Media24Media.com: #द्रौपदी मुर्मु

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भारत और मॉरीशस के संबंधों को मिला नया आयाम: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री रामगुलाम की भेंटवार्ता

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नई दिल्ली-भारत यात्रा के समापन अवसर पर मॉरीशस गणराज्य के प्रधानमंत्री डॉ. नविनचंद्र रामगुलाम ने आज राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। प्रधानमंत्री रामगुलाम की यह राजकीय यात्रा 9 से 16 सितम्बर तक चली, जिसके दौरान उन्होंने मुंबई, वाराणसी, अयोध्या और तिरुपति का भी दौरा किया।

‘पड़ोस प्रथम’ और ‘महासागर दृष्टि’ में मॉरीशस की अहम भूमिका

राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रधानमंत्री रामगुलाम और उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि मॉरीशस, भारत की ‘पड़ोस प्रथम नीति’, ‘महासागर दृष्टि’ और वैश्विक दक्षिण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता में विशेष स्थान रखता है।

साझेदारी का नया अध्याय – ‘उन्नत रणनीतिक साझेदारी’

राष्ट्रपति ने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि भारत और मॉरीशस के बीच सहयोग निरंतर हर क्षेत्र में मजबूत हो रहा है। हाल ही में संबंधों को ‘उन्नत रणनीतिक साझेदारी’ (Enhanced Strategic Partnership) तक ले जाया गया है, जो इस प्रगाढ़ता को दर्शाता है।

विकास सहयोग और विशेष आर्थिक पैकेज

राष्ट्रपति ने आश्वस्त किया कि भारत, मॉरीशस सरकार की विकास संबंधी प्राथमिकताओं में सहयोग करता रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत द्वारा दिया गया नया विशेष आर्थिक पैकेज सरकार और जनता की आवश्यकताओं को पूरा करेगा।

  • इस पैकेज के अंतर्गत अस्पताल, सड़क, बंदरगाह विकास, रक्षा खरीद और संयुक्त निगरानी जैसे परियोजनाएँ शामिल हैं।

  • ये परियोजनाएँ अवसंरचना को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आने वाले वर्षों में जनजीवन पर सकारात्मक असर डालेंगी।

  • साथ ही, द्विपक्षीय सहयोग अब डिजिटल तकनीक और अंतरिक्ष क्षेत्र जैसे नए क्षेत्रों में भी विस्तारित हो रहा है।

साझा इतिहास और सांस्कृतिक जुड़ाव

दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और मॉरीशस के संबंध अद्वितीय हैं, जो साझा इतिहास, भाषा, संस्कृति और मूल्यों पर आधारित हैं।

राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री रामगुलाम के व्यापक नेतृत्व अनुभव से भारत-मॉरीशस के दीर्घकालिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे।

“आदि-कर्मयोगी अभियान” के अंतर्गत प्रतिष्ठित जनजातीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से की भेंट

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नई दिल्ली,  विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय समाज के प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों ने आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन में भेंट की। यह बैठक जनजातीय कार्य मंत्रालय के आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत आयोजित की गई, जो इस चरण की अंतिम बैठक थी।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि आदि कर्मयोगी अभियान जनजातीय समाज और राष्ट्र के भविष्य को आकार देने में संवाद और सहयोग का सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय केवल विकास के लाभार्थी ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के सह-निर्माता भी बनें।

राष्ट्रपति ने बताया कि जुलाई 2025 से आरंभ इस अभियान के अंतर्गत एक लाख गाँवों में 20 लाख आदि-कर्मयोगियों को संगठित किया गया है। एक लाख आदि सेवा केंद्र एकल खिड़की सेवा व शिकायत निवारण केंद्र के रूप में कार्य कर रहे हैं। धरती अबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान से 63,000 से अधिक जनजातीय बहुल गाँव लाभान्वित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि योजनाएँ महत्वपूर्ण हैं, परंतु वास्तविक सशक्तिकरण अधिकारों की पहचान, सम्मान और प्रतिनिधित्व से आता है। राष्ट्रपति ने जनजातीय समुदायों से सक्रिय भागीदारी और जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति ने हाल ही में लॉन्च आदि वाणी एआई आधारित जनजातीय भाषा अनुवाद उपकरण को भाषा एवं शिक्षा परिवर्तन की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया। इस अवसर पर आदि कर्मयोगी अभियान पर आधारित एक फिल्म भी प्रदर्शित की गई। बैठक में जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम और राज्य मंत्री दुर्गादास उइके भी उपस्थित थे।


भारत की राष्ट्रपति ने EEPC इंडिया के प्लैटिनम जुबिली समारोह की बढ़ाई शोभा

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भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मु ने आज (8 सितंबर, 2025) नई दिल्ली में इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC) इंडिया की प्लैटिनम जुबिली समारोह की शोभा बढ़ाई।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि प्राचीन काल में भारत आध्यात्म और व्यापार दोनों में विश्व का नेतृत्व करता था। भारत को एक बार फिर ज्ञान और व्यापार का अग्रणी केंद्र बनाना सभी नागरिकों का संकल्प होना चाहिए। आर्थिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण हितधारक होने के नाते, EEPC को इस संकल्प को दृढ़ संकल्प के साथ लेना चाहिए।

राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि पिछले 10 वर्षों में भारत के इंजीनियरिंग निर्यात 70 अरब डॉलर से बढ़कर 115 अरब डॉलर से अधिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दशक में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार क्षेत्र में कई चुनौतियों के बावजूद यह निर्यात वृद्धि और भी प्रभावशाली लगती है। उन्होंने इस उपलब्धि में योगदान देने के लिए EEPC की सराहना की।

राष्ट्रपति ने कहा कि EEPC अंतर्राष्ट्रीय बाजार और भारतीय उत्पादकों के बीच एक पुल का कार्य करता है। उन्होंने EEPC से आग्रह किया कि भारत की भूमिका और भारतीय उद्यमियों की भूमिका को वैश्विक मूल्य श्रृंखला (Global Value Chain) में निरंतर बढ़ाएं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विश्व व्यापार व्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था में हो रहे बदलावों के कारण EEPC की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

राष्ट्रपति ने कहा कि वैश्विक व्यापार की चुनौतियों को हमें अपने देश में उपलब्ध असाधारण क्षमताओं का उपयोग कर अवसरों में बदलना होगा। पिछले सात दशकों में भारत के इंजीनियरिंग निर्यात के गंतव्य स्थलों में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। EEPC को इस परिवर्तन की प्रक्रिया को जारी रखना चाहिए और ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना के साथ भारत की अर्थव्यवस्था को लगातार सशक्त बनाने की दिशा में कार्यरत रहना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाली इंजीनियरिंग सेवाएँ और कम लागत वाले उत्पाद भारत की बड़ी ताकत हैं। विश्व की सबसे बड़ी कंपनियों के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर भारत में हैं। EEPC जैसे हितधारकों को उचित प्रोत्साहन और पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करके भारत को एक ग्लोबल इनोवेशन सेंटर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार के विशेषज्ञ इनोवेशन इकॉनमी और कैच-अप इकॉनमी की चर्चा करते हैं। इनोवेशन इकॉनमी विश्व की सबसे प्रतिस्पर्धी और समृद्ध अर्थव्यवस्थाएँ होती हैं। राष्ट्रपति ने EEPC के सभी हितधारकों से आह्वान किया कि वे हमारे देश में उपलब्ध प्रतिभा और ऊर्जा को सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करके भारत को अग्रणी इनोवेशन इकॉनमी बनाने का संकल्प लें।


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