Media24Media.com: दशहरा पर AK-47 से फायरिंग करने वाली IPS अंकिता शर्मा को नोटिस, पुलिस मुख्यालय ने मांगा जवाब

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दशहरा पर AK-47 से फायरिंग करने वाली IPS अंकिता शर्मा को नोटिस, पुलिस मुख्यालय ने मांगा जवाब

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राजनांदगांव- छत्तीसगढ़ में विजयादशमी के अवसर पर शस्त्र पूजा के बाद AK-47 राइफल से फायरिंग करने का वीडियो वायरल होने के मामले में राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक (SP) एवं IPS अधिकारी अंकिता शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। पुलिस मुख्यालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हथियार संचालन के निर्धारित नियमों और पुलिस बल की गरिमा से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा है। घटना के बाद पुलिस विभाग में हथियारों के सुरक्षित इस्तेमाल, अनुशासन और पारंपरिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा मानकों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। 

शस्त्र पूजा के बाद AK-47 से फायरिंग का वीडियो वायरल

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर राजनांदगांव पुलिस लाइन स्थित रक्षित केंद्र में पारंपरिक शस्त्र पूजा का आयोजन किया गया था। इस दौरान पुलिस के हथियारों और वाहनों की पूजा की गई।

कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें SP अंकिता शर्मा साड़ी पहने AK-47 राइफल से हवा में कई राउंड फायर करती दिखाई दीं। वीडियो वायरल होने के बाद इस घटना पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे परंपरा से जोड़कर देखा, जबकि अन्य ने हथियार संचालन के सुरक्षा नियमों के पालन पर सवाल उठाए।

मामले ने तब और ध्यान आकर्षित किया, जब हथियारों के इस्तेमाल और सुरक्षा प्रक्रियाओं से जुड़े जानकारों ने वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधियों पर चिंता जताई। 

पुलिस मुख्यालय ने क्यों मांगा स्पष्टीकरण?

राजनांदगांव रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) अजय यादव के अनुसार, पुलिस मुख्यालय ने घटना का संज्ञान लेते हुए SP अंकिता शर्मा से जवाब मांगा है। अधिकारियों के मुताबिक, फायरिंग का तरीका पुलिस के हथियार संचालन संबंधी नियमों के अनुरूप नहीं पाया गया और वीडियो को लेकर की जा रही टिप्पणियों से पुलिस बल की छवि पर भी सवाल उठे।

IG अजय यादव ने बताया कि अंकिता शर्मा का जवाब मिलने के बाद वह अपना अभिमत दर्ज कर प्रकरण पुलिस मुख्यालय को भेजेंगे। इसके बाद मुख्यालय से प्राप्त निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल नोटिस जारी होने का अर्थ अंतिम दोष-निर्धारण नहीं है। संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आने और विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। 

क्या शस्त्र पूजा में फायरिंग की परंपरा है?

दशहरे पर शस्त्र पूजा की परंपरा कई स्थानों पर निभाई जाती है। पुलिस विभाग में भी इस अवसर पर हथियारों की पूजा कर कर्तव्य, सुरक्षा और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण व्यक्त किया जाता है।

हालांकि, हथियारों की पूजा और उनसे फायरिंग करना दो अलग-अलग बातें हैं। सेवानिवृत्त IPS अधिकारी आर.के. विज ने कहा कि फायरिंग केवल सुरक्षित स्थान पर पर्याप्त सावधानियों के साथ की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शस्त्र पूजा का मूल उद्देश्य हथियारों की पूजा करना है, न कि उनसे गोली चलाना।

दूसरी ओर, एक अनाम पुलिस अधिकारी के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया कि राज्य में कुछ स्थानों पर शस्त्र पूजा के दौरान आवाज पैदा करने वाले खाली कारतूस, जिन्हें आम बोलचाल में ‘आवाजी कारतूस’ कहा जाता है, इस्तेमाल करने की परंपरा रही है। हालांकि, इस विशेष घटना में इस्तेमाल किए गए कारतूसों की प्रकृति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती।

विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि हवा में गोली चलाना जोखिमपूर्ण हो सकता है। गोली नीचे लौटते समय लोगों को घायल कर सकती है। इसलिए ऐसे किसी भी आयोजन में हथियारों का इस्तेमाल निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार होना जरूरी है।

पूर्व सैन्य अधिकारियों ने उठाए सुरक्षा संबंधी सवाल

वीडियो सामने आने के बाद पूर्व सैन्य अधिकारी के.जे.एस. ढिल्लों ने हथियार संभालने के तरीके पर चिंता जताई। उनकी आलोचना मुख्य रूप से हथियार को सुरक्षित दिशा में रखने, आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने से संबंधित थी।

इस बीच, सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने अधिकारी का बचाव करते हुए कहा कि शस्त्र पूजा के बाद फायरिंग की परंपरा कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि मामले का आकलन पूरी परिस्थितियों और इस्तेमाल किए गए कारतूसों की जानकारी के आधार पर होना चाहिए।

इस प्रकार, यह विवाद केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सार्वजनिक आयोजनों में सरकारी हथियारों के सुरक्षित इस्तेमाल और पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही पर भी चर्चा का विषय बन गया। 

अन्य जिलों में भी सामने आए फायरिंग के वीडियो

रिपोर्टों के मुताबिक, विजयादशमी पर शस्त्र पूजा के बाद राजनांदगांव के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर का भी फायरिंग करते हुए एक अलग वीडियो सामने आया। इसके अलावा रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग, कबीरधाम और बस्तर सहित अन्य जिलों से भी पुलिसकर्मियों द्वारा फायरिंग किए जाने के वीडियो साझा किए गए।

इन घटनाओं ने इस सवाल को महत्वपूर्ण बना दिया है कि पारंपरिक आयोजनों के दौरान हथियारों के इस्तेमाल के लिए क्या स्पष्ट और एकसमान सुरक्षा दिशा-निर्देश होने चाहिए तथा उनका पालन किस प्रकार सुनिश्चित किया जाए। 

उपमुख्यमंत्री ने भी मामले पर संज्ञान लेने की बात कही

वीडियो वायरल होने के बाद छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने मीडिया से कहा कि सरकार इस मामले का संज्ञान लेगी। इसके बाद पुलिस मुख्यालय की ओर से स्पष्टीकरण मांगे जाने की खबर सामने आई।

अब आगे की कार्रवाई अंकिता शर्मा के जवाब, रेंज IG की टिप्पणी और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों पर निर्भर करेगी। फिलहाल किसी अंतिम विभागीय दंड या कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। 

आगे क्या होगा?

इस मामले में अब तीन बातें महत्वपूर्ण होंगी:

  • अधिकारी का जवाब: नोटिस के जवाब में घटना और हथियार के इस्तेमाल के संबंध में उनका पक्ष सामने आएगा।

  • विभागीय समीक्षा: रेंज IG अपनी टिप्पणी के साथ मामला पुलिस मुख्यालय को भेजेंगे।

  • आगे की कार्रवाई: पुलिस मुख्यालय उपलब्ध तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर निर्णय लेगा।

निष्कर्ष: दशहरा पर शस्त्र पूजा के बाद AK-47 से फायरिंग करने का वीडियो वायरल होने के बाद IPS अधिकारी अंकिता शर्मा को स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया गया है। विभागीय प्रक्रिया जारी है और अंतिम निर्णय आना बाकी है। यह मामला धार्मिक परंपराओं के सम्मान के साथ-साथ सरकारी हथियारों के सुरक्षित इस्तेमाल, पुलिस अनुशासन और सार्वजनिक सुरक्षा के महत्व को भी रेखांकित करता है।

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