Media24Media.com: 2026 में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की आशंका, IMD की चेतावनी- कृषि, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

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2026 में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की आशंका, IMD की चेतावनी- कृषि, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

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 नई दिल्ली। देश में बढ़ते तापमान के बीच वर्ष 2026 की गर्मी को लेकर गंभीर चेतावनी सामने आई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार मार्च से मई 2026 के बीच देश में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने की संभावना है, जो पिछले वर्षों के रिकॉर्ड को भी पार कर सकती है।


लगातार टूट रहे तापमान के रिकॉर्ड

अप्रैल 2024 से देश के अलग-अलग हिस्सों में लगभग हर महीने अधिकतम, न्यूनतम या औसत तापमान ने नया रिकॉर्ड बनाया है। मई, जून और जुलाई 2024 में भी कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया। 2025 की शुरुआत में भी जनवरी और फरवरी में असामान्य गर्मी देखी गई, हालांकि मार्च में थोड़ी राहत मिली थी।

सुपर अल-नीनो का खतरा

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों NOAA और ECMWF के अनुसार 2026 में अल-नीनो बनने की संभावना 60 प्रतिशत से अधिक है, जो आगे चलकर ‘सुपर अल-नीनो’ का रूप ले सकता है। इससे समुद्र की सतह का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर भारत के मौसम पर पड़ेगा।

पहाड़ी और तटीय इलाकों में ज्यादा असर

IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर राज्य और पश्चिमी घाट के इलाके इस बार सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दिन और रात दोनों का तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। वहीं, पूर्वोत्तर भारत और कर्नाटक-महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों में भी गर्मी का असर अधिक रहेगा।

हीटवेव और जल संकट का खतरा

पूर्व, मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में हीटवेव के दिनों में बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है। सूखी सर्दियों के बाद गर्मी बढ़ने से जल संकट, जंगलों में आग और सूखे जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर

देश की करीब 52 प्रतिशत कृषि भूमि सिंचाई पर निर्भर है। बढ़ती गर्मी फसलों के उत्पादन चक्र को प्रभावित कर सकती है, जिससे पैदावार घटने और खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका है। पिछले अल-नीनो वर्षों में भी खरीफ फसलों को नुकसान और निर्यात पर असर देखा गया था।

स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गर्मी का असर खुले में काम करने वाले श्रमिकों, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों पर सबसे अधिक पड़ेगा। हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और बिजली की मांग में वृद्धि जैसे खतरे बढ़ सकते हैं।

जलवायु परिवर्तन बना मुख्य कारण

वैज्ञानिकों का मानना है कि बढ़ता जलवायु परिवर्तन और अल-नीनो-ला नीना जैसे प्राकृतिक चक्र मिलकर तापमान में लगातार वृद्धि कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर औसत तापमान पहले ही 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है, जिसका असर भारत में भी स्पष्ट दिख रहा है।

तैयारी के निर्देश

IMD ने राज्यों को एडवाइजरी जारी कर कूलिंग सेंटर, पेयजल आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जल संरक्षण, वृक्षारोपण और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 की गर्मी केवल एक मौसमीय घटना नहीं, बल्कि जलवायु संकट की गंभीर चेतावनी है, जिसके लिए समय रहते तैयारी करना बेहद जरूरी है।

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