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टिश्यू कल्चर तकनीक से किसानों को मिलेगा अधिक लाभ : वन मंत्री केदार कश्यप

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 रायपुर : वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप आज अरण्य भवन, नवा रायपुर में आज “सागौन प्रबंधन एवं उन्नत सागौन रोपण” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  अरुण पाण्डेय, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।




सागौन है सुरक्षित और लाभकारी हरित निवेश

कार्यशाला को संबोधित करते हुए वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सागौन (टीक) का प्रबंधन और उन्नत रोपण उच्च गुणवत्ता वाली इमारती लकड़ी के उत्पादन और शानदार मुनाफे का सौदा है स उन्होंने कहा कि सागौन विश्व की सबसे मूल्यवान इमारती लकड़ियों में से एक है। इसकी मजबूती, टिकाऊपन और दीमक-रोधी गुणों के कारण इसे लकड़ी का राजा कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार लोग भविष्य की सुरक्षा के लिए बैंक में निवेश करते हैं, उसी तरह सागौन का पौधा लगाना भी एक दीर्घकालिक और सुरक्षित निवेश है। इससे किसानों को भविष्य में बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकता है।

टिश्यू कल्चर पौधों से बढ़ेगी उत्पादकता

वन मंत्री कश्यप ने किसानों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए बताया कि टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार सागौन के पौधे सामान्य पौधों की तुलना में तेजी से बढ़ते हैं। इन पौधों का तना सीधा और गुणवत्तापूर्ण होता है, जिससे बेहतर गुणवत्ता की लकड़ी प्राप्त होती है और किसानों की आय बढ़ती है।

अंतरवर्ती फसलों से होगी अतिरिक्त आमदनी

 कश्यप ने बताया कि किसान सागौन रोपण के शुरुआती वर्षों में पौधों के बीच खाली स्थान पर दलहन, तिलहन अथवा अन्य फसलें लेकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। वहीं 8 से 10 वर्ष बाद वृक्षों की छंटाई (थिनिंग) से भी आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। राज्य शासन द्वारा निजी भूमि पर व्यावसायिक वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष अनुदान दिया जा रहा है।

5 एकड़ तक के किसानों को 100 प्रतिशत अनुदान

छोटे और सीमांत किसानों के लिए 5 एकड़ तक सागौन रोपण पर 100 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। इसके तहत प्रति पौधा 94.50 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है।

बड़े वृक्षारोपण प्रकल्पों को 50 प्रतिशत सहायता

5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में वृक्षारोपण करने वाले किसानों एवं संस्थाओं को 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।

विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने दी आधुनिक जानकारी

कार्यशाला में कोयम्बटूर से आईं प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. रेखा आर. वारियर और डॉ. आर. यशोदा ने किसानों को उन्नत सागौन उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने मिट्टी के चयन, पौधों की देखभाल, रोग प्रबंधन तथा टिश्यू कल्चर आधारित पौधों की विशेषताओं पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।

छत्तीसगढ़ में सागौन उत्पादन की व्यापक संभावनाएं

विशेषज्ञों ने बताया कि छत्तीसगढ़ की जलवायु और मिट्टी सागौन उत्पादन के लिए अत्यंत उपयुक्त है। बीजापुर, भोपालपटनम, कोटा, अंबागढ़ चौकी, रायगढ़, सराईपाली और नारायणपुर सहित कई क्षेत्रों में सागौन आधारित कृषि वानिकी किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।

खेत में सागौन, हर किसान समृद्ध किसानों से अपील

कार्यशाला के समापन अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने किसानों से बड़े पैमाने पर सागौन रोपण अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि श्खेत में सागौन, हर किसान समृद्धश् का संकल्प प्रदेश में हरित विकास और ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण का नया अध्याय लिखेगा।

वन संरक्षण और जैव विविधता में छत्तीसगढ़ की बड़ी उपलब्धियां : वन मंत्री केदार कश्यप

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 रायपुर। वन, सहकारिता एवं परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में वन संरक्षण, हरित आवरण विस्तार, जैव विविधता संवर्धन और वनवासियों की आजीविका सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की गई हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस वार्ता में विभाग की विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी दी।


वन आवरण में वृद्धि

मंत्री कश्यप ने बताया कि भारतीय वन सर्वेक्षण संस्थान की दिसंबर 2024 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के वन एवं वृक्ष आवरण में 683 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा वन क्षेत्र है। अत्यंत सघन वनों में 348 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज होना पारिस्थितिक संतुलन में सुधार का संकेत है।

हरित छत्तीसगढ़ अभियान

“एक पेड़ माँ के नाम 2.0” अभियान के तहत वर्ष 2024 में 4 करोड़ 20 लाख से अधिक तथा वर्ष 2025 में 2 करोड़ 79 लाख से अधिक पौधों का रोपण और वितरण किया गया।

किसान वृक्ष मित्र योजना

किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से निजी भूमि पर वाणिज्यिक वृक्षारोपण को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। योजना के तहत पांच एकड़ तक 100 प्रतिशत और उससे अधिक क्षेत्र में 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। पिछले दो वर्षों में 36,896 हितग्राहियों की 62,441 एकड़ भूमि पर 3 करोड़ 67 लाख से अधिक पौधे लगाए गए।

देव स्थलों का संरक्षण

आदिवासी देव स्थलों के संरक्षण के तहत पिछले दो वर्षों में 435 देवगुड़ियों का निर्माण किया गया, जिस पर लगभग 16.17 करोड़ रुपये व्यय किए गए।

वन विभाग में भर्ती

पिछले दो वर्षों में तृतीय श्रेणी के 313 पदों पर भर्ती और 150 आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति दी गई। वनरक्षक के 1484 पदों की शारीरिक परीक्षा पूर्ण हो चुकी है।

बाघ और वन्यजीव संरक्षण

गुरू घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व के गठन के बाद राज्य में बाघों की संख्या 17 से बढ़कर 35 हो गई है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 14 से 17 वनभैंसे देखे गए हैं। राज्य पक्षी पहाड़ी मैना संरक्षण के लिए ‘मैना मित्र’ अभियान चलाया गया, जिससे इनकी संख्या 600-700 तक पहुंची है।

बर्ड सफारी और रामसर साइट

गिधवा-परसदा में बर्ड इंटरप्रिटेशन सेंटर और बर्ड सफारी शुरू की गई है, जहां 270 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। बिलासपुर का कोपरा जलाशय राज्य का पहला और देश का 96वां रामसर स्थल घोषित हुआ है।

इको-टूरिज्म और अधोसंरचना

प्रदेश में 240 नैसर्गिक पर्यटन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 50 से अधिक स्वावलंबी बन चुके हैं। वनवासियों की सुविधा के लिए 96 रपटा-पुलिया का निर्माण किया गया है।

मानव-हाथी द्वंद नियंत्रण

‘गज संकेत’ ऐप के जरिए हाथियों की निगरानी की जा रही है। 90 हाथी मित्र दल गठित किए गए हैं। वर्तमान में राज्य में 355 हाथी दर्ज किए गए हैं।

महिला सशक्तिकरण और औषधीय पौधे

औषधि पादप बोर्ड के माध्यम से महिलाओं को औषधीय पौध रोपण से जोड़ा गया है, जिससे हजारों महिलाओं को रोजगार मिला है।

वन विकास निगम की उपलब्धियां

राज्य वन विकास निगम द्वारा काष्ठ उत्पादन, वृक्षारोपण और ई-ऑक्शन के माध्यम से बिक्री की व्यवस्था लागू की गई है। वन अधिकार अधिनियम के तहत 1165 प्रकरणों में विकास कार्यों के लिए वनभूमि उपयोग की स्वीकृति दी गई है।

एशिया का सबसे बड़ा मरीन फॉसिल पार्क

मंत्री कश्यप ने बताया कि मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में स्थित मरीन फॉसिल पार्क एशिया का सबसे बड़ा समुद्री जीवाश्म पार्क है, जो लगभग एक किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। यहां 29 करोड़ वर्ष पुराने जीवाश्म मिले हैं।

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वन संरक्षण और विकास के संतुलन के साथ आगे बढ़ रही है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की आजीविका भी सशक्त हो रही है।

वन विभाग की सख्त कार्रवाई: अवैध सागौन चिरान जब्त

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 रायपुर : वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार राज्य में वन अपराधों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में बारनवापारा परियोजना मंडल, रायपुर के अंतर्गत आरंग परिक्षेत्र के ग्राम मालीडीह में एक बड़ी कार्रवाई की गई है।


मंडल प्रबंधक बारनवापारा परियोजना मंडल ने बताया कि मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर उपमंडल प्रबंधक महासमुंद द्वारा सर्च वारंट जारी किया गया था। जिसके तहत आज वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने मालीडीह गांव में छापामार कार्रवाई की गई। छापेमारी के दौरान एक आरोपी के कब्जे से सागौन चिरान के 75 नग लकड़ी, मात्रा 0.418 घन मीटर बरामद की गई। पूछताछ के दौरान जब आरोपी से लकड़ी के संबंध में वैध दस्तावेज मांगे गए, तो वह कोई भी कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका।

यह कार्रवाई वनपाल एच.आर. पैकरा, उड़नदस्ता प्रभारी ए.के. खुमरी, उपक्षेत्रपाल लोकेश साहू, लोचन साहू, के.के. पटेल, कोमल सिंह मरकाम, दीपा पटेल, चंद्रहास साहू, क्षेत्र रक्षक होमलता मंडावी एवं चौकीदारों के साथ-साथ तुमगांव थाने की पुलिस टीम की उपस्थित थी।

अवैध लकड़ी की कीमत लगभग 70 हजार रुपये आँकी गई है। जप्त की गई सागौन चिरान को कोडार डिपो भेजा गया है और आरोपी के विरुद्ध भारतीय काष्ठ चिरान वन अधिनियम के तहत पी.ओ.आर. क्रमांक 37/11, दिनांक 06/07/2025 के तहत कानूनी कार्रवाई की गई है।

छत्तीसगढ़ में मांस-हड्डी तस्करी पर कड़ा एक्शन, दुधारू पशु योजना से ग्रामीण आय को मिलेगा बढ़ावा: केदार कश्यप

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में पशु मांस और हड्डियों की अवैध तस्करी पर सरकार अब सख्त रुख अपनाने जा रही है। राज्य के वन मंत्री केदार कश्यप ने चेतावनी दी है कि ऐसे मामलों में लिप्त व्यक्तियों और संगठनों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में वन्यजीव संरक्षण और पशु कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट है, और किसी भी तरह की तस्करी की सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।


मंत्री कश्यप ने बताया कि हाल ही में बिलासपुर प्रवास के दौरान उन्हें कछुए की तस्करी की जानकारी मिली थी, जिस पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध रूप से पशु अंगों और मांस की खरीद-फरोख्त न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी गंभीर मामला है।

इसी बीच, राज्य सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना की शुरुआत की है। इस योजना का शुभारंभ पायलट प्रोजेक्ट के रूप में छह जिलों में किया गया है, जिसकी पहली कड़ी कोंडागांव जिले से शुरू हुई है। योजना के तहत ग्रामीणों को दुधारू गायें प्रदान की जा रही हैं, जिससे न केवल दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आमदनी और आत्मनिर्भरता में भी इजाफा होगा।

मंत्री कश्यप ने जानकारी दी कि यह योजना 16 दिसंबर 2023 को केंद्रीय सहकारिता मंत्री की उपस्थिति में हस्ताक्षरित एमओयू के तहत प्रारंभ की गई थी। इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देना और पशुपालन को ग्रामीण आजीविका का मजबूत आधार बनाना है।

बस्तर संभाग के कांकेर और कोंडागांव जिलों में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। मंत्री ने बताया कि गुजरात समेत अन्य राज्यों में इस तरह की योजनाओं से ग्रामीणों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। छत्तीसगढ़ सरकार भी अब उसी दिशा में आगे बढ़ रही है, ताकि पशुपालन के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।

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