमन के पास जंगली हाथी का दांत छिपाकर रखा गया है। सहायक संचालक जगदीश प्रसाद दरों के निर्देशन में वनक्षेत्रपाल दिनेश चौधरी के नेतृत्व में टीम गठित कर आरोपी के घर और बाड़ी की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान टीम उस समय हैरान रह गई जब पता चला कि आरोपी ने पिछले चार वर्षों से हाथी के दांत को अपने घर की दीवार में छिपाकर रखा हुआ था।

आदतन शिकारी भी गिरफ्त में
गिरफ्तार आरोपियों में पुसऊराम (ग्राम सिहार) का नाम भी शामिल है, जिसका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है। वह इसी वर्ष दडईपानी क्षेत्र में हुए सांबर शिकार मामले में मुख्य आरोपी रहा है और फिलहाल जमानत पर बाहर था। जमानत के दौरान फिर से वन्यजीव अपराध में संलिप्त पाए जाने पर विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है।

जब्त हुआ शिकार का सामान
कार्रवाई के दौरान टीम ने आरोपियों के पास से एक ठोस हाथी दांत, 2 धनुष, 12 तीर, चिड़िया मारने का विशेष धनुष, जंगली सुअर का दांत व बालों का गुच्छा, 2 गुलेल और घुरू जैसे उपकरण जब्त किए हैं। ये सभी सामग्री शिकार गतिविधियों में उपयोग की जाती है।

हाथी-मानव द्वंद्व से जुड़ी कड़ी की जांच
पूछताछ में आरोपी सुखचंद (ग्राम कठवा) ने खुलासा किया कि उसने यह हाथी दांत वर्ष 2021 में सिहार निवासी गंगाराम से लिया था। उल्लेखनीय है कि गंगाराम की मौत सितंबर 2022 में हाथी-मानव द्वंद्व के दौरान हो गई थी। आरोपियों के अनुसार, गंगाराम को यह दांत खेत में पड़ा मिला था, हालांकि वन विभाग इस दावे को संदिग्ध मान रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाथी दांत का सैंपल डीएनए जांच के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून भेजा जा रहा है, ताकि संबंधित हाथी की पहचान और उसकी मौत के कारणों का पता लगाया जा सके।

वन विभाग ने तीनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

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