Media24Media.com: बस्तर के जंगलों में क्रूर शिकार: बाघ-तेंदुए की मौत से उजागर हुआ शिकारी गिरोह

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बस्तर के जंगलों में क्रूर शिकार: बाघ-तेंदुए की मौत से उजागर हुआ शिकारी गिरोह

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 जगदलपुर। बस्तर के घने जंगलों से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने न सिर्फ वन्यजीव संरक्षण बल्कि पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान और बीजापुर के जंगलों में एक बाघ और एक तेंदुए की मौत ने वन सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।


मिली जानकारी के अनुसार, दोनों वन्यजीवों का शिकार गोली से नहीं बल्कि बेहद क्रूर तरीके से किया गया। शिकारियों ने तार के फंदे लगाकर उन्हें फंसाया, जहां वे 2-3 दिनों तक तड़पते रहे और आखिरकार दम तोड़ दिया। यह तरीका संगठित शिकारी गिरोह की सक्रियता की ओर इशारा करता है।

मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि देवी प्रसाद कोयाम भी इस गिरोह में शामिल पाया गया। जिस अधिकारी पर जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वही इस अवैध शिकार नेटवर्क का हिस्सा बन गया।

वन विभाग की उड़नदस्ता टीम ने कार्रवाई करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी बाघ और तेंदुए की खाल को बाइक के जरिए रायपुर ले जाकर बेचने की फिराक में थे। बरामद खाल और अन्य साक्ष्यों से स्पष्ट है कि शिकार हाल ही में हुआ था। मारा गया बाघ लगभग 3 साल का युवा था।

विशेषज्ञों के मुताबिक, शिकारियों ने मांस का लालच देकर वन्यजीवों को फंसाया और फिर उनके गले में तार का फंदा कस दिया, जिससे उनकी धीमी और पीड़ादायक मौत हुई।

यह घटना सिर्फ अवैध शिकार नहीं, बल्कि उस भरोसे पर भी सवाल है जिस पर जंगलों की सुरक्षा टिकी है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो वन्यजीवों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी—यह बड़ा प्रश्न अब सबके सामने है।

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