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“नक्सलवाद खत्म नहीं होने देना चाहते थे” - साव का बघेल पर सीधा हमला

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 रायपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे कभी नहीं चाहते थे कि राज्य से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो।


मीडिया से बातचीत में साव ने कहा कि बघेल लगातार बस्तर से सुरक्षाबलों की वापसी की बात करते हैं, जबकि हालात सामान्य होने पर सुरक्षा बलों की वापसी स्वतः हो जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान पुलिस और सुरक्षाबलों के हाथ बांध दिए गए थे, जिससे नक्सलियों का मनोबल बढ़ा।

सरेंडर पॉलिसी का असर

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नक्सलवाद के खिलाफ व्यापक रणनीति के तहत अभियान चला रही है। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए बेहतर पुनर्वास की व्यवस्था की गई है और प्रभावित क्षेत्रों में आम लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है।
साव के अनुसार, इसी नीति के चलते बड़ी संख्या में नक्सलियों ने सरेंडर किया है और कम समय में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

ममता सरकार पर भी निशाना

पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारी को बंधक बनाए जाने की घटना पर टिप्पणी करते हुए साव ने Mamata Banerjee सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वहां कानून व्यवस्था कमजोर हो रही है और राज्य तानाशाही की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव में जनता ऐसी सरकार को सत्ता से बाहर कर देगी।

पेट्रोल कीमतों पर प्रतिक्रिया

पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी पर साव ने कहा कि यह वैश्विक परिस्थितियों का असर है और हालात सुधरने पर स्थिति बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर जनता सरकार के साथ है।

आरोपों को बताया निराधार

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े नेता Manish Kunjam के आरोपों को खारिज करते हुए साव ने कहा कि नक्सली स्वेच्छा से सरकार की सरेंडर नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण कर रहे हैं और किसी प्रकार की “डील” के आरोप गलत हैं।

नक्सलवाद खत्म करने की डेडलाइन नजदीक, 7 फरवरी को छत्तीसगढ़ दौरे पर अमित शाह

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 रायपुर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 7 फरवरी को छत्तीसगढ़ के दौरे पर आएंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार वे शनिवार रात रायपुर पहुंचेंगे। इसके बाद 8 फरवरी, रविवार को राज्य में नक्सलवाद की स्थिति को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक के बाद वे बस्तर रवाना होंगे, जहां बस्तर पंडुम महोत्सव के समापन कार्यक्रम में शामिल होने का कार्यक्रम है।


अमित शाह का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब केंद्र सरकार द्वारा तय की गई नक्सलवाद समाप्ति की 31 मार्च 2026 की समयसीमा नजदीक आ चुकी है। इस डेडलाइन की घोषणा स्वयं केंद्रीय गृहमंत्री ने सार्वजनिक रूप से की थी। इससे पहले वे 4 अक्टूबर 2025 को विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा महोत्सव में शामिल होने बस्तर पहुंचे थे।

नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों द्वारा लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं और अब डेडलाइन में करीब दो महीने का समय शेष है। ऐसे में अमित शाह का यह दौरा नक्सल विरोधी अभियानों की आगे की रणनीति और दिशा तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

रायपुर में होने वाली इस उच्चस्तरीय बैठक को 31 मार्च की समयसीमा से पहले अंतिम सुरक्षा समीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। बैठक में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ तेलंगाना, महाराष्ट्र और ओडिशा के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा स्थिति, चल रहे अभियानों की प्रगति और खुफिया सूचनाओं पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। विशेष रूप से बस्तर संभाग में संचालित एंटी-नक्सल ऑपरेशन बैठक का मुख्य एजेंडा रहेंगे।

विष्णु के सुशासन से संवर रहा छत्तीसगढ़

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 छगन लोन्हारे, उप संचालक (जनसंपर्क)


रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 2 वर्ष के मुख्यमंत्रित्व काल में छत्तीसगढ़ राज्य में विकास का एक नया आयाम गढ़कर राज्य के नागरिकों के दिलों में राज करने वाले मुख्यमंत्री के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। विष्णुदेव साय जनता के बीच के एक ऐसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री हैं जिनकी सदाशयता और दूरगामी योजनाओं से प्रदेश में विकास और प्रगति का राह आसान हुआ है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आदिवासी पृष्ठभूमि से आते हैं। इस दृष्टि से आदिवासी पृष्ठभूमि से आने वाले वे प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री हैं। प्रदेश मे हाल ही में पुलिस महानिदेशकों एवं पुलिस महानिरीक्षको का सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह शामिल हुए।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने एक साल के भीतर छत्तीसगढ़ के किसान भाइयों के खाते में 52 हजार करोड़ रुपए अंतरित कर उन्हें उत्साह से भर दिया है। धान खरीदी समाप्त होने के एक सप्ताह के भीतर किसानों को भुगतान कर दिया गया है। 52 हजार करोड़ रुपए किसानों के खाते में आने से वे खेती किसानी में भरपूर निवेश कर रहे हैं और इससे बाजार भी गुलजार हुए हैं जिससे शहरी अर्थव्यवस्था पर सीधा असर दिख रहा है। ट्रैक्टर आदि की बिक्री ने रिकार्ड आंकड़ा छू लिया है। धान का उचित मूल्य मिलने से किसानों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई और गत वर्ष 25 लाख 72 हजार किसानों ने 149 लाख 25 हजार मीट्रिक टन रिकॉर्ड धान बेचा। सरकार बनने के दूसरे दिन ही केबिनेट की बैठक कर मोदी जी की गारंटी के अनुरूप 18 लाख 12 हजार 743 प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध कराने की स्वीकृत करने का निर्णय लिया गया।


विष्णु देव साय ने अपने दो साल के संक्षिप्त कार्यकाल में छत्तीसगढ़ को सम्पूर्ण देश में एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। बहुत कम समय में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश की जनता के बीच जाकर पूरे प्रदेश की जनता का विश्वास जीता है और न केवल विश्वास जीता है बल्कि उनके हित को ध्यान में रखकर उन्होंने ऐसी योजनाओं का क्रियान्वयन किया है जिससे छत्तीसगढ़ का समग्र विकास सम्भव हो पाया है। यह केवल और केवल विष्णुदेव साय जैसे एक संवेदनशील, कर्मठ तथा ऊर्जावान मुख्यमंत्री ही सम्भव कर सकते हैं। नक्सल हिंसा प्रभावित गांवों में नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार जैसी मूलभूत सुविधाएं दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच रही है। प्रदेश में अब तक कुल 69 सुरक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री पद का शपथ लेते ही प्रदेश की समस्त महिलाओं को महतारी वंदन योजना जैसी एक लाभकारी योजना का सौगात दिया है। महतारी वंदन योजना से प्रदेश की महिलाओं को हर माह एक हजार रुपए की राशि दी जाती है जिससे वे स्वावलंबी बन सके एवं स्वयं का रोजगार भी प्रारंभ कर सके। साथ ही प्रदेश भर के किसानों को 2 साल का बकाया बोनस और 31 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी जैसे वादों को पूरा कर छत्तीसगढ़ के किसानों का मान बढ़ाया है। प्रदेश की नवीन औद्योगिक नीति से राज्य में अब तक 7.69 लाख रूपए के निवेश के प्रस्ताव मिले हैं।

खरीफ सीजन में उपज का वाजिब कीमत 3100 रूपए प्रति क्विंटल की दर से धान का उपार्जन किया गया। सरकार किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी की है। मुख्यमंत्री श्री साय की नेतृत्व वाली सरकार के माध्यम से किसानों के खाते में 52 हजार करोड़ रूपए की राशि अंतरित (ट्रांसफर) हुई है। प्रदेश के नगर पालिका चुनाव में ऐतिहासिक जनादेश प्राप्त हुआ। प्रदेश में अब ट्रिपल इंजन की सरकार से नगरों का सर्वांगीण विकास होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे जवानों के अदम्य साहस और सरकार के निरंतर प्रयासों से नक्सलवाद अब अंतिम सांस ले रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमितशाह का संकल्प है कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त कर देंगे। वो संकल्प पूरा होते साफ दिख रहा है विशेषकर बस्तर क्षेत्र में, जो वर्षों से विकास की मुख्यधारा से अछूता रहा है। वहां अब विकास की गंगा बहेगी।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में बीते 02 वर्षों में 529 नक्सली मारे जा चुके हैं, 1975 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है और 2628 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। प्रदेश के बस्तर अंचल में आतंक का पर्याय रहे हार्डकोर नक्सली लीडर बसवराजू, लक्ष्मी नरसिम्हा चालम उर्फ सुधाकर, और माडवी हिड़मा को न्यूट्रलाइज किया गया इन पर करोड़ों का ईनाम घोषित था।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के हर वर्ग के लोगों को साथ लेकर चलने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने प्रदेश के हर वर्ग की बुनियादी सुविधाओं और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पीएम आवास योजना, कृषक उन्नति योजना, नियद नेल्ला नार, अखरा निर्माण योजना जैसी योजनाओं का शुभारम्भ किया है और जनता के बीच अपनी एक अलग छवि निर्मित की है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जनता के बीच और हर समुदाय के बीच एक ऐसा पुल बनाना जानते हैं जिससे सभी एक दूसरे से जुड़ सके और सभी प्रदेश के हित में अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह भी कर सके। उन्होंने अपने जीवन का बहुमूल्य समय पद्रेश की जनता को समर्पित कर यह सिद्ध कर दिया है कि उनका जीवन केवल उनका नहीं है अपितु प्रदेश की जनता की निस्वार्थ सेवा के लिए समर्पित है। वे सही मायने में एक ऐसे जननेता हैं जिनके लिए जनता ही सब कुछ हैं। ऐसे सेवाभावी और लोकप्रिय जनसेवक बहुत कम होते हैं जिनके लिए जनता का विकास और जनता का साथ ही सबसे महत्वपूर्ण होता है। यह सभी प्रदेशवासियों के लिए गौरवान्वित होने का विषय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय उनके अपने बीच के लोकप्रिय नेता हैं जिनके लिए प्रदेश की जनता की खुशहाली ही सर्वाेपरि है।

‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ की बड़ी सफलता, 81 नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता, बंदूक के नहीं, विकास के साथ है भविष्य — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक अभियान को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। ‘पूना मारगेम’ के अंतर्गत साउथ सब ज़ोनल ब्यूरो से जुड़े 52 माओवादी कैडरों ने हिंसा और हथियारों का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा विकास की मुख्यधारा को अपनाया है। इन पर कुल ₹1.41 करोड़ का इनाम घोषित था, जिससे यह आत्मसमर्पण अभियान अब तक की सबसे बड़ी रणनीतिक उपलब्धियों में शामिल हो गया है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे हिंसा की विचारधारा पर विश्वास की निर्णायक विजय बताया और कहा कि पिछले 48 घंटों में कुल 81 नक्सलियों का आत्मसमर्पण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि माओवाद अब केवल कमजोर नहीं पड़ रहा, बल्कि पूरी तरह बिखर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में अब माओवादी संगठन के साथ-साथ उसकी विकृत विचारधारा और उसका पूरा सपोर्ट सिस्टम भी ध्वस्त हो चुका है। जहाँ कभी भय, भ्रम और दबाव का माहौल था, वहाँ अब शासन की सशक्त उपस्थिति, सुरक्षा बलों की सक्रियता और विकास योजनाओं की प्रभावी पहुँच ने लोगों में भरोसा पैदा किया है। 

‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान के तहत सरकार उन सभी भटके युवाओं को सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और आजीविका के अवसर उपलब्ध करा रही है, जो हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, और यह व्यापक आत्मसमर्पण उसी भरोसे का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन को इस सफलता का आधार बताते हुए कहा कि 31 मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत का संकल्प अब तेज़ी से निर्णायक लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि छत्तीसगढ़ में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि बस्तर में अब भय की जगह भविष्य आकार ले रहा है, जहाँ सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएँ, आजीविका और शासन की पहुँच लगातार मजबूत हो रही है।

हिंसा नहीं, विकास बनेगा सुकमा की नई पहचान : उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

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रायपुर। बस्तर के अति संवेदनशील इलाकों में विकास की नई किरण पहुंचाने के संकल्प के साथ उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा आज सुकमा ले के जगरगुंडा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बैठक में आए पारंपरिक समाज प्रमुखों गायता, सिरहा, पुजारी, बैगा और जनप्रतिनिधियों के साथ आत्मीय मुलाकात की। जिसमें समाज प्रमुखों ने हिंसा के दौर में विकास के गांव तक नहीं पहुंचने के संबंध में विस्तारपूर्वक बताया। उन्होंने बताया कैसे पहले कोई भी विकास कार्य ग्राम में आता तो नक्सलियों द्वारा उनको कभी पूरा होने नहीं दिया जाता था। 

जिससे ग्राम में आधारभूत सुविधाओं का भी आभाव है। जिस पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अब हिंसा नहीं बल्कि विकास सुकमा की नई पहचान बनेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन द्वारा ऐसे क्षेत्रों में जहां विकास माओवादी गतिविधियों के कारण बाधित हो गया था, उनके लिए तीव्र विकास हेतु नियद नेल्ला नार योजना चलाई जा रही है। जहां सुरक्षा कैंप केवल नक्सलवाद को रोकने के लिए नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं को ग्रामीणों तक पहुँचाने के 'सुविधा केंद्र' के रूप में कार्य कर रहे हैं और कई गांव जहां सड़क, बिजली, पेयजल की समस्या थी वहां अब ये सुविधाएं पहुंच रहीं हैं।

उन्होंने आगे बताया कि शासन द्वारा ऐसे ग्राम जो अपने सभी भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाकर खुद को 'सशस्त्र नक्सल हिंसा मुक्त' घोषित करेंगे, उन्हें इलवद पंचायत योजना से 1 करोड़ रुपये की अतिरिक्त विकास राशि प्रदाय की जाएगी। इसके साथ ही संबंधित जनपद सदस्य को 10 लाख और जिला पंचायत सदस्य को 15 लाख रुपये की राशि क्षेत्र के विकास हेतु प्रदान की जाएगी। यह राशि गाँव के सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढाँचे के लिए सीधे उपयोग की जा सकेगी।

उन्होंने बताया कि बस्तर अंचल के वनोपजों से ग्रामीण केवल वनोपज संग्राहक से अब व्यवसायी बनने का सफर तय कर रहे हैं, बस्तर के गांवों में विकास का मॉडल तैयार हो रहे हैं। अब ग्रामीण केवल वनोपज इकट्ठा नहीं करेंगे, बल्कि गांवों में ही प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर उत्पादक और व्यवसायी बनेंगे। गांव के वनोत्पादों को भी उचित मूल्य प्राप्त होगा, प्रसंस्करण से अभी के मुकाबले 4 से 5 गुना अधिक लाभ ग्रामीणों को प्राप्त होगा।

उपमुख्यमंत्री शर्मा ने समाज प्रमुखों से आग्रह किया कि अब हिंसा को रोकना आवश्यक है, वे जंगलों में भटक रहे युवाओं को पुनर्वास नीति का लाभ उठाने और देश के विकास में भागीदार बनने के लिए प्रेरित करें, ताकि सभी का विकास शासन के साथ मिलकर सुनिश्चित किया जा सके। 

50 ग्रामीणों को मिले उन्नत किस्म के पौधे

 इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत समाग्री का भी वितरण किया। जिसमें उन्होंने किसानों को उन्नत किस्म के मूंग और उड़द के बीज प्रदान किए, उद्यानिकी विभाग की ओर से 50 कृषकों को टमाटर और बैंगन के उन्नत किस्म के पौधे वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त 17 किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान किया गया। 5 ग्राम समूहों को पावर वीडर, 5 संकुल संगठनों को 10 लाख रुपए, 76 समूहों को 11.40 लाख रुपए की रिवोल्विंग फंड, 63 समूहों को 37.80 लाख रुपए की सीआईएफ राशि, 6 समूहों को बैंक लिंकेज के तहत A8 लाख रुपए की राशि भी उनके द्वारा प्रदान की गई।

40 लोगों को मोतियाबिंद के इलाज के लिए विशेष बस द्वारा उपमुख्यमंत्री ने किया रवाना

नियद नेल्ला नार योजना के तहत संवेदनशील ग्रामों को मोतियाबिंद मुक्त बनाने के लिए मिशन दृष्टी के तहत विशेष बस को उपमुख्यमंत्री शर्मा ने हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा संचालित यह बस सिलगेर, कोंडासावली, तिमापुरम जैसे दुर्गम इलाकों के दोनों आँखों से मोतियाबिंद के मरीजों को विशेष बस द्वारा जिला अस्पताल पहुंचा कर उपचार कराया जाएगा। इसके तहत 40 लोगों के दल को आज रवाना किया गया। जहां उनका पूर्ण उपचार किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री ने हितग्राहियों से बात कर सभी का हाल जाना और उन्हें पूर्ण उपचार करवाने की सलाह दी।

उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पीएचसी बुरड़ी, गगनपल्ली और किस्टाराम को एनक्यूएएस सर्टिफिकेट प्रदान किया

स्वास्थ्य सेवाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पीएचसी बुरड़ी, गगनपल्ली और किस्टाराम को उपमुख्यमंत्री ने नेशनल क्वालिटी एसस्यूरेंश स्टैण्डर्ड (एनक्यूएएस) सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री शर्मा ने स्वास्थ्यकर्मियों के क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की भी जानकारी ली एवं उन्हें उत्कृष्ट सेवाओं के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष कोंटा कुसुमलता कोवासी, नगर पालिका परिषद सुकमा अध्यक्ष हुंगाराम मरकाम, नगर पंचायत दोरनापाल अध्यक्ष राधा नायक, जिला पंचायत सदस्य कोरसा सन्नू, हुंगा राम मरकाम, सरपंच जगरगुंडा नित्या कोसमा, सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास भीम सिंह, एडीजी विवेकानंद सिन्हा, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी पी सुंदरराज, संचालक अश्विनी देवांगन, कलेक्टर अमित कुमार, एसपी किरण चव्हाण, जनप्रतिनिधि धनीराम बारसे, नूपुर वैदिक, विश्वराज चौहान, बलिराम नायक, रंजीत बारठ तथा अन्य जनप्रतिनिधि और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में लाल आतंक ढहा - 140 नक्सलियों का ऐतिहासिक सरेंडर

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रायपुर : छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलवाद के खिलाफ अभूतपूर्व जीत दर्ज हुई है। कुख्यात नक्सली नेता भूपति, जिस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था, ने अपने गैंग के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। भूपति के साथ 140 से अधिक नक्सलियों ने हथियार डालने का निर्णय लिया है।


यह देश के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा नक्सली आत्मसमर्पण माना जा रहा है। सभी नक्सलियों को बीजापुर से जगदलपुर लाया जा रहा है, जहां 17 अक्टूबर को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण कराया जाएगा।


भूपति गैंग का अंत - प्रवक्ता रूपेश भी सरेंडर की राह पर

इस ऐतिहासिक आत्मसमर्पण में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) के प्रवक्ता रूपेश उर्फ सतीश का नाम भी शामिल है, जो नक्सली संगठन की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाता रहा है।

सूत्रों के अनुसार, यह समूह बीजापुर के पुलिस अधिकारियों और सुरक्षा बलों से संवाद के बाद आत्मसमर्पण के लिए तैयार हुआ। वर्तमान में ये सभी इंद्रावती नदी के उसपरी घाट पर डेरा डाले हुए हैं और 100 से अधिक हथियारों के साथ आत्मसमर्पण की प्रक्रिया में हैं।

जगदलपुर में कड़ी सुरक्षा, पुलिस-CRPF ने संभाला मोर्चा

इतिहास के इस सबसे बड़े आत्मसमर्पण कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस, CRPF, कोबरा और DRG के जवानों को बीजापुर से जगदलपुर तक तैनात किया गया है। पूरा इलाका हाई अलर्ट पर है और आत्मसमर्पण स्थल पर विशेष सुरक्षा घेरा बनाया गया है। गृहमंत्री विजय शर्मा बोले "लाल आतंक का अंत, बस्तर की नई शुरुआत"

उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा,-

“हम नक्सलियों का रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत करेंगे। बस्तर की जनता अब लाल आतंक से मुक्ति चाहती है। यह आत्मसमर्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहे विकास कार्यों और हमारी सरकार की नीतियों का परिणाम है।”

उन्होंने कहा कि इस कदम से नक्सली संगठनों की रीढ़ टूट जाएगी और शेष नक्सलियों के पास आत्मसमर्पण के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का किया शुभारंभ

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रायपुर। बस्तर से नक्सलवाद का अंत शीघ्र होगा और क्षेत्र में शांति स्थापित कर हम विकास के नए आयाम गढ़ेंगे। बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के सुदूर अंचलवासी अब विकास से विश्वास तक की यात्रा में सहभागी बनकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जगदलपुर से मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का शुभारंभ करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने यात्री बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और क्षेत्रवासियों को इस विशेष पहल के लिए शुभकामनाएं दीं।

केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास के लिए डबल इंजन की सरकार प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। लाल आतंक की समाप्ति प्रदेश के सुदूर इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ेगी। आज प्रारंभ हुई यात्री बस सेवा हमारे नागरिकों के जीवन में नई ऊर्जा का संचार करेगी। उन्होंने कहा कि अब 250 गांवों के लोग अपने निकटवर्ती शासकीय कार्यालयों, स्कूलों और अस्पतालों तक आसानी से पहुंच पाएंगे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि हमारी सरकार जनसुविधाओं को बढ़ाने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का उद्देश्य यात्री बस सुविधा से वंचित गांवों में बसों का परिचालन सुनिश्चित करना है। इससे लोग कम लागत में अपने गंतव्य तक समय पर पहुंच सकेंगे। रोज़मर्रा के कामकाज, शासकीय कार्यों और अन्य गतिविधियों में भी सहूलियत बढ़ेगी।

उल्लेखनीय है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना शुरू की गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य उन गांवों तक बस सेवा पहुँचाना है, जहाँ अब तक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इस पहल से ग्रामीणों को सुरक्षित, समयबद्ध और सुविधाजनक यात्रा का अवसर मिलेगा, जो उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

योजना के पहले चरण में बस्तर और सरगुजा पर फोकस

योजना के पहले चरण में बस्तर और सरगुजा संभाग को प्राथमिकता दी गई है। इन क्षेत्रों में कुल 34 मार्गों पर 34 बसों का संचालन प्रारंभ होगा। इस पहल से 11 जिलों के 250 नए गांव बस सेवा से जुड़ेंगे। यह प्रयास विशेष रूप से उन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगा, जहां सड़क संपर्क सीमित है और लोग जिला मुख्यालय या अन्य महत्वपूर्ण स्थानों तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी पैदल तय करते हैं।

ग्राम पंचायत से जिला मुख्यालय तक कनेक्टिविटी

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायत से लेकर जिला मुख्यालय तक निर्बाध बस कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है। इससे ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और बाजार जैसी आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में आसानी होगी। योजना के तहत संचालित बसें समयबद्ध और सुरक्षित यात्रा का भरोसा देंगी, जिससे ग्रामीणों का समय और संसाधन दोनों की बचत होगी।

योजना की दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने बस संचालकों को वायबिलिटी गैप फंडिंग प्रदान करने का प्रावधान किया है। यह वित्तीय सहयोग संचालकों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाएगा, ताकि वे इन दूरस्थ क्षेत्रों में निरंतर सेवा दे सकें। यह कदम न केवल परिवहन सुविधाओं को मजबूत करेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी योगदान देगा।

250 गांवों को पहली बार बस सेवा से जोड़ने की उपलब्धि

इस योजना के तहत लगभग 250 गांव पहली बार बस सेवा से जुड़ रहे हैं। यह ग्रामीण छत्तीसगढ़ के लिए एक ऐतिहासिक कदम है, जो सामाजिक और आर्थिक विकास को गति देगा। ग्रामीणों को अब अपनी आवश्यकताओं के लिए लंबी दूरी पैदल तय करने या निजी वाहनों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी।

समावेशी विकास की दिशा में कदम

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस योजना की शुरुआत पर कहा कि हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ का कोई भी गांव विकास की मुख्यधारा से न छूटे। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाने और उन्हें शहरों से जोड़ने का प्रयास है। यह योजना न केवल परिवहन की सुविधा देगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगी। यह योजना न केवल परिवहन की दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और आर्थिक समानता की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगी।


नक्सलवाद के खात्मे के लिए समाज के सभी वर्गों का सहयोग जरूरी - उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

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 रायपुर। उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुदृढ़ रणनीति और सुरक्षा बलों की निरंतर कार्रवाई से नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है और इसके खात्मे के लिए समाज के हर वर्ग का सक्रिय सहयोग आवश्यक है।


सुकमा प्रवास के दौरान कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने व्यापारी संगठन, सड़क व खदान निर्माण संघ, सर्व आदिवासी समाज, जनजाति सुरक्षा मंच, वनवासी कल्याण समिति, बैंक अधिकारी, मोबाइल व मेडिकल दुकान संचालकों सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। बैठक में जिले के विकास, सुरक्षा व्यवस्था और नक्सल उन्मूलन के प्रयासों की विस्तृत समीक्षा की गई।

शर्मा ने कहा कि सुकमा की जनता अब विकास की राह पर है और गुमराह करने वाले तत्वों का प्रभाव कम हो रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अंदरूनी क्षेत्रों में सड़क, पुल-पुलिया और भवन निर्माण कार्य समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण हों, कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार और पुलिस उठाए, तथा स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, अवैध धर्मांतरण और घुसपैठ पर सख्त नियंत्रण के निर्देश दिए।

बैठक में जिले के प्रभारी मंत्री एवं वन मंत्री केदार कश्यप ने लघु वनोपज, कुटीर उद्योग और कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से स्थानीय आय बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 तक बस्तर संभाग से नक्सलवाद का जड़ से उन्मूलन करने के लिए सभी को दृढ़ संकल्प के साथ कार्य करना होगा।

बैठक में राज्य महिला आयोग की सदस्य, जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। विभिन्न वर्गों और संगठनों ने नक्सल उन्मूलन और विकास के लिए अपने सुझाव व समर्थन दिए। शर्मा ने कहा कि सामूहिक प्रयास ही सुकमा को नक्सलवाद मुक्त, सुरक्षित और समृद्ध बनाएंगे।

नक्सलवाद की रात ढल रही है, बस्तर में विकास की नई सुबह हो रही है : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि बस्तर में नक्सलवाद की रात अब ढल रही है और विकास की नई सुबह का उदय हो चुका है। डबल इंजन सरकार के समग्र और समावेशी प्रयासों का यह परिणाम है कि आज बस्तर रेंज में ₹2.54 करोड़ के इनामी 66 हार्डकोर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया है। इनमें ₹25 लाख के इनामी एसजेडसीएम (SZCM) रामन्ना ईरपा उर्फ जगदीश का आत्मसमर्पण शामिल है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि एक ही दिन में बीजापुर से 25, दंतेवाड़ा से 15, कांकेर से 13, नारायणपुर से 8 और सुकमा से 5 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया है। राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर वे अब हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति और विकास की दिशा में आगे बढ़ने को तैयार हुए हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बीते 18 महीनों में कुल 1,570 माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं। यह हमारे शासन की पारदर्शी नीतियों, नागरिक-हितैषी कार्यप्रणाली और पुनर्वास के प्रति ईमानदारीपूर्ण दृष्टिकोण का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन सामाजिक और आर्थिक पुनर्निर्माण के समर्पित प्रयासों का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बस्तर के दूरस्थ और अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में एक साथ सुरक्षा और विकास का कार्य कर रही है। सड़कों का विस्तार, पेयजल व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को नक्सल प्रभावित इलाकों में पहुँचाया गया है। 

मुख्यमंत्री  साय ने “पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन” नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी नीति बस्तर के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प है। हम आत्मसमर्पण कर रहे नक्सलियों के भविष्य को संवारने हेतु प्रतिबद्ध हैं।


उपमुख्यमंत्री अरुण साव की चेतावनी: "नक्सलवाद अंतिम सांसें गिन रहा है, बस्तर अब भयभीत नहीं

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 रायपुर । छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बीजापुर ज़िले में दो ग्रामीणों की नक्सलियों द्वारा हत्या पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि अब सशस्त्र नक्सलवाद अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हार की हताशा में नक्सली कायराना हरकतें कर रहे हैं, लेकिन बस्तर की जनता अब डरने वाली नहीं है। सरकार और सुरक्षा बल नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।


यह बयान रविवार रात तर्रेम थाना क्षेत्र के ग्राम छुटवाई में दो ग्रामीणों की नृशंस हत्या के बाद आया है। जानकारी के अनुसार, करीब 4-5 हथियारबंद नक्सली गांव में घुसे और 55 वर्षीय कवासी जोगा एवं 50 वर्षीय मंगलू कुरसम को उनके घर से बाहर बुलाकर धारदार हथियारों से निर्ममता से मौत के घाट उतार दिया।

इस बर्बर वारदात की जिम्मेदारी स्मॉल एक्शन टीम, जगरगुंडा एरिया कमेटी ने ली है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं और सघन सर्चिंग अभियान जारी है।

मार्च 2026 तक नक्सलवाद का जड़ से होगा खत्म : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : इच्छाशक्ति, संवेदना और समावेशी नीति से हमने बस्तर में बदलाव की नई शुरुआत की है। बस्तर के युवाओं का आत्मबल ही हमारी प्रेरणा है और हम सब मिलकर नया बस्तर गढ़ेंगे। आप सभी ने पहली बार राजधानी रायपुर को देखा है, आप सभी का यहां स्वागत है और आपकी यह यात्रा सुखद और चिरस्मरणीय हो। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज अपने निवास में प्रदेश के सुदूर और नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के नियद नेल्ला नार ग्राम पंचायतों के 96 युवक-युवतियों के दल से आत्मीय संवाद कर रहे थे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार 'नियद नेल्ला नार' जैसी योजनाओं के माध्यम से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की नई राह खोल रही है। उन्होंने कहा कि आप छत्तीसगढ़ के भविष्य हैं और आप सभी की भागीदारी से ही हम बस्तर क्षेत्र और प्रदेश को आगे लेकर जायेंगे।

साय ने कहा कि 'नियद नेल्ला नार’ योजना से जुड़कर जहां गांवों की तस्वीर बदल रही है, वहीं युवाओं को भी आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि हमारी सरकार आपके क्षेत्र में शांति व्यवस्था स्थापित करने में जुटी हुई है और केंद्रीय मंत्रीअमित शाह ने ठान लिया है कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि माओवादी आपके क्षेत्र में विकास नहीं चाहते, लेकिन विकास के रास्ते आने वाली सभी बाधाओं को हम दूर करेंगे। बस्तर का मनोबल हमें नक्सलवाद जैसी कुरीतियों को जड़ से समाप्त करने की ऊर्जा दे रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर आपके क्षेत्र में घने जंगल, मनमोहक झरने और ऊँचे पहाड़ हैं। वहां भूमि उपजाऊ है और अच्छी खेती होती है। हमारी सरकार खेती को समृद्ध बनाने के लिए पानी की सुविधा आप तक पहुंचाने का काम कर रही है। श्री साय ने कहा कि आप सभी खेती को बढ़ावा दें और जो विद्यार्थी हैं, वे मन लगाकर अच्छी शिक्षा प्राप्त करें। प्रदेश के विकास में आपका सहयोग हमारे लिए बहुत जरूरी है। उन्होंने ‘बस्तर ओलंपिक’ और ‘बस्तर पंडुम’ जैसे आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा यह बस्तर की आत्मा की अभिव्यक्ति हैं। इन आयोजनों में हजारों युवाओं, महिलाओं और बच्चों की भागीदारी ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि बस्तर अब नए युग की ओर अग्रसर है। बस्तर की कला, संस्कृति और धरोहर को संजोने का कार्य हम सब मिलकर आगे भी करते रहेंगे। आज बस्तर वासियों ने यह दिखा दिया है कि वे हिंसा नहीं, शांति और विकास चाहते हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर की धरती वीरता, धैर्य और स्वाभिमान की प्रतीक रही है और अब हम सब मिलकर इसे विकास और समृद्धि के रास्ते पर आगे लेकर जायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की विभिन्न योजनाओं, कौशल प्रशिक्षण, खेल और शिक्षा के माध्यम से सरकार हर युवा को एक नया अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है।

 साय ने युवाओं से आह्वान किया कि वे मुख्यधारा से जुड़कर समाज में बदलाव के वाहक बनें और मजबूत, सुरक्षित व समृद्ध बस्तर के निर्माण में सहभागी बनें।

मुख्यमंत्री से युवाओं ने साझा किए अपने विचार, कहा – “बस्तर को बदलने का बनेंगे माध्यम

बीजापुर जिले के सुदूर गांवों से राजधानी पहुंचे युवाओं ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से खुलकर संवाद किया। युवाओं ने न सिर्फ अपने अनुभव साझा किए, बल्कि अपने सपनों और संकल्पों की भी बात की। उन्होंने कहा कि हम शिक्षा, खेल, हुनर और सेवा के रास्ते पर चलकर अपने जीवन को बेहतर बनाना चाहते हैं। बस्तर को बदलना है, और हम इस बदलाव के सहभागी बनना चाहते हैं। युवाओं ने बताया कि 'नियद नेल्ला नार' योजना ने उन्हें नई पहचान और दिशा दी है।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम के साथ ही वरिष्ठ अधिकारीगण मौजूद रहे।

सुकमा में बड़ी सफलता: 25 लाख के इनामी 16 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, हिंसा छोड़ मुख्यधारा से जुड़े

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। पीएलजीए बटालियन-2 के दो हार्डकोर नक्सलियों समेत कुल 16 सक्रिय नक्सलियों ने पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के समक्ष बिना हथियार के आत्मसमर्पण कर दिया। इन सभी पर कुल 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था।


इन नक्सलियों पर था इनाम

01 महिला नक्सली पर: ₹8 लाख
01 पुरुष नक्सली पर: ₹8 लाख
01 पुरुष नक्सली पर: ₹3 लाख
03 पुरुष नक्सलियों पर: ₹2-2 लाख
कुल इनाम राशि: ₹25 लाख

आत्मसमर्पण के पीछे कारण

नक्सलियों ने बताया कि उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन की “नक्सलवादी आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति – 2025” और “नियद नेल्ला नार” योजना से प्रभावित होकर यह निर्णय लिया।

पुलिस की बढ़ती उपस्थिति और नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना
नक्सल संगठन की अमानवीय और भेदभावपूर्ण नीति
स्थानीय आदिवासियों पर अत्याचार
बाहरी नक्सलियों का शोषण
इन सभी कारणों से वे संगठन छोड़ने के लिए मजबूर हुए।
आत्मसमर्पण में इन इकाइयों की भूमिका
जिला बल, नक्सल सेल आसूचना शाखा, रेंज फील्ड टीम (RFT), कोंटा इन इकाइयों की सतत प्रयासों से यह आत्मसमर्पण संभव हो सका।

पुनर्वास और प्रोत्साहन

सरकार द्वारा आत्मसमर्पित सभी नक्सलियों को ₹50,000 की प्रोत्साहन राशि और पुनर्वास नीति के तहत अन्य सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। यह आत्मसमर्पण नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति स्थापना और विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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