Media24Media.com: दंतेवाड़ा नक्सली हमले के सभी 11 आरोपी बरी, हाईकोर्ट ने जांच पर उठाए सवाल

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दंतेवाड़ा नक्सली हमले के सभी 11 आरोपी बरी, हाईकोर्ट ने जांच पर उठाए सवाल

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 Chhattisgarh के बहुचर्चित 2010 दंतेवाड़ा नक्सली हमले मामले में बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। Chhattisgarh High Court ने मामले में आरोपित सभी 11 लोगों को बरी कर दिया है। अदालत ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य पेश करने में असफल रहा।


यह फैसला चीफ जस्टिस Ramesh Sinha और जस्टिस Ravindra Kumar Agrawal की डिवीजन बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने कहा कि इतने बड़े हमले के बावजूद जांच एजेंसियां असली अपराधियों की पहचान तक नहीं कर सकीं।

गौरतलब है कि 6 अप्रैल 2010 को Dantewada जिले के ताड़मेटला और चिंतलनार के जंगलों में नक्सलियों ने सीआरपीएफ और पुलिस के संयुक्त दल पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में 75 सीआरपीएफ जवान और एक पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इसे देश के इतिहास के सबसे बड़े नक्सली हमलों में गिना जाता है।

अपने फैसले में हाईकोर्ट ने जांच में कई गंभीर खामियां बताईं। अदालत ने कहा कि किसी भी आरोपी की पहचान न्यायालय में नहीं हो सकी और न ही टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (TIP) कराई गई। इसके अलावा फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) रिपोर्ट पेश नहीं की गई और आरोपियों से किसी प्रकार के हथियार की बरामदगी भी नहीं हुई। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच के दौरान कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन नहीं किया गया और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी अधूरी रही।

अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अभियोजन पक्ष आरोपियों की भूमिका संदेह से परे साबित करने में विफल रहा, इसलिए सभी आरोपियों को दोषमुक्त किया गया।

फैसले के बाद शहीद जवानों के परिवारों में निराशा का माहौल है। वहीं कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि नक्सल और आतंकी मामलों में तकनीकी जांच, फॉरेंसिक साक्ष्य और गवाहों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है। शुरुआती जांच में हुई चूक अदालत में पूरे मामले को कमजोर कर देती है।

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