Media24Media.com: होर्मुज के बाद बाब अल-मंदेब बंद करने की ईरान की चेतावनी, दुनिया की एनर्जी सप्लाई पर मंडराया बड़ा संकट

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होर्मुज के बाद बाब अल-मंदेब बंद करने की ईरान की चेतावनी, दुनिया की एनर्जी सप्लाई पर मंडराया बड़ा संकट

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 नई दिल्ली : Iran के एक सैन्य अधिकारी ने चेतावनी दी है कि अगर United States कोई रणनीतिक गलती करता है तो ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद दूसरे अहम समुद्री रास्ते Bab-el-Mandeb Strait को भी बंद कर सकता है। इससे पहले ही Strait of Hormuz के बंद होने की आशंका से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। अगर बाब अल-मंदेब भी बंद होता है तो इसका असर भारत समेत कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।


दुनिया के कई देश, खासकर India, तेल और गैस की जरूरतों के लिए 80 से 90 प्रतिशत तक खाड़ी देशों पर निर्भर हैं। ऐसे में इस समुद्री मार्ग के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।

‘ईरान का दूसरा होर्मुज’ माना जाता है बाब अल-मंदेब

विश्लेषकों के अनुसार Bab-el-Mandeb Strait को “ईरान का दूसरा होर्मुज” कहा जाता है। यह एक ऐसा रणनीतिक दबाव बिंदु है जहां ईरान यमन में अपने सहयोगी Houthi Movement के जरिए प्रभाव डाल सकता है।

यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों ने पहले भी Red Sea में कई जहाजों पर हमले किए थे। विशेष रूप से Israel और गाजा संघर्ष के दौरान लाल सागर में गुजरने वाले कारोबारी जहाजों पर हमलों से वैश्विक शिपिंग प्रभावित हुई थी। इसके बाद United States को क्षेत्र में अपनी नौसेना तैनात करनी पड़ी थी।

हूतियों के समर्थन के कारण बढ़ी चिंता

हालांकि बाब अल-मंदेब ईरान से काफी दूर है और उस पर उसका प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं है, लेकिन ईरान लंबे समय से यमन के हूती आंदोलन का समर्थन करता रहा है। रिपोर्टों के अनुसार नवंबर 2023 के बाद से हूती बलों ने लाल सागर के व्यापारिक मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर 100 से अधिक हमले किए, जिससे करीब 60 देश प्रभावित हुए।

इन हमलों के चलते 2024 के अंत तक बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले तेल और एलएनजी टैंकरों की संख्या में 50 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। हूती समूह ने हाल ही में चेतावनी दी है कि उनकी “उंगलियां ट्रिगर पर हैं।”

दुनिया के लिए अहम समुद्री गलियारा

Bab-el-Mandeb Strait को अरबी में ‘दुख का द्वार’ (Gate of Tears) कहा जाता है। करीब 26 किलोमीटर चौड़ा यह समुद्री मार्ग Yemen और Djibouti के बीच स्थित है। यह मार्ग Red Sea को Gulf of Aden से जोड़ता है और आगे Suez Canal के जरिए भूमध्यसागर तक पहुंच प्रदान करता है।

भारत से इसकी दूरी लगभग 4,000 किलोमीटर बताई जाती है, लेकिन इसके बावजूद यह मार्ग भारत के ऊर्जा आयात के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

रोज गुजरते हैं लाखों बैरल तेल

रिपोर्टों के मुताबिक इस समुद्री मार्ग से हर साल करीब 20,000 तेल टैंकर गुजरते हैं। अनुमान है कि रोजाना करीब 62 लाख बैरल कच्चा तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद इस रास्ते से गुजरते हैं। वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 9 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर Bab-el-Mandeb Strait भी बंद हो जाता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर संकट पैदा हो सकता है।

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