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बिहान योजना से बदली सिवनी की रूखमणी पाण्डेय की जिंदगी, बनीं ‘लखपति दीदी’ और महिला आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ अंतर्गत लखपति दीदी पहल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में उल्लेखनीय परिणाम दे रही है। इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले के विकासखंड बलौदा अंतर्गत ग्राम सिवनी निवासी रूखमणी पाण्डेय ने आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है। कभी पूर्णतः घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली रूखमणी पाण्डेय आज प्रतिमाह 15 से 20 हजार रुपये की नियमित आय अर्जित कर ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं।

कोरोना काल एवं लॉकडाउन के दौरान पशुपालन व्यवसाय में हुए आर्थिक नुकसान के बाद परिवार की आय का प्रमुख स्रोत प्रभावित हुआ, जिससे आर्थिक चुनौतियां बढ़ीं। इस कठिन समय में रूखमणी पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने का संकल्प लिया।

आरबीके दीदी के सहयोग से ग्राम सिवनी में महिलाओं को संगठित कर उन्होंने ‘जय अम्बे महिला स्व सहायता समूह’ का गठन किया। 25 फरवरी 2020 को गठित यह समूह उन्नति महिला ग्राम संगठन सिवनी तथा बिहान महिला क्लस्टर संगठन कुरदा से संबद्ध है। समूह के माध्यम से बैंक लिंकेज के तहत एक लाख रुपये का ऋण तथा अतिरिक्त समूह ऋण प्राप्त कर उन्होंने पारंपरिक पशुपालन व्यवसाय को पुनः प्रारंभ किया। इसके साथ ही आचार, पापड़, मसाला एवं अगरबत्ती निर्माण जैसी विविध आजीविका गतिविधियों को अपनाया, जिससे उनकी आय में सतत वृद्धि हुई।

आज रूखमणी पाण्डेय न केवल अपनी पारिवारिक आवश्यकताओं को स्वयं पूरा कर रही हैं, बल्कि स्व सहायता समूह की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार एवं आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रेरित कर रही हैं। उनके प्रयासों से गांव की अनेक महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रही हैं।

रूखमणी पाण्डेय ने कहा कि ‘लखपति दीदी पहल’ ने उन्हें आत्मविश्वास, पहचान और सम्मान प्रदान किया है। उन्होंने इसके लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उनकी सफलता यह प्रमाणित करती है कि प्रभावी मार्गदर्शन, समूह की सामूहिक शक्ति और सरकारी योजनाओं के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल कर समाज में सशक्त भूमिका निभा सकती हैं।

छत्तीसगढ़ की दीदियां बनीं आत्मनिर्भरता की ब्रांड एंबेसडर : लखपति दीदियों की सफलता हजारों महिलाओं के लिए बनेगी प्रेरणा – मुख्यमंत्री साय

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रायपुर। महिलाएं आज जीवन के हर क्षेत्र में सफलता के नए आयाम गढ़ रही हैं। तकनीक ने पूरी दुनिया के उत्पादों को फिंगरटिप्स पर ला दिया है और अब डिजिटल माध्यम से वैश्विक बाजार तक पहुँचना संभव हो गया है। इसी उद्देश्य से बिहान की दीदियों को डिजिटल प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि छत्तीसगढ़ के उत्पाद देश और दुनिया के बाजारों तक पहुँच सकें। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के शहीद स्मारक भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा पॉलिसी वॉच द्वारा आयोजित बिहान दीदियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नवरात्रि का पर्व हमारी संस्कृति में नारी शक्ति के सम्मान और पूजन का प्रतीक है। जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास माना जाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाएं इतिहास रच रही हैं। बिहान की बहनों की कामयाबी हमें गर्व से भर देती है। छत्तीसगढ़ की दीदियां अब आत्मनिर्भरता की ब्रांड एम्बेसडर बन रही हैं। लखपति दीदियां सपनों को नए पंख दे रही हैं और आज उन्हें डिजिटली सक्षम बनाकर उनके उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यदि हम संकल्प लेकर आगे बढ़ें तो सफलता निश्चित है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। वर्ष 2027 तक देशभर में 3 करोड़ और छत्तीसगढ़ में 8 लाख महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि जशपुर जैसे जिलों में महुआ आधारित उत्पाद तैयार हो रहे हैं, जिन्हें ‘जशप्योर’ ब्रांड के रूप में राष्ट्रीय पहचान मिली है। कोरोना काल में महुआ से सैनिटाइज़र बनाकर महिलाओं ने अपनी क्षमता और नवाचार का परिचय दिया था।

मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद मिली है। आत्मनिर्भरता का मार्ग संकल्प और प्रयास से ही संभव है। महिला स्व-सहायता समूहों के नवाचार और परिश्रम से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार महिलाओं को और अधिक सशक्त बनाने के लिए हरसंभव सहयोग करेगी।

महिलाओं ने साझा किया लखपति बनने का शानदार सफर

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लखपति दीदी बनने की प्रेरक कहानियाँ सुनीं। बलरामपुर जिले के तारकेश्वरपुर की पूनम गुप्ता ने बताया कि सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। प्रशासन के सहयोग से किराना दुकान खोली, आटा चक्की स्थापित की और अब पिकअप व ट्रैक्टर खरीदकर व्यवसाय को विस्तार दिया है।

गरियाबंद की हेमिन साहू ने बताया कि एक समय सब्जी खरीदने तक में कठिनाई होती थी। बिहान से लोन लेकर आचार-पापड़ का व्यवसाय शुरू किया, जो अब राजिम में दुकान तक पहुँच चुका है। आज उन्हें प्रतिदिन लगभग 4 हजार रुपए की आय हो रही है। हाल ही दिल्ली के सरस मेले में उन्होंने 2 लाख 31 हजार रुपए की बिक्री की।

गीता वैष्णव ने भावुक होकर कहा कि पहले उन्हें 10 रुपए के लिए हाथ फैलाना पड़ता था। लेकिन बिहान के माध्यम से मां वैभवलक्ष्मी स्व-सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने आचार-पापड़ व्यवसाय शुरू किया। अब वे अपनी कमाई से बेटे को सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनाने का सपना पूरा कर रही हैं।

रायपुर की गीता वर्मा ने बताया कि वैभव स्व-सहायता समूह से जुड़कर हल्दी-मसाले का व्यवसाय शुरू किया और आज हर महीने 15 से 20 हजार रुपए की आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी के लखपति दीदी बनाने के संकल्प ने उनकी और लाखों बहनों की जिंदगी बदल दी है।

मुख्यमंत्री ने बिहान दीदियों के स्टॉलों का किया निरीक्षण

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शहीद स्मारक भवन परिसर में पॉलिसी वॉच इंडिया फाउंडेशन द्वारा लगाए गए बिहान दीदियों के स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से चर्चा कर उनके उत्पादों और आजीविका गतिविधियों की जानकारी ली।

इस दौरान उन्होंने भारत माता संकुल, डोंगरगांव की महिलाओं से साहीवाल और गिर गाय के A2 मिल्क से निर्मित घी की खरीदारी की। समूह की दिनेश्वरी साहू ने बताया कि उनके पास 25 से 30 गाएं हैं, जिनसे डेयरी उत्पाद तैयार कर महिलाएं अच्छी आय कमा रही हैं।

जालाग्राम संगठन, सेरीखेड़ी की श्रीमती खिलेश्वरी मधुकर ने बताया कि उनके समूह की महिलाएं फिनायल, धूपबत्ती, मोमबत्ती, कुकीज़ और ग्लिसरीन सोप बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

वहीं जय माँ भवानी स्व-सहायता समूह, मुंदगांव (डोंगरगढ़) की लक्ष्मी गंधर्व ने मुख्यमंत्री को अगरवुड का पौधा भेंट किया और बताया कि अगरवुड से बनने वाले तेल की कीमत लाखों रुपए होती है। इसका उपयोग अगरबत्ती, परफ्यूम और एसेंशियल ऑयल निर्माण में किया जाता है।

राष्ट्रीय पहचान की ओर बिहान की दीदियां

उल्लेखनीय है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और पॉलिसी वॉच के संयुक्त तत्वाधान में बिहान की दीदियों के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित की गई है। इसके अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाएं अपने उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्लेटफ़ॉर्म पर बेच सकेंगी। उन्हें प्रोडक्ट की ब्रांडिंग, कास्टिंग और पैकेजिंग जैसी बारीकियों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारीक सिंह तथा फ्लिपकार्ट के मुख्य कॉरपोरेट अधिकारी रजनीश कुमार सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।


रणनीति, शक्ति और आत्मनिर्भरता: 21वीं सदी के लिए भारत की सुरक्षा दृष्टि

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बलों से पारंपरिक युद्ध की अवधारणाओं से आगे बढ़कर सूचना, वैचारिक, पारिस्थितिक और जैविक युद्ध जैसी अदृश्य चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्क और तैयार रहने का आह्वान किया। 16 सितम्बर 2025 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में आयोजित कंबाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस 2025 को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने अस्थिर वैश्विक व्यवस्था, क्षेत्रीय अस्थिरता और उभरते सुरक्षा परिदृश्य के मद्देनज़र निरंतर वैश्विक परिवर्तनों का आकलन करने और उनके देश की सुरक्षा प्रणाली पर प्रभाव को समझने की आवश्यकता पर बल दिया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्ध की प्रकृति लगातार बदल रही है और हालिया वैश्विक संघर्षों ने “तकनीकी रूप से सक्षम” सैन्य बल की प्रासंगिकता को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा, “आज के युद्ध इतने अचानक और अप्रत्याशित होते हैं कि इसकी अवधि का अनुमान लगाना कठिन है। यह दो महीने, एक साल या पाँच साल तक चल सकता है। हमें हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी क्षमता पर्याप्त बनी रहे।”

रक्षा मंत्री ने भारत के रक्षा क्षेत्र को आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताओं का संगम बताते हुए कमांडरों से सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सुदर्शन चक्र” के विज़न को साकार करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि इस परियोजना की समीक्षा और यथार्थवादी कार्य योजना तैयार करने के लिए समिति गठित की गई है। साथ ही उन्होंने पाँच वर्षीय मध्यम अवधि की और दस वर्षीय दीर्घकालिक योजना बनाने का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि भारत का रक्षा क्षेत्र आधुनिकीकरण, संचालनात्मक तत्परता, तकनीकी श्रेष्ठता और विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता पर आधारित है। रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री द्वारा 15 सितम्बर को सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में दिए गए “JAI – संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार” के मंत्र पर जोर दिया। उन्होंने भविष्य उन्मुख तकनीक विकसित करने में उद्योग और शिक्षाविदों के साथ गहन सहयोग का आह्वान किया और रक्षा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में निजी क्षेत्र की भूमिका को बढ़ाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए सशस्त्र बलों के बीच तथा अन्य एजेंसियों के साथ संयुक्तता और तालमेल आवश्यक है। उन्होंने त्रि-सेवा लॉजिस्टिक्स नोड्स और त्रि-सेवा लॉजिस्टिक प्रबंधन एप्लिकेशन के निर्माण का उल्लेख किया, जो रक्षा क्षेत्र में एकीकरण और संयुक्तता को बढ़ावा देंगे। उन्होंने नागरिक-सैन्य सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया।

राजनाथ सिंह ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने सिद्ध किया है कि शक्ति, रणनीति और आत्मनिर्भरता – यही तीन स्तंभ हैं जो भारत को 21वीं सदी में आवश्यक शक्ति प्रदान करेंगे। आज हमारे पास स्वदेशी प्लेटफॉर्म और प्रणालियों तथा हमारे सैनिकों के साहस के बल पर किसी भी चुनौती का सामना करने की क्षमता है। यही आत्मनिर्भर भारत की असली ताकत है।” उन्होंने सशस्त्र बलों की “उत्कृष्ट कार्यक्षमता” और “असाधारण पेशेवराना क्षमता” की सराहना की।

रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता कोई नारा नहीं, बल्कि आवश्यकता है और यह सामरिक स्वायत्तता की कुंजी है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता आर्थिक विकास को बढ़ावा दे रही है, रोजगार पैदा कर रही है और शिपयार्ड, एयरोस्पेस क्लस्टर तथा डिफेंस कॉरिडोर की क्षमता बढ़ा रही है। यही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का गुणक प्रभाव है।

उन्होंने रक्षा खरीद मैनुअल 2025 को मंजूरी देने की जानकारी दी, जिसका उद्देश्य खरीद प्रक्रिया को सरल बनाना है। उन्होंने यह भी बताया कि रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 में संशोधन किया जा रहा है ताकि प्रक्रियाएँ और सरल हों, विलंब कम हो और सशस्त्र बलों को शीघ्र संचालनात्मक ताकत मिल सके।

सम्मेलन में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, पूर्व सैनिक कल्याण सचिव डॉ. नितेन चंद्र, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव एवं डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कमत, वित्तीय सलाहकार (रक्षा सेवाएँ) डॉ. मयंक शर्मा तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

रेशम की डोर से बुनी आत्मनिर्भरता –दंतेवाड़ा की महिलाओं को मिली नई पहचान

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 रायपुर : विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व एवं उनके मार्गदर्शन में कृषि, उद्यानिकी और मत्स्य पालन की तरह ही रेशम विभाग भी हितग्राहियों की आजीविका सशक्त करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विभाग की योजनाओं से लाभान्वित होकर जिले के स्व-सहायता समूह आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहे हैं।

रेशम विभाग द्वारा हितग्राही समूहों को स्वस्थ रेशम कीट अंडे उपलब्ध कराए जाते हैं। इन अंडों से हैचिंग से लेकर कोसा निर्माण तक की संपूर्ण प्रक्रिया हितग्राही स्वयं करते हैं। तत्पश्चात तैयार कोसों के विक्रय से उन्हें आर्थिक आमदनी प्राप्त होती है।

इसी क्रम में शासकीय रेशम केन्द्र, चितालंका की महिला स्व-सहायता समूह ने मलबरी रेशम कीट पालन का सफल संचालन कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

इस वर्ष इन  टसर रेशम कीट पालकों ने तेरह  सौ स्वस्थ अंडों से 45 दिनों की अवधि में 45 हजार नग डाबा कोसा का उत्पादन किया गया। इन के विक्रय से समूह को 72 हजार 300 सौ रुपए की आय प्राप्त हुई। यह प्रथम फसल से हुई आमदनी समूह की महिलाओं के उत्साह और आत्मविश्वास को दोगुना कर रही है।

अब समूह की महिलाएँ इस वित्तीय वर्ष में दूसरी एवं तीसरी फसल लेने के लिए पूरी तरह तैयार और प्रेरित हैं। यह पहल दंतेवाड़ा जिले में आजीविका संवर्धन और महिला सशक्तिकरण का मजबूत उदाहरण बनकर उभर रही है।


लखपति दीदी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं गांव की महिलाएं

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रायपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर खेती के नए तौर-तरीके सीख रही हैं। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा विकासखंड के छोटे से गांव विशेषरा की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं। जहां पहले ये महिलाएं सिर्फ घर के कार्यों तक सीमित थीं, वहीं अब वे सब्जी बाड़ी के जरिये आर्थिक रूप से सक्षम बन कर लखपति दीदी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

गंगा महिला स्व-सहायता समूह ने पारंपरिक धान की खेती से हटकर सब्जी उत्पादन का रास्ता चुना और समूह की सदस्य श्रीमती गायत्री वाकरे ने जानकारी दी कि शुरुआत में महिलाओं ने छोटे पैमाने पर सब्जी की खेती शुरू की थी, लेकिन आज वे करीब 2 एकड़ भूमि में सब्जियों की खेती कर रही हैं।

समूह की महिला गायत्री वाकरे ने बताया कि महिलाएं ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर मौसम आधारित सब्जियों का उत्पादन कर रही हैं। वर्तमान में वे बरबट्टी, मटर और लौकी की खेती कर रही हैं, जिन्हें पहले स्थानीय बाजार में बेचा जाता था, लेकिन अब वे पेंड्रा सब्जी मंडी तक अपने उत्पाद पहुँचा रही हैं। 

महिलाओं ने बताया कि बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें न सिर्फ खेती के तकनीकी ज्ञान मिला, बल्कि बैंक से ऋण लेना, कृषि योजना बनाना, विपणन और परिवहन प्रबंधन जैसे आवश्यक पहलुओं की भी जानकारी मिली। इस कार्य ने उन्हें आत्मविश्वासी बनाया है और वे अब अपने परिवार की आय में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। समूह की सभी महिलाओं को महतारी वंदन योजना का भी लाभ मिल रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक स्थिरता मिली है और वे अपने कार्य को और बेहतर तरीके से कर पा रही हैं। महिलाओं ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे कार्यों को प्रेरणादायक बताया।


भारतीय नौसैनिक युद्धपोत पोर्ट मोरेस्बी पहुँचा, पापुआ न्यू गिनी के 50वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में होगा शामिल

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दिल्ली- भारतीय नौसेना का स्वदेश निर्मित पनडुब्बी रोधी युद्धपोत आईएनएस कदमत आज पोर्ट मोरेस्बी पहुँचा, ताकि पापुआ न्यू गिनी के 50वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग ले सके। यह सद्भावना यात्रा भारत और पापुआ न्यू गिनी के बीच बढ़ती मित्रता और समुद्री साझेदारी का प्रतीक है। यह यात्रा भारत की "एक्ट ईस्ट नीति" के तहत प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ संबंध मजबूत करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समावेशी विकास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इस यात्रा के प्रमुख आकर्षणों में आईएनएस कदमत का पापुआ न्यू गिनी के आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेना शामिल है, जिससे दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और विरासत का सम्मान किया जाएगा। जहाज़ का दल पापुआ न्यू गिनी डिफेंस फोर्स (PNGDF) के साथ समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में सहयोग की संभावनाओं का अन्वेषण करेगा। इसके अतिरिक्त, जहाज़ पर पापुआ न्यू गिनी के चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस फ़ोर्सेस का स्वागत किया जाएगा, ताकि भारतीय नौसेना की ‘आत्मनिर्भरता’ की यात्रा को प्रदर्शित किया जा सके।

यह दौरा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2023 में पापुआ न्यू गिनी की ऐतिहासिक यात्रा के बाद हो रहा है, जिसमें दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने, विकासात्मक साझेदारी का विस्तार करने और रक्षा सहयोग को बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी। भारतीय नौसेना अपनी कूटनीतिक भूमिका निभाते हुए ‘मित्रता के सेतु’ बनाने के संकल्प पर दृढ़ है, जो सद्भावना यात्राओं, क्षमता निर्माण पहलों और सामूहिक समुद्री प्रयासों के माध्यम से राष्ट्रों को जोड़ती है।



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