Media24Media.com: रूस में नौकरी का सपना पड़ा भारी! रायपुर का युवक जेल में बंद होने का दावा, रूसी सेना में भर्ती के दबाव का परिवार ने लगाया आरोप

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रूस में नौकरी का सपना पड़ा भारी! रायपुर का युवक जेल में बंद होने का दावा, रूसी सेना में भर्ती के दबाव का परिवार ने लगाया आरोप

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने विदेश में नौकरी करने का सपना देखने वाले युवाओं और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।

रायपुर के रहने वाले 38 वर्षीय टिकेश्वर साहू बेहतर रोजगार की तलाश में रूस गए थे। उन्हें उम्मीद थी कि विदेश में अच्छी नौकरी मिलेगी, परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और बच्चों का भविष्य बेहतर होगा। लेकिन अब परिवार का दावा है कि टिकेश्वर रूस में जेल में बंद हैं और उन पर रूसी सेना में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा है।

परिवार ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और रायपुर पुलिस कमिश्नर से मदद की गुहार लगाई है। उनकी मांग है कि केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय हस्तक्षेप करें, ताकि टिकेश्वर की सुरक्षित भारत वापसी हो सके।

कैसे मिला रूस में नौकरी का ऑफर?

परिवार के मुताबिक, टिकेश्वर साहू रायपुर में एक स्टोर मैनेजर के रूप में काम करते थे। इसी दौरान उन्हें टेलीग्राम ऐप के माध्यम से रूस में डिलीवरी एजेंट की नौकरी का प्रस्ताव मिला।

उन्हें अच्छी कमाई का भरोसा दिलाया गया था। साथ ही कहा गया था कि शुरुआत में टूरिस्ट वीजा पर रूस जाना होगा और नौकरी तय होने के बाद वीजा को वर्क वीजा में बदल दिया जाएगा।

बेहतर भविष्य की उम्मीद में टिकेश्वर ने रूस जाने का फैसला किया। वे 7 सितंबर को रायपुर से दिल्ली के लिए रवाना हुए और 8 सितंबर को रूस पहुंच गए। पहले वे मॉस्को पहुंचे और फिर वहां से वोल्गोग्राद गए।

परिवार के अनुसार, रूस पहुंचने पर नौकरी दिलाने का वादा करने वाले व्यक्ति ने उन्हें शुरुआती खर्च के लिए 5 हजार रूसी रूबल भी दिए थे।

16 सितंबर के बाद अचानक टूट गया संपर्क

परिवार का कहना है कि 16 सितंबर को टिकेश्वर से आखिरी बार सामान्य रूप से फोन पर बात हुई थी। इसके बाद उनका मोबाइल फोन बंद हो गया।

शुरुआत में परिवार को लगा कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण नेटवर्क या संपर्क में परेशानी हो सकती है। लेकिन कुछ दिनों बाद परिवार के मोबाइल पर रूस के एक नंबर से हाथ से लिखे पत्र की तस्वीर आई।

परिवार ने उस पत्र की लिखावट को टिकेश्वर की लिखावट के रूप में पहचाना। परिजनों के मुताबिक, पत्र में टिकेश्वर ने लिखा था कि उन्हें प्रतिबंधित पदार्थों से जुड़े एक मामले में फंसाया जा रहा है और रूसी सेना में शामिल होने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

पांच मिनट की वीडियो कॉल में रो पड़े टिकेश्वर

परिवार ने उस रूसी नंबर पर कई बार संपर्क करने की कोशिश की। काफी अनुरोध के बाद टिकेश्वर को परिवार से करीब पांच मिनट की वीडियो कॉल पर बात करने की अनुमति मिली।

परिवार के एक सदस्य के अनुसार, वीडियो कॉल के दौरान टिकेश्वर काफी परेशान थे और रो रहे थे। उन्होंने बताया कि वे जेल में हैं और उन पर रूसी सेना में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा है।

परिजनों का आरोप है कि टिकेश्वर पर ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने का दबाव भी बनाया जा रहा है, जिनसे यह दिखाया जा सके कि वे अपनी इच्छा से रूसी सेना में शामिल हो रहे हैं।

हालांकि, रूस में उन पर लगे आरोपों और सेना में भर्ती के दबाव की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। फिलहाल ये बातें परिवार के आरोपों और टिकेश्वर से हुए कथित संवाद पर आधारित हैं।

टिकेश्वर की सेहत को लेकर परिवार परेशान

इस पूरे मामले में परिवार को उनकी जान और स्वास्थ्य की भी चिंता है।

परिजनों के मुताबिक, टिकेश्वर को थायरॉइड की समस्या है और उन्हें नियमित रूप से दवाइयां लेनी पड़ती हैं। परिवार का आरोप है कि हिरासत के दौरान उन्हें जरूरी दवाइयां नहीं मिल रही हैं। उनके साथ मारपीट किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।

परिवार ने बताया कि 22 अक्टूबर को रूस में नियुक्त वकील ने उन्हें जानकारी दी थी कि ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण टिकेश्वर को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।

इसके बाद से परिवार को उनकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति और रिहाई की संभावित तारीख के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है।

रूस में वकील किया, डेढ़ लाख रुपये खर्च

टिकेश्वर को वापस लाने की कोशिश में परिवार ने रूस में एक वकील की मदद ली है। परिवार का कहना है कि अब तक वकील की फीस के रूप में करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

परिवार की आर्थिक स्थिति भी लगातार प्रभावित हो रही है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी चिंता किसी तरह टिकेश्वर को सुरक्षित भारत वापस लाने की है।

मुख्यमंत्री और पुलिस कमिश्नर से लगाई गुहार

टिकेश्वर की पत्नी मनोरमा साहू ने 4 नवंबर को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और रायपुर पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला को पत्र लिखकर मदद मांगी।

उन्होंने मामले की जांच कराने, कूटनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप करने, टिकेश्वर को कानूनी सहायता और जरूरी चिकित्सा सुविधा दिलाने के साथ उनकी सुरक्षित वापसी की मांग की है।

परिवार ने नया रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय, राज्य सचिवालय और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी संपर्क किया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री के शिकायत पोर्टल पर भी आवेदन दिया गया है।

पुलिस ने क्या कहा?

इस मामले में रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि परिवार की शिकायत प्राप्त हो गई है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत शिकायत को राज्य के गृह विभाग भेजा जाएगा और वहां से आगे की कार्रवाई के लिए विदेश मंत्रालय को भेजा जाएगा।

परिवार का कहना है कि उन्होंने भारतीय और रूसी दूतावासों को भी ईमेल भेजे हैं। भारतीय दूतावास की ओर से जवाब मिला है कि मामले की जानकारी जुटाई जा रही है और आगे अपडेट दिया जाएगा। परिवार के अनुसार, रूसी दूतावास से अब तक जवाब नहीं मिला है।

छत्तीसगढ़ से रूस गए एक अन्य युवक का मामला भी आया था सामने

गौरतलब है कि इससे पहले बिलासपुर जिले के 21 वर्षीय विनीत कुमार दुबे के रूस में लापता होने का मामला भी सामने आया था। उनके परिवार ने भी नौकरी के नाम पर रूस बुलाए जाने और वहां फंसने की आशंका जताई थी।

दोनों मामलों में परिवारों ने बताया कि युवकों को टेलीग्राम के माध्यम से नौकरी का प्रस्ताव मिला था और विदेश जाने से पहले उन्हें काम की वास्तविक प्रकृति की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी।

इन घटनाओं ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाले संभावित फर्जीवाड़े और युवाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

अब सबसे बड़ा सवाल—टिकेश्वर साहू की सुरक्षित वापसी कब होगी?

फिलहाल टिकेश्वर का परिवार सरकार और विदेश मंत्रालय से जल्द हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहा है। परिवार चाहता है कि रूस में उनकी वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाए, उन्हें जरूरी चिकित्सा सुविधा मिले और कानूनी प्रक्रिया के जरिए सुरक्षित भारत वापस लाया जाए।

रायपुर का यह परिवार अब अपने बेटे, पति और पिता की सुरक्षित वापसी की आस लगाए बैठा है।


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