Media24Media.com: अगस्त में दिखेगा ‘ब्लड मून’, 5 घंटे तक रहेगा पूर्ण चंद्र ग्रहण का असर

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अगस्त में दिखेगा ‘ब्लड मून’, 5 घंटे तक रहेगा पूर्ण चंद्र ग्रहण का असर

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 आसमान में अगस्त महीने के आखिर में एक बेहद खास खगोलीय घटना देखने को मिलेगी। 27 और 28 अगस्त की रात पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा, जिसके दौरान चंद्रमा लाल रंग में दिखाई देगा। इसी कारण इसे ‘ब्लड मून’ कहा जाता है। यह दुर्लभ नजारा कई घंटों तक दिखाई देगा और दुनियाभर के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। भारत में भी यह चंद्र ग्रहण आंशिक रूप से देखा जा सकेगा।


क्यों लाल दिखता है चांद?

पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। इस स्थिति में सूर्य की सीधी रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती। पृथ्वी के वातावरण से गुजरने वाली लाल रंग की किरणें चंद्रमा तक पहुंचती हैं, जिससे चांद लाल, नारंगी या तांबे जैसा दिखाई देने लगता है। इसी अनोखी खगोलीय घटना को ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।

करीब 5 घंटे तक रहेगा असर

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण लगभग 5 घंटे तक प्रभाव में रहेगा। ग्रहण के दौरान उपच्छाया, आंशिक और पूर्ण चंद्र ग्रहण जैसे कई चरण देखने को मिलेंगे। पूर्ण ग्रहण के समय चंद्रमा का रंग सबसे अधिक लाल दिखाई देगा, जिसे इस घटना का सबसे खास पल माना जाता है।

खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए यह एक शानदार अवसर होगा। भारत के कई हिस्सों में यह नजारा साफ दिखाई दे सकता है, हालांकि मौसम और बादलों की स्थिति दृश्यता को प्रभावित कर सकती है। कम रोशनी वाले इलाकों में ब्लड मून अधिक स्पष्ट दिखाई देने की संभावना रहती है।

नंगी आंखों से देख सकते हैं ग्रहण

वैज्ञानिकों के अनुसार, चंद्र ग्रहण पूरी तरह प्राकृतिक खगोलीय प्रक्रिया है और इसे नंगी आंखों से सुरक्षित देखा जा सकता है। सूर्य ग्रहण की तरह इसके लिए किसी विशेष चश्मे की आवश्यकता नहीं होती।

आजकल स्मार्टफोन कैमरों से भी ब्लड मून की शानदार तस्वीरें ली जा सकती हैं। यदि फोन में नाइट मोड और अच्छा जूम फीचर हो, तो लोग इस खूबसूरत दृश्य को आसानी से कैद कर सकते हैं। बेहतर तस्वीरों के लिए ट्राइपॉड का इस्तेमाल उपयोगी माना जाता है।

धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व भी

भारतीय परंपराओं और ज्योतिष में चंद्र ग्रहण को विशेष महत्व दिया जाता है। कई लोग ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप और ध्यान करते हैं। कुछ मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में भोजन से परहेज और मंदिरों के कपाट बंद रखने की परंपरा भी निभाई जाती है।

हालांकि वैज्ञानिक इसे एक सामान्य और प्राकृतिक खगोलीय घटना मानते हैं। खगोल वैज्ञानिकों के मुताबिक, ब्लड मून हर साल देखने को नहीं मिलता। पूर्ण चंद्र ग्रहण और ब्लड मून का संयोग विशेष परिस्थितियों में ही बनता है, इसलिए दुनियाभर के लोग इस नजारे का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

 
 
 
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