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नाव्या मलिक ड्रग्स केस में ED की एंट्री, मनी ट्रेल और पूरे नेटवर्क की होगी जांच

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 रायपुर। राजधानी रायपुर के चर्चित नाव्या मलिक ड्रग्स केस में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हो गई है। मामले में ड्रग्स कारोबार से जुड़े आर्थिक लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच के लिए ईडी ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी क्रम में गंज थाना पुलिस ने केस से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज एजेंसी को सौंप दिए हैं। रायपुर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने इसकी पुष्टि की है।


जानकारी के अनुसार, ईडी ने गंज थाना पुलिस से एफआईआर, केस डायरी, जब्ती पंचनामा, आरोपियों के बयान समेत जांच से संबंधित सभी अहम दस्तावेज मांगे थे। पुलिस ने आवश्यक रिकॉर्ड एजेंसी को उपलब्ध करा दिए हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मनी ट्रेल और आर्थिक नेटवर्क की होगी पड़ताल

सूत्रों के मुताबिक, दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ईडी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दर्ज कर सकती है। इसके बाद एजेंसी ड्रग्स कारोबार से अर्जित अवैध धन के स्रोत, उसके निवेश, लेनदेन और पूरे मनी ट्रेल की गहन जांच करेगी।

ईडी यह भी पता लगाएगी कि ड्रग्स नेटवर्क को आर्थिक सहायता किसने उपलब्ध कराई, अवैध कमाई को किन माध्यमों से छिपाया गया और उसे वैध दिखाने के लिए किन व्यक्तियों या संस्थाओं का इस्तेमाल किया गया।

बैंक खाते और संपत्तियां भी रडार पर

जांच के दौरान संदिग्ध बैंक खातों, चल-अचल संपत्तियों, वित्तीय लेनदेन और निवेश की भी विस्तृत पड़ताल की जाएगी। यदि जांच में मनी लॉन्ड्रिंग के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ PMLA के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

ईडी की एंट्री के बाद अब इस मामले की जांच केवल ड्रग्स की सप्लाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे आर्थिक नेटवर्क, फंडिंग सिस्टम और उससे जुड़े सभी लोगों की भूमिका भी एजेंसी के दायरे में होगी।

2434 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग पर ED का मेगा एक्शन, रायपुर समेत देशभर में 30+ ठिकानों पर छापेमारी

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 रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2,434 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में देशभर में एकसाथ छापेमारी की है। इस कार्रवाई के तहत रायपुर, मुंबई, नासिक और बेंगलुरु समेत 30 से अधिक ठिकानों पर ईडी की टीमें तलाशी अभियान चला रही हैं।


यह छापेमारी जय कॉर्प लिमिटेड के निदेशक आनंद जयकुमार जैन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की जा रही है। जांच एजेंसी को संदेह है कि रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट के नाम पर जुटाई गई भारी रकम को विदेशी कंपनियों और ऑफशोर अकाउंट्स के जरिए ट्रांसफर किया गया।

ईडी की टीमें मौके पर दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और वित्तीय लेन-देन से जुड़े अहम सबूत खंगाल रही हैं। एजेंसी शेल कंपनियों, संदिग्ध ट्रांजेक्शन और ऑफशोर नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच के दायरे में कई कंपनियां और बड़े कारोबारी समूह भी आ सकते हैं।

जानिए क्या है पूरा मामला

दरअसल, CBI ने आनंद जयकुमार जैन, जय कॉर्प लिमिटेड, कारोबारी पराग शांतिलाल पारेख और अन्य कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आनंद जैन मशहूर गेमिंग कंपनी ड्रीम11 के को-फाउंडर हर्ष जैन के पिता हैं, जिससे यह केस और भी हाई-प्रोफाइल बन गया है।

बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश से तेज हुई जांच

बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर CBI ने इस मामले में FIR दर्ज की और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया। इससे पहले मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को दिसंबर 2021 और अप्रैल 2023 में शिकायतें मिली थीं।

₹2434 करोड़ निवेश घोटाले का आरोप

CBI की FIR के मुताबिक, मई 2006 से जून 2008 के बीच आनंद जैन और अन्य आरोपियों ने दो कंपनियां बनाईं। इनके जरिए मुंबई और अन्य शहरों में रियल एस्टेट डेवलपमेंट के नाम पर निवेशकों से करीब ₹2,434 करोड़ जुटाए गए।

ईडी को शक है कि इस रकम का इस्तेमाल रिलायंस पैट्रोकैमिकल्स की फ्यूचर ट्रेडिंग में किया गया।

बैंक कर्ज के दुरुपयोग का भी आरोप

जांच में यह भी सामने आया है कि नवी मुंबई SEZ प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर बैंकों से ₹3,252 करोड़ का कर्ज लिया गया। इससे पहले मुंबई SEZ लिमिटेड के लिए ₹686 करोड़ का लोन लिया गया था। आरोप है कि इन कर्जों का इस्तेमाल घोषित उद्देश्यों के बजाय अन्य वित्तीय गतिविधियों में किया गया।

CBI का दावा है कि आपराधिक साजिश के तहत निवेशकों और बैंकों का पैसा मॉरिशस और जर्सी (Channel Islands) स्थित विदेशी कंपनियों में भेजा गया।

विदेशी निवेश और मनी लॉन्ड्रिंग का शक

जांच एजेंसियों के अनुसार, ₹98.83 करोड़ का विदेशी मुद्रा कर्ज भी मॉरिशस में निवेश किया गया। इससे यह संदेह गहराया है कि पूरे नेटवर्क के जरिए सुनियोजित तरीके से मनी लॉन्ड्रिंग की गई।

ED और CBI दोनों एजेंसियां फिलहाल मनी ट्रेल, ऑफशोर कंपनियों और निवेशकों की रकम की पूरी चेन की जांच कर रही हैं।

आगे क्या?

जांच आगे बढ़ने के साथ गिरफ्तारी, संपत्तियों की कुर्की और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है। यह मामला देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में से एक माना जा रहा है।

शराब घोटाला मामला : चैतन्य बघेल की रिमांड 12 नवंबर तक बढ़ी

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 रायपुर। शराब घोटाले में गिरफ्तार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की न्यायिक रिमांड अवधि कोर्ट ने 12 नवंबर तक बढ़ा दी है। रिमांड खत्म होने पर आज उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां सुनवाई के बाद रिमांड बढ़ाने का आदेश दिया गया।


गौरतलब है कि ईडी ने चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को मनी लॉन्ड्रिंग और शराब घोटाले के आरोपों में भिलाई से गिरफ्तार किया था। एजेंसी के अनुसार, उन्होंने 16.70 करोड़ रुपये की अवैध कमाई को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में निवेश किया था। साथ ही, ‘विट्ठलपुरम परियोजना’ में फर्जी फ्लैट खरीद के जरिए 5 करोड़ रुपये हासिल करने के भी आरोप हैं।

बच्चों की मौत से शुरू, मनी लॉन्ड्रिंग पर खत्म - कफ सिरप केस में ED का बड़ा एक्शन

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भोपाल : बच्चों की मौत से शुरू हुआ कोल्डरिफ कफ सिरप मामला अब मनी लॉन्ड्रिंग स्कैंडल में बदल गया है।


प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार सुबह चेन्नई में श्रीसन फार्मा और उससे जुड़े लोगों के 7 ठिकानों पर छापेमारी की।

ED की टीमों ने कंपनी के दफ्तरों, मालिक के घर और तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल ऑफिस के वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों पर एक साथ कार्रवाई की।
यह छापेमारी मध्य प्रदेश में 21 बच्चों की मौत वाले उस घोटाले से जुड़ी है, जिसमें Coughrif कफ सिरप को दोषी पाया गया था।

कैसे शुरू हुआ मामला

मध्य प्रदेश पुलिस की जांच में सामने आया कि चेन्नई की श्रीसन फार्मा कंपनी द्वारा निर्मित कफ सिरप में खतरनाक मिलावट की गई थी।
इसी जहरीली दवा के सेवन से 21 बच्चों की मौत हो गई थी।
इसके बाद पुलिस ने 9 अक्टूबर 2025 को कंपनी के मालिक जी. रंगनाथन को गिरफ्तार किया।

ED की एंट्री: मनी लॉन्ड्रिंग का शक

अब ईडी ने इस केस में ECIR (Enforcement Case Information Report) दर्ज की है।
एजेंसी को शक है कि मिलावटी कफ सिरप की बिक्री से जो मुनाफा हुआ, उसका एक हिस्सा रिश्वत और मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हुआ।
ईडी सूत्रों के मुताबिक,

“यह सिर्फ एक लापरवाही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों से जुड़ा संगठित नेटवर्क है।”

फार्मा कंपनी पर लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप

श्रीसन फार्मा की फैक्ट्री कांचीपुरम (तमिलनाडु) में स्थित है।
जांच में पाया गया कि तमिलनाडु खाद्य एवं औषधि प्रशासन (TNFDA) ने नियमित निरीक्षण और लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं की अनदेखी की।
CDSCO सूत्रों के अनुसार,

“TNFDA ने समय-समय पर फैक्ट्री की जांच नहीं की, जिससे मिलावटी सिरप का उत्पादन जारी रहा।”

अफसरों पर कार्रवाई और रिश्वत का मामला

तमिलनाडु सरकार ने ड्रग कंट्रोल विभाग के दो अफसरों को सस्पेंड किया है, जो पिछले दो वर्षों से फैक्ट्री का इंस्पेक्शन नहीं कर रहे थे।
इसके अलावा, विभाग के डायरेक्टर को ACB ने रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा।
ACB ने भ्रष्टाचार की FIR दर्ज कर दी है।

अब जांच का फोकस

ईडी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि -
कफ सिरप की बिक्री से कुल कितना मुनाफा हुआ?
रिश्वत के लिए किन अफसरों को भुगतान किया गया?
क्या मुनाफे का कोई हिस्सा विदेश भेजा गया?

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