Media24Media.com: रायपुर में डॉक्टरों ने पांच घंटे की जटिल सर्जरी कर बचाई महिला की जान, ऑपरेशन के दौरान चढ़ाया गया 10 यूनिट खून

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रायपुर में डॉक्टरों ने पांच घंटे की जटिल सर्जरी कर बचाई महिला की जान, ऑपरेशन के दौरान चढ़ाया गया 10 यूनिट खून

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रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक राहत भरी खबर सामने आई है। द रूरल प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों की टीम ने गंभीर स्थिति में पहुंची एक महिला का करीब पांच घंटे तक जटिल ऑपरेशन किया। महिला की जान बचाने के लिए उपचार के दौरान 10 यूनिट खून का इस्तेमाल किया गया। यह मामला गंभीर मरीजों के उपचार में चिकित्सकीय टीम की भूमिका और समय पर उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं के महत्व को रेखांकित करता है।

प्रसव के दौरान बिगड़ी महिला की हालत

रिपोर्ट के मुताबिक, 32 वर्षीय महिला अपनी चौथी गर्भावस्था में थी। गर्भावस्था की अवधि पूरी होने के बाद उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजन उसे सबसे पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां से उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और फिर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।

मेडिकल कॉलेज में प्रसव कराने के प्रयास के दौरान महिला की बच्चेदानी (गर्भाशय) और मूत्राशय को गंभीर क्षति पहुंची। गर्भस्थ शिशु की भी पेट में ही मृत्यु हो गई। दूसरी ओर, अत्यधिक रक्तस्राव के कारण महिला की हालत जानलेवा हो गई। गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल में रेफर किया गया। 

पांच घंटे तक चली जटिल सर्जरी

अस्पताल पहुंचने के बाद महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल आपातकालीन सर्जरी की तैयारी की गई। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति जायसवाल के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने ऑपरेशन शुरू किया।

सर्जरी के दौरान डॉक्टरों के सामने दो बड़ी चुनौतियां थीं—गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त बच्चेदानी का उपचार करना और मूत्राशय की चोट को ठीक करना।

  • बच्चेदानी का ऑपरेशन: गर्भाशय को गंभीर क्षति पहुंचने के कारण डॉक्टरों को उसे निकालना पड़ा।

  • मूत्राशय की मरम्मत: सर्जरी विभाग की डॉ. प्राची के सहयोग से क्षतिग्रस्त मूत्राशय की मरम्मत की गई।

  • निश्चेतना और निगरानी: डॉ. अमृता की टीम ने ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को नियंत्रित रखने में सहयोग दिया।

  • रक्त की व्यवस्था: अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मरीज को कुल 10 यूनिट रक्त एवं रक्त घटक चढ़ाए गए।

करीब पांच घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी में अलग-अलग विभागों के डॉक्टरों ने मिलकर काम किया। 

दो दिन वेंटिलेटर पर रहा उपचार

सर्जरी पूरी होने के बाद भी महिला की स्थिति गंभीर थी। उसे वेंटिलेटर पर रखकर क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) में भर्ती किया गया। वहां डॉ. ओ.पी. सुंदरानी की टीम की देखरेख में दो दिनों तक गहन उपचार और लगातार निगरानी की गई।

इस दौरान स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, सर्जरी विभाग, निश्चेतना विभाग, क्रिटिकल केयर यूनिट, ब्लड बैंक और नर्सिंग टीम ने समन्वय से काम किया। लगातार उपचार के बाद महिला की हालत में सुधार हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, बाद में उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और वह अपने परिवार के पास लौट गई। 

डॉक्टरों की टीम के सामूहिक प्रयास की सराहना

पंडित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी ने इस उपचार को चिकित्सा सेवा, समर्पण और महिला चिकित्सकों के प्रयासों का उदाहरण बताया।

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने भी प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग समेत विभिन्न टीमों के प्रयासों की सराहना की। इस मामले में समय पर उच्च स्तरीय उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण रहा। 

इस घटना से क्या सीख मिलती है?

गंभीर प्रसूति जटिलताएं मां और शिशु दोनों के लिए जानलेवा हो सकती हैं। अत्यधिक रक्तस्राव और गर्भाशय या आसपास के अंगों को क्षति पहुंचने जैसी स्थितियों में तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सा, जरूरत पड़ने पर रक्त की उपलब्धता और आपातकालीन सर्जरी बेहद महत्वपूर्ण होती है।

गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच और प्रसव के लिए ऐसी स्वास्थ्य सुविधा चुनना जहां आपातकालीन उपचार उपलब्ध हो, जोखिम को समय रहते पहचानने में मदद कर सकता है। हालांकि, इस मामले में जटिलता कैसे उत्पन्न हुई, इसकी विस्तृत चिकित्सकीय जांच के निष्कर्ष रिपोर्ट में नहीं दिए गए हैं।

निष्कर्ष

रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल में 32 वर्षीय महिला की जान बचाने के लिए की गई पांच घंटे की सर्जरी गंभीर प्रसूति जटिलताओं के उपचार में विशेषज्ञ टीम और बहु-विभागीय सहयोग के महत्व को सामने लाती है। बच्चेदानी और मूत्राशय को गंभीर क्षति, अत्यधिक रक्तस्राव और दो दिन वेंटिलेटर पर रहने के बावजूद महिला का स्वस्थ होकर घर लौटना उसके उपचार का महत्वपूर्ण परिणाम रहा।

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