Media24Media.com: #एग्रीस्टेक पोर्टल

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किसानों के लिए जरूरी खबर - जिनके खसरे एग्रीस्टेक पोर्टल आईडी में लिंक नहीं, वे समितियों में जाकर करवा सकते हैं अपडेट

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रायपुर। धान खरीदी के संबंध में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रावधान शासन द्वारा एग्री स्टेक पोर्टल में किया गया है। जिसके तहत एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीकृत एक से अधिक खसरे वाले ऐसे किसान जिनके सभी खसरों में से कुछ खसरे पोर्टल में उनके एग्रीस्टेक आईडी में प्रदर्शित नहीं हो रहे हैं या लिंक होना शेष रह गए हैं, ऐसे खसरों की पहचान कर समितिवार सूची बनाई गई है, तथा उसे समितियों के बाहर चस्पा किया गया है। 

किसानों से आग्रह किया जाता है कि वे समितियों में जाकर अपने छूटे हुए खसरों का मिलान कर उसे पोर्टल में लिंक करवा सकते हैं। इसके लिए किसान समितियों के किसान सहायता केंद्र में सुबह 09 से 05 तक समितियों में जाकर वहां के ऑपरेटर अथवा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। खाद्य अधिकारी कबीरधाम ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान खरीदी हेतु भारत सरकार, कृषि मंत्रालय के एग्रीस्टेक पोर्टल में किसान पंजीयन अनिवार्य किया गया है।

एग्रीस्टेक पोर्टल में किसान को प्राप्त फार्मर आईडी के साथ उनके फॉर्म आई डी (खसरे) को लिंक किया जाना है। वर्तमान में एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीकृत कृषक के ऐसे खसरे जो यूनीफाइड फार्मर पोर्टल में पंजीकृत थे वो कैरी फारवर्ड हो गए है परंतु वो समस्त खसरे एग्रीस्टेक में फार्मर आईडी के साथ लिंक नही है, उनमें से कुछ खसरे लिंक होने रह गए हैं। इन समस्त छुटे हुए खसरों को एग्रीस्टेक पोर्टल में माध्यम से जोड़ा जाना है ताकि समिति स्तर पर ये सभी खसरे खरीदी हेतु उपलब्ध हो सके। कबीरधाम जिले पंजीकृत किसानों के ऐसे 34 हजार 566 खसरे हैं जो किसानों के एग्री स्टेक आईडी में लिंक होने शेष हैं। इन्हें लिंक कराने की प्रक्रिया किसान स्वयं समिति में जाकर करवा सकते हैं। इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित है।


सीएससी अथवा नागरिक सेवा केन्द्र में जाकर पंजीयन करा सकते हैं : आधार कार्ड एवं बी-1, खसरा एवं मोबाईल नंबर होगा पंजीयन

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रायपुर। धान बेचने के लिए एग्रीस्टेक पोर्टल पर पंजीयन जरूरी है। चालू खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 हेतु धान उपार्जन के संबंध में राज्य शासन द्वारा भारत सरकार के एग्रीस्टेक पोर्टल के पंजीकृत कृषको को आधार मानकर धान खरीदी का निर्णय लिया है। पूर्व वर्ष 2024-25 तक एकीकृत किसान पंजीयन पोर्टल में पंजीकृत किसानों के इस वर्ष धान खरीदी हेतु कैरीफार्वड करने का कार्य सभी धान उपार्जन की समितियों में किया जा रहा है। जिसमें वही किसान जो एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीकृत है केवल उन्हीं का पंजीयन इस वर्ष हेतु मान्य किया गया है।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव द्वारा पंजीयन कार्य की पूर्णता हेतु निरंतर निगरानी एवं समीक्षा किया जा रहा है। कृषकों के एग्रीस्टेक पंजीयन में आने वाली समस्याओं का निराकरण पूर्ण कर लिया गया है। राजस्व अभिलेखों में संयुक्त खातेदार, नगरीय क्षेत्र में पंजीयन, वन अधिकारों की मान्यता पत्रक, इत्यादि सभी समस्याओं का निराकरण कर लिया गया है। जिला कलेक्टरों के मार्गदर्शन में निरंतर पंजीयन का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है।

एग्रीस्टेक पोर्टल के लिए बी-1, खसरा एवं मोबाईल आवश्यक

एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन हेतु कृषकों को किसी भी नजदीकि सी. एस.सी./नागरिक सेवा केन्द्र में जाकर आधार कार्ड एवं राजस्व अभिलेख बी-1, खसरा एवं मोबाईल के साथ पंजीयन कराना होता है। जिसके पश्चात् राजस्व विभाग द्वारा सत्यापन एवं अनुमोदन का कार्य किया जाता है, उपरोक्त पंजीयन के समय कृषक को ध्यान रखना चाहिए कि उसके राजस्व अभिलेख के खाता में दर्ज समस्त भूमियों का मिलान कर प्रविष्टि एग्रीस्टेक पोर्टल में की गई है। उपरोक्त भूमियों के एग्रीस्टेक पोर्टल में अपंजीयन की स्थिति में धान उपार्जन समितियों में धान विक्रय से वंचित हो सकते है।

नागरिक सेवा केन्द्र के माध्यम से एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन

सी.एस.सी./नागरिक सेवा केन्द्र के माध्यम से एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन का शतत् कार्य किया जा रहा है। पंजीयन में सहायता हेतु जिला प्रशासन की ओर से समस्त तहसीलों में पटवारियों, राजस्व निरीक्षकों, कृषि विस्तार अधिकारियों एवं खाद्य निरीक्षकों को निर्देशित किया गया है। जिला प्रशासन की ओर से निरंतर सभी कृषकों को आग्रह किया जा रहा है कि उपरोक्त पंजीयन कार्य में रूचि पूर्वक सहयोग करें एवं अंतिम समय के भाग-दौड़ एवं अनावश्यक परेशानियों से बचें।


भारत सरकार द्वारा अधिप्राप्ति सुधारों पर राज्य स्तरीय कार्यशाला सम्पन्न

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रायपुर- खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, भारत सरकार द्वारा खाद्यान्न उपार्जन प्रणाली में दक्षता, पारदर्शिता तथा तकनीकी समावेश को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से अधिप्राप्ति सुधारों पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन नवा रायपुर में किया गया, जिसमें प्रदेश के खाद्य, सहकारिता एवं कृषि विभाग के अधिकारी शामिल हुए। कार्यशाला के मुख्य अतिथि भारतीय खाद्य निगम के सीएमडी श्री आशुतोष अग्निहोत्री, भारत सरकार की संयुक्त सचिव सुश्री शिखा तथा छत्तीसगढ़ की खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यशाला का शुभारंभ किया गया।

इस अवसर पर भारत सरकार के अधिकारियों द्वारा कस्टम मिलिंग में नवाचार, 10 प्रतिशत ब्रोकन चावल के संबंध में नवीन निर्देश, राइस मिलों के संयुक्त भौतिक सत्यापन की नई मानक संचालन प्रक्रिया, सेंट्रल फूड प्रोक्योरमेंट पोर्टल तथा सेंट्रल फूड स्टोरेज पोर्टल में खाद्यान्न के उपार्जन व वितरण जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई, जिसमें विभिन्न जिलों के जिला कलेक्टर, खाद्य अधिकारी एवं जिला विपणन अधिकारी भी शामिल हुए।

भारत सरकार की संयुक्त सचिव  सुश्री शिखा ने राइस मिलों में ब्रोकन चावल के संबंध में शासन स्तर पर जारी पॉलिसी की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में 25 प्रतिशत तक के ब्रोकन चावल को यांत्रिक उन्नयन के माध्यम से 10 प्रतिशत तक लाने और शेष ब्रोकन चावल को खुले बाजार में विक्रय करने की योजना लागू की जाएगी। भारत सरकार के मार्गदर्शन में भारतीय खाद्य निगम और छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग के समन्वय से सेंट्रल पूल अंतर्गत चावल उपार्जन की गति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसके तहत जून माह में प्रदेश को चावल के निराकरण हेतु 188 रैक उपलब्ध कराए गए, जिससे लगभग 6 लाख मीट्रिक टन चावल का भंडारण संभव हुआ है, और एफसीआई के माध्यम से प्रदेश में उपार्जित चावल कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत वितरित किया जा रहा है। 

कार्यशाला में बताया गया कि कस्टम मिलिंग में पारदर्शिता तथा वर्तमान व्यवस्था एवं नीतिगत सुधार हेतु समय-समय पर संयुक्त भौतिक सत्यापन की मानक संचालन प्रक्रिया को अद्यतन किया गया है तथा अनिवार्य संयुक्त भौतिक सत्यापन हेतु राइस मिलों के चयन के लिए स्वचालन एवं सॉफ्टवेयर आधारित पद्धति अपनाने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश के लगभग 25 लाख किसान 2,739 उपार्जन केंद्रों में समर्थन मूल्य पर धान बेचते हैं, और इन केंद्रों के अधोसंरचनात्मक सुधार पर भारत एवं राज्य सरकार सतत निगरानी रख रही है, जिसके लिए पीसीएसएपी सॉफ्टवेयर के माध्यम से उपार्जन केंद्रों में किए गए सुधार की प्रविष्टि करने संबंधी प्रशिक्षण दिया गया। धान उपार्जन में किए गए अतिरिक्त व्यय का दावा भारत सरकार को ऑनलाइन स्कैन मॉड्यूल के जरिए भेजने की प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई, जिससे दावों का शीघ्र निपटारा संभव होगा, साथ ही धान उपार्जन एवं चावल भंडारण हेतु रूट ऑप्टिमाइजेशन पर भी चर्चा की गई। भारत सरकार के अधिकारियों ने अतिरिक्त मिनिमम थ्रेशहोल्ड पैरामीटर का शत-प्रतिशत अनुपालन करने पर प्रदेश की सराहना की। 

प्रदेश में धान उपार्जन एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली में किए गए नवाचारों, चावल उत्सव, टोकन तुहर हाथ तथा बस्तर क्षेत्र में संचालित नियद नेल्लानार योजना की जानकारी खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने भारत सरकार के अधिकारियों को जानकारी दी। आगामी खरीफ वर्ष में धान उपार्जन हेतु किसानों के लिए एग्रीस्टेक पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य किया गया है, जिससे फर्जी खरीदी पर नियंत्रण होगा, और इस संबंध में जिला कलेक्टरों को आगामी माह में शत-प्रतिशत पंजीयन कराने हेतु प्रशिक्षित किया गया। कार्यशाला के समापन अवसर पर भारत सरकार के अधिकारियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर आभार व्यक्त किया गया। 

कार्यशाला में श्री दलजीत सिंह, कार्यकारी निदेशक, अधिप्राप्ति, भा.खा.नि., डॉ. अश्विनी कुमार गुप्ता, कार्यकारी निदेशक, पश्चिमी अंचल, श्री मातेश्वरी प्रसाद मिश्रा, भारत सरकार द्वारा भी आवश्यक प्रस्तुतिकरण एवं मार्गदर्शन दिया गया। इस अवसर पर विपणन संघ एवं नागरिक आपूर्ति निगम की प्रबंध संचालक श्रीमती किरण कौशल, संचालक खाद्य श्री कार्तिकेय गोयल, पंजीयक सहकारिता श्री कुलदीप शर्मा, महाप्रबंधक भा.खा.नि. श्री देवेश यादव सहित अन्य अधिकारी  उपस्थित थे।


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