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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा बयान: “भारत की धैर्यशीलता हमारी ताकत है, कमजोरी नहीं”

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हैदराबाद,तेलंगाना-रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हैदराबाद मुक्ति दिवस समारोह के अवसर पर कहा कि ऑपरेशन सिंदूर, 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक इस बात का प्रमाण हैं कि भारत का धैर्य उसकी ताकत है, कमजोरी नहीं। जब संवाद से समाधान नहीं निकलता, तो भारत कड़े कदम उठाना भी जानता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नया भारत बातचीत में विश्वास करता है, लेकिन जो देश या ताकतें शांति और सद्भावना की भाषा नहीं समझते, उन्हें मुंहतोड़ जवाब देना भी जानता है।

ऑपरेशन सिंदूर पर बयान

रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकियों ने पहलगाम में निर्दोष लोगों की हत्या धर्म के आधार पर की, वहीं भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को उनके कर्म के आधार पर तबाह किया। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन केवल रुका हुआ है, और यदि सीमा पार से फिर आतंकी गतिविधि होती है तो इसे पूरी ताकत के साथ दोबारा चलाया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने युद्धविराम को लेकर किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को सिरे से खारिज कर दिया था और स्पष्ट कर दिया था कि भारत के आंतरिक मामलों में कोई बाहरी ताकत दखल नहीं दे सकती।

सरदार पटेल और हैदराबाद मुक्ति

रक्षा मंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल को “लौहपुरुष” बताते हुए कहा कि उन्होंने उत्तर और दक्षिण भारत को एकजुट करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने याद दिलाया कि 17 सितंबर को ही हैदराबाद मुक्ति दिवस और प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन दोनों आते हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पटेल ने भारत को एकजुट किया, उसी प्रकार प्रधानमंत्री मोदी भारत को सांस्कृतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक और आर्थिक रूप से सशक्त बना रहे हैं।

उन्होंने कहा, “आज भारत किसी का आदेश नहीं मानता, बल्कि अपनी राह खुद तय करता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है।”

ऑपरेशन पोलो का महत्व

 राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन पोलो में शामिल वीरों के साहस की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि सरदार पटेल का निर्णायक प्रहार था, जिसने रज़ाकारों की साजिश को तोड़कर हैदराबाद को भारत का हिस्सा बनाया। उन्होंने इसे भारतीय इतिहास का गौरवशाली अध्याय बताया, जिसने दुनिया को दिखा दिया कि भारत अपनी एकता की रक्षा के लिए हमेशा सक्षम और शक्तिशाली रहा है।

रक्षा मंत्री ने कहा, “जैसे 1948 में रज़ाकारों की साजिश ध्वस्त हुई थी, वैसे ही आज पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद भी विफल हो चुका है। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए फिर साबित कर दिया है कि हमारी एकता और सांस्कृतिक विविधता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।”

कार्यक्रम में उपस्थिति

इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने हैदराबाद मुक्ति दिवस पर आयोजित फोटो प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी और गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।


रणनीति, शक्ति और आत्मनिर्भरता: 21वीं सदी के लिए भारत की सुरक्षा दृष्टि

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बलों से पारंपरिक युद्ध की अवधारणाओं से आगे बढ़कर सूचना, वैचारिक, पारिस्थितिक और जैविक युद्ध जैसी अदृश्य चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्क और तैयार रहने का आह्वान किया। 16 सितम्बर 2025 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में आयोजित कंबाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस 2025 को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने अस्थिर वैश्विक व्यवस्था, क्षेत्रीय अस्थिरता और उभरते सुरक्षा परिदृश्य के मद्देनज़र निरंतर वैश्विक परिवर्तनों का आकलन करने और उनके देश की सुरक्षा प्रणाली पर प्रभाव को समझने की आवश्यकता पर बल दिया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्ध की प्रकृति लगातार बदल रही है और हालिया वैश्विक संघर्षों ने “तकनीकी रूप से सक्षम” सैन्य बल की प्रासंगिकता को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा, “आज के युद्ध इतने अचानक और अप्रत्याशित होते हैं कि इसकी अवधि का अनुमान लगाना कठिन है। यह दो महीने, एक साल या पाँच साल तक चल सकता है। हमें हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी क्षमता पर्याप्त बनी रहे।”

रक्षा मंत्री ने भारत के रक्षा क्षेत्र को आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताओं का संगम बताते हुए कमांडरों से सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सुदर्शन चक्र” के विज़न को साकार करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि इस परियोजना की समीक्षा और यथार्थवादी कार्य योजना तैयार करने के लिए समिति गठित की गई है। साथ ही उन्होंने पाँच वर्षीय मध्यम अवधि की और दस वर्षीय दीर्घकालिक योजना बनाने का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि भारत का रक्षा क्षेत्र आधुनिकीकरण, संचालनात्मक तत्परता, तकनीकी श्रेष्ठता और विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता पर आधारित है। रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री द्वारा 15 सितम्बर को सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में दिए गए “JAI – संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार” के मंत्र पर जोर दिया। उन्होंने भविष्य उन्मुख तकनीक विकसित करने में उद्योग और शिक्षाविदों के साथ गहन सहयोग का आह्वान किया और रक्षा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में निजी क्षेत्र की भूमिका को बढ़ाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए सशस्त्र बलों के बीच तथा अन्य एजेंसियों के साथ संयुक्तता और तालमेल आवश्यक है। उन्होंने त्रि-सेवा लॉजिस्टिक्स नोड्स और त्रि-सेवा लॉजिस्टिक प्रबंधन एप्लिकेशन के निर्माण का उल्लेख किया, जो रक्षा क्षेत्र में एकीकरण और संयुक्तता को बढ़ावा देंगे। उन्होंने नागरिक-सैन्य सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया।

राजनाथ सिंह ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने सिद्ध किया है कि शक्ति, रणनीति और आत्मनिर्भरता – यही तीन स्तंभ हैं जो भारत को 21वीं सदी में आवश्यक शक्ति प्रदान करेंगे। आज हमारे पास स्वदेशी प्लेटफॉर्म और प्रणालियों तथा हमारे सैनिकों के साहस के बल पर किसी भी चुनौती का सामना करने की क्षमता है। यही आत्मनिर्भर भारत की असली ताकत है।” उन्होंने सशस्त्र बलों की “उत्कृष्ट कार्यक्षमता” और “असाधारण पेशेवराना क्षमता” की सराहना की।

रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता कोई नारा नहीं, बल्कि आवश्यकता है और यह सामरिक स्वायत्तता की कुंजी है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता आर्थिक विकास को बढ़ावा दे रही है, रोजगार पैदा कर रही है और शिपयार्ड, एयरोस्पेस क्लस्टर तथा डिफेंस कॉरिडोर की क्षमता बढ़ा रही है। यही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का गुणक प्रभाव है।

उन्होंने रक्षा खरीद मैनुअल 2025 को मंजूरी देने की जानकारी दी, जिसका उद्देश्य खरीद प्रक्रिया को सरल बनाना है। उन्होंने यह भी बताया कि रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 में संशोधन किया जा रहा है ताकि प्रक्रियाएँ और सरल हों, विलंब कम हो और सशस्त्र बलों को शीघ्र संचालनात्मक ताकत मिल सके।

सम्मेलन में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, पूर्व सैनिक कल्याण सचिव डॉ. नितेन चंद्र, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव एवं डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कमत, वित्तीय सलाहकार (रक्षा सेवाएँ) डॉ. मयंक शर्मा तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

लखनऊ में डीआरडीओ-एमएसएमई कॉनक्लेव, रक्षा अनुसंधान एवं उत्पादन में सहयोग पर जोर

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लखनऊ, डीआरडीओ के डिफेन्स टेक्नोलॉजी एंड टेस्ट सेंटर (DTTC), अमौसी कैम्पस में शनिवार को एमएसएमई और स्टार्ट-अप्स के साथ सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से कॉनक्लेव आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मकसद उत्तर प्रदेश डिफेन्स इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को नई गति देना था।

100 से अधिक प्रतिभागियों ने कौशल विकास, अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए फंडिंग, तकनीकी परामर्श और तकनीक हस्तांतरण जैसे विषयों पर चर्चा की।

डीआरडीओ अध्यक्ष ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि DTTC, रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की परिकल्पना का परिणाम है और आज उद्योगों के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। उन्होंने एमएसएमई को भरोसा दिलाया कि डीआरडीओ हर संभव सहयोग करेगा ताकि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बन सके।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ और एमएसएमई को कॉनक्लेव के आयोजन के लिए बधाई दी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विज़न को साकार करने में एमएसएमई की भूमिका को सराहा।

कार्यक्रम में डीजी (नेवल सिस्टम्स एंड मैटेरियल्स) डॉ. आरवी हरा प्रसाद, डीजी (टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट) डॉ. एलसी मंगल और डीजी (ह्यूमन रिसोर्सेस) डॉ. मयंक द्विवेदी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


स्वदेशी एयरो-इंजन परियोजना से आत्मनिर्भरता की ओर भारत का बड़ा कदम

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज नई दिल्ली में “21वीं सदी का युद्ध” विषयक रक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवाद, महामारी और क्षेत्रीय संघर्षों के इस दौर में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल विकल्प नहीं बल्कि सुरक्षा, संप्रभुता और राष्ट्रीय प्रगति की अनिवार्यता है।

प्रमुख बिंदु

ऑपरेशन सिंदूर : स्वदेशी उपकरणों से भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा सटीक व निर्णायक कार्रवाई; वर्षों की तैयारी और आत्मनिर्भरता का परिणाम।

सुदर्शन चक्र मिशन : प्रधानमंत्री द्वारा घोषित, अगले दशक में देश के महत्वपूर्ण स्थलों की संपूर्ण वायु सुरक्षा सुनिश्चित करने की परिकल्पना।

नौसैनिक आत्मनिर्भरता : INS हिमगिरी और INS उदयगिरि जैसे अत्याधुनिक स्टील्थ युद्धपोत अब पूरी तरह भारत में निर्मित।

स्वदेशी एयरो-इंजन परियोजना : लंबे समय से लंबित चुनौती निर्णायक चरण में; जल्द ही जमीन पर कार्य आरंभ होगा।

रक्षा औद्योगिक गलियारे : उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में सफल क्रियान्वयन; अन्य राज्यों तक विस्तार की संभावना।

रक्षा निर्यात : 2014 के ₹700 करोड़ से बढ़कर 2025 में लगभग ₹24,000 करोड़।

पॉजिटिव इंडिजिनाइजेशन लिस्ट : 5,500 से अधिक वस्तुएँ अब भारत में निर्मित होंगी; इनमें से 3,000 पहले ही स्वदेशीकरण हो चुकीं।

घरेलू रक्षा उत्पादन : ₹1.5 लाख करोड़ का आंकड़ा पार; 25% योगदान निजी क्षेत्र से।

सुधार एवं नीतिगत पहल

1]रक्षा लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाया गया।

2]प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) सीमा 74% तक बढ़ाई गई।

3]iDEX योजना : स्टार्ट-अप्स व युवाओं को नवाचार का अवसर।

4]ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड का कॉरपोरेटाइजेशन — घाटे से लाभकारी इकाई में परिवर्तन।

5]महिलाओं को कॉम्बैट रोल्स में शामिल करने का ऐतिहासिक निर्णय।

रक्षा मंत्री का संदेश
“भारत किसी देश को शत्रु नहीं मानता, पर अपने हितों पर समझौता भी नहीं करेगा।”
“रक्षा केवल व्यय नहीं, बल्कि डिफेंस इकोनॉमिक्स है, जो नौकरियों और औद्योगिक विकास का आधार है।”
“मीडिया युद्धकाल में चौथा स्तंभ ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रहरी भी है।”
“आत्मनिर्भर भारत रक्षा के क्षेत्र में कोई नारा नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और प्रगति का रोडमैप है।”

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