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शुभेंदु की शपथ में PM मोदी ने जिन बुजुर्ग नेता के छुए पैर, जानिए कौन हैं माखनलाल सरकार

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 नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता माखनलाल सरकार का सम्मान कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने मंच पर उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया, उन्हें शॉल भेंट किया और भावुक अंदाज में उनसे बातचीत की। यह दृश्य समारोह का खास आकर्षण बन गया।


कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित इस समारोह में भाजपा की पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया गया। राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार बनने के बाद आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

कौन हैं माखनलाल सरकार?

माखनलाल सरकार पश्चिम बंगाल के वरिष्ठतम भाजपा कार्यकर्ताओं में गिने जाते हैं। स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रवादी आंदोलन से उनका गहरा जुड़ाव रहा है। वर्ष 1952 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में कश्मीर में भारतीय तिरंगा फहराने के आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था।

करीब 98 वर्ष की आयु में भी माखनलाल सरकार भाजपा और राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच सम्मानित नाम माने जाते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी का यह सम्मान भाजपा की वैचारिक विरासत और पुराने कार्यकर्ताओं के योगदान को सम्मान देने का प्रतीक माना जा रहा है।

भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद शपथ

शनिवार को आयोजित समारोह में शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही वे राज्य में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बन गए। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह समेत NDA शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का किया लोकार्पण

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रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज छत्तीसगढ़ की रजत जयंती समारोह के अवसर पर शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक सह संग्रहालय का लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को संग्रहालय को उत्कृष्टता के साथ मूर्त रूप देने के प्रयासों के लिए बधाई और शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि संग्रहालय में छत्तीसगढ़ के वीर सेनानियों का देश के लिए योगदान जीवंत रूप में प्रदर्शित हो रहा है। यह आने वाली पीढ़ियों को हमारे वीर नायकों के शौर्य और बलिदान से परिचित कराता रहेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय वर्गों की ऐतिहासिक गौरवगाथा, शौर्य और बलिदान का प्रतीक यह संग्रहालय-सह-स्मारक अब जनसमर्पित हो रहा है। यह संग्रहालय नई पीढ़ियों को हमारे पुरखों की वीरगाथाओं को अविस्मरणीय बनाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने संग्रहालय की विशेषताओं की जानकारी दी। बोरा ने बताया कि शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक सह संग्रहालय 50 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया है। यहां 14 गैलरियों में अंग्रेजी हुकूमत काल के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की लगभग 650 मूर्तियाँ स्थापित की गई हैं। जनजातीय विद्रोहों को आसानी से समझाने के लिए डिजिटल माध्यमों की भी व्यवस्था की गई है।

परिसर में शहीद वीर नारायण सिंह जी की प्रतिमा का अनावरण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संग्रहालय परिसर में शहीद वीर नारायण सिंह जी की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर ‘ई-पुस्तिका आदि शौर्य’ का विमोचन भी किया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने शहीद वीर नारायण सिंह जी के वंशजों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। उन्होंने संग्रहालय परिसर में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण भी किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘जशप्योर ब्रांड’ की कलाकृतियों की सराहना की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जशपुर जिले की महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित ‘जशप्योर ब्रांड’ के अंतर्गत तैयार किए गए उत्पादों — महुआ लड्डू, महुआ कैंडी, महुआ टी, महुआ हेक्टर संग्रह आदि का अवलोकन किया और उनकी गुणवत्ता की सराहना की। उन्होंने जशपुर की पारंपरिक हस्तकला ‘छिंद कांसा टोकरी’ (हाथ से बनी बांस/छिंद की टोकरियाँ) के बारे में जानकारी ली और स्थानीय संसाधनों से बनी इस कलाकृति की प्रशंसा की।

इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम, राज्य के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास मंत्री रामविचार नेताम, केंद्रीय राज्य मंत्री (जनजातीय कार्य) दुर्गा दास उइके, केंद्रीय सचिव (जनजातीय कार्य मंत्रालय) रंजना चोपड़ा, प्रमुख सचिव (अनुसूचित जनजाति) सोनमणि बोरा, निदेशक (केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय) दीपाली मसीरकर, आयुक्त डॉ. सारांश मित्तर, टीआरटीआई संचालक हिना अनिमेष नेताम, शहीद वीर नारायण सिंह जी के वंशज तथा विभिन्न राज्यों के जनजातीय कार्य एवं अनुसंधान संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

आदिवासी गौरव, शौर्य एवं बलिदान का प्रतीक है यह संग्रहालय

नवा रायपुर अटल नगर में स्थापित यह भव्य और आकर्षक संग्रहालय आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की शौर्यगाथा को सजीव रूप में प्रस्तुत करता है। यह संग्रहालय इस संदेश को जीवंत करता है कि अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध विद्रोह करने का साहस सबसे बड़ी शक्ति है। 

यह प्रदेश का पहला संग्रहालय है, जो विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के शौर्य और बलिदान को समर्पित है। यह स्मारक-सह-संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को अपने पुरखों के संघर्षों और बलिदानों की स्मृति से जोड़े रखेगा।

50 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित यह संग्रहालय 14 गैलरियों में विभाजित है, जिनमें अंग्रेजी शासन काल में हुए विभिन्न आदिवासी विद्रोहों के 650 से अधिक मूर्तिशिल्प प्रदर्शित किए गए हैं। जनजातीय विद्रोहों को सहज रूप में समझाने के लिए यहां डिजिटल माध्यमों का भी प्रयोग किया गया है।

यह संग्रहालय केवल आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि सभी वर्गों के लिए प्रेरणादायी है। यह देश-विदेश के आगंतुकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपरा, शौर्य और संस्कृति से परिचित कराएगा।

आधुनिक तकनीक से सुसज्जित संग्रहालय

यह स्मारक-सह-संग्रहालय छत्तीसगढ़ के आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के इतिहास पर गहन अध्ययन और शोध के बाद VFX टेक्नोलॉजी और प्रोजेक्शन वर्क के माध्यम से तैयार किया गया है।

आगंतुकों को प्रत्येक दीर्घा में आदिवासी विद्रोह का विवरण डिजिटल बोर्ड पर उपलब्ध रहेगा। वे संग्रहालय में प्रदर्शित मूर्तियों और घटनाओं को जीवंत रूप में अनुभव कर सकेंगे। प्रत्येक दीर्घा के सामने लगे स्कैनर से मोबाइल द्वारा कोड स्कैन कर संबंधित जानकारी तुरंत प्राप्त की जा सकती है।

16 गैलरियों में जीवंत हुआ इतिहास

संग्रहालय में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान छत्तीसगढ़ में हुए प्रमुख आदिवासी विद्रोहों — हल्बा विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भोपालपट्टनम विद्रोह, परलकोट विद्रोह, तारापुर विद्रोह, लिंगागिरी विद्रोह, कोई विद्रोह, मेरिया विद्रोह, मुरिया विद्रोह, रानी चौरिस विद्रोह, भूमकाल विद्रोह, सोनाखान विद्रोह, झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह — के वीर नायकों के संघर्ष और शौर्य के दृश्य 14 गैलरियों में सजीव रूप से प्रदर्शित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त जंगल सत्याग्रह और झंडा सत्याग्रह पर दो अलग-अलग गैलरियाँ भी निर्मित की गई हैं।





लखनऊ में डीआरडीओ-एमएसएमई कॉनक्लेव, रक्षा अनुसंधान एवं उत्पादन में सहयोग पर जोर

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लखनऊ, डीआरडीओ के डिफेन्स टेक्नोलॉजी एंड टेस्ट सेंटर (DTTC), अमौसी कैम्पस में शनिवार को एमएसएमई और स्टार्ट-अप्स के साथ सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से कॉनक्लेव आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मकसद उत्तर प्रदेश डिफेन्स इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को नई गति देना था।

100 से अधिक प्रतिभागियों ने कौशल विकास, अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए फंडिंग, तकनीकी परामर्श और तकनीक हस्तांतरण जैसे विषयों पर चर्चा की।

डीआरडीओ अध्यक्ष ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि DTTC, रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की परिकल्पना का परिणाम है और आज उद्योगों के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। उन्होंने एमएसएमई को भरोसा दिलाया कि डीआरडीओ हर संभव सहयोग करेगा ताकि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बन सके।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ और एमएसएमई को कॉनक्लेव के आयोजन के लिए बधाई दी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विज़न को साकार करने में एमएसएमई की भूमिका को सराहा।

कार्यक्रम में डीजी (नेवल सिस्टम्स एंड मैटेरियल्स) डॉ. आरवी हरा प्रसाद, डीजी (टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट) डॉ. एलसी मंगल और डीजी (ह्यूमन रिसोर्सेस) डॉ. मयंक द्विवेदी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद में डायल 112 के अंतर्गत जनरक्षक परियोजनाओं का किया उद्घाटन

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अहमदाबाद- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज अहमदाबाद, गुजरात में डायल 112 के अंतर्गत शुरू किए जा रहे जनरक्षक प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राज्य सरकार के गृह विभाग ने गुजरात की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए '112 जनरक्षक' परियोजना के रूप में ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि '112 जनरक्षक' परियोजना के उद्घाटन के साथ ही गुजरात पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन द्वारा 217 करोड़ रुपये की लागत से बने नए आवास और कार्यालयों का उद्घाटन किया गया और 1000 पुलिस वाहनों के बेड़े को भी हरी झंडी दिखाई गई। शाह ने कहा कि उनके लिए विशेष महत्व की बात यह है कि मानसा थाने को बीआईएस प्रमाणन प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि उनका जन्म मानसा में हुआ, वे वहीं पले-बढ़े और वहीं से वे गुजरात और देश की राजनीति में योगदान देने में सक्षम बने, इसलिए उनके लिए यह खुशी की बात है कि मानसा थाने को बीआईएस प्रमाणन मिला है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि '112' परियोजना देश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आपात स्थिति में समय पर सहायता प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी पहल है। उन्होंने खुशी व्यक्त की कि आज गुजरात 'डायल 112 जनरक्षक' के नक्शे पर अपनी जगह दर्ज कर रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक अलग-अलग टोल-फ्री नंबर जैसे पुलिस के लिए 100, एम्बुलेंस के लिए 108, फायर सर्विस के लिए 101, महिला हेल्पलाइन के लिए 181, चाइल्ड हेल्पलाइन के लिए 1098, और आपदा प्रबंधन के लिए 1070 व 1077 जैसी उलझनों से लोग भ्रमित होते थे। लेकिन अब लोग सिर्फ एक नंबर 112 डायल करके आपदा प्रबंधन, चाइल्ड हेल्पलाइन, महिला हेल्पलाइन, फायर सर्विस, एम्बुलेंस और पुलिस सहायता जैसी किसी भी सुरक्षा सेवा को बहुत कम समय में प्राप्त कर सकेंगे।

अमित शाह ने कहा कि सभी प्रकार की सेवाओं का संचालन अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर से चलने वाले एक उच्च स्तरीय कंट्रोल रूम से किया जाएगा और जीपीएस युक्त वाहन एक वैज्ञानिक प्रणाली के तहत काम करेंगे। उन्होंने कहा कि इन वाहनों में 108 एम्बुलेंस का बड़ा बेड़ा शामिल है, जो कॉल करने वाले व्यक्ति का स्थान पता करेगा और निकटतम पुलिस, एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड वाहन को जानकारी भेजेगा। श्री शाह ने कहा कि यह गुजरात सरकार द्वारा न्यू एज स्मार्ट पुलिसिंग सिस्टम की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना अहमदाबाद में स्टेट इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर के माध्यम से संचालित होगी, जिसे केंद्रीय रूप से प्रबंधित किया जाएगा और 24x7 चलाया जाएगा। 150 सीटों की क्षमता वाला यह कॉल सेंटर हर पल सतर्क रहेगा और एकीकृत प्रणाली के माध्यम से सभी सेवाओं से जुड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि डायल 112 जनरक्षक पीसीआर वैन का बेड़ा, जिसमें कुल 1000 वाहन शामिल हैं, आज से ही जनता की सेवा में लगाया जाएगा। गुजरात सरकार इस परियोजना के संचालन पर प्रति वर्ष 92 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इन वाहनों में लाइट बार, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, एमडीटी वायरलेस सेट, लोकेशन ट्रैकर जैसी सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इनके प्रभावी उपयोग के लिए प्रशिक्षित स्टाफ की भी व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूरे भारत में स्मार्ट पुलिसिंग का आह्वान, गुजरात ने इस उन्नत तकनीक के साथ उत्कृष्ट रूप से लागू किया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि गुजरात पुलिस हाउसिंग बोर्ड ने पुलिस, होमगार्ड और जेल कर्मचारियों के कार्य और निवास के लिए 217 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न परियोजनाओं का निर्माण किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में, इन इमारतों में उपलब्ध बेहतर सुविधाओं के साथ, पुलिसकर्मी, होमगार्ड जवान और जेल कर्मचारी गुजरात की जनता की और अधिक प्रभावी ढंग से सेवा कर सकेंगे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि गुजरात देश के सबसे संवेदनशील सीमा राज्यों में से एक है। देश की उत्तरी सीमा से लेकर गुजरात तक पूरा सीमावर्ती क्षेत्र कई दृष्टिकोणों से संवेदनशील है। चाहे गुजरात का समुद्र तट हो, कच्छ की सीमा हो या बनासकांठा की सीमा – सभी क्षेत्रों में सुरक्षा का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी के शासनकाल में गुजरात की सीमाओं से देश की सुरक्षा पर सवाल खड़े करने वाली कई घटनाएं हुईं। लेकिन उनकी पार्टी के सत्ता में आने के बाद और खासकर जबसे नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री बने, गुजरात सरकार ने राज्य की सीमाओं को दुश्मनों के लिए अभेद्य बनाने का काम किया है।

 अमित शाह ने कहा कि गुजरात इस बात का सर्वोत्तम उदाहरण है कि यदि सुशासन से प्रेरित नेतृत्व शासन की बागडोर संभाले तो कितना परिवर्तन संभव है। उन्होंने कहा कि आज गुजरात ने न केवल सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि आतंकवाद, मादक पदार्थ, साइबर अपराध जैसे विभिन्न अपराधों पर भी प्रभावी रोक लगाई है। उन्होंने कहा कि मोदी जी द्वारा गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में रखी गई राह को वर्तमान मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल और गृह राज्य मंत्री श्री हर्ष सांघवी ने आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकारों ने गुजरात को देश का सबसे सुरक्षित राज्य बनाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 11 साल के कार्यकाल में, यह न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में स्थापित हो गया है कि भारत की सेना और उसकी सीमाओं से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। उन्होंने याद दिलाया कि विपक्षी पार्टी के शासनकाल में देश के विभिन्न हिस्सों में बार-बार बम धमाके होते थे और केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी जाती थी। राज्य सरकारों द्वारा कुछ कार्रवाई को छोड़कर कोई और कदम नहीं उठाया गया। लेकिन मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद, जब भी पाकिस्तान ने उरी, पुलवामा और पहलगाम जैसे बड़े हमले किए, मोदी सरकार ने हर बार पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पहली बार सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए, दूसरी बार एयर स्ट्राइक से और जब तब भी सुधार नहीं हुआ, तो तीसरी बार आतंकवादियों के ठिकानों को ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान की सीमा से 100 किलोमीटर अंदर जाकर नष्ट कर दिया गया। श्री शाह ने कहा कि भारत ने दुनिया को कड़ा संदेश दिया है कि वह आत्मरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और अपने नागरिकों और सीमाओं की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंक घटनाओं के मास्टरमाइंड्स को सबक सिखाया और ऑपरेशन महादेव के जरिए पहलगाम हमले को अंजाम देने वाले सभी तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया गया।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में देश के प्रधानमंत्री और गुजरात के गौरव पुत्र श्री नरेंद्र मोदी जी ने 'आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता' की नीति को न केवल सैद्धांतिक रूप से बल्कि वास्तविकता में भी लागू किया है। उन्होंने कहा कि चाहे देश का उत्तर-पूर्वी क्षेत्र हो, नक्सल प्रभावित क्षेत्र हो या कश्मीर – मोदी सरकार ने इन सभी तीन हॉटस्पॉट्स में आतंकवादियों और सशस्त्र समूहों को सबक सिखाया है। उत्तर-पूर्व में 10,000 से अधिक उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने एक बार फिर विश्वास व्यक्त किया कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद पूरी तरह देश से समाप्त कर दिया जाएगा – यही मोदी सरकार का संकल्प है।

जनरक्षक प्रोजेक्ट्स के उद्घाटन समारोह से पहले केंद्रीय गृह मंत्री ने अहमदाबाद में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लिया। उन्होंने चांदलोडिया वार्ड में अर्बन हेल्थ सेंटर का उद्घाटन किया और रानीप, स्टेडियम और घाटलोडिया वार्ड में वृक्षारोपण किया। इसके अलावा, केंद्रीय गृह मंत्री ने अहमदाबाद शहर की कुलदेवी श्री भद्रकाली माताजी के प्राचीन मंदिर में दर्शन-पूजन किया और टोरेंट ग्रुप-यूएनएम फाउंडेशन द्वारा पुनर्विकसित 'सरदार बाग' का उद्घाटन किया।


स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया बस्तर में नए सबेरे का स्वागत — अब आतंक नहीं, खेलों से पहचान

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रायपुर- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ के बस्तर का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक समय था जब बस्तर का नाम सुनते ही नक्सलवाद और हिंसा की याद आती थी, लेकिन आज यह तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गर्व के साथ कहा कि आज बस्तर के नौजवान बंदूक़ पकड़ने की जगह खेलों के मैदान में उतर रहे हैं। बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और उत्साह का जीवंत प्रतीक बन चुके हैं। उन्होंने इस ऐतिहासिक बदलाव को सुरक्षा, विकास और जनसहभागिता के संयुक्त प्रयासों का परिणाम बताया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कभी देश के अनेक हिस्सों को नक्सलवाद की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता था। हिंसा और भय के माहौल ने दशकों तक विकास की गति को जकड़ रखा था, जिससे प्रगति के रास्ते थम से गए थे। उन्होंने कहा कि अब यह स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है — नक्सलवाद आज देश में केवल कुछ ही जिलों तक सीमित रह गया है। प्रधानमंत्री ने कहा  कि पिछले 11 वर्षों में नक्सलवाद 125 से अधिक जिलों से घटकर मात्र 20 जिलों तक सीमित हो गया है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर में खेलकूद, शिक्षा, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर की यह नई पहचान आने वाली पीढ़ियों के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत बनेगी, और यह क्षेत्र अब शांति, प्रगति और गौरव की राह पर निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।


बिल्हा ने देशभर में बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान –स्वच्छता में देशभर में प्रथम, ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने की सराहना

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रायपुर- छत्तीसगढ़ की नगर पंचायत बिल्हा ने स्वच्छता के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए स्वच्छता सर्वेक्षण 2024–25 में 20,000 से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में पूरे भारतवर्ष में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इस उपलब्धि के लिए दिनांक 17 जुलाई 2025 को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित भव्य पुरस्कार समारोह में भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा बिल्हा नगर पंचायत को सम्मानित किया गया था। आज इस गौरवशाली उपलब्धि की प्रतिध्वनि ‘मन की बात’ के राष्ट्रीय मंच तक पहुँची, जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 124वें संस्करण में बिल्हा नगर पंचायत की महिलाओं द्वारा किए गए नवाचार और श्रम का उल्लेख करते हुए सराहना की।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बिल्हा की महिलाओं को वेस्ट मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी गई और उन्होंने मिलकर शहर की तस्वीर बदल डाली। यह उल्लेख पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है, जिसने स्वच्छता को न केवल शासकीय योजना के रूप में, बल्कि सामुदायिक आंदोलन के रूप में अपनाया है।

नगर पंचायत बिल्हा की आबादी लगभग 15,000 है, जहाँ 28 स्वच्छता दीदियाँ कार्यरत हैं। ये दीदियाँ नगर के 15 वार्डों में घर-घर जाकर ई-रिक्शा के माध्यम से कचरा संग्रहण का कार्य करती हैं और फिर कचरे को SLRM सेंटर में ले जाकर गीला और सूखा कचरा पृथक करती हैं। गीले कचरे से खाद बनाई जाती है और सूखे कचरे को बेचकर ये महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं। इसके अतिरिक्त बिल्हा नगर में 10 विशेष स्वच्छता कमांडो भी नियुक्त किए गए हैं जो ट्रैक्टर और ऑटो टिपर के माध्यम से पूरे शहर में घूमकर कचरा सफाई और जन-जागरूकता का कार्य कर रहे हैं। बिल्हा नगर पंचायत द्वारा जन-जागरूकता अभियान, मुनादी, और घरों-दुकानों से सीधे कचरा संग्रहण जैसे कदमों से आज नगरवासी कचरे को पृथक कर ई-रिक्शा में देने के लिए प्रेरित हो चुके हैं। मुक्तिधाम, तालाब, गार्डन, सामुदायिक भवन आदि में सामूहिक सफाई अभियान भी समय-समय पर चलाए जाते हैं। इस सफलता का श्रेय सभी सफाई कर्मचारियों, स्वच्छता दीदियों, नगर पंचायत के अधिकारियों, कर्मचारियों और सकारात्मक सोच वाले जनप्रतिनिधियों को जाता है, जो निरंतर निरीक्षण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि भारत में 20,000 से कम आबादी वाले 2000 से अधिक नगरीय निकाय हैं। भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय द्वारा स्वतंत्र एजेंसियों के माध्यम से सफाई व्यवस्था का परीक्षण, जिसमें डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन, रोड स्विपिंग, नाइट स्विपिंग, कचरा निपटान, शौचालयों और पार्कों की सफाई व्यवस्था सहित जनता से फीडबैक शामिल था, उसी के आधार पर यह सम्मान मिला है।

इस अवसर पर विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, नगर पंचायत बिल्हा की अध्यक्ष श्रीमती वंदना जेन्ड्रे, मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्री प्रवीण सिंह गहलोत, उपाध्यक्ष श्री सतीश शर्मा, पीआईसी सदस्य श्री मोहन ढोरिया, तत्कालीन उप अभियंता श्री नरेंद्र दुबे, सफाई दरोगा श्री यशवंत सिंह, स्वच्छता सुपरवाइजर श्री राकेश डागोर, स्वच्छता दीदी श्रीमती पूजा राठौर एवं पीआईयू श्री अंकित दुबे विशेष रूप से उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि बिल्हा नगर पंचायत ने स्वच्छता के क्षेत्र में जो कीर्तिमान स्थापित किया है, वह सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। भारत सरकार के स्वच्छता सर्वेक्षण 2024–25 में देशभर के 20,000 से कम आबादी वाले शहरों में प्रथम स्थान प्राप्त कर बिल्हा ने न केवल प्रदेश का मान बढ़ाया है, बल्कि यह सिद्ध किया है कि संकल्प, सहभागिता और सेवा भाव से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'मन की बात' कार्यक्रम में बिल्हा की महिलाओं और उनके स्वच्छता नवाचार की प्रशंसा करना इस उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर ऐतिहासिक बना देता है। यह समस्त छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण है।

उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि बिल्हा नगर पंचायत ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2024–25 में पूरे भारत में प्रथम स्थान प्राप्त कर छत्तीसगढ़ का मान पूरे देश में बढ़ाया है। यह सफलता हमारे नगरीय निकायों की प्रतिबद्धता, कार्यशैली और जनभागीदारी का जीवंत उदाहरण है। यह उपलब्धि प्रदेश के अन्य नगर निकायों को भी नई प्रेरणा देगी और हम सब मिलकर स्वच्छता में छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी राज्यों में बनाए रखने के लिए निरंतर कार्य करेंगे।


छत्तीसगढ़ अंजोर विज़न@2047 जनता को समर्पित-मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर,  छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में आज का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने “छत्तीसगढ़ अंजोर विज़न@2047” दस्तावेज को प्रदेश की जनता को समर्पित किया। नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित भव्य कार्यक्रम में राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यगण, नीति आयोग भारत सरकार, विषय विशेषज्ञ, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दस्तावेज केवल शब्दों का संकलन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का एक ठोस संकल्प और स्पष्ट दिशा है। उन्होंने कहा कि यह विज़न प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत@2047 के संकल्प से प्रेरित है और छत्तीसगढ़ को भारत के अग्रणी एवं विकसित राज्य में शामिल करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां सोच बड़ी हो, दिशा स्पष्ट हो और जन-जन की भागीदारी हो, वहाँ विकास तय होता है। आज हम अपने राज्य का विज़न डाक्यूमेंट - छत्तीसगढ़ अंजोर विज़न@2047 प्रदेशवासियों को समर्पित कर रहे हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि छत्तीसगढ़ उन चुनिंदा राज्यों में है जिन्होंने यह विज़न तैयार किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने स्वयं पिछले माह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की अध्यक्षता में हुई नीति आयोग की बैठक में इस विज़न की जानकारी दी, जिसे विशेष रूप से सराहा गया।

उन्होंने कहा कि श्रद्धेय पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने हमारे राज्य की नींव रखी थी, और प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में यह आगे बढ़ा है। ऐसे ऐतिहासिक अवसर पर, जब हम राज्य की स्थापना के रजत जयंती और अटल निर्माण वर्ष मना रहे हैं, यह विज़न जनता को समर्पित किया जाना अत्यंत सार्थक है। उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज जनभागीदारी का प्रतीक है, जिसमें प्रदेश के तीन करोड़ लोगों के सपने और संकल्प समाहित हैं। इसे तैयार करने में न केवल विशेषज्ञों और विभागों का सहयोग रहा, बल्कि वर्किंग ग्रुप्स, संभाग स्तरीय जनसंवाद और मोर सपना मोर विकसित छत्तीसगढ़ पोर्टल के माध्यम से जनता के सुझाव भी शामिल किए गए।

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा-यह केवल दस्तावेज नहीं, संकल्प है, दिशा है, विकसित छत्तीसगढ़ की नींव है

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में जब भारत वैश्विक आशाओं का केंद्र बन चुका है, तब छत्तीसगढ़ भी विकसित भारत की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाने को तैयार है। हम आतंकवाद और नक्सलवाद के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति के साथ विकास के नए कीर्तिमान रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऊँचा लक्ष्य रखना और मेहनत करना हमने मोदी जी से सीखा है। पहले कहते थे मोदी हैं तो मुमकिन है, अब कहते हैं मोदी हैं तो निश्चित है - 2047 तक का लक्ष्य अब हमारी साझा दिशा है।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि विकसित भारत की भव्य इमारत को ऊर्जावान बनाने में छत्तीसगढ़ पावर हाउस की भूमिका निभाएगा। हमारा स्टील, इस लक्ष्य को फौलादी बनाएगा। उन्होंने बताया कि स्टील उत्पादन को वर्ष 2030 तक 28 मिलियन टन से बढ़ाकर 45 मिलियन टन किया जाएगा, और यह गर्व का विषय है कि जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बने देश के सबसे ऊंचे ब्रिज में छत्तीसगढ़ के स्टील का उपयोग हुआ है। इसी तरह, कोयला उत्पादन को 207 मिलियन टन से बढ़ाकर 437 मिलियन टन, विद्युत उत्पादन को वर्तमान 30 हजार मेगावाट से देश में शीर्ष स्थान तक पहुँचाया जाएगा। आयरन ओर उत्पादन को 46 से बढ़ाकर 100 मिलियन टन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है, जहां लिथियम खनिज ब्लॉक की सफल नीलामी हुई है।मुख्यमंत्री ने मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को संसाधनों के प्रबंधन का सबसे अहम आधार बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में वर्ष 1853 से 2014 तक केवल 1100 रूट किलोमीटर रेलमार्ग बने थे, जिन्हें वर्ष 2030 तक दोगुना किया जाएगा। बोधघाट परियोजना जैसी योजनाओं से सिंचाई और बिजली उत्पादन को नया विस्तार मिलेगा। उन्होंने बताया कि यह विज़न स्पष्ट कार्ययोजना के साथ तैयार किया गया है, जिसमें 2030 तक अल्पकालिक, 2035 तक मध्यकालिक और वर्ष 2047 तक दीर्घकालिक लक्ष्य रखे गए हैं। 

राज्य के 13 प्रमुख क्षेत्रों में 10 मिशनों के माध्यम से संतुलित विकास किया जाएगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अंजोर विज़न @2047 के माध्यम से राज्य के 13 प्रमुख क्षेत्रों में 10 मिशनों के माध्यम से आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को संतुलित रूप से आगे बढ़ाया जाएगा, इनमें  कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, पर्यटन, संस्कृति, लॉजिस्टिक्स और आईटी से लेकर जैविक खेती और शिक्षा तक का समावेश है। रायपुर की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए लॉजिस्टिक्स नीति तैयार की गई है जो ई-कॉमर्स को गति देगी।

राज्य की जीडीपी 5 लाख करोड़ रूपए से बढ़ाकर 75 लाख करोड़ करने का लक्ष्य

उन्होंने बताया कि इस विजन के माध्यम से राज्य की जीडीपी को 5 लाख करोड़ रूपए से वर्ष 2030 तक 11 लाख करोड़ और वर्ष 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपए तक करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए कृषि उन्नति मिशन, जैविक खेती, निर्यात आधारित संभावनाएं और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएं प्रभावी होंगी। वर्ष 2047 तक किसानों की आय में 10 गुना से अधिक वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है।

स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन प्रत्याशा के क्षेत्र में भी ठोस योजनाएँ बनाई गई हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत 87 प्रतिशत लोग पहले ही कवर हो चुके हैं, लक्ष्य 100 प्रतिशत का है। नवा रायपुर में मेडीसिटी, बस्तर-सरगुजा में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल तथा राज्य में कई मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। युक्तियुक्तकरण के बाद अब कोई भी विद्यालय शिक्षकविहीन नहीं है। 5 हजार नई शिक्षक भर्ती, 1 हजार पीएमश्री स्कूल, 36 आदर्श कॉलेज और ग्लोबल स्किल यूनिवर्सिटी की स्थापना पर काम हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बेरोजगारी दर 2.7 प्रतिशत है, जिसे 2047 तक 1 प्रतिशत से कम लाने का लक्ष्य है। पैन-आईआईटी संस्थानों के सहयोग से स्किल डेवलपमेंट को नई दिशा दी जा रही है। आईटी सेक्टर में सेमीकंडक्टर प्लांट और एआई डाटा सेंटर पार्क विकसित किए जा रहे हैं। पिछले डेढ़ वर्षों में 350 से अधिक नीतिगत और प्रशासनिक सुधार किए गए हैं और 6.75 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 से उद्योगों को एक क्लिक पर मंजूरी

उन्होंने बताया कि सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 के माध्यम से उद्योगों को एक क्लिक पर मंजूरी दी जा रही है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर बस्तर और सरगुजा में होम-स्टे व ईको टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में 2 करोड़ पर्यटक राज्य में आते हैं, जिन्हें वर्ष 2047 तक 10 करोड़ तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।

44 प्रतिशत वन क्षेत्र देश के ऑक्सीजन हब बनेंगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से आधार, राशन कार्ड, बैंकिंग जैसी सेवाएं गाँवों तक पहुँचाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण-अनुकूल विकास ही टिकाऊ है और प्रधानमंत्री जी के वर्ष 2070 तक ‘नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन’ लक्ष्य को प्राप्त करने में छत्तीसगढ़ अग्रणी भूमिका निभाएगा। राज्य के 44 प्रतिशत वन क्षेत्र देश के लिए ऑक्सीजन हब बनेंगे। बस्तर के कलागुड़ा में प्लास्टिक कचरे से बनाई गई सड़क जैसे नवाचार सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने खनन को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए कहा कि राज्य में पिछले 45 वर्षों में केवल 28,700 हेक्टेयर वनभूमि एफसीए के तहत परिवर्तित हुई है, और इसमें भी वास्तविक कटाई केवल   0.11 प्रतिशत क्षेत्र में हुई है। वहीं, पिछले वर्षों में 68,300 हेक्टेयर वन क्षेत्र की वृद्धि दर्ज की गई है। खनन से राज्य की जीडीपी का 9.38 प्रतिशत हिस्सा आता है और 2 लाख प्रत्यक्ष व 20 लाख परोक्ष रोजगार सृजित होते हैं।

मुख्यमंत्री ने सीएसआर और डीएमएफ के जरिए हुए विकास कार्यों को ‘नया उजाला’ बताया और कहा कि केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को सम्मानित किया गया है। उन्होंने बताया कि नागरिक सहभागिता पोर्टल भी तैयार किया जा रहा है ताकि योजनाओं में जनता की भागीदारी बढ़े।

जब रास्ता स्पष्ट हो, संकल्प दृढ़ हो और मेहनत हो तब कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता

मुख्यमंत्री ने राज्य नीति आयोग और अधिकारियों को इस ऐतिहासिक विज़न डाक्यूमेंट को तैयार करने के लिए बधाई देते हुए कहा कि जब रास्ता स्पष्ट हो, संकल्प दृढ़ हो और मेहनत हो तब कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे इस विज़न को साझा सपना मानकर सहभागी बनें और वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ की संकल्पना को साकार करें।

अल्पकालिक से दीर्घकालिक लक्ष्य तक, आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन की स्पष्ट कार्ययोजना तैयार: वित्त एवं योजना मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी

विज़न दस्तावेज़ की संरचना और उसकी रणनीतिक विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए छत्तीसगढ़ राज्य के वित्त एवं योजना मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ अंजोर विज़न @2047 राज्य के नागरिकों की सुख-सुविधा, समावेशी आर्थिक विकास, सुशासन और निवेश प्रोत्साहन जैसे क्षेत्रों में एक बहुआयामी रणनीति प्रस्तुत करता है। उन्होंने बताया कि इस दस्तावेज़ में अल्पकालिक (2030 तक), मध्यकालिक (2035 तक) और दीर्घकालिक (2047 तक) लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जो राज्य के सर्वांगीण विकास की दिशा को सुनिश्चित करते हैं।

वित्त मंत्री ने कहा कि यह दृष्टिपत्र 13 प्रमुख सामाजिक-आर्थिक थीम्स पर केंद्रित है, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, अधोसंरचना, लॉजिस्टिक्स, कृषि, वनोपज, निवेश, कौशल विकास, सूचना प्रौद्योगिकी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पर्यटन, संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन सभी विषयों के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन, मूल्यांकन और अनुश्रवण के लिए रणनीति, मापनीय इण्डिकेटर्स और 200 से अधिक नीतिगत, संस्थागत और अधोसंरचना संबंधी पहलें प्रस्तावित की गई हैं।

उन्होंने बताया कि अंजोर विज़न के माध्यम से राज्य की अर्थव्यवस्था के आकार को आगामी पाँच वर्षों में दोगुना करने और वर्ष 2047 तक जीडीपी में 15 गुना तथा प्रति व्यक्ति आय में 10 गुना वृद्धि करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को उद्योग, सेवा, स्वास्थ्य, शिक्षा और अधोसंरचना में निवेश के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें 5,000 से अधिक स्मार्ट विलेज और 10 से अधिक स्मार्ट सिटीज़ के निर्माण का खाका तय किया गया है, साथ ही छत्तीसगढ़ को देश का एक अग्रणी आईटी हब बनाया जाएगा।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सेवा क्षेत्र में नवाचार और अवसरों को प्रोत्साहन देना, पर्यटन और आईटी सेक्टर में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय नेतृत्व प्रदान करना, तथा राज्य की अनुकूल भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाते हुए लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को मजबूती देना, विज़न की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इन प्रयासों से राज्य में रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे और आर्थिक संरचना में व्यापक परिवर्तन आएगा।

वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि इस विज़न डाक्यूमेंट का निर्माण राज्य नीति आयोग द्वारा विभागों के सहयोग और व्यापक जनभागीदारी से किया गया है। युवाओं, महिलाओं, कृषकों और विभिन्न हितधारकों से संवाद के माध्यम से इस दस्तावेज़ में उनकी आकांक्षाओं को समाहित किया गया है। देश की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत को भी यथोचित सम्मान देते हुए यह दस्तावेज़ तैयार किया गया है।

वित्त मंत्री ने अंत में यह विश्वास व्यक्त किया कि यह विज़न दस्तावेज़ केवल दिशादर्शक ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य में रूपांतरित करने की एक ठोस रणनीतिक रूपरेखा भी है, जिसमें हर नागरिक की भूमिका अहम होगी और जिसका मूल्यांकन निरंतर प्रगति सूचकों के माध्यम से किया जा सकेगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने की। नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, मंत्री सर्व श्री रामविचार नेताम, दयालदास बघेल, केदार कश्यप, श्याम बिहारी जायसवाल, श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सासंद श्री बृजमोहन अग्रवाल, नीति आयोग के सीईओ श्री बी.वी आर. सुब्रह्मण्यम, मुख्य सचिव एवं राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री अमिताभ जैन विशिष्ठ अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इसके अलावा कार्यक्रम में राज्य के पद्म पुरस्कार से सम्मानित अतिथिगण, विधायक गण, जनप्रतिनिधि गण, निगम, मंडल, आयोग के अध्यक्षगण, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री मनोज पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी दयानंद, श्री राहुल भगत, राज्य नीति आयोग के सदस्य श्री के सुब्रह्मण्यम, योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।


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