Media24Media.com: विज्ञान जगत की बड़ी खबर: Francis Halzen को 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार

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विज्ञान जगत की बड़ी खबर: Francis Halzen को 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार

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अमेरिकी विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञानी फ्रांसिस हाल्ज़ेन (Francis Halzen) को वर्ष 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने उन्हें IceCube Neutrino Observatory में निर्णायक योगदान और खगोलीय स्रोतों से आने वाले उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज के लिए यह सम्मान दिया है। 

आखिर न्यूट्रिनो क्या हैं?

न्यूट्रिनो बेहद सूक्ष्म और लगभग बिना द्रव्यमान वाले विद्युत-तटस्थ कण हैं, जो पदार्थ के साथ बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं। हर सेकंड अरबों न्यूट्रिनो हमारे शरीर से होकर गुजरते हैं, लेकिन हमें उनका पता तक नहीं चलता।

यही वजह है कि वैज्ञानिकों के लिए इन्हें पकड़ना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है।

दक्षिणी ध्रुव की बर्फ में बना अनोखा प्रयोग

फ्रांसिस हाल्ज़ेन ने 1980 के दशक में यह विचार विकसित किया कि दक्षिणी ध्रुव की विशाल और पारदर्शी बर्फ की परतों का इस्तेमाल न्यूट्रिनो को पकड़ने के लिए किया जा सकता है।

जब कोई उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो बर्फ में मौजूद परमाणु के नाभिक से टकराता है, तो बेहद हल्की नीली रोशनी पैदा हो सकती है। बर्फ के अंदर लगाए गए हजारों सेंसर इस रोशनी को रिकॉर्ड करते हैं। इसी विचार से आगे चलकर IceCube Neutrino Observatory का निर्माण हुआ। 

ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में मदद

IceCube ने वैज्ञानिकों को ऐसे उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो का अध्ययन करने में मदद की है, जो हमारी आकाशगंगा के बाहर मौजूद अत्यंत शक्तिशाली खगोलीय स्रोतों से आते हैं।

इन कणों के जरिए वैज्ञानिक ब्लैक होल जैसे अत्यधिक ऊर्जावान ब्रह्मांडीय क्षेत्रों के बारे में नई जानकारी हासिल कर सकते हैं। 

Francis Halzen कौन हैं?

फ्रांसिस हाल्ज़ेन का जन्म 1944 में बेल्जियम में हुआ था। वह लंबे समय से अमेरिका की University of Wisconsin–Madison में भौतिकी के प्रोफेसर रहे हैं और IceCube परियोजना के प्रमुख वैज्ञानिकों में शामिल हैं। 

क्यों महत्वपूर्ण है यह पुरस्कार?

हाल्ज़ेन के काम ने खगोल विज्ञान को देखने का एक नया तरीका उपलब्ध कराया है। अब वैज्ञानिक केवल प्रकाश, रेडियो तरंगों या गुरुत्वाकर्षण तरंगों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि न्यूट्रिनो के जरिए भी ब्रह्मांड की दूर-दराज की घटनाओं का अध्ययन कर सकते हैं।

यानी दक्षिणी ध्रुव की बर्फ में छिपे इन बेहद मुश्किल कणों ने ब्रह्मांड के उन रहस्यों तक पहुंचने का रास्ता खोला है, जिन्हें पारंपरिक तरीकों से समझना बेहद कठिन था।


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