Media24Media.com: SCO Summit में मोदी–पुतिन की अहम मुलाकात: युद्ध खत्म करने पर PM मोदी का जोर, व्यापार-ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर भी हुई चर्चा

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SCO Summit में मोदी–पुतिन की अहम मुलाकात: युद्ध खत्म करने पर PM मोदी का जोर, व्यापार-ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर भी हुई चर्चा

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बिश्केक- शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन के दौरान सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों, व्यापार, ऊर्जा, रक्षा सहयोग और वैश्विक परिस्थितियों के साथ-साथ यूक्रेन युद्ध को लेकर भी चर्चा की।

मुलाकात की शुरुआत गर्मजोशी से

मोदी और पुतिन की मुलाकात बेहद गर्मजोशी भरे माहौल में हुई। दोनों नेताओं ने भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। रूस की ओर से भी भारत के साथ संबंधों को विशेष और महत्वपूर्ण साझेदारी बताया गया।

यूक्रेन युद्ध पर PM मोदी का बड़ा संदेश

बैठक का सबसे अहम पहलू यूक्रेन युद्ध को लेकर प्रधानमंत्री मोदी का संदेश रहा।

PM मोदी ने कहा कि युद्ध का हर दिन मानवता और दुनिया की प्रगति को पीछे धकेलता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब अंतहीन युद्ध की स्थिति से निकलकर युद्ध समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है।

भारत लगातार यह रुख रखता रहा है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान संवाद, कूटनीति और शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए होना चाहिए। मोदी ने इसी नीति को दोहराते हुए शांति के लिए किए जा रहे हर प्रयास का समर्थन करने की बात कही।

भारत–रूस व्यापार पर भी हुई चर्चा

दोनों नेताओं ने आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। रिपोर्टों के अनुसार भारत और रूस के बीच व्यापार का कुल कारोबार लगभग 100 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच चुका है, हालांकि व्यापार संतुलन को लेकर भारत की चिंताएं भी बनी हुई हैं।

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने बताया कि 2026 की पहली छमाही में दोनों देशों के व्यापार कारोबार में 2.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। दोनों देश व्यापार को और बढ़ाने तथा उसमें विविधता लाने पर जोर दे रहे हैं।

ऊर्जा सुरक्षा बनी अहम प्राथमिकता

बैठक में ऊर्जा सहयोग भी महत्वपूर्ण मुद्दा रहा। भारत के लिए रूस लंबे समय से तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों का एक प्रमुख स्रोत रहा है।

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच दोनों देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा का महत्व और बढ़ गया है। इसलिए तेल, गैस, उर्वरक और अन्य ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाना दोनों देशों के आर्थिक हित में है।

रक्षा सहयोग पर भी नजर

भारत और रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में दशकों पुराना सहयोग है। बैठक में रणनीतिक और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी का महत्व इसलिए भी है क्योंकि भारत अपनी सैन्य क्षमताओं के लिए रूस से लंबे समय से विभिन्न रक्षा प्रणालियां और उपकरण हासिल करता रहा है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने पर भी जोर दे रहा है।

व्यापार के साथ कनेक्टिविटी पर भी जोर

बैठक में आर्थिक सहयोग के साथ-साथ कनेक्टिविटी और नए आर्थिक अवसरों पर भी चर्चा हुई। भारत और रूस के बीच आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग तथा व्लादिवोस्तोक से जुड़े कनेक्टिविटी प्रयासों को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पर्यटन और छात्रों के संबंध भी बढ़े

दोनों देशों के बीच संबंध सिर्फ रक्षा और ऊर्जा तक सीमित नहीं हैं। शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ रहा है।

रूसी राष्ट्रपति के अनुसार, रूस में भारतीय छात्रों की संख्या बढ़कर करीब 40,000 हो गई है। वहीं 2025 में दोनों देशों के बीच पर्यटकों की आवाजाही में भी 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

भारत में होने वाले BRICS Summit का भी जिक्र

बैठक में आगामी BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने रूस को भारत में होने वाले BRICS सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।

इससे यह संकेत मिलता है कि SCO के अलावा BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी भारत और रूस के बीच समन्वय महत्वपूर्ण बना हुआ है।

 क्यों महत्वपूर्ण है मोदी–पुतिन की यह मुलाकात?

मोदी–पुतिन बैठक ऐसे समय हुई है जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक संकटों से गुजर रही है। यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव, ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता और वैश्विक व्यापार में बदलाव के बीच भारत और रूस दोनों अपने रणनीतिक हितों को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत के लिए रूस के साथ संबंधों का महत्व ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और रणनीतिक स्वायत्तता के कारण बना हुआ है। वहीं रूस के लिए भारत एशिया की एक महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक शक्ति है। इसलिए दोनों नेताओं की यह मुलाकात सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं बल्कि व्यापक वैश्विक कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बैठक की 5 बड़ी बातें

1. 🕊️ यूक्रेन युद्ध: PM मोदी ने युद्ध खत्म करने और शांति की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया।
2. 💰 व्यापार: भारत-रूस व्यापार को और बढ़ाने पर चर्चा हुई।
3. ⛽ ऊर्जा: तेल, गैस और ऊर्जा सुरक्षा सहयोग महत्वपूर्ण मुद्दा रहा।
4. 🛡️ रक्षा: दोनों देशों की रणनीतिक और रक्षा साझेदारी को मजबूत करने पर जोर।
5. 🌐 BRICS और SCO: बहुपक्षीय मंचों पर भारत-रूस सहयोग जारी रखने का संदेश।

निष्कर्ष: मोदी–पुतिन की बिश्केक मुलाकात ने एक बार फिर साफ किया कि वैश्विक तनाव के बावजूद भारत और रूस अपने लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं। वहीं यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत ने अपना स्पष्ट संदेश दिया है—संवाद और कूटनीति के जरिए युद्ध का अंत और स्थायी शांति की दिशा में प्रयास जरूरी हैं।

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