Media24Media.com: जापान ने रक्षा निर्यात नीति में किया बड़ा बदलाव, भारत-जापान सहयोग पर बढ़ी चर्चा

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जापान ने रक्षा निर्यात नीति में किया बड़ा बदलाव, भारत-जापान सहयोग पर बढ़ी चर्चा

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 टोक्यो। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सुरक्षा परिदृश्य के बीच जापान ने अपनी रक्षा नीति में अहम बदलाव किया है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अपनाई गई शांतिवादी नीति में संशोधन करते हुए जापान सरकार ने हथियार निर्यात से जुड़े नियमों को पहले की तुलना में अधिक लचीला बना दिया है। इस कदम को क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों, खासकर चीन और उत्तर कोरिया की गतिविधियों के संदर्भ में देखा जा रहा है।


जापान सरकार का कहना है कि यह नीति परिवर्तन उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता में भी योगदान देगा। इस फैसले का स्वागत भारत, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के कई देशों ने किया है।

भारत-जापान के बीच रक्षा सहयोग पर जोर

22 से 24 अप्रैल 2026 के बीच टोक्यो में भारत और जापान के बीच 8वीं "आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ टॉक्स" आयोजित हुई। इस बैठक में भारतीय सेना और जापान ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

चर्चा का मुख्य फोकस द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास, तकनीकी सहयोग और इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाना रहा। दोनों देशों ने “मुक्त और समावेशी इंडो-पैसिफिक” क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि जापान की नई रक्षा नीति की समीक्षा का भारत स्वागत करता है और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण स्तंभ है।

संभावित रक्षा सहयोग: किन क्षेत्रों पर नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में भारत और जापान के बीच रक्षा तकनीक और उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ सकता है। हालांकि, किसी भी विशेष हथियार प्रणाली के अधिग्रहण पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। संभावित सहयोग के क्षेत्रों में शामिल हो सकते हैं:

उन्नत नौसैनिक प्लेटफॉर्म (जैसे हेलीकॉप्टर कैरियर तकनीक)
डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी तकनीक
मिसाइल डिफेंस सिस्टम और युद्धपोत
आधुनिक हेलीकॉप्टर और एविएशन सिस्टम
अत्याधुनिक लड़ाकू विमान तकनीक
संतुलित दृष्टिकोण जरूरी

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की रक्षा खरीद नीति कई रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी कारकों पर आधारित होती है। ऐसे में किसी भी देश से हथियार खरीद का निर्णय व्यापक मूल्यांकन के बाद ही लिया जाता है।

साथ ही, क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर सहयोग का उद्देश्य संतुलन और स्थिरता बनाए रखना होता है, न कि किसी एक देश के खिलाफ आक्रामक रणनीति बनाना।

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