Media24Media.com: NATO पर ट्रंप का बड़ा हमला: ‘कागज़ी शेर’ कहकर अमेरिका के बाहर निकलने के संकेत

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NATO पर ट्रंप का बड़ा हमला: ‘कागज़ी शेर’ कहकर अमेरिका के बाहर निकलने के संकेत

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 वॉशिंगटन/नई दिल्ली : पश्चिमी सैन्य गठबंधन नाटो (NATO) के भविष्य पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गठबंधन को लेकर तीखी नाराज़गी जताते हुए संकेत दिया है कि अमेरिका इससे अलग होने पर गंभीरता से विचार कर सकता है।


ब्रिटिश अख़बार टेलीग्राफ को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वे कभी भी NATO से प्रभावित नहीं रहे और इसे “कागज़ी शेर” मानते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान से जुड़े मौजूदा तनाव के दौरान सहयोगी देशों ने अमेरिका का साथ नहीं दिया।

होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद बना वजह

ट्रंप की नाराज़गी की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सहयोगी देशों का रुख बताया जा रहा है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, जहां से दुनिया के लगभग 30 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच इस जलडमरूमध्य में बाधा उत्पन्न हुई, जिसके बाद अमेरिका ने NATO देशों से इसे खुलवाने के लिए सैन्य सहयोग मांगा। हालांकि, कई यूरोपीय देशों ने युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया।

ट्रंप का NATO पर सीधा हमला

ट्रंप ने कहा,- “मैं NATO से कभी संतुष्ट नहीं था। मैं हमेशा से जानता था कि यह सिर्फ कागज़ी शेर है, और यह बात व्लादिमीर पुतिन भी जानते हैं।”

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अब अमेरिका के लिए इस रक्षा गठबंधन में बने रहना मुश्किल हो सकता है।

सहयोगी देशों को दी चेतावनी

ट्रंप ने ब्रिटेन समेत अन्य सहयोगी देशों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए खुद आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो देश ईरान के खिलाफ कार्रवाई में शामिल नहीं हुए, उन्हें अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय खुद कदम उठाने चाहिए।

ट्रंप ने कहा,
“आपको खुद के लिए लड़ना सीखना होगा। अमेरिका अब हमेशा आपकी मदद के लिए मौजूद नहीं रहेगा, ठीक वैसे ही जैसे आप हमारी मदद के लिए मौजूद नहीं थे।”

वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका NATO से अलग होता है, तो इसका सीधा असर यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था और वैश्विक शक्ति संतुलन पर पड़ेगा। इससे रूस जैसे देशों को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है और अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

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