Media24Media.com: जलवायु परिवर्तन से महंगी फसलें प्रभावित, किसानों की आय पर बढ़ा संकट

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जलवायु परिवर्तन से महंगी फसलें प्रभावित, किसानों की आय पर बढ़ा संकट

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 नई दिल्ली। देश में बदलते मौसम के मिजाज ने किसानों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। हालिया रबी सीजन में हाई-वैल्यू फसलें—जैसे फल, सब्जियां, मसाले और प्रीमियम चावल—जलवायु परिवर्तन की मार सबसे अधिक झेलती नजर आ रही हैं। मौसम में अचानक बदलाव से पैदावार, गुणवत्ता और किसानों की आय तीनों प्रभावित हो रही हैं।


महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश के कारण अंगूर के बागानों को नुकसान पहुंचा है, वहीं हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में सर्दी कम पड़ने से सेब की फसल प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड की कमी से सेब के पेड़ों में फूल आने की प्रक्रिया बाधित होती है, जिससे उत्पादन घटता है।

देश के कई हिस्सों में लंबी चली हीटवेव ने सब्जियों और फलों की खेती पर भी असर डाला है। अधिक तापमान के कारण फलों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जबकि टमाटर और शिमला मिर्च जैसी फसलों में फूल झड़ने की समस्या बढ़ी है। महाराष्ट्र के अंगूर और अनार उत्पादक क्षेत्रों में भी तेज गर्मी के कारण फलों के झुलसने और असमान पकने की शिकायतें सामने आई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अलग-अलग घटनाएं नहीं, बल्कि Climate Change का स्पष्ट संकेत हैं। पिछले कुछ वर्षों में किसान पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं और धान से हटकर अधिक लाभ देने वाली फसलों की ओर बढ़े हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और उत्तर भारत के कई राज्यों में बागवानी का रकबा तेजी से बढ़ा है और यह कई क्षेत्रों में आय का प्रमुख स्रोत बन चुका है।

हालांकि, हाई-वैल्यू फसलें मौसम के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। अनाज के विपरीत, इन फसलों में मात्रा के साथ-साथ गुणवत्ता—जैसे आकार, रंग, स्वाद और टिकाऊपन—भी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में फूल आने के समय अधिक गर्मी या कटाई के दौरान बारिश होने से फसल की गुणवत्ता घट जाती है, जिससे बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पाता।

बारिश के पैटर्न में बदलाव भी चिंता का विषय बना हुआ है। कम समय में अधिक बारिश से जलभराव और मिट्टी के पोषक तत्वों का नुकसान होता है, जबकि लंबे सूखे से सिंचाई पर दबाव बढ़ता है। कटाई के समय बारिश होने पर फलों के फटने और अनाज की गुणवत्ता खराब होने की समस्या भी सामने आती है।

कृषि विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस चुनौती से निपटने के लिए मजबूत मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, क्षेत्र-विशेष अनुसंधान, बेहतर फसल बीमा, माइक्रो-इरिगेशन और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जाना चाहिए। इससे किसानों की आय को स्थिर रखने और कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से बचाने में मदद मिल सकती है।

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