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सहकारिता मंत्रालय के 5 वर्ष पूरे, महासमुंद में ध्वजारोहण के साथ सहकारिता सप्ताह का शुभारंभ

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 महासमुंद : भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के 5 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सहकारिता सप्ताह के प्रथम दिवस में आज जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्या. रायपुर जिला कार्यालय महासमुंद अंतर्गत 159 सहकारी समितियों समितियों के अध्यक्ष, समिति प्रभारियों अन्य कर्मचारियों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में ध्वजा रोहण कर सहकारी सप्ताह का शुभारंभ किया गया।


साथ ही जिले में 16 जिला सहकारी केंद्रीय बैंक परिसर मे बैंक के कर्मचारियों और ग्राहकों की उपस्थिति मे ध्वजा रोहण किया गया।

इतिहास में पहली बार रेल मानचित्र पर उभरेगा जशपुर

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 रायपुर : जशपुर जिले के विकास इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। भारत सरकार के रेल मंत्रालय द्वारा धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किए जाने के साथ ही जशपुर को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह केवल एक रेल परियोजना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास की नई आधारशिला है।


लगभग 291.881 किलोमीटर लंबी यह महत्वाकांक्षी रेल लाइन रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ से प्रारंभ होकर जशपुर जिले के पत्थलगांव होते हुए झारखंड के लोहरदगा तक पहुंचेगी। परियोजना के क्रियान्वयन से जशपुर जिला सीधे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा और क्षेत्र के विकास को अभूतपूर्व गति मिलेगी।


यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विकसित की जा रही आधुनिक आधारभूत संरचना तथा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विशेष प्रयासों का परिणाम है। वर्षों से क्षेत्रवासियों द्वारा उठाई जा रही रेल संपर्क की मांग अब साकार होने की दिशा में निर्णायक चरण में पहुंच गई है।

रेल मंत्रालय द्वारा भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार रेल अधिनियम, 1989 के प्रावधानों के तहत सार्वजनिक हित और राष्ट्रीय अवसंरचना विकास को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को अधिसूचित किया गया है। अधिसूचना के प्रकाशन के साथ ही परियोजना औपचारिक रूप से प्रभावशील हो गई है।

विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा वनांचल क्षेत्र

प्राकृतिक संसाधनों और संभावनाओं से समृद्ध जशपुर जिला अब तक रेल संपर्क से वंचित था। परिवहन के लिए मुख्यतः सड़क मार्ग पर निर्भरता के कारण आम नागरिकों, विद्यार्थियों, किसानों, व्यापारियों और रोजगार की तलाश में बाहर जाने वाले युवाओं को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नई रेल लाइन के निर्माण से जिले की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक बदलाव आएगा और लोगों को सुरक्षित, सुलभ तथा किफायती परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

किसानों और उद्यमियों के लिए खुलेगी नई संभावनाएं

रेल संपर्क स्थापित होने से जशपुर के कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों को देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा। जैविक खेती, सुगंधित धान, मक्का, दलहन, सब्जियां और बागवानी उत्पादों के लिए पहचान रखने वाले इस क्षेत्र के किसानों को बेहतर बाजार और बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। परिवहन लागत कम होने से स्थानीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी। साथ ही व्यापार और लघु उद्योगों को विस्तार का नया अवसर मिलेगा।

पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान

जशपुर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने वन क्षेत्रों, जलप्रपातों, धार्मिक स्थलों और पर्यटन स्थलों के लिए विशेष पहचान रखता है। रेल संपर्क स्थापित होने के बाद पर्यटकों की पहुंच अधिक आसान होगी, जिससे पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होगी। इससे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और अन्य सेवा क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक बढ़ेगी पहुंच

नई रेल लाइन विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों तक पहुंच को सुगम बनाएगी। वहीं गंभीर मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों तक शीघ्र पहुंचाने में भी सहायता मिलेगी। इससे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के साथ उनकी उपलब्धता और पहुंच में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा।

रोजगार और निवेश का नया केंद्र बनेगा क्षेत्र

रेल परियोजना के निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार अवसर सृजित होंगे। बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध होने से क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।

क्षेत्रवासियों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

परियोजना की अधिसूचना जारी होने के बाद जशपुर सहित पूरे क्षेत्र में उत्साह और खुशी का माहौल है। लोगों का मानना है कि यह रेल लाइन केवल यातायात सुविधा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए विकास, समृद्धि और नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी। दशकों की प्रतीक्षा के बाद जशपुर का रेल मानचित्र पर स्थान सुनिश्चित होना जिले के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।

धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना जशपुर के विकास को नई दिशा देने वाली आधारभूत संरचना साबित होगी, जो आने वाले वर्षों में जिले की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने का सामर्थ्य रखती है।

अमेरिका-ईरान युद्धविराम का भारत ने किया स्वागत, शांति बहाली की जताई उम्मीद

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 नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच घोषित युद्धविराम (सीजफायर) पर भारत ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। भारत सरकार ने इस कदम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में स्थायी शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी।


अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के साथ सीजफायर की घोषणा के बाद क्षेत्र में जारी तनाव फिलहाल थमता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच करीब एक महीने से अधिक समय से चल रहा संघर्ष अब दो सप्ताह के लिए रोक दिया गया है।

विदेश मंत्रालय ने बुधवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में कहा, “हम युद्धविराम का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी।” मंत्रालय ने दोहराया कि भारत हमेशा से संवाद और कूटनीति के माध्यम से विवादों के समाधान का पक्षधर रहा है।

आम लोगों पर पड़ा गहरा असर

विदेश मंत्रालय ने कहा कि लंबे समय से जारी इस संघर्ष ने आम नागरिकों को भारी नुकसान पहुंचाया है। साथ ही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार नेटवर्क भी प्रभावित हुआ है। भारत ने विशेष रूप से Strait of Hormuz में निर्बाध नौवहन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यहां से व्यापारिक गतिविधियां सुचारू रूप से जारी रहनी चाहिए।

28 फरवरी से शुरू हुआ था संघर्ष

गौरतलब है कि यह टकराव 28 फरवरी को तब शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी हमले किए और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस संघर्ष का असर वैश्विक स्तर पर देखा गया।

करीब 40 दिनों तक चले इस तनावपूर्ण दौर के बाद अब दोनों देशों के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी है। यह सहमति उस समय बनी, जब अमेरिका द्वारा तय की गई समयसीमा खत्म होने में केवल कुछ ही समय बचा था।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीजफायर क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में अहम कदम है, हालांकि स्थायी शांति के लिए आगे भी कूटनीतिक प्रयास जरूरी होंगे।

श्रम सुधारों पर रायपुर में विशेष वार्ता, मीडिया को दी गई विस्तृत जानकारी

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 रायपुर भारत सरकार द्वारा 21 नवंबर 2025 को लागू की गई चार ऐतिहासिक श्रम संहिताओं को लेकर रायपुर में एक विशेष वार्ता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में श्रम सुधारों के दूरगामी प्रभाव, उनके प्रभावी क्रियान्वयन और भावी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।


मीडिया के जरिए श्रमिकों तक पहुंचे सही जानकारी का प्रयास

इस विशेष वार्ता का उद्देश्य मीडिया के माध्यम से आम जनमानस और श्रमिक वर्ग तक श्रम सुधारों से जुड़ी सटीक, तथ्यपरक और प्रामाणिक जानकारी पहुंचाना रहा। कार्यक्रम में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और विषय विशेषज्ञ मौजूद रहे, जिन्होंने श्रम संहिताओं के सकारात्मक प्रभाव और भविष्य के रोडमैप पर प्रकाश डाला।

चार श्रम संहिताओं के प्रमुख प्रावधानों पर फोकस

कार्यक्रम में इन चार संहिताओं पर विशेष चर्चा की गई

  • मजदूरी संहिता (2019)
  • सामाजिक सुरक्षा संहिता (2020)
  • औद्योगिक संबंध संहिता (2020)
  • व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता (2020)

इन श्रम सुधारों का उद्देश्य व्यापार सुगमता बढ़ाने के साथ-साथ करोड़ों श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी की गारंटी, व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज और सुरक्षित एवं स्वस्थ कार्यस्थल उपलब्ध कराना है।

‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में अहम कदम

वार्ता के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि ये श्रम सुधार ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में किस तरह मजबूत आधार तैयार करेंगे और श्रमिक कल्याण के साथ आर्थिक विकास को गति देंगे।

वन संरक्षण और अध्ययन के लिए बस्तर में राज्य का पहला वन विज्ञान केंद्र तैयार

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर वन मंडल के आसना में राज्य का पहला वन विज्ञान केंद्र स्थापित किया जाएगा। इसे राष्ट्रीय कैम्पा मिशन, भारत सरकार की स्वीकृति मिल गई है। 23वीं क्रियान्वयन समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि पायलट बेसिस पर झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और मध्यप्रदेश में एक-एक वन विज्ञान केंद्र शुरू किए जाएं।


केंद्र के संचालन, प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम निर्धारण के लिए मुख्य वन संरक्षक, जगदलपुर वृत्त की अध्यक्षता में प्रदेश स्तरीय सलाहकार समिति का गठन किया गया है। समिति में 8 विषय विशेषज्ञ और विभिन्न वन अधिकारियों को शामिल किया गया है।

सलाहकार समिति में प्रमुख सदस्य हैं:

  • डॉ. गिरीश चंदेल (कुलपति, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर)
  • डॉ. संजीवन कुमार (सह-प्राध्यापक, शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर)
  • डॉ. राहुल मुंगीकर (पुणे, महाराष्ट्र)
  • राजेश गुप्ता, गिरीश कुबेर, राजीव शर्मा, डॉ. एम.एल. नायक, सुबोध मनोहर पांडे

बस्तर वन मंडलाधिकारी को समिति का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। समिति के सदस्य संचालन, प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम निर्धारण में सहयोग करेंगे, लेकिन उन्हें किसी प्रकार का मानदेय या वेतन नहीं दिया जाएगा।

यह पहल छत्तीसगढ़ में वन विज्ञान और संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

छत्तीसगढ़ के 141879 किसानों को 152.84 करोड़ रुपये का दावा भुगतान

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रायपुर : भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एवं मौसम आधारित फसल बीमा योजना अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य के एक लाख 41 हजार 879 पात्र बीमित किसानों को कुल 152 करोड़ 84 लाख 62 हजार रुपये का दावा राशि का भुगतान राष्ट्रव्यापी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से किया जाएगा। जिसमें खरीफ सीजन 2024 के 33 हजार 943 पात्र किसानों को 10 करोड़ 25 लाख 97 हजार रुपये तथा रबी सीजन 2024-25 के एक लाख 7 हजार 936 पात्र किसानों को 142 करोड़ 58 लाख 65 हजार रुपये का दावा भुगतान शामिल है।


प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत यह भुगतान 11 अगस्त 2025 (सोमवार) को राष्ट्रव्यापी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण आधारित स्वचालित प्रणाली के माध्यम से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में राजस्थान के झुंझुनू में आयोजित कार्यक्रम में होगी। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा होंगे। कार्यक्रम में केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री भागीरथ चौधरी, राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किशोरी लाल मीना विशिष्ट अतिथि होंगे।

यह कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से आरंभ होगा। छत्तीसगढ़ के पात्र बीमित कृषकों को वर्चुअल मोड से कार्यक्रम में शामिल करने हेतु जिला स्तर पर कार्यालय उप संचालक कृषि तथा विकासखण्ड स्तर पर कार्यालय वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी में आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि अधिक से अधिक लाभार्थी कृषक इसका हिस्सा बन सकें।

मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन ने इस अवसर पर कहा कि किसानों की आर्थिक सुरक्षा हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसे प्रभावी कार्यक्रम किसानों को प्राकृतिक आपदाओं एवं फसल हानि से उबारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह दावा भुगतान हमारे कृषकों के विश्वास और आत्मनिर्भरता को और मजबूत करेगा। हमारी सरकार खेती को लाभकारी बनाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक तकनीक के प्रसार और फसल विविधीकरण के माध्यम से प्रदेश की कृषि को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए संकल्पित है।

छत्तीसगढ़ में आदिवासी क्षेत्रों के लिए बड़ी सौगात, 375.71 करोड़ की सड़कों को केंद्र की मंजूरी

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 रायपुर। भारत सरकार द्वारा आदिवासी और दूरस्थ अंचलों के विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के चयनित जनजातीय बहुल विकासखंडों में 2449.108 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जाएंगी। इस परियोजना की कुल लागत 375.71 करोड़ रुपये होगी, जिसे भारत सरकार ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।


केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर इस मंजूरी की जानकारी दी और इसे "पीवीटीजी (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों)" के जीवन में परिवर्तन लाने वाली पहल बताया।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि यह योजना अनुसूचित जनजाति समुदायों, विशेषकर PVTG (Particularly Vulnerable Tribal Groups) को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रयास है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन सड़कों के निर्माण से इन समुदायों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में बदलाव आएगा और वे राष्ट्र की मुख्यधारा से बेहतर ढंग से जुड़ सकेंगे।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि इस योजना के अंतर्गत 2449.108 किलोमीटर लंबी नई सड़कें और 100 पुल की स्वीकृति दी गई है। मंत्री चौहान ने राज्य सरकार से इन कार्यों की त्वरित स्वीकृति और क्रियान्वयन की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया है।

चौहान ने यह भी अनुरोध किया है कि राज्य सरकार इन सड़कों के निर्माण कार्यों को शीघ्र शुरू कर फास्ट ट्रैक मोड पर पूरा कराए ताकि लोगों को जल्द से जल्द सुविधा मिल सके।l

उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जनजातीय समुदायों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह पहल और अधिक सफल होगी।

मुख्य बिंदु-:

  • - पीएमजीएसवाई के तहत 375.71 करोड़ रुपये की सड़कों को मंजूरी
  • - 2449.108 किलोमीटर नई सड़कें, 100 पुल की स्वीकृति
  • - जनजातीय बहुल ब्लॉकों में होगा कार्यान्वयन
  • - पीवीटीजी समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बड़ी पहल
  • - केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ से शीघ्र क्रियान्वयन की अपेक्षा जताई


यह निर्णय राज्य के आदिवासी समुदायों के लिए न केवल एक विकास की राह खोलेगा बल्कि सामाजिक समावेशन और क्षेत्रीय संतुलन की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा।

छत्तीसगढ़ राज्य को डीएमएफ संबंधी उत्कृष्ट कार्यों के लिए भारत सरकार के खान मंत्रालय द्वारा किया गया सम्मानित

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 रायपुर : भारत सरकार के खान मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य को जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) के अंतर्गत उल्लेखनीय कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। आज नई दिल्ली स्थित स्कोप कन्वेंशन सेंटर में आयोजित एक दिवसीय “नेशनल डीएमएफ वर्कशॉप” के दौरान केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने मुख्यमंत्री के सचिव और खनिज सचिव  पी. दयानंद को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।


खान मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना द्वारा नेशनल डीएमएफ पोर्टल में समस्त राज्यों के डीएमएफ से संबंधित डेटाबेस का संधारण किया जा रहा है। डीएमएफ के ऑडिट रिपोर्ट का राज्य डीएमएफ पोर्टल एवं नेशनल डीएमएफ पोर्टल में 90 प्रतिशत डेटाबेस पूर्णतः अपलोड किए जाने पर छत्तीसगढ़ राज्य को प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के प्रयासों को मॉडल राज्य के रूप में प्रस्तुत किया गया और अन्य राज्यों को भी डेटा अपलोडिंग, पारदर्शिता और ज़मीनी क्रियान्वयन के अनुकरण की सलाह दी गई।

उल्लखेनीय है कि नेशनल डीएमएफ कार्यशाला का आयोजन प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना एवं डीएमएफ की प्रभावशीलता को बढ़ाने और खनन क्षेत्रों में सतत एवं समावेशी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से सचिव, संचालक एवं खनन प्रभावित जिलों के कलेक्टर्स शामिल हुए।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा डीएमएफ के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, अधोसंरचना एवं आजीविका जैसे विविध क्षेत्रों में समावेशी विकास के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। राज्य में अब तक 16,506 करोड़ रुपये की लागत से 1,01,313 विकास कार्यों की स्वीकृति दी जा चुकी है, जिनमें से 70,318 कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए जा चुके हैं।

राज्य शासन द्वारा डीएमएफ के क्रियान्वयन में पारदर्शी और जनहितकारी दृष्टिकोण को अपनाते हुए, प्रत्येक जिले में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों की योजना और निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। यह नीति न केवल भौतिक विकास बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण को भी लक्ष्य में रखती है।

कार्यशाला में छत्तीसगढ़ की ओर से सचिव, खनिज साधन विभाग पी. दयानंद, संचालक रजत बंसल के साथ बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा, कोरबा, रायगढ़ एवं दंतेवाड़ा जिलों के कलेक्टर्स एवं डीएमएफ के नोडल अधिकारी उपस्थित थे।

राष्ट्रीय स्तर की 'लखपति महिला पहल' क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन 9 से 11 जुलाई तक राजधानी रायपुर में

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 रायपुर : भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा “लखपति दीदी” बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर की क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन 9 से 11 जुलाई 2025 तक राजधानी रायपुर में होने जा रहा है। यह कार्यशाला दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत आयोजित की जा रही है। आयोजन में देश के 11 राज्यों के वरिष्ठ अधिकारीगण, मिशन संचालक, आजीविका विशेषज्ञ, स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधि तथा अन्य संबद्ध हितधारक सहभागी होंगे।


कार्यशाला का उद्घाटन भारत सरकार, ग्रामीण विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव टी. के. अनिल, छत्तीसगढ़ शासन की पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक, भारत सरकार की संयुक्त सचिव स्वाति शर्मा तथा छत्तीसगढ़ शासन के सचिव भीम सिंह की उपस्थिति में होगा।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में 3 करोड़ “लखपति दीदी” तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और उद्यमशील बनाने हेतु विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में यह कार्यशाला विविध पहलुओं जैसे— ग्रामीण आजीविका के अवसर, सामाजिक एवं वित्तीय समावेशन, कौशल विकास, बाजार उपलब्धता, वेल्यू चेन निर्माण एवं आधुनिक तकनीकों पर आधारित रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा एवं अनुभव साझा करने का एक सशक्त मंच प्रदान करेगी।

यह कार्यशाला मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, झारखंड, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना, ओडिशा, हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु तथा आंध्रप्रदेश राज्यों के प्रतिभागियों की सहभागिता का गवाह बनेगी।

विशेष रूप से भारत सरकार, ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के सचिव श्री एस. सी. एल. दास वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़कर प्रतिभागियों को मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

कार्यशाला के दौरान विभिन्न सत्रों में स्थानीय संसाधनों के उपयोग, महिला प्रशिक्षण, वित्तीय समावेशन तथा व्यवसाय संवर्धन के विषयों पर गहन मंथन किया जाएगा। आयोजन में आजीविका मिशन अंतर्गत गठित स्व-सहायता समूहों द्वारा उत्पादित सामग्रियों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिससे उनके उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध हो सके।

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की संचालक जयश्री जैन ने बताया कि कार्यशाला की सभी तैयारियाँ पूर्ण कर ली गई हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि यह आयोजन ग्रामीण विकास में महिला नेतृत्व को और अधिक प्रभावी भूमिका निभाने हेतु प्रेरित करेगा। यह कार्यशाला केवल विमर्श का अवसर न होकर भविष्य की ठोस रणनीतियों का आधार भी बनेगा, जिससे “लखपति दीदी” के रूप में लाखों महिलाओं को सशक्त किया जा सकेगा।

प्रधानमंत्री आवास योजना 2025: हर परिवार को मिलेगा पक्का घर, जानिए आवेदन की पूरी प्रक्रिया, पात्रता और ज़रूरी दस्तावेज़

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भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) का उद्देश्य है 2025 तक हर परिवार को पक्का घर उपलब्ध कराना। यह योजना शहरी और ग्रामीण – दोनों क्षेत्रों के लिए लागू है।


योजना के दो प्रमुख भाग

PMAY-Urban (PMAY-U): शहरी झुग्गीवासियों, किराए पर रहने वालों और कच्चे मकानों में रह रहे परिवारों को पक्का घर मुहैया कराना।

PMAY-Gramin (PMAY-G): ग्रामीण इलाकों में भूमिहीन मजदूरों, गरीब किसानों, अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के लिए मकान निर्माण सहायता।

पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria):

आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए।
परिवार में किसी के नाम पर पहले से पक्का मकान नहीं होना चाहिए।
महिला स्वामित्व को प्राथमिकता दी जाती है।

आय वर्ग अनुसार पात्रता:

वर्ग वार्षिक आय सीमा
EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) ₹3 लाख तक
LIG (निम्न आय वर्ग) ₹3–6 लाख
MIG-I (मध्यम आय वर्ग-I) ₹6–12 लाख
MIG-II (मध्यम आय वर्ग-II) ₹12–18 लाख

जरूरी दस्तावेज़:

आधार कार्ड
आय प्रमाण पत्र
निवास प्रमाण पत्र
बैंक पासबुक की कॉपी
पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो
संपत्ति न होने का स्व-घोषणा पत्र
प्रॉपर्टी दस्तावेज़ (यदि प्लॉट है)
मोबाइल नंबर

ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

pmaymis.gov.in वेबसाइट खोलें।
“Citizen Assessment” सेक्शन पर क्लिक करें।
आधार नंबर से सत्यापन करें।
मांगी गई सभी जानकारियां भरें – जैसे:
नाम, लिंग, जन्मतिथि
आय स्तर
वर्तमान आवासीय स्थिति आदि
दस्तावेज़ अपलोड करें।
सबमिट करें और एप्लिकेशन स्लिप डाउनलोड करें।

ऑफलाइन आवेदन कैसे करें?

अपने नजदीकी CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) या नगर पंचायत / नगर निगम कार्यालय जाएं।

वहाँ से फॉर्म प्राप्त करें और आवश्यक दस्तावेज़ संलग्न कर जमा करें।

नोट:
इस योजना के तहत आवेदन की प्रक्रिया जारी है। पात्र परिवार समय रहते आवेदन करें ताकि 2025 तक पक्के घर का सपना पूरा हो सके।

सरपंचों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने प्रशिक्षण का हुआ आयोजन

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 रायपुर : भारत सरकार, नीति आयोग नई दिल्ली द्वारा आकांक्षी जिला/ब्लॉक कार्यक्रम के तहत् नैस्कॉम फाउण्डेशन द्वारा जनपद पंचायत कोरबा के अंतर्गत समस्त ग्राम पंचायतों के सरपंचों को डिजिटली साक्षरता कार्यक्रम के तहत् डिजिटल रूप से सशक्त बनाने व उनके दैनिक कार्य को सरल बनाने के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन जनपद पंचायत कोरवा के सभाकक्ष में किया गया। यह पहल प्रधानमंत्री डिजिटल साक्षरता अभियान के अंतर्गत आती है. जिसका उद्देश्य ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना है।


इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों के सरपंचों को डिजिटल उपकरणों और ई-गवर्नेस सेवाओं के उपयोग में सक्षम बनाना है, ताकि वे अपने दैनिक कार्यों को अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से कर सकें। नैस्कॉम फाउंडेशन की पहल, “डिजी-साक्षर“ विशेष रूप से वंचित समुदायों को डिजिटल कौशल प्रदान करने के लिए डिजाइन की गई है। इस कार्यक्रम के तहत, सरपंचों को कंप्यूटर कौशल, साइबर सुरक्षा और इंटरनेट के प्रभावी उपयोग जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन कौशाम्बी गबेल, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत कोरवा, और महेश्वरी साव, विकास विस्तार अधिकारी जनपद पंचायत कोरबा द्वारा किया गया। संस्था की तरफ से लोकेश तिवारी प्रोजेक्ट फिल्ड ऑफिसर तथा प्रोग्राम के मास्टर ट्रेनर अनुसुईया ने डिजिटल साक्षरता का प्रशिक्षण दिया। इसमें 65 ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने भाग लिया, जो स्थानीय शासन और प्रशासन में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

गवेल के द्वारा आज के युग में डिजिटल साक्षरता के महत्व एवं आवश्यकता को बताया गया। वही लोकेश ने डिजिटल प्लेटफार्म के सुरक्षित उपयोग पर जोर देते हुए, प्रशिक्षण के माध्यम से कई उपयोगी टिप्स साझा किये।

नैस्कॉम फाउंडेशन ने वर्ष 2022 में “आकांक्षी जिला कार्यक्रम“ की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य 55 आकांक्षी जिलों में डिजिटल साक्षरता, ई-गवर्नेस और कौशल विकास के माध्यम से अधिक लोगों को सशक्त बनाना है। इस पहल के तहत, डिजिटल संसाधन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो समुदायों को आवश्यक डिजिटल उपकरणों और सेवाओं तक पहुंच प्रदान करते हैं।

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