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जशक्राफ्ट को मिला राष्ट्रीय पहचान का नया मंच : महिलाओं द्वारा बांस, छिंद, मिट्टी एवं लकड़ी से बनाए उत्पाद मिलेंगे देश के विभिन्न एयरपोर्ट पर

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रायपुर। वन विभाग की पहल पर जशपुर जिले में महिला सशक्तिकरण और वन आधारित आजीविका को नई दिशा देने वाला एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में विगत दिवस बगिया में रेयर प्लेनेट संस्था तथा जशपुर जिले की स्व-सहायता समूह—जागरण, स्माईल आरती, राखी एवं मुस्कान समूह—के मध्य जशक्राफ्ट ब्रांड के उत्पादों के विपणन हेतु अनुबंध समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस महत्वपूर्ण समझौते के अंतर्गत अब जशपुर की जनजातीय महिलाओं द्वारा बांस, छिंद, मिट्टी एवं लकड़ी से निर्मित हस्तशिल्प, आभूषण एवं सजावटी उत्पाद देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर संचालित रेयर प्लेनेट के बिक्री केंद्रों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय स्व-सहायता समूहों को स्थायी बाजार, उचित मूल्य तथा नियमित आय के अवसर प्राप्त होंगे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एमओयू को जशपुर की महिलाओं के लिए एक निर्णायक उपलब्धि बताते हुए कहा कि जशक्राफ्ट जैसे ब्रांड के माध्यम से हमारी आदिवासी बहनों की कला अब देशभर के लोगों तक पहुँचेगी। यह पहल केवल उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान, आर्थिक स्वतंत्रता और स्वावलंबन की मजबूत नींव रखती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि वन एवं परंपरागत ज्ञान आधारित आजीविका को बाजार से जोड़ा जाए, ताकि महिलाएं अपने गांव में रहकर सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह एमओयू ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ की अवधारणा को साकार करता है तथा जशपुर की जनजातीय महिलाओं को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक ठोस और दूरगामी पहल है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कौशल्या साय, पत्थलगांव क्षेत्र की विधायक गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कलेक्टर रोहित व्यास, वनमंडलाधिकारी शशि कुमार सहित स्व-सहायता समूह की महिलाएं एवं रेयर प्लेनेट संस्था के प्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

पुस्तक विमोचन और जशक्राफ्ट उत्पादों की सराहना

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा “जशक्राफ्ट” पर आधारित विशेष पुस्तक का विमोचन किया गया। उन्होंने जशक्राफ्ट के अंतर्गत तैयार किए गए आभूषणों एवं हस्तनिर्मित उत्पादों का अवलोकन करते हुए उनकी गुणवत्ता, कलात्मकता और नवाचार की सराहना की।

स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कौशल्या देवी एवं विधायक गोमती साय का जशक्राफ्ट ब्रांड के पारंपरिक आभूषण पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया, जो महिला सशक्तिकरण और स्थानीय संस्कृति के सम्मान का सशक्त प्रतीक बना।

इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री द्वारा जशक्राफ्ट ब्रांड के प्रचार-प्रसार हेतु तैयार वीडियो का भी विमोचन किया गया, जिससे जशक्राफ्ट को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।

जशक्राफ्ट: जशपुर की सांस्कृतिक विरासत से जन्मा सशक्त ब्रांड

उल्लेखनीय है कि जशक्राफ्ट जशपुर जिले की समृद्ध जनजातीय सांस्कृतिक विरासत की सजीव अभिव्यक्ति है। जिले की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या जनजातीय समुदायों से आती है, जहाँ पीढ़ियों से बाँस, कांसा घास, छिंद पत्ते, लकड़ी एवं मिट्टी से हस्तनिर्मित कलाकृतियाँ तैयार की जाती रही हैं। पूर्व में संगठित व्यवस्था और बाजार की कमी के कारण कारीगरों की प्रतिभा सीमित रह जाती थी। 

जिला प्रशासन की पहल से जशक्राफ्ट के रूप में ऐसा सशक्त मंच विकसित हुआ है, जो जशपुर जिले के आठों विकासखंडों के कारीगरों को एकजुट कर उनकी कला को पहचान, संरक्षण और बाजार उपलब्ध करा रहा है।

इस पहल के केंद्र में आदिवासी महिला कारीगर हैं, जिनके हाथों से बिना मशीनों के बने उत्पाद परंपरा, प्रकृति और आत्मनिर्भरता का संदेश देते हैं। जशक्राफ्ट आज स्वदेशी ज्ञान से आकार लेते हुए एक टिकाऊ और सम्मानजनक आजीविका मॉडल के रूप में उभर रहा है।

वन विभाग द्वारा संचालित यह पहल महिला स्वावलंबन, वन आधारित आजीविका और स्थानीय उत्पादों के राष्ट्रीय बाजारीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध हो रही है, जो आने वाले समय में जशपुर को हस्तशिल्प के राष्ट्रीय मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाएगी।

महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

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रायपुर। महिला सशक्तिकरण, स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण परिवारों के स्वास्थ्य संरक्षण के उद्देश्य से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा योजना के अंतर्गत 25 लाख अतिरिक्त एलपीजी गैस कनेक्शन जारी करने की मंजूरी दी गई है। इसके तहत छत्तीसगढ़ के “नियद नेल्लानार योजना” में शामिल ग्रामों के बीपीएल परिवारों को प्राथमिकता से लाभ प्रदान किया जाएगा।

खाद्य सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने तेल विपणन कंपनियों के अधिकारियों की बैठक लेकर योजना के पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि “सुशासन तिहार” और “नियद नेल्लानार योजना” के तहत पात्र 1.59 लाख माताओं-बहनों को उज्ज्वला कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा।

सुकमा कलेक्टर देवेश कुमार धु्रव ने संबंधित अधिकारियों को चिन्हांकित ग्रामों में विशेष शिविर आयोजित कर आवेदन प्राप्त करने, लाभार्थियों का सत्यापन करने तथा गैस सुरक्षा संबंधी जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। स्वच्छ रसोई ईंधन की उपलब्धता से महिलाओं को धूम्ररहित रसोई, समय की बचत, स्वास्थ्य सुरक्षा, सुविधा और सम्मानपूर्ण जीवन की दिशा में नई मजबूती प्राप्त होगी।

डूमरिया की दीदियों ने तीन माह में किया 12 लाख का कारोबार

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रायपुर। महिला सशक्तिकरण की दिशा में लखपति दीदी योजना उल्लेखनीय परिणाम दे रही है। कोरिया जिले के बैकुंठपुर ब्लॉक के डूमरिया गाँव का महालक्ष्मी स्व-सहायता समूह इस योजना के अंतर्गत सफलता का प्रेरक उदाहरण बन गया है।

समूह की अध्यक्ष मुन्नी बाई को प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम एवं बिहान योजना के तहत “एम प्लस” नाम से पैक्ड वाटर प्लांट स्थापित करने का अवसर मिला। इस परियोजना की कुल लागत 35 लाख रुपये रही, जिसमें से 30 लाख रुपये की सहायता पीएमईजीपी से तथा 5 लाख रुपये का ऋण बिहान से प्राप्त हुआ। केवल तीन माह के भीतर ही इस प्लांट के माध्यम से 12 लाख रुपये से अधिक का कारोबार किया है, जिससे समूह को नई पहचान मिली है।

इस उपलब्धि से समूह की पाँच से अधिक महिलाएँ लखपति बनने की ओर अग्रसर हैं। मुन्नी बाई ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि लखपति दीदी योजना ने उनके जीवन में नया आत्मविश्वास भरा है। अब वे न केवल अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर पा रही हैं, बल्कि रोजगार सृजन में भी योगदान दे रही हैं। महालक्ष्मी समूह की महिलाएँ शिक्षा, सामाजिक गतिविधियों और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं।


महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए महतारी सदन निभाएगा महत्वपूर्ण भूमिका- मंत्री टंक राम वर्मा

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रायपुर- बलौदाबाजार जिले के ग्राम पंचायत रवान में महतारी सदन निर्माण कार्य का भूमिपूजन आज हर्षाेल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस भवन का निर्माण 24 लाख 70 हजार रूपए की लागत से किया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सरकार गांव-गांव में विकास की रोशनी फैला रही है और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए महतारी सदन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल, जनपद पंचायत अध्यक्ष सुमन योगेश वर्मा, उपाध्यक्ष शीतल घनश्याम वर्मा, रवान की सरपंच निकिता अक्षय भारती सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।


अब तक 368 महतारी सदन स्वीकृत, 50 से अधिक का निर्माण पूरा

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 रायपुर : प्रदेश के प्रत्येक ग्राम पंचायतों में ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनाने तथा आपसी समरसता स्थापित करने सामायिक कार्यक्रमों में सामूहिक भागीदारी तथा महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के निर्देशानुसार महतारी सदन का निर्माण कार्य किया जाना है।


उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयास से 166 महतारी सदन की स्वीकृति आदेश जारी किया गया है, इसके लिए 49 करोड़ 80 लाख रुपये की स्वीकृति जारी की गई है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि न्यू इंडिया के ग्रोथ साइकल में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत अभियान महिलाओं की क्षमता को देश के विकास के साथ जोड़ रहा है। प्रदेश के ग्राम पंचायतों में बनने जा रहा महतारी सदन भी इसी दिशा में एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि लगातार ग्राम भ्रमण के दौरान महिलाओं द्वारा बैठने की स्थान न होने की शिकायत की और बैठने हेतु स्थान दिलाने की मांग की जाती रही इसलिए महतारी सदन बनाने का विचार आया।

ततपश्चात महिलाओं को रोजगार दिलाने और उनको काम काज के लिए स्थान उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार गांवों में महतारी सदन बनाने जा रही है। अब तक 368 महतारी सदन की स्वीकृति इसी उद्देश्य को पूर्ति के लिये जारी किया गया है। कार्यों में एकरूपता के दृष्टिकोण से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कार्य का एक मानक डिजाईन एवं प्राक्कलन तैयार किया गया है। प्रति महतारी सदन की लागत राशि रुपये 30 लाख होगी।

5 वर्षो में सभी ग्राम पंचायतों में महतारी सदन बनाने की योजना

प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों में महतारी सदन बनाया जाएगा। महतारी सदन बनाने की शुरुआत हो गयी है। पहले चरण में प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में महतारी सदन बनना प्रारंभ किया जा रहा है व 5 साल में सभी ग्राम पंचायत में महतारी सदन बनेंगे। प्रदेश में बनने वाले महतारी सदन का निर्माण लगभग 25 सौ वर्गफुट में कराया जाएगा।

सदन में कमरा, शौचालय, बरामदा, हाल, किचन और स्टोररूम जैसी सुविधाएं रहेगी। पानी के लिए ट्यूबवेल के साथ वाटर हार्वेस्टिंग भी किया जाएगा। महिलाओं की सुरक्षा के लिए इसमे बॉउंड्रीवाल भी बनाये जाएंगे। महतारी सदन में सामुदायिक शौचालय का भी निर्माण किया जाएगा।

जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं – डॉ. एकता लगेह

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महासमुंद। ग्राम कौवाझार में महिला सशक्तिकरण पर रविवार को एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन  किया गया। इस कार्यक्रम में महिलाओं की भूमिका, उनके अधिकारों एवं समाज में उनकी स्थिति को लेकर  चर्चा की गई।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि समाज सेविका डॉ. एकता लगेह थीं। अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में उन्होंने कहा कि “जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक युग में महिला सशक्तिकरण एक अहम मुद्दा है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि शक्ति का स्वरूप होने के बावजूद महिलाएं आज भी अपेक्षित सम्मान और अवसरों से वंचित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्र की प्रगति तभी संभव है जब महिलाएं स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक रूप से सशक्त हों तथा अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम पंचायत कौवाझार के सरपंच  गेंदराम जांगड़े ने की। वहीं, विशेष अतिथि के रूप में जिला सदस्य प्रतिनिधि  अमर चंद्राकर और जनपद सदस्य सुश्री अंजलि जगन्नाथ खैरवार उपस्थित रहे। डॉ. एकता लगेह ने महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया और किशोरी बालिकाओं को सेनेटरी पैड का वितरण भी किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और किशोरियों को स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता और संसाधनों की उपलब्धता जरूरी है।

विशेष अतिथि अमर चंद्राकर ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाएं समाज की धुरी हैं। उन्होंने उपस्थित महिलाओं से आह्वान किया कि वे झांसी की रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगनाओं से प्रेरणा लें और जीवन में आत्मनिर्भरता तथा साहस का परिचय दें।

इस अवसर पर ग्राम पंचायत के पंच, ग्रामीणजन, महिला स्व-सहायता समूह की सदस्याएँ, हेमवती यादव और ममता यादव सहित बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद थीं। कार्यक्रम का संचालन डाइजेश्वरी चंद्राकर ने कुशलतापूर्वक किया।



शासन की योजनाओं से सशक्त बनी जशपुर की उद्यमी महिला लालमती

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित महिला सशक्तिकरण की योजनाएं अब धरातल पर सकारात्मक परिणाम देने लगी हैं। इसकी एक प्रेरणादायी मिसाल हैं जशपुर जिले के गम्हरिया ग्राम की लालमती, जिन्होंने शासन की विभिन्न योजनाओं से लाभ लेकर आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है। उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प और मेहनत से न सिर्फ स्वयं की पहचान बनाई, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया है।


लालमती का जीवन एक साधारण मजदूर से सफल उद्यमी बनने की कहानी है। जब वे प्रजापति गौरी स्व-सहायता समूह से जुड़ीं, तब उन्हें बिहान योजना के माध्यम से शासन की योजनाओं का लाभ मिला। उन्होंने उद्योग विभाग से लोन प्राप्त कर शटरिंग प्लेट का व्यवसाय प्रारंभ किया और बाद में जनवरी 2025 में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत ऋण लेकर अपने व्यवसाय को विस्तार दिया।

आज श्रीमती लालमती के पास 200 से अधिक शटरिंग प्लेट हैं, जो वे निजी भवनों एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्माणाधीन आवासों की छत ढलाई हेतु किराये पर उपलब्ध कराती हैं। फरवरी 2025 से अब तक इस व्यवसाय से उन्हें लगभग 35,000 से 40,000 रुपये की आय हुई है। यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है क्योंकि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गांव में कई मकानों का निर्माण कार्य चल रहा है।

लालमती ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि, यदि शासन की योजनाओं का साथ न होता, तो मैं आज इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाती। शासन ने हमें हौसला दिया, साधन उपलब्ध कराए और नई राह दिखाई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार का यह दृढ़ संकल्प है कि ग्रामीण अंचलों की महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और आर्थिक गतिविधियों में अग्रणी भूमिका निभाएं। बिहान, मुद्रा योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से हम महिलाओं को न केवल वित्तीय सहयोग दे रहे हैं, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बाज़ार तक पहुँच भी प्रदान कर रहे हैं। लालमती जैसी महिलाएं छत्तीसगढ़ की नई सामाजिक-आर्थिक चेतना की प्रतीक हैं।छत्तीसगढ़ शासन की प्राथमिकता है कि हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो, सम्मान के साथ जीवन जिए और दूसरों के लिए प्रेरणा बने।

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