Media24Media.com: ​महासमुंद: 1.5 करोड़ के गैस गबन कांड का सनसनीखेज खुलासा, जिला खाद्य अधिकारी ही निकला मुख्य 'मास्टरमाइंड'

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​महासमुंद: 1.5 करोड़ के गैस गबन कांड का सनसनीखेज खुलासा, जिला खाद्य अधिकारी ही निकला मुख्य 'मास्टरमाइंड'

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 ​ महासमुंद । छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में खाकी और खाद्यान्न विभाग के बीच हुए एक बड़े आपराधिक गठजोड़ का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने करीब 1.5 करोड़ रुपये की एलपीजी (LPG) गैस के गबन मामले को सुलझाते हुए जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव सहित तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं हैं।


​ षड्यंत्र की शुरुआत: कलेक्टोरेट से थाने तक बुना गया जाल

​इस पूरे खेल की पटकथा 23 मार्च 2026 को लिखी गई थी। जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव और गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर ने मिलकर जप्तशुदा गैस कैप्सूल्स को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। गबन को अंजाम देने के लिए रायपुर के मनीष चौधरी को साथ लिया गया, जिसका काम ऐसी एजेंसी ढूंढना था जो इस काले खेल में भागीदार बन सके। ​डील फाइनल करने से पहले 26 मार्च को अजय यादव और पंकज चंद्राकर ने खुद सिंघोड़ा थाने जाकर जप्त 6 कैप्सूल्स का मुआयना किया और अनुमान लगाया कि इसमें करीब 105 मीट्रिक टन गैस उपलब्ध है। इसी आधार पर 1 करोड़ रुपये की अवैध उगाही का लक्ष्य रखा गया।


​ 80 लाख में हुई डील और काली कमाई का बंटवारा

​बाजार में कई एजेंसियों से सौदेबाजी के बाद अंततः ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष ठाकुर के साथ 80 लाख रुपये में सौदा तय हुआ।
​खाद्य अधिकारी अजय यादव: मुख्य खिलाड़ी होने के नाते 50 लाख रुपये का सबसे बड़ा हिस्सा।
​पंकज चंद्राकर: क्रियान्वयन की जिम्मेदारी के लिए 20 लाख रुपये।
​मनीष चौधरी: बिचौलिए की भूमिका के लिए 10 लाख रुपये।
​हैरानी की बात यह है कि खाद्य अधिकारी को उनके हिस्से के 50 लाख रुपये सुपुर्दनामे के अगले ही दिन यानी 31 मार्च को घर पर डिलीवर कर दिए गए थे।

​ सरकारी तंत्र को बनाया ढाल, रचे गए फर्जी दस्तावेज

​इस गबन को छिपाने के लिए खाद्य अधिकारी ने अपने पद का जमकर दुरुपयोग किया। उन्होंने अपने मातहत कर्मचारियों को सुपुर्दनामा के कागजातों पर हस्ताक्षर न करने के निर्देश दिए और पुलिस को भी गुमराह किया। ​सबसे चौंकाने वाला खुलासा फर्जी वजन पंचनामा को लेकर हुआ। जांच में पाया गया कि खाली कैप्सूल्स का वजन होने से पहले ही खाद्य अधिकारी के दफ्तर में बैठकर फर्जी पंचनामा तैयार कर लिया गया था और उसे कलेक्टोरेट में जमा भी करा दिया गया। तकनीकी साक्ष्यों के अनुसार, जब वजन कांटा पर्ची के मुताबिक ट्रक का वजन रात 8 बजे हो रहा था, उसके कई घंटे पहले ही दस्तावेज सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो चुके थे।


​ पुलिस की सूक्ष्म जांच ने बिगाड़ा खेल

​जब कोर्ट और पुलिस की सक्रियता बढ़ी, तो आरोपियों ने आरंग के एक ढाबे में गुप्त बैठक कर पुलिस पर दबाव बनाने और बयान न बदलने की रणनीति बनाई। लेकिन महासमुंद पुलिस की 40 सदस्यीय टीम ने 15 दिनों तक निरंतर तकनीकी विश्लेषण, सीडीआर (CDR) जांच और वैज्ञानिक पूछताछ के जरिए इस पूरे षड्यंत्र की परतों को उधेड़ दिया। विशेषज्ञों की रिपोर्ट ने स्पष्ट किया कि 100 टन गैस का रिसाव बिना किसी बड़े विस्फोट के संभव ही नहीं है, जिससे आरोपियों का 'लीकेज' वाला बहाना धड़ाम हो गया।

​ गिरफ्तार आरोपी और जप्ती

​पुलिस ने निम्नलिखित आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है:
​अजय कुमार यादव (जिला खाद्य अधिकारी, महासमुंद)
​पंकज चंद्राकर (संचालक, गौरव गैस एजेंसी)
​मनीष चौधरी (सह-षड्यंत्रकारी, रायपुर)
​जप्ती: आरोपियों के पास से नकदी, महंगे होम अप्लायंसेज और मोबाइल फोन जप्त किए गए हैं। कुल जप्त संपत्ति की कीमत 6,11,700 रुपये बताई जा रही है।

​ इन धाराओं में मामला दर्ज

​पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(3), 316(5), 61, 238, 336(3), 338, 340(2) और आवश्यक वस्तु अधिनियम (EC Act) की धारा 3 व 7 के तहत मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई जिले में भ्रष्टाचार और सरकारी संपत्ति की हेराफेरी करने वालों के लिए एक बड़ी चेतावनी है।

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