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खरीफ 2025–26 के लिए बड़ी राहत: छत्तीसगढ़ में तुअर, उड़द, मूंग, सोयाबीन और मूंगफली की एमएसपी पर खरीद को मंजूरी

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रायपुर। भारत सरकार के ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर अवगत कराया है कि खरीफ विपणन वर्ष 2025–26 के दौरान छत्तीसगढ़ में दाल एवं तिलहनी फसलों की खरीद के लिए मूल्य समर्थन योजना (PSS) लागू करने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

केंद्रीय मंत्री द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार छत्तीसगढ़ में निम्नानुसार फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 21 हजार 330 मीट्रिक टन तुअर, 25 हजार 530 मीट्रिक टन उड़द, 240 मीट्रिक टन मूंग, 4 हजार 210 मीट्रिक टन सोयाबीन और 4 हजार 210 मीट्रिक टन मूंगफली खरीद की मंजूरी दी गई है।

इन फसलों की खरीद मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जाएगी, जिससे किसानों को अपनी उपज का उचित दाम प्राप्त होगा। केंद्रीय मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने अपने पत्र में आशा व्यक्त की है कि इस निर्णय से तुअर, उड़द, मूंग, सोयाबीन और मूंगफली उत्पादक किसानों को बड़ी राहत मिलेगी तथा उन्हें औने-पौने दाम पर फसल बेचने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्र सरकार के इस निर्णय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हितों की सुरक्षा हमारी शीर्ष प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एमएसपी पर खरीद की सभी तैयारियाँ समयबद्ध तरीके से पूर्ण कर किसानों को अधिकतम लाभ सुनिश्चित करेगी। इस निर्णय से राज्य के किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, दलहन एवं तिलहन उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी।

धान से आगे सोच : मखाना खेती से बदलेगी धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर

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धमतरी। कृषि विविधीकरण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में धमतरी जिले ने एक और ठोस कदम बढ़ाया है। विकासखंड नगरी के ग्राम सांकरा से 40 इच्छुक महिला किसान समूह का एक दल रायपुर जिले के विकासखंड आरंग अंतर्गत ग्राम लिंगाडीह पहुंचा, जहाँ उन्होंने मखाना प्रोसेसिंग एवं आधुनिक खेती तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस अध्ययन भ्रमण एवं प्रशिक्षण की संपूर्ण व्यवस्था जिला उद्यानिकी विभाग, धमतरी द्वारा की गई। 

ख़ास कर कलेक्टर अबिनाश मिश्रा मखाना खेती को बढ़ावा देने और किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी को लेकर रुचि ले रहे है। अब जल्द ही धान से आगे सोच से मखाना खेती से धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलेगी। छोटी-छोटी डबरी से समृद्धि तक धमतरी की महिलाओं को मखाना खेती में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह दिखायी दे रही है । शासकीय प्रयासों का प्रतिफल है कि मखाना खेती से धमतरी में आर्थिक सशक्तिकरण होगा।

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के सतत प्रयासों से धमतरी जिले के ग्राम राखी, पीपरछेड़ी, दंडेसरा, राँकाडोह एवं सांकरा में लगभग 90 एकड़ क्षेत्र में डबरी चिन्हांकन कर मखाना खेती की शुरुआत हो चुकी है। महिला किसानों ने स्थानीय ओजस फार्म का भ्रमण करते हुए मखाना की खेती, कटाई, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी संपूर्ण श्रृंखला को नजदीक से समझा। फार्म प्रबंधक संजय नामदेव ने किसानों को बताया कि मखाना की खेती के लिए जलभराव वाली डबरी, तालाब या जल संरचनाएं उपयुक्त होती हैं। उन्होंने तकनीकी पहलुओं, बीज चयन, उत्पादन लागत और बाजार संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी तथा यह भी बताया कि उचित प्रशिक्षण एवं सरकारी सहयोग से यह फसल किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।

इस अवसर पर शिव साहू ने मखाना खेती के व्यावसायिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह फसल कम जोखिम वाली है और इससे स्थायी आय का मजबूत स्रोत विकसित किया जा सकता है। महिला किसानों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मखाना खेती से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का नया अवसर दिखाई दे रहा है।

बिहार के दरभंगा निवासी मखाना प्रोसेसिंग विशेषज्ञ रोहित साहनी फोड़ी ने प्रसंस्करण की बारीकियां समझाते हुए बताया कि 1 किलो मखाना बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम पॉप तैयार होता है, जिसकी बाजार कीमत ₹700 से ₹1000 प्रति किलो तक होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसान स्वयं उत्पादन के साथ प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग करें, तो प्रति एकड़ लाभ में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रमुख वैज्ञानिक ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जानकारी देते हुए बताया कि प्रति एकड़ लगभग 20 किलो बीज की आवश्यकता होती है और औसत उत्पादन 10 किं्वटल तक प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि छह माह की अवधि वाली इस फसल में कीट-व्याधि का प्रकोप नगण्य होता है तथा चोरी जैसी समस्याएं भी नहीं होतीं, जिससे यह किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प बनती है।

उप संचालक उद्यानिकी, धमतरी डॉ.पूजा कश्यप साहू के मार्गदर्शन में ग्रामीण उद्यानिकी अधिकारी चंद्रप्रकाश साहू एवं बीटीएम पीताम्बर भुआर्य के साथ आए किसानों ने मखाना बोर्ड एवं राज्य शासन की योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। डॉ.पूजा ने बताया कि मखाना की खेती को प्रोत्साहन देने हेतु प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता एवं सब्सिडी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम व्यावसायिक मखाना उत्पादन आरंग विकासखंड के ग्राम लिंगाडीह में स्वर्गीय श्री कृष्ण कुमार चंद्राकर द्वारा प्रारंभ किया गया था, जहाँ राज्य का पहला मखाना प्रसंस्करण केंद्र भी स्थापित हुआ।

आज मखाना उत्पादन छत्तीसगढ़ की नई कृषि पहचान बन रहा है। धमतरी की महिला किसानों का यह प्रयास न केवल कृषि नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन,प्रशिक्षण और प्रशासनिक संकल्प से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है।


किसान की आड़ में अवैध धान व्यापार करने वाले को प्रशासन ने रंगे हाथों पकड़ा

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रायपुर। बस्तर जिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दिशा निर्देशों के अनुसार निरंतर किसानों से धान का उपार्जन किया जा रहा है साथ ही अवैध धान के विक्रय पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा रहा है। जिसका असर आज देखने को मिला जहां कलेक्टर हरिस एस के निर्देश पर अवैध धान परिवहन के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत बकावंड विकासखण्ड के अनुविभागीय दंडाधिकार मनीष वर्मा ने बड़ी कार्रवाई की। 

सोमवार को धान उपार्जन केंद्र करपावंड के औचक निरीक्षण के दौरान प्रशासन ने व्यापारी और किसान की मिलीभगत से चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया, जिसमें किसान के टोकन पर व्यापारी का धान खपाने का प्रयास किया जा रहा था। मामले की जांच में यह खुलासा हुआ कि जिस टोकन पर धान बेचा जा रहा था, वह कृषक उपेन्द्र भारती पिता अर्जुन भारती के नाम पर था।

जमीनी हकीकत यह थी कि कृषक उपेन्द्र भारती आजीविका के सिलसिले में हैदराबाद में निवासरत हैं और उनकी जमीन पर खेती उनके भाई लखीधर भारती द्वारा की जा रही थी। लखीधर ने अपनी उपज के लिए 182 क्विंटल का टोकन कटवाया था, लेकिन खेत में वास्तविक उत्पादन केवल 100 क्विंटल ही हुआ। टोकन में बचे 80 क्विंटल के अंतर का गलत फायदा उठाने के लिए व्यापारी राजेश गुप्ता ने साजिश रची। व्यापारी ने मंडी करपावंड से ही धान अपने दो वाहन क्रमांक सीजी 17 केवाय 7204 और सीजी 17 केजे 9389 में लोड करवाया और ड्राइवरों के हाथ में उपेन्द्र भारती के टोकन की फोटोकॉपी थमाकर उन्हें उपार्जन केंद्र भेज दिया।

मौके पर पहुंची प्रशासन की टीम ने जब कड़ाई से पूछताछ की, तो ड्राइवर और किसान के भाई ने पूरा सच स्वीकार कर लिया। उनकी स्वीकारोक्ति के बाद एसडीएम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अवैध धान से भरे दोनों वाहनों को जब्त कर लिया है और उन्हें आगामी कार्यवाही हेतु थाना करपावंड के सुपुर्द कर दिया गया है।

प्रदेश के किसान आधुनिक कृषि यंत्रों से हो रहे हैं समृद्ध : बीज निगम द्वारा किसानों को अनुदान पर उपलब्ध कराये जा रहे आधुनिक कृषि यंत्र

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रायपुर। प्रदेश के किसान खेती-किसानी में आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रयोग कर आर्थिक रूप से समृद्ध हो रहे हैं। वहीं विकसित भारत विजन की परिकल्पना की ओर अग्रसर हो रहे हैं। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम द्वारा किसानों को अनुदान पर आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिसका बड़ी संख्या में किसान लाभ ले रहे हैं। किसान सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर खेती किसानी के उन्नत एवं आधुनिक तौर तरीके अपना रहे हैं, जिससे किसानों को पारंपरागत किसानी से अधिक फायदा हो रहा है।

शासकीय अनुदान पर आधुनिक एवं उन्नत कृषि यंत्र किसानों को

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य शासन द्वारा कृषि के क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की योजनाएं संचालित हैं जिनसे किसान लगातार लाभान्वित हो रहे हैं, चाहे वो उन्नत बीज हो या अन्य विभागीय योजनाएं। इसी क्रम में बीज एवं कृषि विकास निगम द्वारा किसानों के हित में शासकीय अनुदान पर आधुनिक एवं उन्नत किस्म में विभिन्न प्रकार के कृषि यंत्रों को किसानों को उपलब्ध कराया जाता है l खेती किसानी के विभिन्न चरणों जुताई, बुआई, रोपाई, फसल कटाई जैसे सभी चरणों के लिए अनुदान पर कृषि यंत्र किसान के द्वारा चयन आधार पर उपलब्ध कराया जाता है, इससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है। बीज निगम द्वारा किसानों को शक्ति चलित कृषि यंत्र जैसे - रोटावेटर, स्व चलित रीपर, पैडी ट्रांसप्लांटर, लेज़र लैंड लेवलर, पावर वीडर, मल्चर, थ्रेशर, सीड ड्रिल, सहित अन्य आधुनिक कृषि यंत्र अनुदान पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। 

आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग से फसल की गुणवत्ता बेहतर हुई

इन कृषि यंत्रों के उपयोग से किसानों को समय की बचत के साथ-साथ श्रम लागत में भी कमी हो रही है। किसानों का कहना है कि आधुनिक यंत्रों के प्रयोग से खेती का कार्य कम समय में और अधिक सटीक तरीके से हो पा रहा है, जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर हुई है। परिणाम स्वरूप बाजार में उन्हें उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है।  

882 किसानों को अनुदान पर कृषि यंत्रों से किया गया लाभान्वित

बता दें कि बीज निगम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। निगम द्वारा किसानों की आवश्यकताओं के अनुसार कृषि यंत्र अनुदान पर उपलब्ध कराने की योजना क्रियान्वित है। जिससे कृषि क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा मिल रहा है। वर्ष 2025-26 में अभी तक 882 किसान को अनुदान पर कृषि यंत्रों से लाभान्वित हो चुके हैं। 

स्व-चलित रीपर से कटाई हुई आसान

बिलासपुर जिले के किसान नारायण दल्लू पटेल ने बीज निगम के माध्यम से अनुदान पर स्व-चलित रीपर प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि पहले एक एकड़ फसल की कटाई में 10-12 मजदूर और पूरा दिन लगता था, जबकि अब वही कार्य 2-3 घंटे में पूरा हो जाता है। इससे कटाई लागत में 50-60 प्रतिशत तक कमी आई है और समय पर कटाई संभव हो सकी है।

रोटावेटर से खेत की तैयारी हुई तेज

रायपुर जिले के किसान हीरालाल साहू ने बताया कि रोटावेटर के उपयोग से खेत की जुताई एक ही बार में हो जाती है। पहले जहाँ खेत तैयार करने में 3-4 दिन लगते थे, अब कुछ घंटों में कार्य पूर्ण हो जाता है। इससे फसल उत्पादन में 20-25 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।

सीड ड्रिल से बीज की बचत और बेहतर उत्पादन

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के किसान लेखूराम छेदईया ने अनुदान पर सीड ड्रिल मशीन क्रय किए है। उन्होंने बताया कि इस मशीन का प्रयोग बोआई में करने पर बीज की 15-25 प्रतिशत तक बचत होती है। समान दूरी और गहराई पर बोआई से अंकुरण बेहतर हुआ है और उत्पादन में 20-30 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई।

पारदर्शी व्यवस्था से खुशहाल किसान—3100 रुपये समर्थन मूल्य से नंद कुमार ने जताया मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाई जा रही पारदर्शी और किसान हितैषी धान खरीदी व्यवस्था ने किसानों के चेहरे पर संतोष और भरोसे की नई चमक ला दी है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत 15 नवंबर से शुरू हुई धान खरीदी के दौरान नारायणपुर जिले के 17 उपार्जन केंद्रों में बारदाना, छाया, पेयजल, मेडिकल किट जैसी सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। 

खरीदी प्रक्रिया को ज्यादा सहज और पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन टोकन प्रणाली लागू की गई है, जिससे किसानों को अब लंबी कतारों और अनावश्यक प्रतीक्षा से मुक्ति मिल रही है। वहीं नोडल अधिकारियों की नियमित मॉनिटरिंग के कारण किसानों को किसी प्रकार की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा। धान विक्रय के बाद भुगतान भी दो दिनों के भीतर किसानों के खातों में अंतरित किया जा रहा है, जिससे उन्हें बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा।

नारायणपुर जिले के माहका धान खरीदी केंद्र में अपना धान बेचने पहुंचे किसान नंद कुमार शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए सरकार की इस व्यवस्था की सराहना की। पाँच एकड़ खेत में इस वर्ष 60 क्विंटल धान का उत्पादन करने वाले शर्मा ने बताया कि 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मानक से किसानों को वास्तविक लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन टोकन प्रणाली ने प्रक्रिया को आसान बना दिया है और केंद्रों पर उपलब्ध सुविधाएँ संतोषजनक हैं।

नंद कुमार ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने धान बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग खेती-बाड़ी सुधार और पारिवारिक आवश्यकताओं को पूरा करने में करने की बात कही।

केंद्र में मौजूद अन्य किसानों ने भी धान खरीदी की सुदृढ़ व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए उम्मीद जताई कि ऐसी सुविधाएँ आने वाले वर्षों में भी जारी रहेंगी और सरकार के प्रयासों से किसानों का विश्वास निरंतर बढ़ता रहेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोयंबटूर से जारी की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त

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रायपुर। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने धमतरी में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में 2,225 करोड़ रुपये की ग्रामीण सड़क परियोजनाओं, मखाना बोर्ड का विस्तार, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत किसानों को प्रत्यक्ष भुगतान और अनेक विकासपरक घोषणाओं का औपचारिक शुभारंभ किया। 


केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ के 25 लाख किसानों के खातों में पहुंचे 500 करोड़ रुपये

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोयंबटूर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त का देशव्यापी वितरण और छत्तीसगढ़ के 25 लाख किसानों के खातों में 500 करोड़ रुपये का सीधा हस्तांतरण इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा। हज़ारों किसानों और ग्रामीण प्रतिनिधियों की उपस्थिति में सम्पन्न इस समारोह ने राज्य के विकास पथ को नई दिशा प्रदान की।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने छत्तीसगढ़ को दी ग्रामीण सड़कों की सौगात, 2,225 करोड़ रु. लागत से बनेगी 2,500 कि.मी. सड़कें

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के धमतरी में राज्यस्तरीय समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, राज्य के कृषि मंत्री रामविचार नेताम, मंत्री दयालदास बघेल, टंकराम वर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana) के अंतर्गत 2,225 करोड़ रुपये की स्वीकृत ग्रामीण सड़क परियोजनाओं का दस्तावेज प्रस्तुत किया। इन परियोजनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ के लगभग 780 गाँव पहली बार पक्की सड़क से जुड़ेंगे और 2,500 किलोमीटर से अधिक नई ग्रामीण सड़कें निर्मित की जाएँगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता ने देश में बुनियादी ढांचे के विस्तार को नई दिशा दी है और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण आर्थिक गतिविधियों को सशक्त बनाता है।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने घोषणा की कि केंद्र सरकार द्वारा स्थापित किए गए राष्ट्रीय मखाना विकास बोर्ड में अब छत्तीसगढ़ को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से प्रदेश के किसानों को मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और राष्ट्रीय बाज़ार से जुड़ने का बड़ा अवसर प्राप्त होगा।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए प्रमुख राष्ट्रीय निर्णयों का उल्लेख किया, जिनमें अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का शांतिपूर्ण निष्कासन, महिला आरक्षण कानून का पारित होना और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने वाले निर्णय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी कदम भारत की विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक मील के पत्थर हैं।

केंद्रीय मंत्री  चौहान ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे समन्वित अभियान से राज्य में नक्सली हिंसा में उल्लेखनीय कमी आई है और अब नक्सलवाद “अंतिम चरण” में पहुँच चुका है। उन्होंने इसे प्रदेश के विकास, निवेश और ग्रामीण शांति की दिशा में बड़ा कदम बताया।

अपने संबोधन में उन्होंने छत्तीसगढ़ की वर्तमान राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य अब पुनः विकास की मुख्यधारा में तेजी से लौट रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के कारण कई केंद्रीय योजनाएँ प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सकीं, किन्तु अब लाभ सीधे पात्र किसानों, ग्रामीणों और महिलाओं तक पहुँच रहा है।

कार्यक्रम में हजारों किसानों एवं ग्रामीण नागरिकों की सहभागिता रही। इस अवसर पर विभिन्न योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र, कृषि किट, उपकरण और अन्य सामग्री वितरित की गई। कार्यक्रम स्थल पर कृषि तकनीक, ग्रामीण अवसंरचना, महिला स्व-सहायता समूहों, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना और आत्मनिर्भर भारत से संबंधित प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे किसानों और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक देखा।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा स्थापित इस राज्य की उपलब्धियों का उल्लेख किया और कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते समय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों की आय-वृद्धि, कृषि तकनीकी विस्तार, सिंचाई क्षमता, जैविक खेती और मिलेट मिशन जैसे विषयों पर केंद्रित महत्वपूर्ण वक्तव्य दिया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अन्नदाताओं का सम्मान और समृद्धि हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की किस्त जारी होने से राज्य के 24 लाख 70 हजार 640 किसानों को सीधा लाभ प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि 494 करोड़ रुपये की राशि किसानों, वनपट्टाधारी हितग्राहियों एवं विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) के परिवारों के बैंक खातों में अंतरित की गई है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने इस योजना में 2 लाख 75 हजार नए किसानों को पंजीकृत कर लाभार्थियों की संख्या बढ़ाई है।

धान खरीदी में छत्तीसगढ़ अग्रणी

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को अधिक मजबूत और किसान-हितैषी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी कर रही है तथा किसानों को 21 क्विंटल प्रति एकड़ तक बेचने की अनुमति दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हमारे किसानों के विश्वास और सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि पृथक छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के प्रारंभिक वर्षों में धान खरीदी केवल 5 लाख मीट्रिक टन हुआ करती थी, जो अब कई गुना बढ़ गई है।

कृषक उन्नति योजना का विस्तार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार ने कृषक उन्नति योजना का दायरा बढ़ाते हुए इसमें दलहन, तिलहन और मक्का फसलों को शामिल किया है। उन्होंने कहा कि धान फसल में लाभ ले चुके किसान यदि इन फसलों की खेती करेंगे तो उन्हें भी योजना का पूरा लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि योजना का लाभ रेगहा , बटाई, लीज तथा डूबान क्षेत्र के किसानों को भी दिया जा रहा है, जिससे कृषि आधारित आजीविका को सीधा बल मिल रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने यह भी बताया कि पिछले 22 महीनों में लगभग सवा लाख करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों के खातों में अंतरित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के दो सप्ताह के भीतर 13 लाख किसानों को 3,716 करोड़ रुपये बोनस के रूप में दिया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मिलेट मिशन को दिए गए बढ़ाए गए महत्व से छत्तीसगढ़ के परंपरागत कोदो-कुटकी, रागी उत्पादकों को बड़ा लाभ मिला है। उन्होंने जशपुर जिले में स्वसहायता समूहों द्वारा बनाए जा रहे ‘‘जशप्योर’’ ब्रांड के उत्पादों का उदाहरण देते हुए कहा कि ‘‘महुआ लड्डू, कोदो-कुटकी आधारित उत्पाद पूरे देश में लोकप्रिय हो रहे हैं।’’

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैविक खेती की अपार संभावनाओं वाला प्रदेश है, क्योंकि जनजातीय क्षेत्रों में रासायनिक खादों का न्यूनतम उपयोग हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2015 से लंबित 115 सिंचाई परियोजनाओं के लिए 2,800 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे लाखों किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी।उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (GST) में कटौती से ट्रैक्टरों और कृषि मशीनरी की खरीदी बढ़ी है।

उन्होंने कहा कि ‘‘कई व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल यह बताते हैं कि GST कटौती के बाद किसानों की खरीद क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।’’ कार्यक्रम का समापन किसानों के प्रति आभार और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण एवं कृषि विकास की निरंतरता बनाए रखने के संकल्प के साथ हुआ।

सीएससी अथवा नागरिक सेवा केन्द्र में जाकर पंजीयन करा सकते हैं : आधार कार्ड एवं बी-1, खसरा एवं मोबाईल नंबर होगा पंजीयन

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रायपुर। धान बेचने के लिए एग्रीस्टेक पोर्टल पर पंजीयन जरूरी है। चालू खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 हेतु धान उपार्जन के संबंध में राज्य शासन द्वारा भारत सरकार के एग्रीस्टेक पोर्टल के पंजीकृत कृषको को आधार मानकर धान खरीदी का निर्णय लिया है। पूर्व वर्ष 2024-25 तक एकीकृत किसान पंजीयन पोर्टल में पंजीकृत किसानों के इस वर्ष धान खरीदी हेतु कैरीफार्वड करने का कार्य सभी धान उपार्जन की समितियों में किया जा रहा है। जिसमें वही किसान जो एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीकृत है केवल उन्हीं का पंजीयन इस वर्ष हेतु मान्य किया गया है।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव द्वारा पंजीयन कार्य की पूर्णता हेतु निरंतर निगरानी एवं समीक्षा किया जा रहा है। कृषकों के एग्रीस्टेक पंजीयन में आने वाली समस्याओं का निराकरण पूर्ण कर लिया गया है। राजस्व अभिलेखों में संयुक्त खातेदार, नगरीय क्षेत्र में पंजीयन, वन अधिकारों की मान्यता पत्रक, इत्यादि सभी समस्याओं का निराकरण कर लिया गया है। जिला कलेक्टरों के मार्गदर्शन में निरंतर पंजीयन का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है।

एग्रीस्टेक पोर्टल के लिए बी-1, खसरा एवं मोबाईल आवश्यक

एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन हेतु कृषकों को किसी भी नजदीकि सी. एस.सी./नागरिक सेवा केन्द्र में जाकर आधार कार्ड एवं राजस्व अभिलेख बी-1, खसरा एवं मोबाईल के साथ पंजीयन कराना होता है। जिसके पश्चात् राजस्व विभाग द्वारा सत्यापन एवं अनुमोदन का कार्य किया जाता है, उपरोक्त पंजीयन के समय कृषक को ध्यान रखना चाहिए कि उसके राजस्व अभिलेख के खाता में दर्ज समस्त भूमियों का मिलान कर प्रविष्टि एग्रीस्टेक पोर्टल में की गई है। उपरोक्त भूमियों के एग्रीस्टेक पोर्टल में अपंजीयन की स्थिति में धान उपार्जन समितियों में धान विक्रय से वंचित हो सकते है।

नागरिक सेवा केन्द्र के माध्यम से एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन

सी.एस.सी./नागरिक सेवा केन्द्र के माध्यम से एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन का शतत् कार्य किया जा रहा है। पंजीयन में सहायता हेतु जिला प्रशासन की ओर से समस्त तहसीलों में पटवारियों, राजस्व निरीक्षकों, कृषि विस्तार अधिकारियों एवं खाद्य निरीक्षकों को निर्देशित किया गया है। जिला प्रशासन की ओर से निरंतर सभी कृषकों को आग्रह किया जा रहा है कि उपरोक्त पंजीयन कार्य में रूचि पूर्वक सहयोग करें एवं अंतिम समय के भाग-दौड़ एवं अनावश्यक परेशानियों से बचें।


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