Media24Media.com: भीषण गर्मी का कहर: चलती-खड़ी गाड़ियों में आग, बढ़ रही घटनाएं

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भीषण गर्मी का कहर: चलती-खड़ी गाड़ियों में आग, बढ़ रही घटनाएं

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 Heat Alert : बढ़ती गर्मी अब लोगों के लिए नई परेशानी बनती जा रही है। शहर में चलती और खड़ी गाड़ियों में आग लगने के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं, जिससे वाहन चालकों की चिंता बढ़ गई है।


पिछले एक महीने में ही रायपुर में 6 से ज्यादा घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें रिंग रोड-2 पर चलती टाटा एस, कलेक्ट्रेट के पास खड़ी कार, खमतराई में स्कॉर्पियो और अवंति विहार की घटनाएं शामिल हैं। हालांकि राहत की बात यह रही कि सभी मामलों में लोग समय रहते बाहर निकल गए और कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन गाड़ियां पूरी तरह जलकर खाक हो गईं।

ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, गर्मियों में कार के अंदर का तापमान 60°C तक पहुंच जाता है। इससे इंजन, वायरिंग और फ्यूल सिस्टम पर ज्यादा दबाव पड़ता है। ओवरहीटिंग, फ्यूल लीकेज और इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट जैसी समस्याएं अचानक आग लगने का कारण बनती हैं। इसके अलावा गाड़ी में रखी ज्वलनशील चीजें भी खतरे को बढ़ा देती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन घटनाओं के पीछे सबसे बड़ा कारण लापरवाही और समय पर मेंटेनेंस का अभाव है। अगर वाहन की नियमित सर्विसिंग कराई जाए और छोटी समस्याओं को नजरअंदाज न किया जाए, तो ऐसे हादसों से बचा जा सकता है।

कैपिटल मोटर संचालक दीपक चावला के अनुसार, अधिक तापमान के कारण इंजन और बैटरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। फ्यूल जल्दी वाष्पित हो जाता है और इलेक्ट्रिकल सिस्टम प्रभावित होता है, जिससे खतरा बढ़ जाता है।

पुराने वाहनों को लेकर भी नियम सख्त हैं। 15 साल पुरानी पेट्रोल और 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों पर कुछ क्षेत्रों में प्रतिबंध है। वहीं 20 साल पुरानी निजी और 15 साल पुरानी कमर्शियल गाड़ियों के लिए फिटनेस टेस्ट अनिवार्य है, अन्यथा उन्हें स्क्रैप किया जा सकता है।

जहां तक CNG और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बात है, अगर उनकी किट सही तरीके से नहीं लगी हो या समय पर सर्विसिंग न हो तो खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, अधिकृत सर्विस सेंटर से नियमित देखभाल करने पर जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।

 कार में आग लगने के प्रमुख कारण

  • इलेक्ट्रिकल फॉल्ट
    • वायरिंग में शॉर्ट सर्किट
    • ढीले या टूटे तार
    • गलत आफ्टर-मार्केट फिटिंग
  • फ्यूल लीकेज (पेट्रोल/डीजल/CNG)
    • टैंक या पाइप से रिसाव
    • स्पार्क प्लग के पास फ्यूल पहुंचना
  • इंजन ओवरहीटिंग
    • कूलिंग सिस्टम फेल होना
    • इंजन का अत्यधिक गर्म होना
  • CNG/LPG किट में खराबी
    • लीकेज या वाल्व में गड़बड़ी
    • घटिया क्वालिटी या गलत इंस्टॉलेशन
  • मेंटेनेंस की कमी
    • समय पर सर्विसिंग न कराना
    • पुराने या खराब पार्ट्स का इस्तेमाल
  • एक्सीडेंट के बाद चिंगारी
    • टक्कर के बाद स्पार्क
    • फ्यूल लाइन कटना
  • ज्वलनशील सामान रखना
    • परफ्यूम, डियो, लाइटर
    • सैनिटाइजर, पावर बैंक

 कार में आग लगने से बचाव के उपाय

  • नियमित सर्विसिंग कराएं
    • गर्मी से पहले पूरी जांच
    • कूलिंग सिस्टम, वायरिंग और फ्यूल लाइन चेक करें
  • इंजन ऑयल और कूलेंट जांचें
    • सही स्तर बनाए रखें
    • इंजन को ठंडा रखने में मदद
  • ज्वलनशील वस्तुएं कार में न रखें
    • परफ्यूम, सैनिटाइजर, लाइटर आदि न छोड़ें
  • इलेक्ट्रिकल सिस्टम की जांच कराएं
    • पुरानी गाड़ियों में विशेष ध्यान रखें
  • CNG/LPG किट की नियमित जांच
    • केवल अधिकृत सेंटर से सर्विसिंग कराएं
  • फायर एक्सटिंग्विशर रखें
    • हर कार में छोटा अग्निशामक रखें
    • आपात स्थिति में बेहद उपयोगी
  • धूप में पार्किंग से बचें
    • संभव हो तो छांव में वाहन खड़ा करें
    • इससे तापमान कम रहता है
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