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एक साथ 10 मिसाइलें दागकर भारत ने दिखाया दम, कई देशों की बढ़ी चिंता

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 नई दिल्ली: भारत अपनी सामरिक क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ा रहा है। देश में एक नई पीढ़ी की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) विकसित करने पर काम चल रहा है, जो मौजूदा अग्नि-5 मिसाइल से अधिक उन्नत और प्रभावी मानी जा रही है।


सूत्रों के अनुसार, इस नई मिसाइल की रेंज 10,000 किलोमीटर से अधिक हो सकती है, जो भारत की वैश्विक स्ट्राइक क्षमता को और मजबूत करेगी। इसके साथ ही इसमें एक साथ कई वॉरहेड ले जाने की क्षमता (MIRV) विकसित किए जाने की संभावना है, जिससे एक ही मिसाइल से कई लक्ष्यों को साधा जा सकेगा।

एडवांस तकनीक पर फोकस

इस मिसाइल में MARV (मैनुवरेबल री-एंट्री व्हीकल) तकनीक के इस्तेमाल की योजना है। इस तकनीक के जरिए मिसाइल वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करते समय अपना रास्ता बदल सकती है, जिससे दुश्मन के रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए इसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।

इसके अलावा, मिसाइल में डिकॉय (नकली लक्ष्य) छोड़ने की क्षमता भी हो सकती है, जिससे दुश्मन की रक्षा प्रणाली भ्रमित हो सकती है।

हल्के और आधुनिक मटेरियल का उपयोग

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई मिसाइल को हल्का बनाने के लिए एडवांस कंपोजिट मटेरियल का उपयोग किया जा रहा है। इससे वजन कम होगा, ईंधन की बचत होगी और मारक क्षमता (रेंज) में वृद्धि संभव होगी।

वैश्विक सिस्टम को चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई तकनीक अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों की उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए चुनौती बन सकती है, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत तकनीकी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

रणनीतिक महत्व

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की मिसाइल के विकास से भारत की “डिटरेंस” क्षमता मजबूत होगी। लंबी दूरी से सटीक हमला, मल्टीपल वॉरहेड और एंटी-मिसाइल डिफेंस को चकमा देने की क्षमता इसे रणनीतिक रूप से अहम बनाती है।

आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में भारत का ऐतिहासिक कदम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर। भारत के आर्थिक भविष्य को नई ऊँचाइयों तक ले जाने वाला एक ऐतिहासिक क्षण सामने आया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी और सशक्त नेतृत्व में संपन्न हुई ‘Mother of All Deals’ यानी IndiaEUTradeDeal भारत को एक सशक्त आर्थिक शक्ति के रूप में वैश्विक पटल पर नए शिखर तक पहुँचाने वाली सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि यह युगांतरकारी डील भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का विश्वसनीय, सशक्त और प्रभावशाली केंद्र बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह समझौता भारत की आर्थिक विश्वसनीयता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत करेगा तथा देश को वैश्विक व्यापार की मुख्यधारा में निर्णायक भूमिका प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह ऐतिहासिक समझौता केवल व्यापारिक करार भर नहीं है, बल्कि यह भारत के करोड़ों युवाओं के सपनों को पंख देने वाला अवसर है। इससे रोजगार, निवेश, तकनीक और नवाचार के नए द्वार खुलेंगे, जिससे युवाओं की आकांक्षाओं को नई दिशा और गति मिलेगी।

उन्होंने आगे कहा कि #IndiaEUTradeDeal देश की आर्थिक आकांक्षाओं को मजबूती प्रदान करते हुए विकसित भारत के संकल्प को साकार करने का एक सुदृढ़ आधार बनेगा। यह समझौता आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को वैश्विक सहयोग के साथ जोड़ते हुए भारत को दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और समृद्धि की ओर अग्रसर करेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह भारत की सामूहिक शक्ति, नीति-निर्माण क्षमता और वैश्विक नेतृत्व का प्रतीक है, जो आने वाले वर्षों में देश को आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

ट्रकों से अफगानिस्तान तक राहत पहुँचाई, भारत ने अमेरिका को किया बेअसर

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 नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा दी गई चेतावनियों और ईरान के चाबहार पोर्ट पर छूट रद्द करने की घोषणा के बावजूद भारत ने चाबहार पोर्ट के माध्यम से अफगानिस्तान में राहत सामग्री भेजी है। इस कदम ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा पैदा कर दी है।


अफगानिस्तान में पिछले महीने आए भीषण भूकंप से प्रभावित लोगों की मदद के लिए भारत ने तीन कंटेनरों में राहत सामग्री भेजी। इस खेप में खाद्य आपूर्ति, जल शुद्धिकरण उपकरण, प्रोटीन पाउडर, टिन की चादरें, स्लीपिंग बैग, स्वच्छता किट, जल भंडारण टैंक, जनरेटर सेट, पारिवारिक टेंट, कंबल और आवश्यक दवाइयाँ शामिल हैं। यह राहत सामग्री सीधे काबुल पहुँचाई गई और अफगान अधिकारियों को सुपुर्द की गई।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह खेप भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत देने और दीर्घकालिक पुनर्निर्माण प्रयासों को समर्थन प्रदान करने के उद्देश्य से भेजी गई है। भारत की ओर से राहत सामग्री की पहली खेप 1 सितंबर को भेजी गई थी, जिसमें 1,000 परिवारों के लिए टेंट शामिल थे। इसके अलावा, 15 टन खाद्य सामग्री काबुल से कुनार प्रांत तक पहुँचाई गई थी।

इस राहत अभियान ने दिखाया कि भारत अपनी मानवीय प्रतिबद्धताओं में कटिबद्ध है और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट का इस्तेमाल करके क्षेत्रीय रसद चुनौतियों के बीच अफगानिस्तान में सहायता पहुँचाने का वैकल्पिक मार्ग तैयार किया है।

भारत का विकास कुछ लोगों को पसंद नहीं, खुद को दुनिया का बॉस समझते हैं : राजनाथ सिंह

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 भोपाल। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्था है, लेकिन कुछ लोगों को यह प्रगति रास नहीं आ रही है। उन्होंने कहा, "कुछ लोग खुद को दुनिया का बॉस समझ बैठे हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि भारत इतनी तेजी से कैसे आगे बढ़ रहा है। कई कोशिशें की जा रही हैं कि भारत में बनी चीजें विदेशों में महंगी पड़ें, ताकि लोग उन्हें खरीदें ही नहीं।


रक्षा मंत्री ने बताया कि अब भारत 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की रक्षा वस्तुओं का निर्यात कर रहा है और यह निर्यात लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "यह नए भारत की ताकत है और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का परिणाम है।"

राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का ज़िक्र करते हुए कहा कि पहलगाम में आतंकियों ने पर्यटकों को धर्म पूछकर मारा, लेकिन भारत ने आतंकियों के कर्म देखकर जवाब दिया।

वे भोपाल में BEML (भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड) की नई रेल कोच फैक्ट्री के ‘भूमि पूजन’ समारोह में बोल रहे थे। यह नेक्स्टजेन रोलिंग स्टॉक फैक्ट्री लगभग 1,800 करोड़ रुपये के निवेश से बनाई जाएगी और दो साल में तैयार होगी। यहां न केवल रेल के डिब्बे, बल्कि रेलवे के अन्य उत्पाद भी तैयार होंगे, जिससे प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

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